चेपॉक में फिर चला चेन्नई का जादू, लगातार दूसरी जीत; KKR का हार का ‘चौका’

चेपॉक में फिर चला चेन्नई का जादू, लगातार दूसरी जीत; KKR का हार का ‘चौका’


चेन्नई सुपर किंग्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स को 32 रनों से हरा दिया है. CSK की टीम जैसे अपने चैंपियन वाले रूप में लौट आई है, खासतौर पर गेंदबाजों ने कहर बरपाते हुए केकेआर के बल्लेबाजी लाइन-अप को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. चेपॉक मैदान में खेले गए इस मुकाबले में चेन्नई टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 192 रनों का स्कोर खड़ा किया था. जवाब में कोलकाता की टीम निर्धारित 20 ओवरों में 160 रन ही बना सकी.

KKR ने लगाया हार का चौका

कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए IPL 2026 सीजन बहुत बुरा बीत रहा है. चेन्नई के खिलाफ इस हार से केकेआर ने हार का चौका लगा दिया है. वहीं अपने घरेलू मैदान पर चेन्नई सुपर किंग्स ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर ली है. केकेआर के पास सिर्फ एक अंक है, जो उसे पंजाब किंग्स के साथ मैच रद्द होने पर मिला था.

सीएसके पहले बल्लेबाजी करने आई थी, जिसके लिए संजू सैमसन ने 48 रन बनाए, वहीं आयुष म्हात्रे ने 17 गेंद में 38 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली थी. डेवाल्ड ब्रेविस ने भी 41 रनों का योगदान देकर टीम का स्कोर 192 तक पहुंचाया. हालांकि CSK डेथ ओवरों में बुरी तरह संघर्ष करती दिखी थी.

गेंदबाजों ने बरपाया कहर

चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों ने KKR को कभी मैच में आने ही नहीं दिया. सुनील नरेन और फिन एलन ओपनिंग करने आए. एलन सिर्फ एक रन बना पाए, वहीं नरेन 24 रन बनाकर आउट हो गए. 29 के स्कोर तक कोलकाता के 2 विकेट गिर चुके थे. अजिंक्य रहाणे और अंगकृष रघुवंशी ने 50 रनों की साझेदारी कर पारी को संभाला.

10वें ओवर में रघुवंशी आउट हुए, जिसके बाद विकेटों का पतझड़ शुरू हो गया. इस बीच 11 रनों के भीतर कोलकाता ने चार विकेट खो दिए. रोवमैन पावेल और रमनदीप सिंह काफी देर तक क्रीज पर टिके रहे और 63 रनों की साझेदारी की, लेकिन वे गेंद और बल्ले का कनेक्शन नहीं कर पा रहे थे. अंत में कोलकाता जीत से 32 रन दूर रह गई. चेन्नई के लिए नूर अहमद ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए. अंशुल कंबोज ने 2 बल्लेबाजों को आउट किया. खलील अहमद और अकील हुसैन ने एक-एक विकेट चटकाया और अधिकांश गेंदबाजों ने बढ़िया इकोनॉमी रेट से बॉलिंग की.



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360 One bags ₹2k cr for PIPE strategy; Wealth Company MF enters SIF space

360 One bags ₹2k cr for PIPE strategy; Wealth Company MF enters SIF space



360 One Asset has secured ₹2,000 crore in commitments for its private investment in public equity (PIPE) strategy. The strategy aims to identify high-potential listed and late-stage opportunities, combining private market discipline with public market liquidity, the asset manager said. It will invest through block deals and anchor placements, while maintaining an un-indexed, engagement-driven portfolio approach.

 


Wealth Company MF enters SIF space

 


The Wealth Company Mutual Fund (MF) has entered the Specialized Investment Fund (SIF) space with the launch of two strategies — WSIF Equity Long-Short Fund and WSIF Equity Ex-Top 100 Long-Short Fund. It is the first relatively new MF player to launch offerings in the SIF category.

