ईरान की महिला फुटबॉल टीम सुर्खियों में है. हर कोई ईरान की महिला फुटबॉल टीम के बारे में बात कर रहा है. इसकी एक खास वजह है. दरअसल, एशियन कप के ओपनिंग मैच में ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने अपने देश के राष्ट्रगान का बहिष्कार किया है. उन्होंने राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया. ईरान की महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया में एएफसी एशियन कप 2026 के दौरान अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार किया. इसके बाद से हर तरफ उनकी चर्चा हो रही है. 

मैच में ईरान की टीम को हार का सामना करना पड़ा. साउथ कोरिया ने ईरान की टीम को 3-0 से हराया. हालांकि, ईरान की खिलाड़ियों की बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. पिछले लंबे वक्त से ईरान की महिलाएं अपने देश के कानूनों के खिलाफ विरोध करती रही हैं. ईरान में महिलाओं के अधिकार दबाए जा रहे हैं. इस बीच खिलाड़ियों ने भी विरोध जताया और साइलेंट प्रोटेस्ट किया. ईरान की महिला टीम ने राष्ट्रगान गाने से ही मना कर दिया. 

गोल्ड कोस्ट स्टैंड्स में भारी मात्रा में ईरान टीम के समर्थक मौजूद थे. इस दिलचस्प बात यह रही कि सभी ने 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले वाले झंडे फहराए. उनके हाथ में मौजूदा झंडे नहीं थे. पहले के आधिकारिक झंडे में शेर और सूरज का प्रतीक था, लेकिन बाद में इसे हरे और सफेद झंडे से बदल दिया गया. 

ईरान की महिला फुटबॉल टीम की कोच मरज‍ियेह जाफरी ने अपने देश पर हुए हमलों और देश के सबसे बड़े लीडर अयातुल्लाह अली खामेनई की मौत के सवाल पर कुछ भी नहीं बोला. उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. 





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