सोना क्यों बटोर रहा है चीन, अब खरीदा 3.4 लाख करोड़ का गोल्ड, क्या आने वाला है आर्थिक संकट?

सोना क्यों बटोर रहा है चीन, अब खरीदा 3.4 लाख करोड़ का गोल्ड, क्या आने वाला है आर्थिक संकट?


Gold Collection: इन दिनों वैश्विक स्तर पर हालात कैसे हैं, ये तो सभी जानते हैं. ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध के कारण सभी देशों की अर्थव्यवस्था इस समय डगमगाई हुई है. आने वाले दिनों के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता कि क्या होने वाला है. इसी बीच किसी भी अन्य देश की गतिविधियों पर भी लोगों की नजर है. जैसे हाल ही में चीन में सोना रिजर्व किया जा रहा है, लेकिन आखिर ऐसा क्यों? आइये जानते हैं.

गोल्ड रिजर्व कर रहा चीन
दरअसल चीन का केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) लगातार 19वें महीने अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है. मई 2026 में बैंक ने करीब 10 टन सोना खरीदा, जिससे चीन का कुल आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,331.5 टन हो गया है. साथ ही, चीन का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) भी बढ़कर 3.44 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है. जो अप्रैल के मुकाबले 31.7 अरब डॉलर ज्यादा है. ये नवंबर 2015 के बाद विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे ऊंचा स्तर है. पिछले 10 महीनों से चीन का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार 3.3 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर बना हुआ है.

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क्यों बढ़ रहा चीन का विदेशी मुद्रा भंडार?
चीन के विदेशी मुद्रा नियामक SAFE के मुताबिक, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल एसेट्स की बढ़ती कीमतों ने इसमें मदद की है. वहीं चीन के मजबूत निर्यात भी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने की बड़ी वजह हैं. जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान चीन का कुल विदेशी व्यापार लगभग 15% से बढ़कर 2.39 ट्रिलियन डॉलर हो गया.

हालांकि, दूसरी ओर चीन में सोने की मांग में ठंडक के संकेत दिखाई दे रहे हैं. पिछले एक महीने में 14 गोल्ड ETF से करीब 1.48 अरब डॉलर निकाला गया है. पहले निवेशकों के बीच गिरावट आने पर सोना खरीदने की रणनीति लोकप्रिय थी, लेकिन अब कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इस सोच पर मतभेद बढ़ रहे हैं.

शेयरों में आई तेज गिरावट
इतना ही नहीं हांगकांग में लिस्टेड कई चीनी गोल्ड कंपनियों के शेयरों में भी तेजी से गिरावट देखी गई है. वहीं, शंघाई गोल्ड एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक मई में सोने की निकासी घटकर 63.5 टन रह गई, जो फरवरी 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है और मार्च के मुकाबले लगभग आधी है.

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क्या बढ़ने वाला है आर्थिक संकट?
चीन के इस कदम को देखते हुए लगता है कि आने वाला समय थोड़ा और मुश्किल हो सकता है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण महंगाई तो बढ़ ही रही है, लेकिन चीन के इस कदम लगता है कि कोई आर्थिक संकट भी आने वाले समय में देखने को मिलेगा, जिसके लिए चीन की तरफ से तैयारी की जा रही है. हालांकि इसे लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है लेकिन हाातों को देखते हुए यही कयास लगाए जा रहे हैं.



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बाल कटवाना-शेविंग कराना भी हुआ महंगा, इस राज्य में सैलून सर्विस के बढ़ गए दाम

बाल कटवाना-शेविंग कराना भी हुआ महंगा, इस राज्य में सैलून सर्विस के बढ़ गए दाम


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  • महाराष्ट्र में सैलून सेवाओं की कीमतों में 20% बढ़ोतरी।
  • शनिवार से बढ़े दाम प्रभावी, आम लोगों को झटका।
  • कच्चे माल की बढ़ती लागत ही दामों की वजह।
  • अब बाल कटवाना ₹180, शेविंग ₹120 होगी।

Maharasthra News: इस बढ़ती महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. अगर आप भी महीने में दो से तीन बार सैलून जाकर बाल कटवाते हैं तो अब आपको महंगाई का एक झटका लगने वाला है. महाराष्ट्र में आम लोगों को अब सैलून सेवाओं के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे. राज्य में नाई संगठन ने बाल कटवाने, शेविंग और अन्य सेवाओं के दामों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी. यह बढ़ोतरी शनिवार से लागू हो जाएगी और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है.

