भूलने की आदत होगी दूर, योग से याददाश्त रहेगी एकदम लोहे जैसी मजबूत, एम्स स्टडी में खुलासा

भूलने की आदत होगी दूर, योग से याददाश्त रहेगी एकदम लोहे जैसी मजबूत, एम्स स्टडी में खुलासा


Yoga Benefits For Brain Health: हर साल 21 जून को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाती है. संयुक्त राष्ट्र ने भारत के प्रस्ताव पर दिसंबर 2014 में इसे आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी थी. इस वर्ष योग दिवस की थीम स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग रखी गई है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार यह थीम सिर्फ एक संदेश नहीं, बल्कि साइंटफिक रिसर्च के जरिए भी मजबूती पाती नजर आ रही है.

किन बीमारियों में फायदेमंद है योग?

दिल्ली स्थित एम्स के रिसर्चर ने हाल ही में एक स्टडी में पाया है कि नियमित योग अभ्यास अल्जाइमर रोग के शुरुआती चरण के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है. अल्जाइमर रोग जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च को एम्स के शरीर रचना साइंस और न्यूरोलॉजी विभाग ने मिलकर किया है. अध्ययन में हल्के अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों को शामिल किया गया. इन प्रतिभागियों ने 12 सप्ताह तक रोजाना 60 मिनट की निगरानी में योग सत्र किए. रिसर्च के शुरुआत और अंत में उनकी मानसिक क्षमता, डिप्रेशन के लक्षणों और आंतों में मौजूद बैक्टीरिया की संरचना का इवोल्यूशन किया गया. 

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क्या हुआ योग करने से बदलाव?

परिणामों में तीनों स्तरों पर पॉजिटिव बदलाव देखने को मिले. मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट के आधार पर मरीजों की कॉग्निटिव क्षमता में सुधार दर्ज किया गया. वहीं पीएचक्यू-9  स्केल से मापे गए डिप्रेशन के लक्षणों में भी उल्लेखनीय कमी आई. सबसे दिलचस्प बदलाव आंतों के माइक्रोबायोम में देखने को मिला. योग कार्यक्रम के बाद फैसालिबैक्टेरियम प्राउसनिट्जी, रोज़बुरिया इंटेस्टिनालिस, बिफिडोबैक्टीरियम और अक्करमैन्सिया जैसे लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ी. ये बैक्टीरिया शॉर्ट-चेन फैटी एसिड बनाते हैं, जिन्हें सूजन कम करने और ब्रेन व आंतों के बेहतर स्वास्थ्य से जोड़ा जाता है. दूसरी ओर कॉलिन्सेला एरोफैसिएन्स और क्लेब्सिएला जैसे सूजन बढ़ाने वाले माइक्रोबायोम में कमी दर्ज की गई.

इसके पीछे किसका है रोल?

एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे गट-ब्रेन एक्सिस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. पिछले कुछ वर्षों में हुए कई स्टडी में यह सामने आया है कि आंतों में मौजूद बैक्टीरिया न केवल प्रतिरक्षा प्रणाली और सूजन को प्रभावित करते हैं, बल्कि ब्रेन के कामकाज पर भी असर डाल सकते हैं. एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ एनाटॉमी की प्रोफेसर और स्टडी की प्रमुख रिसर्चर डॉ. रीमा दादा का कहना है कि यह अध्ययन शुरुआती संकेत देता है कि योग जैसी लाइफस्टाइल आधारित गतिविधियां आंतों में स्वस्थ माइक्रोबायोम वातावरण बनाने में मदद कर सकती हैं. उनके अनुसार लाभकारी बैक्टीरिया में वृद्धि और हानिकारक माइक्रोबायोम में कमी ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाने वाली जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ी हो सकती है.

क्या योग अल्जाइमर का इलाज है?