 

First Published: Apr 14 2026 | 11:16 PM IST



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Brigadier assault case: Delhi LG Sandhu lauds police for arresting 2 accused

Brigadier assault case: Delhi LG Sandhu lauds police for arresting 2 accused


Delhi Lieutenant Governor (L-G) Taranjit Singh Sandhu on Tuesday praised the Delhi Police for promptly arresting the two accused involved in the assault of a senior serving Army officer and his son in Vasant Vihar.

In a message on social media platform X, L-G Sandhu said, “Appreciate the much-needed swift action by @DelhiPolice in the Vasant Enclave case. With two key accused now apprehended and the vehicle seized, the investigation must be fast-tracked to ensure all accomplices are brought to justice.”

The L-G said, “We remain committed to ensuring the safety of our citizens and maintaining the accepted standards of law and order.”


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One of the accused has been identified as Satender alias Sonu (49), the son of Banwari Lal and a resident of 8/123, Mehram Nagar.

He is a director at Chaudhary Aviation Private Limited, a firm that provides chartered and cargo flight services, and deals in the sale and purchase of aircraft and related parts.

The second accused, Sanjay Sharma (56), the son of Laxmi Narayan Sharma, resides at 8/142, Mehram Nagar and runs Pandit Ji Dhaba.

Earlier on Tuesday, L-G Sandhu expressed deep concern over the incident in Vasant Enclave involving the assault on the Brigadier, his wife, and their son, a 23-year-old IIT Delhi graduate.

He said that he has directed the Delhi Police to provide full security to the Army officer and his family.

“Deeply concerned by the incident in Vasant Enclave involving the assault on a serving Brigadier of the Indian Army, his wife and son, a 23-year-old IIT Delhi graduate.”

L-G Sandhu said that he has personally spoken with the Brigadier to enquire about the incident and their well-being.

“I also spoke with the Police Commissioner and the Deputy Commissioner of Police, directing them to ensure a thorough and swift investigation, leading to immediate and appropriate action against those responsible,” the L-G added.



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आखातातील युद्धाचा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या स्मारकाला फटका! स्मारकाचं काम रखडण्याची शक्यता

आखातातील युद्धाचा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या स्मारकाला फटका! स्मारकाचं काम रखडण्याची शक्यता


 अमेरिका-इस्त्रायल आणि इराणमधील युद्धाचा फटका आता थेट डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या स्मारकाला बसलाय, युद्धामुळे तांबे आणि एलपीजीची टंचाई निर्माण झाली असून किंमतीमध्ये देखील वाढ झाली आहे. या महागाईचा फटका इंदू मिलमध्ये साकारल्या जाणाऱ्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या आंतरराष्ट्रीय स्मारकाला बसत आहे. त्यामुळे हा प्रकल्प आणखी वर्षभर रखडण्याची शक्यता आहे असे सांगितले जात आहे, दरम्यान युद्ध आणि स्मारकाचा संबंध काय? असा सवाल करत संजय राऊतांनी सरकारला केला आहे. तर याला प्रत्युतर देत मविआच्या काळामध्ये विटही रचण्यात आली नव्हती विटही रचण्यात आली नव्हती असं म्हणत नवनाथ बन यांनी राऊतांवर पलटवार केला आहे. 

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आखातातील युद्धाचा स्मारकाला फटका

इंदू मिलमधील बाबासाहेबांच्या स्मारकावरून सुप्रिया सुळेंनीही सरकारवर जोरदार हल्लाबोल केला आहे. पक्ष फोडायला वेळ आहे, मात्र बाबासाहेबांच्या स्मारकासाठी वेळ नसल्याचं म्हणत सुप्रिया सुळेंनी राज्य सरकारवर टीका जोरदार टीका केली आहे. आखाती युद्धामुळे तांबे आणि एलपीजीची टंचाई निर्माण झाली आहे, याचा फटका आता ‘दादर’च्या ‘इंदू मिल’मध्ये साकारल्या जाणाऱ्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या आतंरराष्ट्रीय स्मारकाला बसतोय. तांबे आणि एलपीजीच्या टंचाई आणि दरवाढीमुळे हा प्रकल्प आणखी वर्षभर रखडण्याची शक्यता आहे असे सांगण्यात आले आहे. 

हेही वाचा – ‘जय भीम’ शब्द कसा तयार झाला? भारतात पहिल्यांदा जय भीम अशी घोषणा कोणी, कधी आणि कुठे केली?

