Early Warning Signs Of Kidney Disease You Should Not Ignore: आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. समस्या यह है कि अधिकतर लोगों को तब पता चलता है जब किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे और बिना किसी क्लियर लक्षण के बढ़ती है. शुरुआती चरण में कई लोगों को बिल्कुल सामान्य महसूस होता है, इसलिए वे इसे पहचान नहीं पाते.

किडनी हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करती ह.। यह खून से गंदगी और विषैले पदार्थों को फिल्टर करती है, शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखती है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में भी भूमिका निभाती है. किडनी के बारे में जानकारी देने वाली संस्था नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, इसके कुछ संकेत पहले से दिखने लगते हैं, जिससे आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं. 

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किडनी की समस्या के अहम संकेत

यूरिन में बदलाव

किडनी की बीमारी का सबसे शुरुआती संकेत यूरिन से जुड़ा बदलाव हो सकता है. पेशाब बार-बार आना, खासकर रात में, या फिर पहले से कम होना भी समस्या का संकेत हो सकता है. कई बार यूरिन का रंग गहरा, झागदार या धुंधला भी दिखाई देता है.

शरीर में सूजन

जब किडनी अतिरिक्त नमक और पानी को बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इससे पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे सकती है. सुबह-सुबह आंखों के आसपास सूजन भी इसी का संकेत हो सकती है.

लगातार थकान

किडनी ठीक से काम न करे तो खून में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है. इसके अलावा किडनी रेड ब्लड सेल्स के निर्माण से जुड़े हार्मोन का उत्पादन भी कम कर देती है, जिससे एनीमिया हो सकता है.

झागदार यूरिन

अगर पेशाब में साबुन जैसे झाग दिखें और वे जल्दी खत्म न हों, तो यह पेशाब में प्रोटीन जाने का संकेत हो सकता है. इसे प्रोटीनयूरिया कहा जाता है और यह किडनी के शुरुआती नुकसान का संकेत हो सकता है.

ये भी होते हैं संकेत

पेशाब में गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिखाई देना गंभीर संकेत हो सकता है. यह किडनी इंफेक्शन, किडनी स्टोन या किडनी को हुए नुकसान की वजह से हो सकता है. इसके साथ ही जब शरीर में विषैले पदार्थ बढ़ने लगते हैं, तो डाइजेशन सिस्टम भी प्रभावित होता है. इससे भूख कम लग सकती है और मुंह में धातु जैसा स्वाद महसूस हो सकता है. खून में टॉक्सिन जमा होने से मतली और उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है. किडनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है. जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन हो सकती है.

इनको भी न करें इग्नोर

किडनी के खराब होने से शरीर में मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे त्वचा सूखी और खुजलीदार हो सकती है. इसके साथ ही किडनी की समस्या में लंग्स में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है या एनीमिया के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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