हरियाणा के छांयसा में 24 दिन में कैसे हुईं 15 मौतें, कौन-सी बीमारी बना रही शिकार?

हरियाणा के छांयसा में 24 दिन में कैसे हुईं 15 मौतें, कौन-सी बीमारी बना रही शिकार?


Haryana Contaminated Water Deaths: हरियाणा के पलवल जिले के हथीन उपमंडल स्थित छांयसा गांव में महज कुछ हफ्तों के भीतर कई मौतों ने दहशत फैला दी है. गांव में कथित तौर पर दूषित पीने वाले पानी के सेवन के बाद रिपोर्ट के अनुसार, बीते करीब 24 दिनों में मौतों का आंकड़ा 15 से अधिक पहुंच चुका है. इससे पहले मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भी दूषित पानी से कई लोगों की जान गई थी.

क्या है मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसा,  करीब 5,700 की आबादी वाले इस गांव में जनवरी के आखिर से अचानक लोग बीमार पड़ने लगे. पहले तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़ती गई. मृतकों में बुजुर्ग, युवा और स्कूली बच्चे शामिल हैं. ग्रामीणों ने बुखार, खांसी, बदन दर्द, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण बताए. कई गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ को बचाया नहीं जा सका.

गांववालों का आरोप है कि कई दिनों से पानी दूषित था, लेकिन जांच के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए. पानी से फैलने वाली बीमारियों के लक्षण पूरे गांव में दिखाई देने लगे. स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जो आसपास के 40 हजार लोगों के लिए बनाया गया था, अब अपने ही गांव के लोगों को बुनियादी सुविधा देने में असमर्थ है. वहां केवल एक डॉक्टर तैनात है, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ के पद खाली हैं और जांच की सही व्यवस्था नहीं है.

एक्सपर्ट का क्या कहना है?

पलवल के सीएमओ डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के मुताबिक, इस मामले की जांच 1 फरवरी से शुरू की गई. ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1100 सैंपल लिए गए हैं, इसके अलावा  2100 से अधिक घरों की स्क्रीनिंग की गई है. पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती दो मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी की पुष्टि हुई थी. प्रारंभिक जांच में मौतों को लिवर संक्रमण, मल्टी ऑर्गन फेलियर और पानी से फैलने वाली बीमारियों से जुड़ा माना गया. 107 पानी के नमूनों में से 23 में बैक्टीरिया और क्लोरीन की कमी पाई गई. इसके बाद चार स्वास्थ्य निगरानी टीमें तैनात की गईं और टैंकरों से अस्थायी साफ पानी की व्यवस्था की गई.

हालांकि अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि मौतों की सीधी वजह क्या रही. प्रशासन दूषित पानी, पाइपलाइन में गंदगी, ठहरे हुए पानी और बिना लाइसेंस वाले चिकित्सकों की लापरवाही जैसे कई पहलुओं की जांच कर रहा है. हेपेटाइटिस ए, बी और सी के साथ-साथ अन्य इंफेक्शन की भी जांच जारी है. अब तक तीन अस्थायी मेडिकल कैंपों में 2,000 से अधिक लोगों की जांच हो चुकी है और 32 लोगों में हेपेटाइटिस बी व सी की पुष्टि हुई है. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीम जांच में जुटी हुई है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इस बीच गांव में पानी आपूर्ति लाइनों में लीकेज और गंदे नाले का पानी मिलने के आरोप भी सामने आए हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मैच गंवाने के बाद पाक कप्तान ने सीधे इस बल्लेबाज को ठहराया हार का दोषी, किसका लिया नाम

मैच गंवाने के बाद पाक कप्तान ने सीधे इस बल्लेबाज को ठहराया हार का दोषी, किसका लिया नाम


आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार ने पाकिस्तान की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है. 165 रन का लक्ष्य देने के बावजूद पाकिस्तान की टीम इस स्कोर को बचा नहीं सकी और मैच 19.1 ओवर में गंवा बैठी. मैच के बाद कप्तान सलमान अली आगा ने हार की बड़ी वजह खुद सबके सामने रख दी.

