आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग जल्दी-जल्दी तैयार होने वाले पैकेज्ड फूड पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं. चिप्स, बिस्किट, पैकेट वाला जूस, कोल्ड ड्रिंक, प्रोसेस्ड मीट, रेडी-टू-ईट नूडल्स और ब्रेड जैसी चीजें हर घर में आम हो गई हैं. अब सवाल उठता है कि क्या पैकेट वाली इन चीजों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है? इस सवाल पर दुनिया भर में रिसर्च हो रही है. फ्रांस की बड़ी स्टडी न्यूट्रीनेट-सैंटे से लेकर हाल की रिपोर्ट्स तक कई सबूत मिले हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के ज्यादा सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अभी पुख्ता सबूत नहीं हैं. पटना के मशहूर कैंसर एक्सपर्ट डॉ. बीपी सिंह ने भी इस पर अपनी राय दी है. आइए जानते हैं कि इस मसले पर उन्होंने क्या  खुलासा किया? 

कैसे होते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने की वे चीजें हैं, जो फैक्ट्री में बहुत ज्यादा प्रोसेस की जाती हैं. इनमें नमक, चीनी, तेल और कई तरह के केमिकल ऐडिटिव्स जैसे प्रिजर्वेटिव्स, कलर, फ्लेवर और इमल्सिफायर मिलाए जाते हैं, जिससे फूड प्रॉडक्ट्स लंबे समय तक खराब न हों और स्वाद अच्छा लगे. आमतौर पर पैकेट में बंद चिप्स, सोडा, पैकेट जूस, प्रोसेस्ड चीज, सॉसेज, हैम जैसे मीट प्रॉडक्ट्स और कई तरह के स्नैक्स इसी कैटेगरी में आते हैं.

रिसर्च में क्या आ चुका सामने?

सबसे पहले पुरानी रिसर्च की बात करते हैं. दरअसल, साल 2018 के दौरान न्यूट्रीनेट-सैंटे नाम की बड़ी स्टडी में पाया गया कि अगर डाइट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का हिस्सा 10 पर्सेंट बढ़ जाए तो कैंसर का खतरा 12 पर्सेंट और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 11 पर्सेंट बढ़ जाता है. यह स्टडी मशहूर मेडिकल जर्नल बीएमजे में प्रकाशित हुई थी, जिसके लिए हजारों लोगों को काफी समय तक फॉलो किया गया था. वहीं, जनवरी 2026 में ही बीएमजे जर्नल में न्यूट्रीनेट-सैंटे स्टडी का नया हिस्सा पब्लिश हुआ है, जिसमें फूड प्रिजर्वेटिव्स यानी सामान को खराब होने से बचाने वाले केमिकल्स पर फोकस किया गया.

नई स्टडी में इतने लोग हुए शामिल

जानकारी के मुताबिक, नई स्टडी में एक लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया. नतीजे बताते हैं कि कुछ खास प्रिजर्वेटिव्स का ज्यादा सेवन सभी तरह के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ाता है. दरअसल, पोटैशियम सोर्बेट, सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम नाइट्रेट और सोडियम इरिथोरबेट जैसे ऐडिटिव्स से खतरा ज्यादा दिखा. हालांकि, प्रिजर्वेटिव्स और कैंसर में डायरेक्ट कनेक्शन नहीं मिला, लेकिन ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में कैंसर का रिस्क 10-20 प्रतिशत तक बढ़ा पाया गया.

क्यों बढ़ता है खतरा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में ज्यादा नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट होता है, जो मोटापा, डायबिटीज और इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है. ये सब कैंसर के लिए रिस्क फैक्टर हैं. साथ ही, पैकेजिंग से आने वाले केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं या डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्लास्टिक पैकेट से माइक्रोप्लास्टिक्स भी शरीर में जा सकते हैं.

क्या कभी नहीं खाने चाहिए पैकेज्ड फूड?

तमाम रिसर्च पर फोकस करने पर सवाल उठता है कि क्या गलती से भी पैकेज्ड फूड नहीं खाने चाहिए? इस पर पटना के मशहूर कैंसर एक्सपर्ट डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि अब तक कई रिसर्च हो चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी लैब में पुख्ता सबूत नहीं मिले कि पैकेट वाले खाने से कैंसर होता है. यह साफ है कि पैकेज्ड फूड हानिकारक होता है, जिससे पेट की बीमारियां और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रॉब्लम्स बढ़ती हैं. ताजा जूस, दूध या ब्रेड फायदेमंद होते हैं, लेकिन पैकेट वाले फूड हानिकारक हो सकते हैं. प्लास्टिक पैकेट में आने वाले दूध को भी अच्छा नहीं माना जाता है, लेकिन कैंसर के सबूत अब तक नहीं मिले हैं. हालांकि, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे फूड से पेट और आंतों से संबंधित कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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