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  • भारत रूसी तेल शोधित कर यूरोप को निर्यात.

Russian Crude Oil Import: मिडिल ईस्ट में संकट से सबक लेते हुए भारत कच्चे तेल के आयात के लिए सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता है. इसके चलते वह कई अन्य देशों से भी बड़े पैमाने पर कच्चा तेल मंगा रहा है. इन्हीं में से एक है रूस.

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में भारत ने रूस से कुल 5.5 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन (जीवाश्म ईंधन) खरीदे. इसमें से 83% हिस्सा अकेले कच्चे तेल का रहा, जो 4.5 अरब यूरो (49000 करोड़) रुपये का था. इसकी रिकॉर्डतोड़ खरीदारी के बाद भारत दुनिया में चीन के बाद (7.3 अरब डॉलर) रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. 

निर्यात बढ़ने के बाद रूस की कम कमाई

भारत की तरफ से कच्चे तेल की खरीदारी बढ़ने से रूस के कच्चे तेल का एक्सपोर्ट वॉल्यूम भी 14% बढ़ गया है, लेकिन डिस्काउंट की वजह से कच्चे तेल के एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई महीने-दर-महीने 8% घटकर 348 मिलियन यूरो प्रति दिन रह गई है.

रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि कुल मिलाकर, रूस के एक्सपोर्ट वॉल्यूम में 7% की बढ़ोतरी होने के बावजूद रूस के फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई 1% घटकर 734 मिलियन यूरो प्रति दिन रह गई. यानी कि भारत और अन्य एशियाई देशों को तेल बेचकर भी रूस के रेवेन्यू में 8% की गिरावट अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में नरमी और भारी डिस्काउंटके चलते आई है. 

भारत बना रिफाइनरी हब

भारत रूस से कम कीमत पर तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में बेच रहा है. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि जून 2026 में ब्रिटेन ने सरकारी छॅट के तहत रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी से रूसी कच्चे तेल से तैयार जेट ईंधन की अपनी पहली खेप प्राप्त की, जिसकी कीमत लगभग 63 मिलियन यूरो रही. 

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