अगर आपके पिता, चाचा, दादा या परिवार का कोई सदस्य कम उम्र में हार्ट रोग से जूझ चुका है, तो आपका जोखिम भी 2–3 गुना बढ़ जाता है. आप एक्टिव हो या दुबले-पतले हों, फिर भी दिल की बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ सकती है.

लिपोप्रोटीन, यह एक बेहद खतरनाक प्रकार का कोलेस्ट्रॉल है. सामान्य लिपिड प्रोफाइल में इसकी जांच नहीं होती है. यह पूरी तरह जेनेटिक होता है. आपका LDL नॉर्मल होने पर भी यह धमनियों में ब्लॉकेज जमा कर सकता है.

सिर्फ दौड़ने या जिम जाने से तनाव कम नहीं होता, ज्यादा तनाव से एड्रेनालाईन बढ़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, शरीर में सूजन बढ़ती है और दिल की धमनियां कमजोर हो जाती हैं. आजकल की तेज कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल हार्ट पर बड़ा असर डालती है.

कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर सूजन बनी रहती है. यह सूजन धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाती है, और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है. आम ब्लड टेस्ट में इसकी जांच नहीं होती है.

रोज 6 घंटे सोना काफी नहीं है.अगर आप आधी रात तक मोबाइल देखते रहते हैं या स्क्रीन यूज करते हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक स्ट्रेस बढ़ता है.इससे कॉर्टिसोल बढ़ जाता है, खून गाढ़ा हो जाता है, प्लाक ज्यादा अस्थिर हो जाता है और अचानक हार्ट अटैक की संभावना बढ़ती है.

दौड़ना, जॉगिंग, योगा फिटनेस के लिए अच्छे हैं,लेकिन ये गारंटी नहीं है कि आपकी धमनियां साफ हैं.दिल की बीमारी सिर्फ लाइफस्टाइल से नहीं बल्कि जीन, तनाव, सूजन, नींद और लिपोप्रोटीन(A) जैसे कई फैक्टर से मिलकर बनती है.

डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति को 25 साल की उम्र के बाद कुछ जांचें जरूरी करवानी चाहिए. जैसे Lipoprotein(a), HS-CRP (सूजन टेस्ट), ApoB, HbA1c, Fasting Insulin, Vitamin D, Homocysteine, TMT (अगर लक्षण दिखाई दें) और Coronary Calcium Score (35 साल के बाद), ये टेस्ट असली खतरे को समय रहते पकड़ सकते हैं.
Published at : 10 Dec 2025 07:06 AM (IST)