आईसीएमआर की एक स्टडी के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे लाइफस्टाइल में आए बदलाव अहम भूमिका निभा रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ मैमोग्राफी पर निर्भर रहने के बजाय अब जोखिम के आधार पर जांच और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, खासकर युवा महिलाओं में.

नींद की कमी को लेकर अब ठोस सबूत सामने आ रहे हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि नींद का बिगड़ा पैटर्न शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करता है. इससे मेलाटोनिन हार्मोन, एस्ट्रोजन संतुलन, इम्युनिटी और डीएनए रिपेयर पर असर पड़ता है, जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है.
Published at : 22 Jan 2026 11:12 AM (IST)