बढ़ोतरी के पीछे की वजह क्या है?

संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता, खासकर मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते यह फैसला लिया गया. अगर नई दरें कुछ इस प्रकार हैं. 

  • बाल कटवाने का चार्ज 180 रुपये
  • शेविंग 120 रुपये
  • दाढ़ी ट्रिमिंग 150 रुपये
  • हेड मसाज 180 रुपये
  • बाल धोने का 120 रुपये
  • फेसियल कम से कम 700 रुपये
  • हेयर स्पा 600 रुपये हो गया

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संगठन का दावा- हर दो साल में होती है समीक्षा

बता दें कि महाराष्ट्र नाभिक महामंडल के पदाधिकारी श्याम अस्करकर ने बताया कि आमतौर पर दरें हर दो साल में संशोधित होती हैं, लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं रहे, इसलिए बीच में ही दाम बढ़ने पड़े. संगठन का कहना है कि तेल, क्रीम, ब्लेड और बाकी के जरूरी सामान की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अब इसका सीधा असर छोटे बिजनेस करने वालों पर पड़ रहा है.

महाराष्ट्र में लगभग एक लाख से ज्यादा नाई की दुकानें हैं. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पारंपरिक सैलून पर लागू है. हालांकि, लग्जरी सैलून इसमें शामिल नहीं हैं. अब इस बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर पड़ेगा. 

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हार्ट और पेट में क्यों भर जाता है पानी? रोजाना की इन गलतियों से हो सकता है गंभीर नुकसान

हार्ट और पेट में क्यों भर जाता है पानी? रोजाना की इन गलतियों से हो सकता है गंभीर नुकसान


Why Does Fluid Build Up Around The Heart And Abdomen: शरीर में पानी की कमी होना जितना खतरनाक है, उतना ही खतरनाक शरीर के कुछ हिस्सों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होना भी हो सकता है. कई बार लोगों को लगता है कि पेट का अचानक फूलना या सांस फूलना सामान्य समस्या है, लेकिन यह शरीर में फ्लूइड जमा होने का संकेत भी हो सकता है. डॉक्टरों के अनुसार पेट और दिल के आसपास पानी भरना कई गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

किन लोगों को होती है पेट में पानी भरने की दिक्कत?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Cleveland Clinic के अनुसार पेट में पानी भरने की स्थिति को एसाइटिस कहा जाता है. यह समस्या सबसे ज्यादा लिवर सिरोसिस के मरीजों में देखी जाती है. जब लिवर खराब होने लगता है, तो शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है. धीरे-धीरे पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे पेट असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देने लगता है. इसके अलावा तेजी से वजन बढ़ना, टखनों में सूजन, सांस लेने में दिक्कत, पेट दर्द और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

क्या होते हैं इसके कारण?

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ रोजमर्रा की आदतें इस खतरे को बढ़ा सकती हैं. लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों का समय पर इलाज न कराना तथा लिवर की सेहत को लगातार नजरअंदाज करना सिरोसिस और आगे चलकर पेट में पानी भरने की वजह बन सकता है. रिसर्च में भी पाया गया है कि लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां एसाइटिस के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं. 

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हार्ट में पानी भरना कितना खतरनाक?

वहीं हार्ट के आसपास पानी भरने की स्थिति को पेरिकार्डियल इफ्यूजन कहा जाता है. यह तब होता है जब दिल को घेरे रहने वाली थैली में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा हो जाता है. शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समस्या बढ़ने पर सीने में दर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है. Cleveland Clinic के अनुसार इंफेक्शन का इलाज टालना, गंभीर बीमारियों को नजरअंदाज करना और हार्ट, किडनी या लिवर से जुड़ी समस्याओं का समय पर उपचार न कराना पेरिकार्डियल इफ्यूजन का जोखिम बढ़ा सकता है. कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है क्योंकि अतिरिक्त पानी दिल पर दबाव डालने लगता है.

