Warm Water Burp Test Truth: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक इंस्टाग्राम वीडियो ने लोगों को उलझन में डाल दिया है. वीडियो में दावा किया गया है कि गर्म पानी पीने के बाद अगर डकार आती है, तो इसका मतलब शरीर में टॉक्सिन्स फंसे हुए हैं. वहीं अगर डकार न आए, तो कहा जा रहा है कि शरीर के सभी अंग बिल्कुल ठीक काम कर रहे हैं. लेकिन डॉक्टर इस दावे को पूरी तरह गलत और मेडिकल साइंस के खिलाफ बता रहे हैं. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं. 

डकार आने का असली मतलब क्या है?

डकार आना, जिसे मेडिकल भाषा में बेल्चिंग कहा जाता है, शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है. यह तब होती है जब पाचन तंत्र में जमा अतिरिक्त हवा या गैस बाहर निकलती है. ज्यादातर मामलों में इसकी वजह अनजाने में हवा निगल लेना होता है. जल्दी-जल्दी खाना, कोल्ड ड्रिंक या सोडा पीना, च्युइंग गम चबाना, स्मोकिंग करना या खाते वक्त बात करना, इन सभी से हवा निगली जाती है, जिसे एयरोफेजिया कहा जाता है. कई बार चिंता या तनाव की वजह से भी व्यक्ति बार-बार हवा निगल लेता है. यह हवा पेट या फूड पाइप में जमा होकर डकार के रूप में बाहर निकलती है.

पेट से बनने वाली गैस का रोल

कुछ मामलों में पेट के अंदर पाचन के दौरान गैस बनती है, जिसे गैस्ट्रिक बेल्चिंग कहा जाता है. यह तब हो सकता है जब बिना पचे कार्बोहाइड्रेट आंतों में बैक्टीरिया के जरिए फर्मेंट होते हैं या फिर एसिड रिफ्लक्स  और एच पाइलोरी जैसे इंफेक्शन की स्थिति में. डॉक्टर साफ तौर पर कहते हैं कि डकार का शरीर से टॉक्सिन्स निकलने, लिवर या किडनी फेल होने से कोई सीधा संबंध नहीं है.

साइंस क्या कहती है?

Neurogastroenterology & Motility जैसी मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च बताती है कि जरूरत से ज्यादा डकार आने के ज्यादातर मामले सुप्रागैस्ट्रिक बेल्चिंग से जुड़े होते हैं. इसमें हवा पेट से नहीं, बल्कि फूड पाइप से ऊपर की ओर आती है. यह आदतों और व्यवहार से जुड़ा होता है, न कि अंगों की खराबी से.अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के मुताबिक, डकार आना सामान्य और नुकसानदेह नहीं है, जब तक कि इसके साथ पेट दर्द, अचानक वजन कम होना, उल्टी या निगलने में परेशानी जैसे लक्षण न दिखें.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

दिलशाद गार्डन स्थित करुणा हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशीष सचान बताते हैं कि “ये टेस्ट गर्म पानी पीकर डकार आने या न आने से नहीं किए जाते और न ही इससे लिवर या किडनी की सेहत का आकलन होता है. सोशल मीडिया पर जिसे ‘डकार टेस्ट’ कहा जा रहा है, वह असल में मेडिकल ब्रीथ टेस्ट की गलत समझ है. उनके मुताबिक, ये टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर किए जाते हैं.”

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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