आजकल लोग तला-भुना, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाने से दूर रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन एक चीज ऐसी भी है, जो लगभग हर घर में इस्तेमाल होती है और ब्रेन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. यह है चीनी (खासकर सफेद चीनी और मीठे ड्रिंक्स में मिली एडेड शुगर). डॉक्टरों और लेटेस्ट रिसर्च के मुताबिक, रोजाना ज्यादा चीनी खाने से ब्रेन फॉग, मेमोरी कमजोर होना, डिप्रेशन और यहां तक कि अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लीडिंग न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ऑस्टिन पर्लमटर (MD) कहते हैं कि तला-भुना या रिफाइंड कार्ब्स नहीं, बल्कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी (खासकर लिक्विड शुगर यानी मीठे ड्रिंक्स) ब्रेन के लिए सबसे खराब है. यह चीज 99% लोग चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, जूस, बिस्किट या मिठाई में रोज लेते हैं.

ब्रेन को कैसे नुकसान पहुंचाती है चीनी?

  • ब्लड शुगर स्पाइक और क्रैश: जब आप ज्यादा चीनी लेते हैं तो ब्लड शुगर बहुत तेजी से बढ़ता है और फिर तेजी से गिरता है. इससे ब्रेन फॉग (दिमाग सुन्न होना) होने का खतरा और चिड़चिड़ापन बढ़ता है. साथ ही, फोकस में कमी होती है. 2025 में जारी हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई GI वाली चीनी ब्रेन के हिप्पोकैंपस (मेमोरी वाला हिस्सा) को नुकसान पहुंचाती है.
  • इन्फ्लेमेशन बढ़ना: ज्यादा चीनी से ब्रेन में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ती है. 2025 की न्यूरोसाइंस स्टडीज में पाया गया कि हाई शुगर डाइट से ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) कम होता है, जो न्यूरॉन्स को हेल्दी रखता है. इससे लर्निंग और मेमोरी कमजोर पड़ती है.
  • इंसुलिन रेसिस्टेंस और ‘टाइप 3 डायबिटीज’: डॉक्टर अब अल्जाइमर को ‘टाइप 3 डायबिटीज’ कहते हैं, क्योंकि ज्यादा चीनी से ब्रेन इंसुलिन रेसिस्टेंट हो जाता है. इससे मेमोरी लॉस और डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है. 2025 की द लैंसेट स्टडी में पाया गया कि हाई शुगर से ब्रेन के ब्लड वेसल्स डैमेज होते हैं.
  • एडिक्शन जैसा असर: चीनी ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम को उत्तेजित करती है, जैसे कोई नशा. इससे क्रेविंग बढ़ती है और छोड़ना मुश्किल हो जाता है।.वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, फ्री शुगर रोजाना 5-10% कैलोरी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, लेकिन ज्यादातर लोग इससे कहीं ज्यादा लेते हैं.
  • बच्चों को ज्यादा खतरा: छोटे बच्चों में ज्यादा मीठे ड्रिंक्स से ADHD, अटेंशन प्रॉब्लम और बाद में कम IQ का खतरा बढ़ता है. कोरियन स्टडी (2025) में पाया गया कि 2 साल से कम उम्र में 200ml से ज्यादा मीठा ड्रिंक पीने वाले बच्चों में ADHD ज्यादा होता है.

कैसे करें बचाव?

  • चाय-कॉफी में चीनी कम करें या छोड़ दें.
  • पैकेज्ड जूस, सोडा, एनर्जी ड्रिंक्स अवॉइड करें.
  • फ्रेश फ्रूट्स से मीठा लें. इनमें फाइबर होता है, जो शुगर को धीरे रिलीज करता है.
  • घर का खाना, साबुत अनाज, नट्स और हरी सब्जियां ज्यादा खाएं.
  • अगर मीठा चाहिए तो शहद, गुड़ या फ्रेश फ्रूट यूज करें, लेकिन कम मात्रा में.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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