डिलीवरी के बाद क्यों होता है हेयर लॉस? जानें इसे कैसे कंट्रोल करें



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<p>डिलीवरी के बाद कई महिलाएं हेयर लॉस की समस्या का सामना करती हैं, जिसे पोस्टपार्टम हेयर लॉस कहा जाता है. यह आमतौर पर हार्मोनल बदलावों के कारण होता है जो गर्भावस्था के बाद शरीर में होते हैं. गर्भावस्था के दौरान, बढ़े हुए हार्मोन स्तर बालों को गिरने से रोकते हैं, जिससे बाल घने और मजबूत दिखाई देते हैं. हालांकि, डिलीवरी के बाद, जब हार्मोन सामान्य होते हैं, तो यह अतिरिक्त बालों के झड़ने का कारण बनता है. आज हम डिलीवरी के बाद हेयर लॉस के कारणों को समझेंगे और यह भी जानेंगे कि इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है, ताकि आप अपने बालों की स्वास्थ्य और चमक को फिर से पा सकें.&nbsp;</p>
<p><strong>क्यों होता है हेयर लॉस?</strong></p>
<ul>
<li>हार्मोनल परिवर्तन: गर्भावस्था के दौरान, महिलाओं के हार्मोनल स्तर में वृद्धि होती है, जिससे बालों का झड़ना कम हो जाता है. हालांकि, डिलीवरी के बाद हार्मोनल स्तर सामान्य होते ही अतिरिक्त बाल झड़ने लगते हैं.</li>
<li>पोषण की कमी: डिलीवरी के बाद शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हेयर लॉस का एक कारण हो सकती है.&nbsp;</li>
</ul>
<p><strong>हेयर लॉस को कैसे कंट्रोल करें?</strong></p>
<ul>
<li>सही पोषण: आहार में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की उचित मात्रा शामिल करें. खासतौर पर आयरन, जिंक, विटामिन C, D और E बालों के लिए जरूरी होते हैं.</li>
<li>माइल्ड हेयर केयर प्रोडक्ट्स का उपयोग: सल्फेट फ्री शैम्पू और कंडीशनर का चयन करें जो बालों को कम नुकसान पहुंचाते हैं.</li>
<li>नियमित हेयर मसाज: नारियल तेल या बादाम तेल से नियमित रूप से सिर की मालिश करने से बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है.</li>
<li>स्ट्रेस कम करें: ध्यान, योग या किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि के माध्यम से स्ट्रेस को कम करने का प्रयास करें.</li>
<li>पर्याप्त नींद लें: अच्छी और पर्याप्त नींद लेना भी बालों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.&nbsp;</li>
<li>नियमित रूप से बालों की ट्रिमिंग: बालों की नियमित ट्रिमिंग से स्प्लिट एंड्स को कम किया जा सकता है, जो कि बालों के टूटने और गिरने के सामान्य कारणों में से एक है.</li>
</ul>
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<div class="flex w-full items-center"><strong>Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.</strong></div>
<div class="flex w-full items-center"><strong><br />यह भी पढ़ें :&nbsp;<br /><a title="अब महज सौ रुपए की दवा में होगा कैंसर का इलाज ! जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/good-news-only-100-rs-tablet-can-treat-cancer-2625293/amp" target="_self">अब महज सौ रुपए की दवा में होगा कैंसर का इलाज ! जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></div>
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मेंटल हेल्थ सुधारनी है तो जमकर करें डांस, जानें कैसे करता है मदद


अगर आप अपनी मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो डांस एक बहुत ही अच्छा उपाय है. डांस न सिर्फ हमें खुश रखता है, बल्कि यह हमारे तनाव को भी कम करता है. जब हम डांस करते हैं, तो हमारा शरीर खुशी देने वाले हार्मोन छोड़ता है, जिससे हमारा मूड अच्छा होता है. इसके अलावा, डांस करने से हम अपनी रोजमर्रा की चिंताओं से दूर हो जाते हैं और पल भर के लिए सब कुछ भूल जाते हैं. तो, अगर आप अपने मन को हल्का करना चाहते हैं और खुश रहना चाहते हैं, तो अपने पसंदीदा संगीत पर जमकर डांस करें. 

