Stock Market News: विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में फिर से भारी कोहराम देखने को मिला. केंद्रीय बजट से पहले की सतर्कता और कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया. इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा और बीएसई सेंसेक्स 0.94 प्रतिशत यानी 770 अंक की गिरावट के साथ 81,537.70 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं एनएसई का निफ्टी-50 भी 241 अंक यानी 0.95 प्रतिशत फिसलकर 25,048.65 के स्तर पर आ गया.
क्यों क्रैश शेयर बाजार?
इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में देखने को मिला. बीएसई मिडकैप इंडेक्स करीब 1.6 प्रतिशत टूट गया, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.2 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ संकेत मिलता है कि जोखिम भरे शेयरों से निवेशक तेजी से पैसा निकाल रहे हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. छोटे और मझोले शेयरों में बिकवाली इस बात का संकेत है कि बाजार में डर का माहौल बना हुआ है.
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों को एक ही दिन में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र में जहां 458.5 लाख करोड़ रुपये था, वह घटकर करीब 452 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. यानी कुछ ही घंटों के कारोबार में लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति बाजार से साफ हो गई.
निवेशक हुए अलर्ट
जानकारों का मानना है कि एफआईआई की बिकवाली, वैश्विक स्तर पर जारी तनाव, डॉलर की मजबूती और घरेलू स्तर पर बजट व कॉर्पोरेट नतीजों को लेकर अनिश्चितता ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है. जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते और बजट को लेकर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए रहेंगे.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)