डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी, भारत में लॉन्च हुई Ozempic, जानें कीमत और फायदे

डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी, भारत में लॉन्च हुई Ozempic, जानें कीमत और फायदे


Type 2 Diabetes Treatment: दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपनी चर्चित डायबिटीज दवा ओजेम्पिक लॉन्च कर दी है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा ह. कंपनी ने इसकी शुरुआती 0.25 एमजी साप्ताहिक डोज की कीमत 8,800 रुपये तय की है. यह दवा एक प्री-फिल्ड इंजेक्शन पेन के रूप में आती है, जिसे हफ्ते में एक बार लगाया जाता हैय  भारत में डायबिटीज और मोटापे के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैंय  CDSCO ने इस दवा को अक्टूबर में टाइप-2 डायबिटीज वाले वयस्क मरीजों के लिए मंजूरी दी थी, जिसके बाद इसका भारत में लॉन्च लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था.

दवा कैसे काम करती है?

एक्सपर्ट बताते हैं कि ओजेम्पिक का असर केवल ब्लड शुगर कंट्रोल तक सीमित नहीं है. यह शरीर में भूख कम करने, शुगर लेवल को संतुलित रखने और लंबे समय में वजन प्रबंधन में मदद कर सकती है. चेलेरम डायबिटीज इंस्टीट्यूट के डॉ. उन्नीकृष्णन ने एनआई से कहा कि “यह दवा तभी प्रभावी बनती है जब इसके साथ एक नियमित रूटीन,जैसे एक्सरसाइज, संतुलित डाइट और समय पर दवा सही तरीके से अपनाए जाए.” वे कहते हैं कि इसे किसी त्वरित वजन घटाने वाली दवा के रूप में समझना गलती होगी यह डायबिटीज मरीजों में हार्ट और किडनी से जुड़ी दिक्कतों को भी कम करने में मदद कर सकती है. 

 

भारत क्यों बना दवा कंपनियों का बड़ा बाजार?

भारत दुनिया में टाइप-2 डायबिटीज मरीजों की संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर है. इसके साथ मोटापे के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि वजन सही रखने और शुगर कंट्रोल वाली दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है. एक अनुमान के अनुसार, अगले कुछ सालों में इस कैटेगरी का वैश्विक बाज़ार लगभग 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.  अमेरिका में ओजेम्पिक 2017 से मंजूरी दी गई है और वजन घटाने की क्षमता के कारण वहां यह दवा बेहद लॉपुलर हो चुकी है. हालांकि भारत में इसका इस्तेमाल केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों के प्रिस्क्रिप्शन पर ही किया जा सकेगा. इसे कॉस्मेटिक या सिर्फ वजन घटाने के उद्देश्य से उपयोग की मंजूरी नहीं दी गई है.

ओजेम्पिक की कीमतें

कंपनी ने भारत में इसकी तीन स्ट्रेंथ उपलब्ध कराई हैं

0.25 mg- 8,800 रुपये

0.5 mg- 10,170 रुपये

1 mg- 11,175 रुपये

कंपनी का दावा

Novo Nordisk इंडिया के हेड विक्रांत श्रोत्रिया के अनुसार ओजेम्पिक डायबिटीज मरीजों में लगभग 8 किलो तक वजन कम कराने में मदद कर सकती है. उनका कहना है कि यह दवा ब्लड शुगर कंट्रोल से आगे बढ़कर हार्ट और किडनी हेल्थ में भी लाभ पहुंचा सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ठंड में हड्डियां करने लगती हैं कट-कट की आवाज, ये विंटर डाइट लेंगे तो होंगी मजबूत

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तिल जैसे छोटे बीज कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन D से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं. इन्हें सलाद, चटनी या पराठों में जोड़कर आसानी से रोज की रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जा सकता है.



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ठंड में नीली पड़ जाती हैं कुछ लोगों के अंगुलियां, जानें शरीर में किस चीज की होती है कमी?

ठंड में नीली पड़ जाती हैं कुछ लोगों के अंगुलियां, जानें शरीर में किस चीज की होती है कमी?


सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई लोगों की उंगलियां अचानक सफेद, नीली या बैंगनी पड़ने लगती हैं. इसके साथ झनझनाहट, दर्द और सूजन की समस्या भी होने लगती है. अक्सर लोग इस सामान्य ठंड समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह रेनाड्स सिंड्रोम का संकेत हो सकता है. यह समस्या खास तौर पर 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है.

खासकर उन लोगों में जो ठंडा और गर्म पानी के बीच लगातार कम करते हैं या लंबे समय तक ठंडे माहौल में रहते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ठंड में अगर आपकी उंगलियां भी नीली पड़ जाती है तो यह शरीर में किस चीज की कमी से होती है.

ठंड में उंगलियां क्यों पड़ जाती है नीली?

रेनाड्स सिंड्रोम में हाथ और पैरों की उंगलियों की धमनियां ठंड पड़ते ही सिकुड़ जाती है. इस वजह से उंगलियाें तक प्योर खून और ऑक्सीजन पहुंचाना कम हो जाता है. वहीं जब ऑक्सीजन की कमी होती है तो उंगलियां पहले सफेद फिर नीली और बाद में लाल पड़ने लगती है. वहीं ब्लड सर्कुलेशन रुकने पर उंगलियों में सुन्नपन, जलन और दर्द होता है. इसके अलावा बार-बार ऐसा होने पर उंगलियों में घाव भी बन सकते हैं. यह समस्या अचानक तनाव में आने पर भी ट्रिगर हो सकती है और कुछ लोगों को 60 से 70 डिग्री फारेनहाइट जैसी सामान्य ठंड में भी इसके लक्षण दिखने लगते हैं.

