Fatty Liver And Liver Cancer Risk:  फैटी लिवर बीमारी, जिसे हाल ही में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन असोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज कहा जाने लगा है, आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुकी है. जिसे कभी हल्की-फुल्की परेशानी माना जाता था, वह अब एक गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रही है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया में हर तीन में से एक एडल्ट इस बीमारी से प्रभावित है. लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने से यह समस्या होती है और शुरुआती दौर में इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखते. लेकिन इलाज न मिलने पर यह लिवर में सूजन, सिरोसिस और यहां तक कि कैंसर तक का रूप ले सकती है.

क्यों है यह साइलेंट किलर?

अमेरिका के MD Anderson Cancer Center के मुताबिक, MASLD आगे चलकर MASH यानी मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस नाम की गंभीर स्थिति में बदल सकती है. इस स्टेज पर लिवर में सूजन और सेल्स को नुकसान होने लगता है, जिससे लिवर फाइब्रोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि ज्यादातर मरीजों को तब तक पता ही नहीं चलता, जब तक लिवर को गंभीर नुकसान नहीं पहुंच चुका होता.

आदतें फैटी लिवर को बना देती हैं और खतरनाक

डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ आदतें फैटी लिवर को बिगाड़ देती हैं. इनमें- 

खराब खानपान

ज्यादा शुगर, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, बिस्किट और फास्ट फूड लिवर में फैट तेजी से बढ़ाते हैं. एक्सपर्ट मेडिटेरियन डाइट अपनाने की सलाह देते हैं, जिसमें सब्ज़ियां, साबुत अनाज, नट्स, ऑलिव ऑयल और मछली शामिल होती हैं. यह डाइट लिवर फैट कम करने में मददगार मानी जाती है.

खराब लाइफस्टाइल

लंबे समय तक बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी लिवर की फैट प्रोसेस करने की क्षमता को कमजोर कर देती है. डॉक्टर हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम या 75 मिनट तेज एक्सरसाइज की सलाह देते हैं. लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लेना या फोन पर बात करते हुए टहलना भी फायदेमंद हो सकता है.

पहले से मौजूद बीमारियां

मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल फैटी लिवर को तेजी से गंभीर बना सकते हैं. वजन कंट्रोल, अच्छी नींद और नियमित मेडिकल जांच से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

किन संकेतों पर रखें नजर?

फैटी लिवर को ‘साइलेंट डिजीज’ कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. फिर भी कुछ संकेत हो सकते हैं जैसे लगातार थकान, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्की परेशानी, रूटीन टेस्ट में लिवर एंजाइम का बढ़ना या स्कैन में लिवर का बढ़ा हुआ दिखना. डॉक्टर कहते हैं कि हाई-रिस्क लोगों को नियमित स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए.
अच्छी बात यह है कि शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. शरीर का सिर्फ 5 से 10 फीसदी वजन कम करने से लिवर फैट में बड़ा सुधार देखा गया है. कई रिसर्च के अनुसार, कॉफी पीने से भी इसके खतरे में कमी आ सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर को फायदा पहुंचाते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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