किन चीजों को न करें इग्नोर?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर पेट तेजी से बढ़ रहा हो, अचानक वजन बढ़ रहा हो, सांस लेने में परेशानी हो रही हो या सीने में लगातार दर्द महसूस हो रहा हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय रहते पहचान और इलाज से इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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BHEL bags over Rs 90-cr LNTP from DVC for 800 MW Durgapur project

BHEL bags over Rs 90-cr LNTP from DVC for 800 MW Durgapur project


Bharat Heavy Electricals (BHEL) has received a Limited Notice to Proceed (LNTP) worth over Rs 90 crore (excluding GST) from Damodar Valley Corporation (DVC) for the 1×800 MW Durgapur Supercritical Thermal Power Station project.

The company has emerged as the successful bidder for the main plant package comprising the boiler, turbine and generator (BTG). The LNTP enables BHEL to initiate advance engineering activities and place orders for critical long-lead items for the project.

Bharat Heavy Electricals (BHEL) is an integrated power plant equipment manufacturer, engaged in the design, engineering, manufacturing, erection, testing, commissioning, and servicing of a diverse range of products and systems. The company caters to key sectors of the Indian economy, including power, transmission, industry, transportation, renewable energy, oil & gas, and defence.

 

On a consolidated basis, the company posted a net profit of Rs 1,290.47 crore in Q4 FY26, up 155.82% YoY and 230.50% QoQ. Revenue from operations rose 36.87% YoY to Rs 12,310.37 crore in Q4 FY26 while growing 45.29% QoQ, driven by strong performance in both power and industry segments.

Shares of Bharat Heavy Electricals fell 1.70% to close at Rs 370.60 on the BSE.

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India’s ethanol push needs uniform policies, consumer trust for success

India’s ethanol push needs uniform policies, consumer trust for success


Higher ethanol blends in petrol aim to cut oil imports as India expands its biofuel roadmap.

To ensure the Ethanol Blending Programme succeeds, the government must standardise state-level taxes and educate consumers to resolve lingering doubts about the fuel.

To accelerate its Ethanol Blending Programme (EBP) by granting complete excise duty exemptions on higher ethanol-blended petrol variants — specifically targeting E22, E25, E27, and E30 blends – the Centre is establishing a financial and technical framework designed to curb India’s reliance on expensive crude oil imports. However, this may not be enough.

State tax alignment crucial for consumer benefits

Bharati Balaji, Deputy Director General of the All India Distillers’ Association (AIDA), told businessline that excise exemptions provide a vital commercial route for surplus ethanol capacity, which currently exceeds E-20 programme requirements. AIDA is urging state governments to align tax structures to ensure benefits reach consumers, while actively collaborating with the Ministries of Petroleum & Natural Gas, Road Transport, and Food to address concerns regarding reduced fuel efficiency, she said.

“Consumer awareness is a vital pillar for the long-term success of India’s ethanol blending program. Historically, introducing new products to the Indian market triggers immediate resistance, as seen when chemical manufacturers protested molasses procurement during the program’s initial rollout. These challenges are simply standard, temporary hurdles,” she said.

Addressing mileage concerns around higher ethanol blends

Balaji emphasised that consumer awareness is vital, noting that while ethanol’s lower energy content might slightly reduce fuel mileage, the issue must be viewed through a broader lens. She urged a focus on overall vehicle technology, efficiency, carbon emissions, running costs, energy security, and environmental benefits.

“The minor mileage drop we are talking about applies to vehicles built before 2023,” she said, adding that “It is important to note that modern vehicles are designed and calibrated for E20. In fact, they are engineered to optimize performance, emissions, and fuel efficiency under higher ethanol blends.”

Ethanol capacity and demand landscape

On feedstock, Balaji explained that AIDA members—comprising top grain, molasses, and integrated distilleries—control about 80 per cent of India’s ethanol production. She highlighted that fuel ethanol is a substantial, fast-growing part of the distillery ecosystem, driven by market demand and government policy.

Explaining the capacity metrics, Balaji noted that India’s current installed ethanol capacity stands close to 2,000 crore litres. With the Ethanol Blending Programme (EBP) requiring 1,100 crore litres and alternative sectors—including potable alcohol, pharmaceuticals, and chemicals—consuming 334 crore litres, total demand reaches 1,434 crore litres. This leaves the industry sitting on a notable surplus capacity of approximately 566 crore litres.

Published on June 11, 2026



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