वहीं एम्स दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि योग को अल्जाइमर का इलाज नहीं माना जा सकता. हालांकि शुरुआती चरण के मरीजों और हल्की कॉग्निटिव कमजोरी वाले लोगों के लिए यह एक सहायक चिकित्सा पद्धति के रूप में उपयोगी साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि अध्ययन में मानसिक क्षमता, मनोदशा और आंतों के माइक्रोबियल कम्युनिटी  में पॉजिटिव बदलाव दर्ज किए गए हैं. हालांकि रिसर्चर ने यह भी स्वीकार किया है कि अध्ययन का नमूना छोटा था और इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हार्ट पेशेंट्स को सुबह के नाश्ते में क्या खाना चाहिए, यहां देख लें पूरे हफ्ते की लिस्ट

हार्ट पेशेंट्स को सुबह के नाश्ते में क्या खाना चाहिए, यहां देख लें पूरे हफ्ते की लिस्ट


Healthy Heart Diet Tips : आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में हार्ट को हेल्दी रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है. इसके लिए सिर्फ दवाइयों या एक्सरसाइज पर ध्यान देना ही काफी नहीं है, बल्कि रोज सुबह क्या खाया जा रहा है, इसका भी सीधा असर हार्ट हेल्थ पर पड़ता है. रातभर के लंबे समय के बाद सुबह का नाश्ता शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करने और दिनभर की सेहत को बैलेंस रखने का काम करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर नाश्ते में ज्यादा तेल, घी, मक्खन, तली-भुनी चीजें या ज्यादा चीनी वाले फूड आइटम्स शामिल किए जाएं, तो समय के साथ कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है. यही कारण है कि हार्ट पेशेंट्स के लिए ऐसा नाश्ता चुनना जरूरी माना जाता है, जो टेस्टी होने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. ऐसे में आइए जानते हैं कि हार्ट पेशेंट्स को सुबह के नाश्ते में पूरे हफ्ते क्या खाना चाहिए. 

हार्ट हेल्थ के लिए नाश्ता क्यों जरूरी माना जाता है?

सुबह का हेल्दी नाश्ता शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है. यह ब्लड शुगर को बैलेंस रखने में मदद करता है, दिनभर की एनर्जी बनाए रखता है और बार-बार भूख लगने की समस्या को कम कर सकता है. इसके अलावा यह हेल्दी कोलेस्ट्रॉल लेवल बनाए रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक बैलेंस नाश्ते में साबुत अनाज, पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, सही मात्रा में सब्जियां और सीमित मात्रा में हेल्दी फैट शामिल होना चाहिए. वहीं तले हुए फूड आइटम्स, मैदा, ज्यादा चीनी और ज्यादा तेल वाले फूड आइटम्स से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है. 

हार्ट पेशेंट्स को सुबह के नाश्ते में पूरे हफ्ते क्या खाना चाहिए?

1. सोमवार – हफ्ते की शुरुआत ओट्स उपमा से की जा सकती है. यह फाइबर से भरपूर और हल्का नाश्ता माना जाता है. ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकन फाइबर शरीर से एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में मदद कर सकता है. वहीं गाजर, बीन्स और मटर जैसी सब्जियां पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट उपलब्ध कराती हैं, जो ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में सहायक हो सकते हैं. 

2. मंगलवार – बेसन चिल्ला प्रोटीन और फाइबर से भरपूर नाश्ता माना जाता है. बेसन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देता है. इसमें मौजूद पौधों से मिलने वाला प्रोटीन वजन और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है. इसे पालक, गाजर, लौकी, टमाटर और प्याज जैसी सब्जियों के साथ तैयार किया जा सकता है. 

3. बुधवार – अगर आप हल्का नाश्ता पसंद करते हैं तो अंकुरित मूंग का सलाद एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. अंकुरित अनाज में फैट कम और प्रोटीन, फाइबर साथ ही एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाने के साथ कोलेस्ट्रॉल को बैलेंस रखने में मदद कर सकता है. इसे खीरा, टमाटर, धनिया और नींबू के रस के साथ तैयार किया जा सकता है.

4. गुरुवार – दलिया लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला और बैलेंस एनर्जी देने वाला नाश्ता माना जाता है. इसमें मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव नहीं होता है. दलिया में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को हेल्दी रखने में मदद करता है. इसे गाजर, मटर, लौकी और बीन्स जैसी मौसमी सब्जियों के साथ बनाया जा सकता है.

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5. शुक्रवार – रागी डोसा दिल की सेहत के लिए फायदेमंद ऑप्शन में गिना जाता है. रागी फाइबर से भरपूर होती है और वजन तथा कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखने में मदद कर सकती है. इसमें पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं. रागी में कैल्शियम और आयरन भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं. इसे सब्जियों के साथ तैयार कर सांभर और चटनी के साथ खाया जा सकता है. 