किन लोगों में रहता है सबसे ज्यादा खतरा?

उंगलियां नीली पड़ने का खतरा सबसे ज्यादा होटल और खानपान इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों, वाइब्रेटिंग टूल्स चलने वाले मजदूर, ठंडा-गर्म पानी में लगातार हाथ डालने वाले लोग और घर का काम करने वाली महिलाओं को ज्यादा होता है. डॉक्टरों के अनुसार सर्दियों में ओपीडी में करीब 60 प्रतिशत तक मरीज इसी समस्या के लक्षणों के साथ पहुंचते हैं. लापरवाही बढ़ने पर उंगलियां काली पड़ सकती है और गंभीर मामलों में उत्तक भी नष्ट होने लगते हैं.

कैसे करें इससे बचाव?

रेनाड्स से बचाव करने के लिए कोशिश करें कि आप ज्यादा ठंडे पानी के संपर्क में न आएं, घर में नंगे पैर न चले, फ्रिज में हाथ न डालें और उसके सामने खड़े न हो. इसके अलावा डिटर्जेंट या कपड़े धोने वाले साबुन को सीधे हाथ में न लगाए, ऊनी ग्लव्स और मोजे पहन कर रखें और बर्तन धोते समय रबड़ के ग्लव्स जरूर पहनें. दरअसल रेनाड्स का शुरुआती इलाज दवाओं से किया जा सकता है लेकिन कुछ मामलों में बायोफीडबैक टेक्निक से हाथों का तापमान कंट्रोल किया जाता है. वहीं अगर दवाओं से राहत न मिले तो समस्या बढ़ने पर सर्जरी भी की जाती है. 

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दिनभर लैपटॉप पर झुके रहते हैं? फिजियोथेरेपिस्ट से जानें ऑफिस में काम करने के लिए आसान टिप्स

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आज की हेक्टिक लाइफ में हम सभी कहीं न कहीं अपने शरीर की केयर करना भूल जाते हैं. खासकर जो लोग ऑफिस में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते हैं, वे अक्सर कमर दर्द, गर्दन में जकड़न, पीठ में खिंचाव और जोड़ों की समस्याओं से परेशान रहते हैं. लगातार बैठकर काम करने की वजह से न सिर्फ शारीरिक थकान होती है, बल्कि धीरे-धीरे यह आदत कई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स को बड़ा दे सकती है. ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि हम अपनी डेली लाइफ में ऐसी आदतें शामिल करें, जो हमारे शरीर को एक्टिव बनाए रखें. ऐसे में फिजियोथेरेपी एक ऐसा ही आसान, सेफ और कारगर तरीका है जो न सिर्फ चोट या दर्द में राहत देता है, बल्कि फ्यूचर में होने वाली बीमारियों से भी बचाता है. फिजियोथेरेपी सिर्फ इलाज का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी लाइफस्टाइल है जिसे अपनाकर लंबे समय तक हेल्दी और एक्टिव रह सकते हैं. तो चलिए आज हम आपको फिजियोथेरेपिस्ट की ऑफिस में बैठकर काम करने वालों के लिए आसान टिप्स बताते हैं. 

क्या है फिजियोथेरेपी और क्यों है जरूरी?

फिजियोथेरेपी एक मेडिकल प्रैक्टिस है जिसमें दवाइयों की जगह एक्सरसाइज, मसाज, स्ट्रेचिंग और सही बॉडी पॉश्चर की मदद से शरीर को ठीक किया जाता है. यह उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहते हैं, कंप्यूटर या लैपटॉप पर झुककर काम करते हैं, लगातार मोबाइल या टैबलेट यूज करते हैं, बुजुर्ग हैं या जिनकी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, किसी चोट, फ्रैक्चर या सर्जरी से रिकवरी कर रहे हैं. ऐसे में फिजियोथेरेपी की मदद से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, शरीर की मोबिलिटी बेहतर होती है, मेंटल स्ट्रेस भी कम होता है, चोट या सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी होती है. 

ऑफिस में काम करने वालों के लिए आसान और असरदार फिजियोथेरेपी टिप्स

1. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें – लंबे समय तक बैठना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है. ऐसे में हर आधे घंटे में 2–3 मिनट का छोटा ब्रेक लें, खड़े हों, थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें. 

2. सही बैठने का तरीका अपनाएं – ऑफिस में काम करने के लिए बैठते समय पीठ सीधी रखें, कंधे ढीले और रिलैक्स रखें, पैरों को जमीन पर सीधा रखें, साथ ही आपकी स्क्रीन आंखों के सामने हो, ताकि गर्दन न झुके. 

3. हल्की स्ट्रेचिंग करें – काम के बीच-बीच में हाथ, गर्दन, पीठ और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग करें. इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और जकड़न दूर होती है. 

4. सुबह 20–30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज – दिन की शुरुआत हल्की एक्सरसाइज और योग से करें. इससे शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी आती है और दिनभर एक्टिव नेस बनी रहती है. 

5. नींद और आराम भी जरूरी है – शरीर को रिकवर करने के लिए 7–8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है. सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का यूज कम करें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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