डॉक्टर के मुताबिक, ग्लूकोमा की जांच में इंट्राओक्यूलर प्रेशर यानी आंखों के अंदर का दबाव बेहद अहम होता है. यही वजह है कि हर विजिट पर इस प्रेशर को मापा जाता है, ताकि बीमारी की स्थिति और इलाज का असर समझा जा सके.



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