पाक कप्तान ने इस खिलाड़ी को बताया हार का जिम्मेदार

पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में आगा ने साफ कहा कि टीम ने बल्लेबाजी में अच्छी शुरुआत तो की थी, लेकिन अंत में जिस तरह से रन बनने चाहिए थे, वो नहीं बन सके. उनका मानना था कि स्कोर थोड़ा कम रह गया और यही मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. हालांकि उन्होंने विरोधी कप्तान हैरी ब्रूक की जमकर तारीफ की, जिन्होंने मैच को पाकिस्तान की पकड़ से पूरी तरह बाहर कर दिया.

ब्रूक ने पलटा मैच

165 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम एक समय 58 रन पर अपने 4 विकेट गंवा चुकी थी. ऐसे मुश्किल वक्त में ब्रूक ने मोर्चा संभाला और पाकिस्तान के गेंदबाजों के खिलाफ चारों तरफ शॉट्स खेलते हुए सिर्फ 51 गेंदों में 100 रन की शानदार पारी खेली. उनकी इस पारी ने मैच का रुख ही बदल दिया और इंग्लैंड को जीत की ओर पहुंचा दिया.

पाक कप्तान ने की तारीफ

सलमान अली आगा ने कहा कि उनकी टीम ने ब्रूक को आउट करने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन वह नहीं रुके. उन्होंने कहा कि जब भी इंग्लैंड के खिलाफ मैच हारते हैं, अक्सर ब्रूक ही फर्क पैदा करते हैं. वह ऐसे बल्लेबाज हैं जो मैदान के हर कोने में शॉट खेलने की क्षमता रखते हैं और गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं.

फरहान और शाहीन की मेहनल गई बेकार

सलमान अली आगा ने साहिबजादा फरहान की भी तारीफ की. पाकिस्तान के लिए साहिबजादा फरहान ने 63 रन की अहम पारी खेली और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. वहीं गेंदबाजी में शाहीन अफरीदी ने 4 विकेट लेकर वापसी की उम्मीद जरूर जगाई, लेकिन आखिर में टीम मैच नहीं बचा सकी.

आर्चर ने लगाया जीत का चौका

आखिरी ओवरों में विकेट गिरने के बावजूद इंग्लैंड ने संयम बनाए रखा और अंत में जोफ्रा आर्चर ने चौका लगाकर टीम को जीत दिला दी. इस हार के बाद पाकिस्तान के लिए सेमीफाइनल का रास्ता अब बेहद मुश्किल हो गया है और आगे का सफर दूसरे मैचों के नतीजों पर निर्भर करेगा. 



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जिम्बाब्वे के खिलाफ रिंकू नहीं खेले तो कौन करेगा उन्हें रिप्लेस? ये दो खिलाड़ी बन सकते हैं सरप्

जिम्बाब्वे के खिलाफ रिंकू नहीं खेले तो कौन करेगा उन्हें रिप्लेस? ये दो खिलाड़ी बन सकते हैं सरप्


आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया की भिड़ंत अब जिम्बाब्वे से होने वाली है. दोनो टीमें 26 फरवरी को चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में आमनें-सामनें होंगी. यह मैच भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि सुपर-8 में मिली एक हार के बाद अब टीम के लिए हर मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा हो गया है. इसी बीच भारतीय टीम को एक और झटका लगा है.

स्टार फिनिशर रिंकू सिंह पारिवारिक आपात स्थिति के कारण टीम से अस्थायी रूप से अलग हो गए हैं. उनके पिता की तबीयत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया है. ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ रिंकू का खेलना संदिग्ध माना जा रहा है.

विकल्प नंबर-1: अक्षर पटेल

अगर रिंकू इस मैच में उपलब्ध नहीं होते हैं, तो सबसे मजबूत विकल्प अक्षर पटेल हो सकते हैं. चेन्नई की पिच आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों को मदद करती है. ऐसे में अक्षर टीम को अतिरिक्त स्पिन विकल्प दे सकते हैं. अगर अक्षर को शामिल किया जाता है तो भारत चार ऑलराउंडर के साथ उतर सकता है – शिवम दुबे, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर. इससे बल्लेबाजी की गहराई भी बढ़ेगी और गेंदबाजी में संतुलन भी मिलेगा. तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह संभाल सकते हैं.