स्मारकाचं काम पूर्ण होईल – साटम

विरोधकांनी स्मारकावरून सरकारवर केलेल्या टीकेनंतर अमित साटम यांनी उत्तर दिलं आहे. भाजप नेते अमित साटम यांनी दोन वर्षात इंदू मिल येथील डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या स्मारकाचं काम पूर्ण होईल असं सांगितल आहे. तर दुसरीकडे बाबासाहेब आंबेडकरांचं स्मारक बनवू नका असं विधान सुजात आंबेडकर यांनी केलं. त्याऐवजी रिसर्च सेंटर उभारण्याची मागणी त्यांनी केली आहे. 

मागील अनेक वर्षांपासून इंदू मिल येथे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या आंतरराष्ट्रीय स्मारकाचं काम सुरू आहे. मात्र, आता आखातातील युद्धाचा स्मारकाच्या कामावर परिणाम झाला आहे असे सांगितले जात आहे. धातू ओतकामात एलपी वापरला
जातो. आखाती युद्धामुळे तांबे आणि एलपीजीची देशात टंचाई असून दोन्हींचे दरही वाढले, त्यामुळे स्मारकाचं काम रखडण्याची शक्यता आहे.





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क्या है SEBI का BER, म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है इसे समझना?

क्या है SEBI का BER, म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है इसे समझना?


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  • सेबी ने म्यूचुअल फंड खर्च के लिए बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) लागू किया है।
  • BER से फंड चलाने के असल खर्च को समझना आसान होगा।
  • इसमें फंड मैनेजमेंट, डिस्ट्रीब्यूटर और RTA शुल्क शामिल होते हैं।
  • BER, TER से अलग है, जो कुल खर्च दर्शाता है।

Investment Tips: अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो शुरुआत से ही कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है. जिनमें बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) को समझना काफी अहम है. 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने खर्च दिखाने के तरीके में बदलाव करते हुए BER को लागू किया हैं. ताकि निवेशकों को फंड के असली खर्च की ज्यादा जानकारी मिल सके. आइए जानते हैं, आखिर क्या होता है बेस एक्सपेंस रेशियो.

पहले खर्च समझना था मुश्किल

पहले निवेशक म्यूचुअल फंड के खर्च को टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के जरिए समझते थे. जिसमें फंड मैनेजमेंट फीस के साथ-साथ जीएसटी और STT जैसे टैक्स और दूसरे चार्ज भी शामिल होते थे. इससे यह साफ-साफ समझ पाना मुश्किल हो जाता था कि असल में फंड हाउस कितना चार्ज ले रहा है, क्योंकि सभी खर्च एक साथ जोड़ कर दिखाए जाते थे.

BER से खर्च समझना हुआ आसान

अब बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में सिर्फ म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने से जुड़े खर्च को ही दिखाया जाता है. वहीं, जीएसटी और STT जैसे दूसरे चार्ज अलग से दिखाए जाते हैं.

इससे निवेशकों को यह साफ समझ में आता है कि फंड हाउस वास्तव में कितना पैसा निवेशकों से चार्ज कर रही है. साथ ही बाकी चार्ज की जानकारी भी अलग होने से समझने में आसानी होती है. 

BER में क्या शामिल होता है?

बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में म्यूचुअल फंड से जुड़ी जरूरी जानकारी को शामिल किया जाता है. जैसे फंड मैनेजमेंट फीस, डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन और रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंट (RTA) चार्ज. जिससे निवेशकों को साफ पता चलता है कि, उनका पैसा किन चीजों पर खर्च हो रहा हैं. 

BER और TER में क्या फर्क है?

बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) और टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के बीच अंतर की बात करें तो, BER सिर्फ फंड हाउस के खर्च को दिखाता है. यानी इसमें केवल ऑपरेटिंग लागत शामिल होती है. वहीं TER वह कुल खर्च होता है जो निवेशकों को देना पड़ता है. इसमें BER के साथ-साथ सभी टैक्स और रेगुलेटरी चार्ज भी जुड़े होते हैं.
 
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