जितना जरूरी पेट के लिए खाना होता है उससे भी ज्यादा जरूरी आंखों के लिए नींद होती है, लेकिन आज के जमाने में नींद जैसी बेहद  जरूरी चीज को लोग नजरअंदाज कर देते है जो कि उनकी सेहत के लिए काफी घातक साबित हो सकता है

देर से सोना और सिर्फ 5–6 घंटे की नींद लेना आजकल एक तरह का नॉर्म बन गया है, इसमें “हसल कल्चर” का भी बड़ा हाथ है, जो कम नींद लेकर ज्यादा काम करने को बढ़ावा देता है, काम के प्रति लगन होना बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपनी नींद से समझौता करना बिल्कुल भी सही नहीं है

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आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय

Dr. Prashant Makhija, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, वॉकहार्ट, बताते हैं कि “नींद के दौरान हमारा दिमाग दिनभर की गंदगी (वेस्ट) को साफ करता है और याददाश्त, लर्निंग और इमोशन्स से जुड़ी चीजों को रीसेट करता है, साथ ही शरीर में भूख, मेटाबॉलिज्म और तनाव से जुड़े हार्मोन को भी ठीक करता है, लेकिन जब नींद कम हो जाती है तो शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है, इसकी वजह से दिनभर थकान, ध्यान न लगना, चिड़चिड़ापन और सोचने की स्पीड धीमी हो सकती है. नींद की कमी का असर दिल, ब्लड प्रेशर और इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है, लंबे समय तक कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और ज्यादा तनाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

Dr. Dipesh Pimpale के अनुसार, “इंसानी शरीर एक घड़ी की तरह काम करता है, जो समय आने पर हमें नींद के संकेत देता है. 7–8 घंटे की नींद शरीर को बैलेंस में रखने और अगले दिन के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन जब नींद कम हो जाती है, तो दिमाग थका हुआ महसूस करता है और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है. इसकी वजह से लोगों को मूड स्विंग्स और सिरदर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. साथ ही, इसका सीधा असर शरीर की स्ट्रेस और हार्मोन को संभालने की क्षमता पर भी पड़ता है”.

Dr. Aniruddha Vasant More के अनुसार, हमारा दिमाग सही तरीके से काम करने के लिए नींद का इस्तेमाल करता है.जब हम सोते हैं, तो दिमाग यादों को प्रोसेस करता है और ऊर्जा को फिर से स्टोर करने में मदद करता है, इसलिए जब किसी को जरूरत के हिसाब से नींद नहीं मिलती, तो दिमाग सही से काम नहीं कर पाता, इसकी वजह से सोचने की गति धीमी हो जाती है, ध्यान कमजोर पड़ता है और चीजें भूलने की आदत हो जाती है. वहीं, अगर कोई व्यक्ति रोज एक ही समय पर सोने का रूटीन फॉलो करता है, तो उसे अच्छी नींद आती है और वह ज्यादा एक्टिव, संतुलित और प्रोडक्टिव महसूस करता है.

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