Union Budget 2026: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करने जा रही हैं. ऐसे समय में जब भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अगले दो वर्षों में तीसरी इकोनॉमी बनने की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई गंभीर आर्थिक चुनौतियां सरकार के सामने खड़ी हैं. आइए जानते हैं कि बजट पेश करते वक्त वित्त मंत्री के सामने कौन-सी बड़ी चुनौतियां होंगी-

1. जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है. जबकि सरकार ने 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को लगातार 8 प्रतिशत या उससे अधिक की विकास दर बनाए रखना जरूरी होगा.

2. रुपये में लगातार गिरावट

आरबीआई के हस्तक्षेप के बावजूद भारतीय रुपया दबाव में बना हुआ है. 29 जनवरी 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया. 2 अप्रैल 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच रुपये में करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

3. आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर में छंटनी

आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों में रोजगार संकट एक बड़ी चिंता है. वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में टॉप 5 आईटी कंपनियों ने सिर्फ 17 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 17,764 थी.

4. चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा

भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है. चीन ने भारत को करीब 8.39 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया है, जिससे घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ा है.

5. सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतें

सोने और चांदी की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं. 30 जनवरी को सोना 1.71 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.95 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. इसका सीधा असर मिडिल क्लास पर पड़ रहा है, खासकर तब जब भारत में हर साल करीब 1 करोड़ शादियां होती हैं.

6. स्वच्छता और वायु प्रदूषण

जनवरी 2026 में आई सीआरईए (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 44 प्रतिशत शहर क्रॉनिक एयर पॉल्यूशन से जूझ रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साल के 365 दिनों में से केवल 79 दिन ही हवा ‘अच्छी’ श्रेणी में रहती है.

7. अमेरिका का हाई टैरिफ

अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है- जिसमें 25 प्रतिशत बेस टैरिफ और 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ शामिल है, जो रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया है. इससे भारतीय निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है.

8. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सुस्त रफ्तार

‘मेक इन इंडिया’ के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 12.13 प्रतिशत GVA पर अटका हुआ है, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे 25 प्रतिशत तक ले जाने का है.

9. किसान और कृषि उत्पादकता

कृषि वर्ष 2024–25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 254.3 LMT अधिक है. हालांकि, अनाज, मक्का, सोयाबीन और दालों की पैदावार अब भी वैश्विक औसत से कम है. विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादकता सुधार, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और सिंचाई पर फोकस जरूरी है.

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