Can Weekend Sleep Make Up For Lost Sleep: हफ्ते के दिनों में ज़्यादातर लोग नींद की कमी के साथ जीते हैं. काम का दबाव, बच्चों की जिम्मेदारियां, लंबा सफर, देर रात तक मोबाइल चलाना और अधूरे घरेलू काम, ये सब मिलकर सोने का वक्त कम कर देते हैं. हम जानते हैं कि जल्दी सोना चाहिए, लेकिन शाम का समय ही ऐसा लगता है जो सिर्फ अपना होता है. इसलिए एक और एपिसोड, एक और वीडियो या फोन का आखिरी स्क्रॉल चलता रहता है. नतीजा यह कि आधी रात हो जाती है और सुबह 6 बजे अलार्म फिर से उसी थकान भरे चक्र में धकेल देता है.

शुक्रवार तक आते-आते लोग सिर्फ थके नहीं होते, बल्कि पूरी तरह टूट चुके होते हैं. ऐसे में वीकेंड पर देर तक सोना बेहद लुभावना लगता है. लगता है जैसे शरीर को उसकी बकाया नींद मिल रही हो. नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग की मरम्मत का समय है. जब हफ्ते भर नींद कम होती है, तो दिमाग इसका हिसाब रखता है. लेकिन सवाल यह है कि हम हफ्ते में ठीक से सो क्यों नहीं पाते? वजह साफ है  कि आधुनिक लाइफस्टाइल नींद के अनुकूल नहीं है। काम के घंटे शरीर की नेचुरल नींद की लय को नहीं मानते. सोशल लाइफ देर रात तक चलती है और स्क्रीन दिमाग को तब तक सक्रिय रखती हैं, जब शरीर थक चुका होता है. ऊपर से, व्यस्त और थका हुआ दिखना मेहनत की निशानी मान लिया गया है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इसी वजह से वीकेंड की नींद एक तरह का रीसेट बटन बन जाती है लेकिन क्या यह हफ्ते भर की नींद की कमी पूरी कर पाती है? TOI  से बातचीत में अंकित कुमार सिन्हा बताते हैं कि वीकेंड पर ज्यादा सो लेने से थकान कुछ समय के लिए कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय से चली आ रही नींद की कमी इससे ठीक नहीं होती. नींद की कमी शरीर के हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और दिमागी कार्यों को प्रभावित करती है, जो एक-दो रात ज्यादा सोने से सामान्य नहीं होते.

हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

हफ्ते भर कम नींद लेने से शरीर तनाव की स्थिति में रहता है. स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और ब्लड शुगर कंट्रोल प्रभावित होता है. ध्यान, याददाश्त और इमोशन पर नियंत्रण भी कमजोर पड़ने लगता है. लंबे समय तक ऐसा चलने पर  हार्ट की बीमारी, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, समाधान वीकेंड की नींद नहीं, बल्कि नियमित नींद है. हर दिन लगभग एक ही समय पर सोना और उठना, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और 15 से 30 मिनट का शांत रूटीन अपनाना मददगार हो सकता है. ज्यादातर वयस्कों को रोज़ 7 से 9 घंटे की नींद चाहिए. अच्छी और नियमित नींद ही शरीर को सही मायनों में रिकवर होने का मौका देती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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