6. शनिवार – बिजी रूटीन वाले लोगों के लिए मल्टीग्रेन वेजिटेबल सैंडविच एक आसान और हेल्दी ऑप्शन हो सकता है. मल्टीग्रेन या साबुत गेहूं की ब्रेड में मौजूद फाइबर एक्सट्रा कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है. इसमें खीरा, टमाटर, प्याज, पालक जैसी सब्जियां और मक्खन की जगह दही या हम्मस का यूज किया जा सकता है. 

7. रविवार – हफ्ते के आखिरी दिन हल्का लेकिन हेल्दी नाश्ता करने के लिए फलों, ओट्स, बादाम, चिया सीड्स और टोंड दूध से बनी स्मूदी का ऑप्शन चुना जा सकता है. चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो ब्लड वेसल्स में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. बादाम अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं, जबकि ओट्स फाइबर की मात्रा बढ़ाते हैं. 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मानसून में बढ़ जाते हैं आई फ्लू के मामले, आंखों को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

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एक्सपर्ट्स के अनुसार, मानसून में बढ़ी हुई नमी, वायरल, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, गंदा पानी और लोगों के बीच नजदीकी आई  कॉन्टेक्ट आई फ्लू के तेजी से फैलने की प्रमुख वजह बन जाते हैं. यह इन्फेक्शन घर, स्कूल, ऑफिस और पब्लिक प्लेस पर आसानी से फैलता है. ऐसे में आंखों की सुरक्षा और समय पर सावधानी बरतना बहुत जरूरी होता है.

कंजंक्टिवाइटिस आंख की उस पतली झिल्ली में सूजन आने की स्थिति है, जो आंख के सफेद हिस्से और पलकों के अंदरूनी भाग को ढकती है. यह संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जी की वजह से हो सकता है. इस बीमारी में आंखें लाल हो जाती है, आंखों में पानी आने लगता है और कई बार आंखों में चिपचिपा पदार्थ भी जमा होने लगता है. बच्चों में यह समस्या ज्यादा तेजी से फैलती है, क्योंकि वह बार-बार आंखों को छूते हैं.

कंजंक्टिवाइटिस आंख की उस पतली झिल्ली में सूजन आने की स्थिति है, जो आंख के सफेद हिस्से और पलकों के अंदरूनी भाग को ढकती है. यह संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जी की वजह से हो सकता है. इस बीमारी में आंखें लाल हो जाती है, आंखों में पानी आने लगता है और कई बार आंखों में चिपचिपा पदार्थ भी जमा होने लगता है. बच्चों में यह समस्या ज्यादा तेजी से फैलती है, क्योंकि वह बार-बार आंखों को छूते हैं.

Published at : 20 Jun 2026 04:59 PM (IST)

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दिल की सेहत के लिए नया फॉर्मूला! चुकंदर और च्यूइंग गम के कॉम्बिनेशन से घटेगा BP, स्टडी में दावा

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Beetroot Chewing Gum : हाई ब्लड प्रेशर आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के लिए लोग दवाओं के साथ-साथ खानपान और लाइफस्टाइल में भी बदलाव करते हैं. इसी बीच एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों का एक अनोखा कॉम्बिनेशन सामने आया है. इस नई स्टडी में शोधकर्ताओं का दावा है कि चुकंदर जैसी नाइट्रेट से भरपूर चीजें खाने के बाद शुगर वाली च्यूइंग गम चबाने से कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर कम करने का असर बढ़ सकता है.

इस शोध में पहली बार यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि मुंह के अंदर बनने वाला माहौल शरीर में नाइट्रेट के इस्तेमाल को किस तरह प्रभावित करता है. अध्ययन में पाया गया कि चुकंदर का जूस पीने के बाद शुगर वाली च्यूइंग गम चबाने से शरीर में नाइट्राइट का लेवल बढ़ा और ब्लड प्रेशर में मामूली लेकिन जरूरी कमी दर्ज की गई. 

नाइट्रेट और ब्लड प्रेशर का क्या है संबंध?

