कई महिलाओं के लिए पीरियड्स का पहला दिन सबसे मुश्किल होता है. अचानक पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द शुरू हो जाता है. शरीर भारी-भारी लगता है, कमर में दर्द होता है, कभी जी मिचलाता है तो कभी दस्त भी लग सकते हैं. ऐसे में रोज के साधारण काम जैसे ऑफिस जाना, पढ़ाई करना या घर का काम भी बहुत कठिन लगने लगते हैं. लेकिन आपने शायद नोटिस किया होगा कि यह दर्द तीसरे या चौथे दिन तक धीरे-धीरे कम हो जाता है. तब तक ऐंठन सहने लायक हो जाती है और शरीर थोड़ा सामान्य महसूस करने लगता है. ऐसे में कई बार मन में सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है क्यों पीरियड्स का पहला दिन सबसे ज्यादा दर्दनाक होता है और फिर आराम मिलने लगता है. तो आइए जानते हैं कि पीरियड्स पेन पहले दिन ज्यादा और बाद में कम होने की वजह क्या है. 

पहले दिन दर्द इतना ज्यादा क्यों होता है?

दिल्ली के सीके बिरला अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की निदेशक डॉ. कीर्ति खेतान और रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. साक्षी गोयल के अनुसार, इसका सीधा संबंध शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायन से है. पीरियड्स के पहले दिन शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायन का स्तर सबसे ज्यादा होता है. यह रसायन यूट्रस को सिकुड़ने में मदद करता है, ताकि वह अपनी परत बाहर निकाल सके. जब प्रोस्टाग्लैंडिन ज्यादा मात्रा में बनता है, तो यूट्रस तेजी और जोर से सिकुड़ता है, जितने ज्यादा और तेज ऐंठन होगी,दर्द उतना ज्यादा महसूस होगा. पहले 24 से 48 घंटों में यूट्रस की ज्यादातर परत बाहर निकल जाती है. इसके बाद प्रोस्टाग्लैंडिन का स्तर कम होने लगता है. इसलिए तीसरे-चौथे दिन तक दर्द भी कम हो जाता है. 

यूट्रस में ऑक्सीजन की कमी से बढ़ता है दर्द

जब यूट्रस बार-बार और जोर से सिकुड़ता है, तो आसपास की ब्लड वेसल्स थोड़ी देर के लिए दब जाती हैं. इससे यूट्रस की मांसपेशियों तक खून और ऑक्सीजन कम पहुंचती है. जब किसी हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वहां तेज और ऐंठन जैसा दर्द होता है.इसी वजह से पहले दिन का दर्द धड़कन जैसा या बहुत तीखा महसूस हो सकता है. जैसे-जैसे ऐंठन कम होते हैं, खून का प्रवाह सामान्य होने लगता है और दर्द घट जाता है. 

ज्यादा ब्लीडिंग मतलब ज्यादा ऐंठन

आमतौर पर पीरियड्स के पहले और दूसरे दिन ब्लीडिंग सबसे ज्यादा होती है. जब ज्यादा मात्रा में खून और ऊतक बाहर निकालने होते हैं, तो यूट्रस को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. चौथे दिन तक ब्लीडिंग कम हो जाती है. जब निकालने के लिए ज्यादा परत नहीं बचती, तो यूट्रस को उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती, इससे आराम मिलता है.कम उम्र की लड़कियों में सर्विक्स का छिद्र थोड़ा संकरा हो सकता है. जब खून इस छोटे रास्ते से बाहर निकलता है, तो पहले एक-दो दिन दबाव ज्यादा महसूस हो सकता है. जैसे-जैसे फ्लो कम होता है, यह दबाव भी कम हो जाता है और दर्द घटने लगता है.

कब समझें कि दर्द सामान्य नहीं है?

हल्का या मध्यम दर्द आम बात है,लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टर से सलाह लें. अगर दर्द इतना तेज हो कि उल्टी या बेहोशी होने लगे, हर साल दर्द बढ़ता जा रहा हो, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, दर्द निवारक दवा से भी आराम न मिले या पीरियड्स के बीच में भी दर्द होता हो. ऐसे मामलों में एंडोमेट्रियोसिस, एडिनोमायोसिस या फाइब्रॉएड जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिनका इलाज जरूरी होता है. 

पहले दिन के दर्द से राहत कैसे पाएं?

अगर आपको पता है कि पहले दिन दर्द ज्यादा होगा, तो पहले से तैयारी करना मददगार हो सकता है. पेट के निचले हिस्से पर हीटिंग पैड रखें, डॉक्टर की बताई गई दर्द निवारक दवा समय पर लें, हल्की स्ट्रेचिंग या धीमी वॉक करें, खूब पानी पिएं और अपने पीरियड्स का कैलेंडर बनाए रखें. तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान से दर्द और बढ़ सकता है. इसलिए बैलेंस डाइट और स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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