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  • पिछले चार माह में ईंधन कीमतें 7-8 रुपये प्रति लीटर बढ़ीं.

Petrol-Diesel Rate Today on July 12: आज 12 जुलाई, रविवार को देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जबकि शुक्रवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई थी. इस दिन ब्रेंट क्रूड फिसलकर 76.24 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 72.04 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ. तेल की कीमतों में यह गिरावट तनाव के बावजूद अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर और शांति समझौते को लेकर आई पॉजिटिव खबरों के बीच आई, जिससे होर्मुज (Strait of Hormuz) से एनर्जी शिपिंग फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी. अमेरिका ने इस बीच ईरान के मुख्य एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने से परहजे किया. उन्होंने यह भी कहा कि ”यह संघर्ष एक लंबे युद्ध में नहीं बदलेगा.” उनके ऐसा कहने से निवेशकों का डर कुछ कम हुआ है. 

क्या अभी कम होंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते संकेत दिया था कि अभी घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें कम करने पर कोई विचार नहीं हो रहा है. यह फैसला तब लिया गया है जब OPEC+ ने अगस्त 2026 से तेल उत्पादन में हर दिन 1,88,000 बैरल की और बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है. यह लगातार 50वां महीना है, जब OPEC+ में शामिल देशों ने अपनी प्रोडक्शन लिमिट बढ़ाई है. बता दें कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव शुरू होने के बाद से पिछले चार महीनों में देश में ईंधन की कीमतें चार बार बढ़ी हैं, जिससे इस दौरान कीमतें लगभग 7.5-8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई हैं.

शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमतें

शहर  पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली   102.12 रुपये 95.20 रुपये
मुंबई  111.21 रुपये 97.83 रुपये
कोलकाता 113.51 रुपये 99.82 रुपये
बेंगलुरु 110.93 रुपये 98.80 रुपये
चेन्नई  107.77 रुपये  99.55 रुपये
पटना  113.35 रुपये  99.36 रुपये
लेह 109.81 रुपये 97.92 रुपये
हैदराबाद 115.69 रुपये  103.82 रुपये
कोहिमा 104.39 रुपये 95.91 रुपये

क्यों अलग-अलग शहरों में रेट अलग-अलग?

केंद्र सरकार पूरे देश में एक समान एक्साइज ड्यूटी लगाती है, लेकिन राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर अपने अलग-अलग प्रतिशत में VAT या सेल्स टैक्स लगाती है. जैसे कि अंडमान-निकोबार में टैक्स बहुत कम होने के चलते वहां तेल सस्ता है. वहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में टैक्स ज्यादा लगने की वजह से तेल महंगा हो जाता है. ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और मांग-आपूर्ति की मौजूदा स्थिति भी उस रिटेल कीमत पर असर डालती है, जो ग्राहकों को पेट्रोल पंप पर दिखती है.

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