पाकिस्तान के खिलाड़ी अबरार अहमद को खरीदने के बाद से सनराइजर्स लीड्स आलोचकों के निशाने पर है. इंग्लैंड की फ्रेंचाइजी लीग ‘द हंड्रेड’ के लिए सनराइजर्स लीड्स ने अबरार को 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपये) में खरीदा था, इस फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक सन ग्रुप के पास है. इसी के पास आईपीएल की टीम सनराइजर्स हैदराबाद का भी मालिकाना हक है. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद भी अबरार को खरीदने के बाद से सन ग्रुप की आलोचना हो रही है. भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने भी इसकी आलोचना की है.
काव्या मारन की भी आलोचना हो रही है, जो सनराइजर्स फ्रेंचाइजी की सीईओ हैं और द हंड्रेड के ऑक्शन के दौरान वहां मौजूद थी. सुनील गावस्कर का मानना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार को खरीदने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है, वो स्वाभाविक है. मिड-डे में लिखे अपने कॉलम में गावस्कर ने याद दिलाया कि कैसे मुंबई (2008) में आतंकी हमले के बाद आईपीएल से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बैन कर दिया गया. इसके बाद पुलवामा (2019) और पहलगाम (2025) में हुए आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और खराब हो गए.
गावस्कर का मानना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मिलने वाले पैसे टैक्स के रूप में पाकिस्तान सरकार तक भी पहुंचेगा, जिसका इस्तेमाल हथियार खरीदने के लिए भी किया जा सकता है. यानी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दिए गए पैसे भारतीयों के खून के लिए किया जा सकता है. उन्होंने लिखा कि सनराइजर्स लीड्स के कोच डेनियल विटोरी शायद इसे न समझें, लेकिन भारतीय मालिकों को समझना चाहिए था.
सुनील गावस्कर ने लिखा, ‘अगर टीम के मालिक भारतीय है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से उस सिस्टम को पैसा दे रहे हैं जो भारत के सैनिकों और लोगों की मौत का कारण बन सकता है. क्या इस टूर्नामेंट को जीतना भारतीय लोगों की जानों से ज्यादा महत्वपूर्ण है? जिसमें दुनिया के बहुत कम देशों के प्लेयर्स खेलते हैं.’
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