तनाव कम करता है
जब हम डांस करते हैं, तो हमारा शरीर एक खास हार्मोन निकालता है जिसे एंडोर्फिन कहते हैं. यह हार्मोन हमें बहुत खुशी देता है और हमारा तनाव दूर करता है. इससे हमारी चिंता और मानसिक परेशानी कम हो जाती है. 
आत्म-सम्मान बढ़ाए
डांस करने से हम अपने शरीर को और अच्छे से समझने लगते हैं और खुद में विश्वास बढ़ता है. जब हम डांस के नए कदम सीखते हैं और उनमें अच्छे होते जाते हैं, तो हमें खुद पर गर्व महसूस होता है. यह हमें खुशी देता है और हमारा आत्म-सम्मान बढ़ता है. 

खुशी महसूस करें
जब हम डांस करते हैं, हमारा शरीर खुशी के हार्मोन, जैसे एंडोर्फिन, छोड़ता है. ये हार्मोन हमें बहुत खुश और ऊर्जावान महसूस कराते हैं. इससे हमारा मूड अच्छा होता है और हम तनाव से मुक्त महसूस करते हैं. डांस हमें खुशी और हल्कापन देता है.

दोस्त बनाएं
जब आप डांस क्लास में जाते हैं या किसी समूह में डांस करते हैं, तो आपको नए दोस्त बनाने का मौका मिलता है. इससे आप खुद को कम अकेला महसूस करते हैं. नए लोगों से मिलने और उनके साथ डांस करने से आपको खुशी मिलती है और आपका समय भी अच्छा गुजरता है. 

एक्टिव रहें
डांस एक मजेदार शारीरिक कसरत है जो हमें चुस्त दुरुस्त रखती है. यह हमारे शरीर को सक्रिय बनाता है और हमें फिट रखता है. साथ ही, डांस हमारे मन को भी खुश रखता है. इससे हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं. डांस करने से आपकी सोचने की क्षमता बढ़ती है और आप ज्यादा रचनात्मक बनते हैं.

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

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एक दिन में कितनी बार ग्रीन टी पीनी चाहिए? ज्यादा पीने से क्या होता है जानें



<p>आजकल, ग्रीन टी हमारी रसोई में एक जरूरी चीज बन चुकी है, खासकर जब बात वजन कम करने की आती है. यह न सिर्फ हमें तरोताजा करती है बल्कि हमारे शरीर को भीतर से साफ करने में मदद करती है. ग्रीन टी में मौजूद गुण हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मदद करता है. लेकिन, क्या आपको पता है कि एक दिन में हमें कितनी ग्रीन टी पीनी चाहिए? और अगर हम इसे ज्यादा पी लें तो क्या हो सकता है? आइए जानते हैं यहां.&nbsp;</p>
<p><strong>जाने कितनी बार ग्रीन टी पीनी चाहिए?&nbsp;<br /></strong>स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार पूरे दिन में 2 या 3 कप ग्रीन टी पीना सेहत के लिए अच्छा होता है. इतनी मात्रा में ग्रीन टी पीने से हमें इसके फायदे मिलते हैं और कोई नुकसान नहीं होता. ग्रीन टी में बहुत सारे अच्छे तत्व होते हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखते हैं. यह हमारे दिल को मजबूत बनाता है, हमारे वजन को नियंत्रित करता है, और हमें तरोताजा महसूस कराता है. इसलिए, अगर हम रोज इतनी ग्रीन टी पीएं, तो हमारी सेहत अच्छी रहेगी.&nbsp;</p>
<p><strong>ज्यादा पीने का नुकसान&nbsp;</strong></p>
<ul>
<li>ग्रीन टी पीना अगर सीमित मात्रा में हो तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है. लेकिन अगर हम इसे ज्यादा मात्रा में पीते हैं, तो इससे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. सबसे पहले, ग्रीन टी में कैफीन होता है. अगर हम बहुत ज्यादा ग्रीन टी पीते हैं, तो हमारे शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ जाती है. इससे हमें नींद न आना, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और दिल की धड़कन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.</li>
<li>दूसरा, ग्रीन टी में टैनिन भी होते हैं जो आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं. इसका मतलब है कि अगर हम खाने के साथ या खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा ग्रीन टी पीते हैं, तो हमारे शरीर को खाने से मिलने वाला आयरन सही से नहीं मिल पाता. इससे खून की कमी या एनीमिया हो सकता है.</li>
<li>तीसरा, बहुत ज्यादा ग्रीन टी पीने से पेट में दर्द और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. क्योंकि ग्रीन टी एसिडिटी बढ़ा सकती है, जिससे पेट में जलन हो सकती है.</li>
</ul>
<p><strong>Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :&nbsp;<br /><a title="अब महज सौ रुपए की दवा में होगा कैंसर का इलाज ! जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/good-news-only-100-rs-tablet-can-treat-cancer-2625293/amp" target="_self">अब महज सौ रुपए की दवा में होगा कैंसर का इलाज ! जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p>