चुकंदर, पालक और केल जैसी सब्जियों में नेचुरल रूप से नाइट्रेट पाया जाता है. हालांकि शरीर सीधे तौर पर नाइट्रेट का यूज नहीं कर सकता है इसके लिए सबसे पहले मुंह में मौजूद बैक्टीरिया नाइट्रेट को नाइट्राइट में बदलते हैं. नाइट्राइट बनने के बाद यह शरीर में कई जरूरी काम करता है. यह ब्लड वेसल्स को आराम पहुंचाने और उन्हें चौड़ा करने में मदद करता है, जिससे ब्लड का फ्लो बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर कम होने में मदद मिलती है. 

चुकंदर और च्यूइंग गम के कॉम्बिनेशन से घटेगा BP

किंग्स कॉलेज लंदन के स्कूल ऑफ कार्डियोवैस्कुलर एंड मेटाबॉलिक मेडिसिन एंड साइंसेज के क्लीनिकल सीनियर लेक्चरर डॉ. एंड्रयू वेब के अनुसार, यह समझना जरूरी है कि लार में एसिड की मात्रा नाइट्रेट को ज्यादा एक्टिव नाइट्राइट में बदलने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करती है. ऐसे में उन्होंने बताया कि पहले की एक स्टडी में उनकी टीम ने पाया था कि चुकंदर के जूस के साथ ग्रेपफ्रूट जूस लेने से लार में एसिड की मात्रा कम हो गई थी और नाइट्रेट से नाइट्राइट बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी. इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने यह जांचने का फैसला किया कि अगर लार में एसिड की मात्रा बढ़ाई जाए तो क्या इसका उल्टा असर देखने को मिलेगा. 

कैसे किया गया अध्ययन?

इस स्टडी में कुछ हेल्दी लोगों को शामिल किया गया. जिसमें सबसे पहले सभी को चुकंदर के जूस का एक शॉट पिलाया गया. इसके बाद उन्हें दो अलग-अलग ग्रुप में बांट दिया गया. एक ग्रुप को शुगर वाली च्यूइंग गम (Hubba Bubba Bubble Gum) दी गई, जबकि दूसरे समूह को शुगर-फ्री च्यूइंग गम (Wrigleys Extra) चबाने के लिए दी गई. सभी लोगों ने 3 से 6 घंटे तक च्यूइंग गम चबाई. इस दौरान शोधकर्ताओं ने उनके खून और लार की जांच की और समय-समय पर उनका ब्लड प्रेशर भी चेक किया. जिसमें करीब एक हफ्ते बाद सभी को फिर से स्टडी में शामिल किया गया. इस बार जिन्होंने पहले शुगर वाली गम चबाई थी, उन्हें शुगर-फ्री गम दी गई और जिन्होंने पहले शुगर-फ्री गम चबाई थी, उन्हें शुगर वाली गम दी गई. 

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स्टडी में क्या सामने आया?

अध्ययन में सामने आया कि शुगर वाली च्यूइंग गम चबाने वाले लोगों की लार में एसिडिटी बढ़ गई. उनकी लार का pH स्तर शुगर-फ्री गम चबाने वालों की तुलना में 1.4 अंक तक कम हो गया. इसके अलावा, उनके मुंह में नाइट्राइट की मात्रा 45 प्रतिशत ज्यादा पाई गई. वहीं शरीर में भी नाइट्राइट का स्तर 25 प्रतिशत ज्यादा दर्ज किया गया. शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि शुगर वाली च्यूइंग गम चबाने वाले लोगों का ब्लड प्रेशर कुछ हद तक कम हुआ. उनके सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में करीब 3 mmHg और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में लगभग 2 mmHg की कमी दर्ज की गई. 

क्या हाई ब्लड प्रेशर का इलाज है यह तरीका?

शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि इन निष्कर्षों का यह मतलब नहीं है कि लोग हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए नियमित रूप से शुगर वाली च्यूइंग गम चबाना शुरू कर दें. अध्ययन में देखा गया प्रभाव केवल कुछ घंटों तक ही बना रहा. इसके अलावा लंबे समय तक शुगर वाली चीजों को खाने से दांतों की सेहत और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
 
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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‘हेल्दी’ का लेबल लगाकर नहीं चलेगा खेल! FSSAI ने कंपनियों को भेजा नोटिस

‘हेल्दी’ का लेबल लगाकर नहीं चलेगा खेल! FSSAI ने कंपनियों को भेजा नोटिस


FSSAI की कार्रवाई में इस बार फोकस सिर्फ कंपनियों पर नहीं बल्कि उन दावों पर है जो रोज़मर्रा के खाने-पीने के प्रोडक्ट्स पर लिखे जा रहे हैं. जांच में सामने आया कि कई प्रोडक्ट्स में हेल्थ से जुड़े ऐसे बड़े-बड़े दावे किए गए जिनका या तो कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था या फिर उन्हें करने की अनुमति ही नहीं है.

