Why Do I Need To Poop Right After Eating: अगर आपको अक्सर खाना खाने के तुरंत बाद टॉयलेट जाने की इच्छा होती है, तो कई बार लगता है कि जैसे खाना सीधे पेट से बाहर निकल रहा है. लेकिन असल में ऐसा नहीं होता. इसके पीछे शरीर की एक नेचुरल प्रक्रिया काम करती है, जिसे गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स कहा जाता है. यह डाइजेशन सिस्टम का एक स्वाभाविक संकेत होता है, जो आंतों को बताता है कि नया भोजन पेट में पहुंच गया है, इसलिए पुराने वेस्ट को बाहर निकालने की तैयारी कर ली जाए. यह प्रक्रिया सामान्य होती है, लेकिन हर व्यक्ति में इसका असर अलग-अलग हो सकता है
क्या होता है गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार, गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स पेट और बड़ी आंत के बीच होने वाला एक ऑटोमैटिक कम्युनिकेशन है. जब भोजन पेट में पहुंचता है, तो नसें बड़ी आंत की मांसपेशियों को संकेत भेजती हैं. इसके बाद आंतों में हलचल शुरू हो जाती है और मल त्याग की इच्छा महसूस हो सकती है. इसका मकसद यह होता है कि नया भोजन पचने के लिए जगह बन सके और पुराना अपशिष्ट शरीर से बाहर निकल जाए.
शरीर में कौन-कौन से हिस्से होते हैं शामिल?
इस प्रक्रिया में डाइजेशन सिस्टम के कई अंग मिलकर काम करते हैं. पेट भोजन को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करता है. इसके बाद बड़ी आंत धीरे-धीरे भोजन से पानी सोखते हुए उसे ठोस अपशिष्ट में बदलती है. इस पूरी प्रक्रिया को कंट्रोल करने में एंटेरिक नर्वस सिस्टम यानी आंतों का नर्वस सिस्टम अहम भूमिका निभाता है, जिसे अक्सर गट ब्रेन भी कहा जाता है. इसके अलावा डाइजेशन सिस्टम की चिकनी मांसपेशियां, गैस्ट्रिन और कोलेसिस्टोकिनिन जैसे हार्मोन भी इस प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं.
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कब ज्यादा तेज हो जाता है यह रिफ्लेक्स?
कुछ लोगों में यह रिफ्लेक्स ज्यादा सक्रिय हो सकता है. ऐसे में खाना खाते ही तुरंत टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है. कई बार कुछ खास तरह के भोजन, दवाएं, इंफेक्शन या मानसिक तनाव भी इसका कारण बन सकते हैं. ज्यादा कैलोरी वाला खाना, तला-भुना या मसालेदार भोजन, शराब और कैफीन जैसे पेय पदार्थ भी आंतों की गतिविधि को तेज कर सकते हैं. अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह कुछ डाइजेशन संबंधी बीमारियों से भी जुड़ी हो सकती है. इनमें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, डंपिंग सिंड्रोम, गैस्ट्रोपेरेसिस और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसी स्थितियां शामिल हैं. इन बीमारियों में आंतें सामान्य से ज्यादा संसेटिव हो जाती हैं और जल्दी प्रतिक्रिया देने लगती हैं.
क्या करें?
अगर यह समस्या कभी-कभार होती है, तो खान-पान में बदलाव काफी मददगार हो सकता है. बहुत ज्यादा मसालेदार, तैलीय या कैफीन वाले खाद्य पदार्थों से बचना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन अगर बार-बार दस्त, पेट में ऐंठन या वजन कम होने जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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