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अगर किसी सर्जरी से पहले लगाया जा रहा एनेस्थीसिया, तो इन बातों का रखें खास ख्याल


Anaesthesia: किसी सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की आवश्यकता होती है. यह एक ऐसी दवा होती है, जिससे ऑपरेशन के वक्त मरीज को दर्द महसूस न हो. आज के समय में इस बात से ज्यादातर लोग अवगत हैं. लेकिन जिस चीज से अधिकतर लोग अनजान हैं, वह ये कि एनेस्थीसिया लेने से पहले उन्हें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना पड़ता है. इससे वे दवा के साइड इफेक्ट से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं. आइये जानते हैं उनके बारे में.

एनेस्थीसिया कितने प्रकार के होते हैं?

एनेस्थीसिया तीन तरह के होते हैं:

सामान्य एनेस्थीसिया: यह मरीज को बेहोश कर देता है ताकि वे दर्द महसूस न कर सकें. इस दवा को गैस या वाष्प के रूप में लिया जा सकता है, जैसे मास्क या ट्यूब के माध्यम से सांस लेते हैं। इसके अलावा इंजेक्शन के माध्यम से भी डॉक्टर इसे मरीज के नस में डालते हैं.

रीजनल एनेस्थीसिया: यह शरीर के उस सामान्य क्षेत्र को सुन्न कर देता है जहां सर्जरी की जाएगी। डॉक्टर नसों में यह दवा इंजेक्ट करते हैं. अगर शरीर के निचले हिस्से में सर्जरी होती है, तो उसे सुन्न करने के लिए रीढ़ की हड्डी में लगाया जाता है। इसमें मरीज पूरी तरह से सोता नहीं हैं, लेकिन पूरी तरह से जगा हुआ भी नहीं होता.

लोकल एनेस्थीसिया: शरीर के एक बहुत छोटे हिस्से को सुन्न करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इस दवा को या तो इंजेक्ट कर सकते हैं या फिर स्किन पर रगड़ सकते हैं. इसका इस्तेमाल तिल हटाने जैसी छोटी प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है.

एनेस्थीसिया लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

इस दवा को लेने से पहले डॉक्टर को यह जरूर बताएं कि आप कौन सी दवाएं लेते हैं.
इसके अलावा अगर कोई एलर्जी हो, तो उसके बारे में भी पहले ही बता दें.
हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट डिजीज, डायबिटीज, लिवर या किडनी की बीमारी, स्लीप ऐपनिया या थायरॉयड सहित कोई हेल्थ इशू हो.
अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस या सांस लेने की कोई अन्य समस्या हो.
अगर स्मोकिंग कर रखी है या फिर शराब और नशीले पदार्थों का सेवन किया हो, तो इंजेक्शन लेने से पहले डॉक्टर को जरूर बताएं.
हाथ या पैर में पहले से ही सुन्नता या कमजोरी महसूस हो रही हो, तो जानकारी दे दें.
गर्भवती महिला विशेषरूप से डॉक्टर को इसके बारे में बताएं.
अगर पहले कभी एनेस्थिसिया से कोई रिएक्शन हुआ हो, तो डॉक्टर को जरूर बता दें.