सबसे बड़ा सवाल उन दावों पर उठा जहां खाने-पीने की चीजों को सीधे बीमारियों से जोड़ दिया गया. कहीं डायबिटीज कंट्रोल करने की बात कही गई तो कहीं दिल को हेल्दी रखने और अस्थमा तक में असरदार होने का दावा किया गया. जबकि, नियम साफ कहते हैं कि ऐसे दावे बिना मंजूरी के नहीं किए जा सकते लेकिन पैकेट पर इन्हें खुलेआम लिखा गया.

‘हेल्दी ड्रिंक’ के नाम पर गुमराह करने का खेल

“हेल्दी” और “फंक्शनल” ड्रिंक्स को लेकर सामने आया पानी तक को वजन घटाने बॉडी डिटॉक्स करने और स्किन सुधारने वाला बताया गया. FSSAI के मुताबिक ऐसे जनरल हेल्थ क्लेम्स लोगों को गुमराह करते हैं क्योंकि इनके पीछे ठोस सबूत नहीं होते.

लेबल कुछ और अंदर कुछ और

लेबलिंग में भी गड़बड़ी पकड़ी गई. कई प्रोडक्ट्स ने “नेचुरल शुगर” या “100% नेचुरल” जैसे शब्द इस्तेमाल किए, लेकिन असल में उनमें अतिरिक्त शुगर या प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट मौजूद थे यानी पैकेट कुछ और कहानी बता रहा था और अंदर की सच्चाई कुछ और थी.

सप्लीमेंट्स में ‘साइंस’ के बिना बड़े दावे

हेल्थ सप्लीमेंट्स और प्रोटीन पाउडर में भी यही पैटर्न दिखा. “100% प्योर”, “मसल्स तेजी से बढ़ाएं”, “डाइजेशन बेहतर करें”, “ब्रेन हेल्थ सुधारें” ऐसे दावे किए गए लेकिन इनके पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं दिया गया. FSSAI ने साफ कहा है कि ऐसे हर दावे को प्रमाणित करना जरूरी है.

‘हार्ट हेल्दी’ टैग भी सवालों में

कुछ मामलों में “हार्ट हेल्दी” जैसे शब्द और दिल के सिंबल का इस्तेमाल भी सवालों में है. इससे उपभोक्ता को यह मैसेज जाता है कि प्रोडक्ट सीधे दिल के लिए फायदेमंद है जबकि नियम सिर्फ सीमित न्यूट्रिशन क्लेम्स की ही अनुमति देते हैं.

खाने को दवा बनाकर बेचने की कोशिश

फूड प्रोडक्ट्स में “एंटी-कैंसर” जैसे गंभीर दावे भी सामने आए, जिन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है यानी खाने की चीजों को दवा की तरह पेश करने की कोशिश की गई.

हाइजीन और क्वालिटी पर भी सवाल

वहीं हाइजीन और क्वालिटी को लेकर भी शिकायतें सामने आईं. कहीं किचन में साफ-सफाई पर सवाल उठे तो कहीं डेयरी प्रोडक्ट्स में खराबी और फंगस की शिकायत मिली. इससे यह साफ होता है कि मामला सिर्फ मार्केटिंग तक सीमित नहीं है बल्कि ग्राउंड लेवल पर भी निगरानी की जरूरत है.

अब हर दावे का देना होगा सबूत

FSSAI का मैसेज सीधा है- अब पैकेट पर लिखा हर शब्द जांच के दायरे में आएगा. “नेचुरल”, “हेल्दी”, “प्रो”, “इम्यूनिटी बूस्टर” जैसे शब्द यूं ही इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे यानी आने वाले समय में सिर्फ प्रोडक्ट बेचना काफी नहीं होगा जो दावा किया जाएगा उसका सबूत भी देना होगा.

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