विकल्प नंबर-2: संजू सैमसन

दूसरा विकल्प संजू सैमसन हैं. संजू आक्रामक बल्लेबाज हैं और जरूरत पड़ने पर पारी की शुरुआत भी कर सकते हैं या मिडिल ऑर्डर में खेल सकते हैं. अगर टीम मैनेजमेंट बल्लेबाजी को और मजबूत करना चाहता है, तो संजू को मौका दिया जा सकता है. इससे भारत के पास एक अतिरिक्त बल्लेबाज होगा जो बड़े शॉट खेलने में सक्षम है.

मैच का महत्व

भारत के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक और लीग मैच नहीं है, बल्कि सेमीफाइनल की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है. टीम को न सिर्फ जीत दर्ज करनी होगी, बल्कि नेट रन रेट सुधारने के लिए बड़े अंतर से जीत भी जरूरी होगी.

अब नजर टीम मैनेजमेंट के फैसले पर रहेगी कि वह संतुलन को प्राथमिकता देता है या बल्लेबाजी की ताकत को. जो भी फैसला हो, जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत को हर हाल में जीत चाहिए. 



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भारत में 70% महिलाएं चुपचाप सहती हैं ये तकलीफें, डॉक्टर से जानें कब आपको सावधान होने की जरूरत?

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Preventive Tips For Women Reproductive Health: आज हमारी लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है, ऐसे में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं. कई स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी हैं जिन्हें महिलाओं से नॉर्मल मानकर सहने की उम्मीद की जाती है. इसमें दर्दभरे पीरियड्स, पीसीओएस, फाइब्रॉइड, एंडोमेट्रियोसिस या बार-बार होने वाले इंफेक्शन लाखों महिलाओं की रोजमर्रा की हकीकत हैं. फिर भी अक्सर कहा जाता है कि ऐसा तो होता है. जबकि लगातार दर्द, इतना अधिक ब्लीडिंग कि रूटीन प्रभावित हो जाए, अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना या पेल्विक दर्द बिल्कुल भी सामान्य नहीं है. चलिए आपको बताते हैं क्यों.

कई बार चुप्पी की वजह परवरिश और झिझक होती है. पीरियड्स या वैजाइनल हेल्थ पर खुलकर बात करने में शर्म महसूस कराई जाती है. कुछ महिलाओं को डर रहता है कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाएगा और दुर्भाग्य से कई बार ऐसा होता भी है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में महिला रोग एक्सपर्ट तक पहुंच सीमित है, जबकि शहरों में व्यस्त जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियां अपनी सेहत को पीछे धकेल देती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

अपोलो हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिला सी ने TOI को बताया कि कि महिलाओं का शरीर कई बदलावों से गुजरता है. भारत में अनुमान है कि 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं जीवन में कभी न कभी स्त्री रोग संबंधी समस्या का सामना करती हैं, लेकिन जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण कई मामले अनदेखे रह जाते हैं.

उनके अनुसार, सबसे पहले पीरियड्स को प्राथमिकता दें. नियमित और सहने योग्य पीरियड सामान्य हैं, लेकिन हर घंटे पैड बदलने की जरूरत, बड़े थक्के या सात दिन से ज्यादा ब्लड निकलने के संकेत हो सकते हैं कि जांच जरूरी है. स्वच्छता का ध्यान रखें, पर अत्यधिक केमिकल उत्पादों से बचें क्योंकि वजाइना स्वयं को साफ रखने की क्षमता रखती है.

लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना जरूरी

पोषण और वजन भी हार्मोन संतुलन से जुड़े हैं. आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर आहार जरूरी है. बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन पीसीओएस और बांझपन जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है. नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं. सक्रिय शारीरिक संबंध रखने वाली महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह अनुसार एचपीवी वैक्सीन पर विचार करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही अहम है, क्योंकि तनाव और नींद की कमी सीधे पीरियड्स को प्रभावित कर सकते हैं. अगर आप लाइफस्टाइल में चेंज करती हैं और हेल्थ की चीजों पर बारीकियों से ध्यान देते हैं, तो आप एक बड़ी बीमारी से बच सकती हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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