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इमोशनल इटिंग और माइंडफुल इटिंग में क्या अंतर है? दोनों में से क्या है बेहतर



<p>खाना हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन कभी-कभी हमारे खाने की आदतें हमारी भावनाओं से प्रभावित होती हैं. "इमोशनल इटिंग" और "माइंडफुल इटिंग" दो ऐसे शब्द हैं जो हमारे खाने के तरीके को बताते हैं, पर दोनों के बीच में बड़ा अंतर है. इमोशनल इटिंग में, लोग अपनी भावनाओं, जैसे कि तनाव, उदासी, या बोरियत, के कारण खाते हैं. इसमें खाना एक सांत्वना या भावनात्मक राहत के रूप में आता है. दूसरी ओर, माइंडफुल इटिंग खाने के प्रति जागरूकता और समझदारी को बढ़ावा देती है. इसमें खाने के प्रति पूरी तरह से सजग रहते हुए, उसे खाते हैं.जिससे हम अपने शरीर की भूख और संतुष्टि को बेहतर समझ पाते हैं.&nbsp;</p>
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<p>माइंडफुल इटिंग और इमोशनल इटिंग में से बेहतर क्या है, आइए जानते हैं.</p>
<ul>
<li><strong>समझदारी से खाना</strong>: माइंडफुल इटिंग का मतलब है ध्यान से खाना. इसमें हम यह सोचते हैं कि हम क्या और क्यों खा रहे हैं. इससे हम सही मात्रा में और सही खाना खाते हैं.</li>
<li><strong style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">भावनाओं के आधार पर खाना</strong><span style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">: इमोशनल इटिंग में, लोग अपनी भावनाओं की वजह से खाते हैं, जैसे कि जब वे उदास या तनाव में होते हैं. इससे कई बार ज्यादा और गलत खाना खा लिया जाता है.जो की मोटापा का कारण बनता है . </span></li>
<li><strong style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">स्वस्थ आदतें</strong><span style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">: माइंडफुल इटिंग से हमें अपने खाने की आदतों के बारे में पता चलता है और हम स्वस्थ खाना चुनने लगते हैं.</span></li>
<li><strong style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">बेहतर चुनाव</strong><span style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">: जब हम माइंडफुल इटिंग को अपनाते हैं, तो हम अपने खाने को लेकर ज्यादा समझदारी से फैसले लेते हैं, जिससे हमारी सेहत बेहतर होती है. </span></li>
<li><strong style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">भावनाओं का प्रबंधन</strong><span style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;">: इमोशनल इटिंग में, हमें अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें सही तरीके से संभालने की जरूरत होती है, ताकि हम गलत खाने की आदतों में न पड़ें.&nbsp;</span></li>
<li><span style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, ‘Segoe UI’, Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, ‘Open Sans’, ‘Helvetica Neue’, sans-serif;"><strong>माइंडफुल इटिंग है ज्यादा अच्छा :</strong> माइंडफुल इटिंग इसलिए अच्छा है क्योंकि यह हमें सही और स्वस्थ खाने की आदत डालता है. इससे हम खाने के बारे में अच्छे फैसले लेते हैं और अपनी सेहत का ध्यान रख पाते हैं. यह हमें स्वस्थ रहने में मदद करता है.&nbsp;</span></li>
</ul>
<p><strong>Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :&nbsp;</strong><br /><strong><a title="अब महज सौ रुपए की दवा में होगा कैंसर का इलाज ! जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/good-news-only-100-rs-tablet-can-treat-cancer-2625293/amp" target="_self">अब महज सौ रुपए की दवा में होगा कैंसर का इलाज ! जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p>
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