पैंक्रियाज यानी अग्नाशय का कैंसर दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा कैंसरों में गिना जाता है. यह बीमारी इतनी चुपचाप बढ़ती है कि जब तक इसके लक्षण साफ दिखाई देते हैं, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है. यही वजह है कि इस कैंसर से पीड़ित करीब 90 प्रतिशत मरीजों की मौत पांच साल के भीतर हो जाती है.
डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए यह कैंसर लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. न तो इसका जल्दी पता चल पाता है और न ही इसके इलाज के बहुत प्रभावी विकल्प मौजूद हैं. लेकिन अब, कई दशकों की निराशा के बाद कुछ नए शोधों ने उम्मीद की एक नई रोशनी दिखाई है. हाल के वर्षों में वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि शरीर का अपना इम्यून सिस्टम को कैसे इस तरह तैयार किया जाए कि वह खुद कैंसर से लड़ सके. इसी दिशा में अब वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी पर आधारित इलाज को लेकर उत्साह बढ़ा है.
चूहों पर सफल प्रयोग, इंसानों के लिए उम्मीद
स्पेन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक नई संयोजन चिकित्सा पद्धति (कॉम्बिनेशन थेरेपी) विकसित की है, जिसने प्रयोगशाला में चूहों के शरीर से पैंक्रियाज कैंसर के ट्यूमर को पूरी तरह खत्म कर दिया. हालांकि यह शोध अभी इंसानों पर आजमाया नहीं गया है, लेकिन इसके नतीजे इतने सकारात्मक हैं कि वैज्ञानिकों को लगने लगा है कि भविष्य में यह तरीका मरीजों की जिंदगी बचाने में मदद कर सकता है.
इससे पहले अमेरिका में भी वैज्ञानिकों ने mRNA आधारित व्यक्तिगत पैंक्रियाज कैंसर वैक्सीन का शुरुआती मानव परीक्षण किया था, जिसमें कुछ मरीजों में अच्छे परिणाम देखने को मिले थे. इन दोनों अध्ययनों ने मिलकर यह संकेत दिया है कि वैक्सीन आधारित इलाज भविष्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है.
यह नई थेरेपी कैसे काम करती है?
स्पेन में हुए इस अध्ययन को स्पेनिश नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (CNIO) के वैज्ञानिक मारियानो बारबासिड और उनकी टीम ने किया. यह इलाज किसी एक दवा पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें तीन अलग-अलग तरीकों को एक साथ यूज किया गया है. जिसमें पहला एडवांस इम्यूनोथेरेपी है, इससे शरीर का इम्यून सिस्टम को मजबूत किया जाता है. इसके बाद दूसरा कैंसर वैक्सीन, जो इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानना सिखाती है.
वहीं तीसरा चेकपॉइंट इनहिबिटर्स,जो इम्यून सिस्टम पर लगे ब्रेक को हटाकर उसे खुलकर कैंसर से लड़ने देते हैं. इन तीनों को मिलाकर वैज्ञानिकों ने कैंसर के चारों ओर बनी उसकी सुरक्षा ढाल को तोड़ दिया, जिससे टी-सेल्स कैंसर पर हमला कर सकीं और ट्यूमर दोबारा लौट नहीं पाया. विशेषज्ञों का मानना है कि एक से ज्यादा तरीकों को साथ में यूज करने से इलाज ज्यादा असरदार होता है, बजाय इसके कि सिर्फ एक ही दवा दी जाए.
आंकड़े बताते हैं बीमारी की गंभीरता
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में पैंक्रियाज कैंसर के लगभग 5.1 लाख नए मामले सामने आए. उसी साल करीब 4.6 लाख लोगों की मौत इस कैंसर से हुई. भारत में भी स्थिति चिंताजनक है. यहां 13,661 नए मरीज और 12,759 मौतें दर्ज की गई. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि यह कैंसर कितनी तेजी से जान लेता है.
KRAS जीन और दवा रेजिस्टेंस की समस्या
पैंक्रियाज कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों में KRAS नाम का एक जीन खराब (म्यूटेटेड) होता है. लंबे समय तक इस जीन को निशाना बनाने वाली कोई दवा उपलब्ध नहीं थी. करीब 50 साल तक इलाज मुख्य रूप से कीमोथेरेपी पर ही निर्भर रहा. 2021 में पहली बार KRAS को टारगेट करने वाली दवाएं मंजूर हुईं, लेकिन समस्या यह रही कि कुछ महीनों में ही ट्यूमर ने उन दवाओं के खिलाफ रेजिस्टेंस विकसित कर लिया.
बारबासिड और उनकी टीम ने इस समस्या का अनोखा हल निकाला. उन्होंने KRAS के सिग्नलिंग रास्ते को एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग जगहों से रोका. हालांकि नतीजे बहुत उत्साहजनक हैं, लेकिन वैज्ञानिक खुद भी सतर्क हैं. बारबासिड ने साफ कहा है कि हम अभी इस ट्रिपल थेरेपी को इंसानों पर आजमाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि मानव परीक्षण शुरू करने से पहले अभी और शोध, सुरक्षा जांच और तैयारी की जरूरत है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें
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