दिल्ली हाई कोर्ट ने डीप फेक मामले में गौतम गंभीर के पक्ष में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने गंभीर को उनके व्यक्तित्व अधिकारों का संरक्षण प्रदान किया है. हाई कोर्ट ने मेटा, गूगल और अमेजन को आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का आदेश दिया है. दरअसल गौतम गंभीर ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके नाम और छवि का दुरुपयोग और साथ ही उन्होंने गलत सूचना फैलाने के लिए उपयोग हो रहे कंटेन्ट को हटाने की मांग की थी.

गौतम गंभीर ने पहले अपनी याचिका वापस ले ली थी, जिससे वे ज्यादा सटीक जानकारी के साथ नई अर्जी दाखिल कर सकें. गंभीर का कहना था कि उनकी इजाजत के बिना उनकी आवाज, फोटोग्राफ का गलत कमर्शियल इस्तेमाल हो रहा है. इसके लिए डीप फेक, AI मैनिपुलेशन जैसी तकनीकों का गलत इस्तेमाल हो रहा है.

न्यायाधीश ज्योति सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और विवादित लिंक (URL) की जांच के बाद पाया कि गौतम गंभीर के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कई पोस्ट ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर मौजूद हैं.  गंभीर के रिजाइन करने वाला AI जनरेटेड वीडियो डाला गया था, जिसपर कुछ ही समय में 29 लाख व्यूज आ गए थे.

भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के वकील अनंत देहाद्राई ने कहा कि कई सारे आपत्तिजनक लिंक हटाए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें बार-बार शेयर किया जा रहा है.

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