रोटी में प्रोटीन, डाइटरी फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और बी-विटामिन जैसे न्यूट्रिशन भरपूर होते हैं. ये सब मिलकर ब्लड शुगर को बैलेंस रखने, पेट भरा रखने, वजन कंट्रोल करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि लोग अलग-अलग तरह के आटे आजमाने लगे हैं.

अगर बात रागी और ज्वार की करें, तो रागी में ज्वार से थोड़ा ज्यादा फाइबर पाया जाता है. एक रागी की रोटी में लगभग 3.1 ग्राम फाइबर होता है, जबकि एक ज्वार की रोटी में करीब 1.4 ग्राम. फाइबर पाचन सुधारता है और आंतों की सूजन कम करता है, यही इन दोनों  को खास बनाता है.

अगर बात रागी और ज्वार की करें, तो रागी में ज्वार से थोड़ा ज्यादा फाइबर पाया जाता है. एक रागी की रोटी में लगभग 3.1 ग्राम फाइबर होता है, जबकि एक ज्वार की रोटी में करीब 1.4 ग्राम. फाइबर पाचन सुधारता है और आंतों की सूजन कम करता है, यही इन दोनों को खास बनाता है.

रागी की तुलना अगर गेहूं से करें, तो रागी कई मामलों में आगे है. यह ग्लूटेन-फ्री है, हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है और भारी फाइबर कंटेंट की वजह से वजन घटाने में भी मददगार है. इसके न्यूट्रिशन डाइजेशन सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं.

रागी की तुलना अगर गेहूं से करें, तो रागी कई मामलों में आगे है. यह ग्लूटेन-फ्री है, हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है और भारी फाइबर कंटेंट की वजह से वजन घटाने में भी मददगार है. इसके न्यूट्रिशन डाइजेशन सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं.

ज्वार और गेहूं दोनों ही फाइबर के अच्छे स्रोत हैं और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं. ज्वार की रोटी में मौजूद फाइबर ओवरईटिंग से बचाता है और बॉवेल मूवमेंट को भी बेहतर बनाता है. कई लोग इसे वजन घटाने के लिए गेहूं की रोटी से बेहतर विकल्प मानते हैं.

ज्वार और गेहूं दोनों ही फाइबर के अच्छे स्रोत हैं और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं. ज्वार की रोटी में मौजूद फाइबर ओवरईटिंग से बचाता है और बॉवेल मूवमेंट को भी बेहतर बनाता है. कई लोग इसे वजन घटाने के लिए गेहूं की रोटी से बेहतर विकल्प मानते हैं.

गेहूं की रोटी रोजमर्रा का स्वाद देती है, लेकिन जो लोग वजन या ब्लड शुगर कंट्रोल में रखते हैं, वे ज्वार, बाजरा या रागी जैसे मिलेट्स का इस्तेमाल करके फायदा उठा सकते हैं. मिलेट्स शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं, जिससे शुगर स्पाइक्स कम होते हैं.

गेहूं की रोटी रोजमर्रा का स्वाद देती है, लेकिन जो लोग वजन या ब्लड शुगर कंट्रोल में रखते हैं, वे ज्वार, बाजरा या रागी जैसे मिलेट्स का इस्तेमाल करके फायदा उठा सकते हैं. मिलेट्स शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं, जिससे शुगर स्पाइक्स कम होते हैं.

कुछ लोगों को रागी की रोटी का गहरा रंग पसंद नहीं आता, लेकिन पोषण के मामले में यह बेहद मजबूत है. इसके बावजूद, अगर स्वाद या रंग समस्या हो, तो इसे अन्य आटे के साथ मिलाकर हल्का और खाने में आसान बनाया जा सकता है.

कुछ लोगों को रागी की रोटी का गहरा रंग पसंद नहीं आता, लेकिन पोषण के मामले में यह बेहद मजबूत है. इसके बावजूद, अगर स्वाद या रंग समस्या हो, तो इसे अन्य आटे के साथ मिलाकर हल्का और खाने में आसान बनाया जा सकता है.

इसी वजह से मिक्स्ड मिलेट फुल्का एक शानदार विकल्प बन गया है. इसमें रागी, ज्वार, बाजरा और गेहूं सभी को मिलकर एक ऐसा फुल्का बनाते हैं जो डायबिटीज के मरीजों से लेकर वजन घटाने वालों तक सभी के लिए फायदेमंद है. एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर से भरपूर यह रोटी रोज की थाली में आसानी से फिट हो जाती है.

इसी वजह से मिक्स्ड मिलेट फुल्का एक शानदार विकल्प बन गया है. इसमें रागी, ज्वार, बाजरा और गेहूं सभी को मिलकर एक ऐसा फुल्का बनाते हैं जो डायबिटीज के मरीजों से लेकर वजन घटाने वालों तक सभी के लिए फायदेमंद है. एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर से भरपूर यह रोटी रोज की थाली में आसानी से फिट हो जाती है.

Published at : 07 Dec 2025 11:26 AM (IST)

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