अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज शपूर जादरान इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. 38 साल के शपूर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत को लेकर क्रिकेट जगत में चिंता बढ़ गई है. युद्ध, संघर्ष और सीमित संसाधनों के बीच अफगानिस्तान क्रिकेट को पहचान दिलाने वाले शपूर जादरान हमेशा मैदान पर जुझारू खिलाड़ी के तौर पर जाने गए, लेकिन अब वह मैदान के बाहर जिंदगी की सबसे बड़ी जंग लड़ रहे हैं.

परिवार और बोर्ड ने दी सेहत की जानकारी

परिवार के सदस्यों के अनुसार, शपूर जादरान पिछले कुछ समय से लगातार अस्वस्थ चल रहे थे. 12 जनवरी 2026 को उनके भाई घमाई जादरान ने सोशल मीडिया के जरिए उनकी हालत की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि शपूर की तबीयत गंभीर है और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है. इसके बाद अफगानिस्तान क्रिकेट से जुड़े सूत्रों ने भी पुष्टि की कि शपूर की व्हाइट ब्लड सेल काउंट ड्रॉप हो गया है. जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. हालांकि, उनकी बीमारी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक मेडिकल डिटेल सामने नहीं आई है.

क्रिकेट जगत ने जताई चिंता

शपूर जादरान की हालत को लेकर सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के पूर्व क्रिकेटरों ने भी चिंता जताई है. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मैदान पर शेर की तरह खेलने वाला यह गेंदबाज आज जिंदगी से लड़ रहा है और उसे सभी की दुआओं की जरूरत है. उनके इस संदेश के बाद कई क्रिकेट फैंस और खिलाड़ी शपूर के जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं.

शपूर जादरान का करियर

अगर शपूर जादरान के क्रिकेट करियर की बात करें, तो वह अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती दौर के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं. उन्होंने साल 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, जब अफगानिस्तान टीम अपनी पहचान बनाने के संघर्ष में थी. करीब 10 साल लंबे करियर में उन्होंने देश के लिए कुल 80 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. इसमें 44 वनडे और 36 टी20 मुकाबले शामिल हैं. वनडे क्रिकेट में उनके नाम 43 विकेट हैं, जबकि टी20 में उन्होंने 37 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा.

शपूर जादरान का सबसे यादगार प्रदर्शन 2015 वनडे वर्ल्ड कप में देखने को मिला था, जब अफगानिस्तान ने स्कॉटलैंड के खिलाफ अपनी पहली वर्ल्ड कप जीत दर्ज की. उस मैच में शपूर ने गेंद से अहम विकेट लिए और बाद में बल्ले से विजयी रन बनाकर इतिहास रच दिया. साल 2025 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. 



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