ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान लगातार ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठने की वजह से उनकी सेहत पर असर पड़ा है.
जानकारी के अनुसार, उन्हें तेज बुखार और थकान की शिकायत हुई है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती किस बीमारी की चपेट में है.
खुले में धरने से बिगड़ी सेहत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बीते छह दिनों से मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं. खुले स्थान पर लंबे समय तक ठंड में रहने के कारण उन्हें सर्दी लगने और बुखार आने के आशंका जताई जा रही है. वहीं उनके शिष्यों के अनुसार उनकी हालत बिगड़ने के बाद वैद्य और चिकित्सकों से परामर्श लिया गया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एलोपैथिक दवाएं नहीं लेते हैं. इस वजह से उनका आयुर्वेदिक उपचार किया जा रहा है. दवाएं दिए जाने के बाद फिलहाल वह आराम कर रहे हैं और स्वास्थ्य कारणों से लोगों से मुलाकात भी सीमित कर दी गई है. बताया गया है कि वह अपने शिविर गेट पर खड़ी फोर्स वैन में विश्राम कर रहे हैं.
अब तक नहीं जारी हुआ मेडिकल बुलेटिन
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तबीयत खराब होने की पुष्टि हो चुकी है. लेकिन अब तक कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन या प्रशासनिक बयान जारी नहीं किया गया है. इसे लेकर उनके अनुयायियों और समर्थकों में चिंता और नाराजगी दोनों देखी जा रही है. लोगों की मांग है कि डॉक्टरों की टीम से जल्द उनकी जांच कराई जाए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके.
मौनी अमावस्या को लेकर क्या है पूरा विवाद?
दरअसल मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए जाते समय मेला प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने के बाद विवाद शुरू हुआ था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों ने प्रशासन पर धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए थे. इसके बाद से ही वह अपने शिविर के बाहर पालकी पर बैठे हुए हैं और प्रशासन से सार्वजनिक माफी तथा सम्मान स्नान कराए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं. इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है. वहीं संत समाज की ओर से शांति और संयम बरतने की अपील की गई है. इसे लेकर संतों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव के बजाय बातचीत और आपसी सम्मान से होना चाहिए.
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