India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर किसानों में चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. वहीं डेयरी इंडस्ट्री ने भरोसा जताया है कि इस समझौते से उनके हितों को कोई नुकसान नहीं होगा. NDTV से हुई बातचीत में अमूल (Amul) के मैनेजिंग डायरेक्टर जयन मेहता  (Jayan Mehta) ने कहा कि पिछले हफ्ते दोनों देशों के बीच हुईइस डील से अपने देश के किसानों या एग्रीकल्चर मार्केट को नुकसान नहीं पहुंचेगा, बल्कि इसके बजाय अमेरिकी बाजारों में इनकी वैल्यूएबल एक्सेस बढ़ेगी. 

जयन मेहता ने आगे कहा, ”अमेरिकी बाजारों में बेहतर पहुंच के लिए बातचीत जरूरी थी और इस डील के जरिए वह हो गया. इससे भी जरूरी बात यह है कि टैरिफ भी 50 परसेंट से घटकर सीधे 18 परसेंट हो गया. इससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी और इस सेक्टर से जुड़े सभी लोगों के सुनहरे भविष्य के लिए नया रास्ता खुलेगा.” 

किसानों को किस बात का डर? 

बता दें कि केंद्र सरकार का दावा है कि अमेरिका के साथ ही हुए व्यापार समझौते के तहत खेती-बाड़ी और डेयरी सेक्टर से जुड़े किसानों के हितों को बाहर रखा गया है. भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी यह कह चुके हैं कि भारत ने इस ट्रेड डील में अपने एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टरों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया है और फल-सब्जियों से लेकर तमाम तरह के अनाज, डेयरी उत्पाद और मसालों को इससे बाहर रखा है ताकि अपने देश के किसानों को कोई नुकसान न पहुंचे.

हालांकि, बावजूद इसके किसान संगठनों को इस बात का डर है कि इस डील से उनके हितों को चोट पहुंच सकती है. और तो और किसान ये तक कह चुके हैं कि अगर उनके हितों से कोई समझौता हुआ, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे. किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई में किसान संगठनों ने 12 फरवरी को एक दिन के लिए हड़ताल पर जाने का ऐलान भी कर दिया है. 

कम इस्तेमाल में आने वाली चीजें नहीं मंगा रहा भारत 

जयन मेहता ने यह भी कहा, “डेयरी इंडस्ट्री और पशुधन सेक्टर के सबसे जरूरी पहलुओं में से एक पशु चारा है.” उन्होंने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी गुजरात के 18,600 गांवों में 36 लाख किसानों के साथ काम करता है और हर दिन लगभग 350 लाख लीटर दूध इकट्ठा करने के साथ-साथ उसे मैनेज करने का काम करती है. अमूल को जिन चीजों की जरूरत पड़ती है, उनके से एक है मवेशियों को बेहतर क्वॉलिटी का चारा देना. इसमें खेती से जुड़ी अलग-अलग तरह की चीजों का कॉम्बिनेशन होता है जैसे कि डी-ऑइल्ड राइस ब्रान, मक्का, रेपसीड एक्सट्रैक्शन और गुड़. 

उन्होंने कहा, “अमूल में हमारे पास लगभग 8 प्लांट हैं जो हर दिन लगभग 12,000 टन पशु चारा बनाते हैं.” लेकिन यहां भी भारत ऐसी चीजों का इंपोर्ट नहीं कर रहा है, जिनका ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता. उन्होंने DDGS (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स) का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में DDGS की भी बहुत ज्यादा उपलब्धता है क्योंकि हमने मक्के से इथेनॉल बनाना भी शुरू कर दिया है, लेकिन आप इसमें 3-4 परसेंट से ज्यादा DDGS का इस्तेमाल नहीं कर सकते इसलिए इसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत देश में लाने का कोई प्रैक्टिकल फायदा नहीं है. बता दें कि DDGS का पशु चारे में बहुत कम इस्तेमाल होता है.

ये भी पढ़ें:

शेयर बाजार में आज धुआंदार तेजी, जानें क्यों सरपट भाग रहा सेंसेक्स; अमेरिका से है बड़ा कनेक्शन 



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp