HPV Vaccination Campaign In India: देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है. सर्वाइकल कैंसर, जिसके मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं, उसके खिलाफ सरकार वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने जा रही है. इस पहल के तहत 14 साल की लड़कियों को मुफ्त में एचपीवी वैक्सीन दी जाएगी. इसे सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1.15 करोड़ लड़कियां 14 वर्ष की उम्र में पहुंचती हैं.
सर्वाइकल कैंसर के मामले
सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है. आंकड़े बताते हैं कि देश में हर कुछ मिनट में एक महिला इस बीमारी के कारण जान गंवा देती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एचपीवी टीकाकरण का विस्तार कैंसर से होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी एक आम इंफेक्शन है, जो स्किन-टू-स्किन संपर्क से फैलता है और अक्सर शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखाता. यदि उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन का इंफेक्शन लंबे समय तक बना रहे, तो यह धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले सकता है.
राष्ट्रीय कार्यक्रम में इस्तेमाल की जा रही क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन एचपीवी के टाइप 16 और 18 से सुरक्षा देती है, जो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं. इसके अलावा यह टाइप 6 और 11 से भी बचाव करती है, जो आम तौर पर जननांग मस्सों का कारण बनते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, यह टीका सिर्फ सर्वाइकल कैंसर ही नहीं बल्कि गुदा, योनि, वल्वा, लिंग और गले से जुड़े कुछ प्रकार के कैंसर के खतरे को भी कम करने में मददगार है. यदि वायरस के संपर्क में आने से पहले यह वैक्सीन लगा दी जाए, तो सर्वाइकल कैंसर और उससे जुड़ी प्रारंभिक अवस्थाओं के खिलाफ लगभग 97 प्रतिशत तक सुरक्षा मिल सकती है. रिसर्च बताती हैं कि टीकाकरण के बाद कम से कम 12 से 15 वर्षों तक मजबूत इम्यून बनी रहती है.
9 साल से 14 साल की लड़कियां
यह टीका किशोरावस्था में सबसे अधिक प्रभावी होता है, इसलिए 9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियां प्राथमिक लक्ष्य हैं. 15 से 26 वर्ष की महिलाओं के लिए कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है, जबकि 27 से 45 वर्ष की आयु के पुरुष और महिलाएं डॉक्टर की सलाह के बाद टीका लगवा सकते हैं. 9 से 14 वर्ष के लड़कों को भी शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि इंफेक्शन के फैलाव को कम किया जा सके. कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, जैसे एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को टीकाकरण से पहले हेल्थ परामर्श लेना चाहिए.
सर्वाइकल कैंसर से मौत
मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर बना हुआ है. हर साल करीब 80 हजार नए मामले सामने आते हैं और 42 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण होती है. साइंटफिक प्रमाण बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर के लगभग सभी मामलों के पीछे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी का लगातार बना रहने वाला इंफेक्शन जिम्मेदार होता है. खासतौर पर एचपीवी के टाइप 16 और 18 को उच्च जोखिम वाला माना जाता है, जो भारत में 80 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार हैं.
एचपीवी वैक्सीन कितनी प्रभावी है
यूएस की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन दुनिया में सबसे ज्यादा स्टडी की गई वैक्सीन में से एक है. रिसर्च से यह साबित हुआ है कि यह वैक्सीन उन एचपीवी प्रकारों से होने वाले सर्वाइकल कैंसर को रोकने में 90 प्रतिशत से ज्यादा तक प्रभावी है, जिन्हें यह कवर करती है. इस वैक्सीनेशन सेंटरों को 24 घंटे संचालित सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत हेल्थ सहायता उपलब्ध हो सके. इससे सुरक्षा स्टेंडर्ड को मजबूत करने के साथ-साथ पेरेंट्स का भरोसा भी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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