रविवार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने साउथ अफ्रीका को हराकर अपना पहला वर्ल्ड कप खिताब जीता. टीम पहली बार 2005 में वर्ल्ड कप फाइनल तक पहुंची थी, तब ऑस्ट्रेलिया चैंपियन बनी थी. उस वर्ल्ड कप में मिताली राज भारत की कप्तान थीं, लेकिन क्या आपको पता है तब खिलाड़ियों के लिए न तो मैच फीस होती थी और न ही बीसीसीआई से सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के तहत उन्हें कोई बड़ी रकम मिलती थी.

आज की बात करें तो बीसीसीआई अपने पुरुष और महिला क्रिकेटर्स को समान वेतन देता है. एक टेस्ट मैच खेलने के लिए प्रत्येक खिलाड़ी को 15 लाख रुपये मिलते हैं. एक वनडे के लिए 6 लाख रुपये और एक टी20 के लिए 3 लाख रुपये प्रति मैच मिलते हैं. ये महिला और पुरुष, दोनों खिलाड़ियों की मैच फीस है. इसके आलावा बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के तहत अलग अलग केटेगरी में खिलाड़ियों को शामिल करता है, केटेगरी के अनुसार उनके सालाना सैलरी भी देता है.

हालांकि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में पुरुष और महिला क्रिकेटर्स में अंतर है. जैसे पुरुष क्रिकेट में टॉप पर ग्रेड ए प्लस है, इसमें विराट कोहली रोहित शर्मा समेत 4 प्लेयर्स शामिल हैं. इस केटेगरी के खिलाड़ियों को साल के 7 करोड़ रुपये मिलते हैं. जबकि महिला क्रिकेटर्स में टॉप का ग्रेड ‘ए’ है, इसमें खिलाड़ी को साल के 50 लाख रुपये मिलते हैं. हरमनप्रीत कौर ए ग्रेड में हैं.

2005 वर्ल्ड कप में कितने रुपये मिलते थे?

मितली राज की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम 2005 में पहली बार वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंची थी. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 215 रन बनाए थे, जवाब में टीम इंडिया 117 रनों पर ढेर हो गई थी. उस दौरान भारतीय महिला खिलाड़ियों ए लिए न तो मैच फीस होती थी और न ही कोई कॉन्ट्रैक्ट. रनर-अप रही टीम इंडिया के खिलाड़ियों को 1000 रुपये मिले थे.

2025 में चैंपियन बनने पर हुई धनवर्षा!

वर्ल्ड कप 2025 जीतने के बाद भारतीय महिला टीम पर धनवर्षा हो रही है. आईसीसी ने ईनामी राशि के रूप में लगभग 40 करोड़ रुपये टीम इंडिया को दिए. बीसीसीआई ने अलग से खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और चयन समिति के सदस्यों के लिए 51 करोड़ रुपये की ईनामी राशि देने का एलान किया. इसके आलावा राज्य सरकार भी अपने प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार राशि की घोषणा कर रही है.



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