Nucleus Software soars after joining hands with Indonesia's Azentra Solusi Digital

Nucleus Software soars after joining hands with Indonesia's Azentra Solusi Digital


Nulcues Software Exports surged 11.17% to Rs 778.50 after the company announced a strategic partnership with Azentra Solusi Digital to further strengthen digital transformation capabilities for banks and financial institutions across the Indonesia.

Established in 2017, Azentra is an IT solutions and services provider focused on Indonesia’s banking and financial services sector.

The partnership marks the next phase of Nucleus Software’s growth strategy in Indonesia, a market where the company has been serving banks and financial institutions for nearly two decades. The collaboration will combine Nucleus Software’s globally proven lending and transaction banking platforms with Azentra’s local market expertise, consulting capabilities, and implementation strengths.

 

The collaboration will focus on enabling financial institutions to modernize end-to-end lending operations, strengthen transaction banking and cash management capabilities, improve operational efficiency, enhance customer and corporate banking experiences, and build scalable and future-ready banking ecosystems.

Apurva Chamaria, chief business officer, Nucleus Software, said, Indonesia has been an important market for Nucleus Software for nearly two decades and remains one of the most promising banking markets in Southeast Asia. As financial institutions accelerate modernization initiatives across lending and transaction banking, success increasingly depends on combining global technology capabilities with strong local execution.

Our partnership with Azentra reflects our long-term commitment to Indonesia and our belief that transformation is most effective when world-class platforms are complemented by deep local expertise. Together, we aim to help financial institutions build more agile, customer-centric, and future-ready banking operations.”

Nucleus Software Exports is a fintech company that provides lending and transaction banking solutions to banks worldwide. It serves over 200 financial institutions across 50 countries, processing more than $15 trillion in annual transactions. Its key offerings include the FinnOne Neo lending platform, the FinnAxia transaction banking suite, and digital services that support banks transformation initiatives.

The companys consolidated net profit tumbled 46.66% to Rs 34.55 crore on 1.83% decline in revenue from operations to Rs 224.77 crore in Q4 FY26 over Q4 FY25.

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दिल्ली में मोटापे के मामले घटे, लेकिन इन बीमारियों में इजाफा, NFHS-6 में खुलासा

दिल्ली में मोटापे के मामले घटे, लेकिन इन बीमारियों में इजाफा, NFHS-6 में खुलासा


Delhi Obesity Cases Decline In NFHS-6: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट दिल्ली की हेल्थ स्थिति को लेकर चिंताजनक पेश किया है. रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में मोटापे के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके साथ ही डायबिटीज, कुपोषण और बच्चों के पोषण से जुड़े कई मामले में स्थिति खराब नजर आई है. चलिए आपको बताते हैं कि रिपोर्ट में क्या बताया गया है और देश की राजधानी में किस बीमारी का खतरा अब बढ़ रहा है. 

दिल्ली में कम हुआ मोटापा

सर्वे के अनुसार  दिल्ली के पुरुषों में मोटापा कम हुआ है. देश की राजधानी में में पुरुषों का मोटापा दर पिछले NFHS-5 के 38.0 प्रतिशक से घटकर अब NFHS-6 में 34.8 प्रतिशत रह गया है. अगर महिलाओं की बात करें तो,  5 राज्यों में जिनमें महिलाओं में मोटापे के मामले कम देखे गए हैं उनमें दिल्ली का नाम शामिल है.पहली नजर में यह पॉजिटिव बदलाव लगता है, लेकिन हेल्थ का कहना है कि तस्वीर का दूसरा पक्ष ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है. रिपोर्ट बताती है कि डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. महिलाओं में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत और पुरुषों में 14 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गया है. यह स्थिति काफी चिंता करने वाली है. 

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कुपोषण के मामले भी बढ़े

राजधानी में कुपोषण के मामले भी बढ़े हैं. महिलाओं में कुपोषण की दर 10 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई, जबकि पुरुषों में यह 9 प्रतिशत से बढ़कर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा कम होने का मतलब हमेशा बेहतर स्वास्थ्य नहीं होता. कई बार खराब खानपान, पोषण की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी वजन में गिरावट देखने को मिल सकती है. 

बच्चों के पोषण को लेकर भी चिंता

रिपोर्ट में बच्चों के पोषण को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है. जन्म के एक घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू कराने वाली माताओं की संख्या 51.2 प्रतिशत से घटकर 45.1 प्रतिशत रह गई है. वहीं छह महीने तक केवल मां का दूध पीने वाले शिशुओं का प्रतिशत 64.3 से घटकर 48.3 रह गया. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन पहले छह महीने तक केवल स्तनपान की सिफारिश करता है, क्योंकि इससे बच्चों को आवश्यक पोषण और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.  बच्चों के पूरक आहार से जुड़े आंकड़े भी निराशाजनक हैं. छह से आठ महीने की उम्र के बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग  के साथ पूरक भोजन देने की दर 62.9 प्रतिशत से घटकर 52.5 प्रतिशत हो गई. वहीं 6 से 23 महीने के केवल 11.2 प्रतिशत बच्चों को ही न्यूनतम पर्याप्त आहार मिल रहा है, जो पहले 16 प्रतिशत था.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Board of Sula Vineyards approves change in registered office


At meeting held on 10 June 2026

The board of Sula Vineyards at its meeting held on 10 June 2026 has approved sale of existing registered office premises of the company for a consideration of not less than Rs 27 crore. Consequently, the board has approved shifting to new registered office located at from 901, Solaris One, Prof. N. S. Phadke Marg, Andheri East, Mumbai – 400069 to 201, Solaris One, Prof. N. S. Phadke Marg, Andheri East, Mumbai – 400069 with effect from 1 July 2026  

Disclaimer: No Business Standard Journalist was involved in creation of this content

First Published: Jun 10 2026 | 2:04 PM IST



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राजेश एक्सपोर्ट्स का महाघोटाला: दांव पर LIC के 300 करोड़! शेयर में लगा लगातार 5वां लोअर सर्किट

राजेश एक्सपोर्ट्स का महाघोटाला: दांव पर LIC के 300 करोड़! शेयर में लगा लगातार 5वां लोअर सर्किट


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Key points generated by AI, verified by newsroom

  • राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर लगातार 5वें दिन 5% गिरे.
  • सेबी ने राजस्व बढ़ाकर दिखाने, फंड डायवर्जन का आरोप लगाया.
  • प्रमोटर पर ट्रेडिंग प्रतिबंध, कंपनी PLI योजना से बाहर.

Rajesh Exports Share: सोना और ज्वेलरी के कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों का आज भी बुरा हाल है. आज 10 जून, बुधवार को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में आज लगातार 5वें सेशन में 5% का लोअर सर्किट लगा है.

बिकवाली के भारी दबाव के बीच शेयरों की कीमत अब टूटकर 84.66  रुपये के स्तर पर आ गई है. मार्केट रेगुलेटर सेबी के लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर लगातार नीचे गिरते जा रहे हैं. इसके चलते निवेशकों के अरबों रुपये डूब चुके हैं. 

लगातार गिरते जा रहे शेयर

पिछले एक हफ्ते में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में लगभग 22.6% की गिरावट आ चुकी है. एक महीने में यह 30% से ज्यादा, 6 महीने में 55% और बीते एक साल में लगभग 58% तक गिर चुका है.

शेयरों में गिरावट का यह सिलसिला तब और भी तेज हो गया, जब केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय की तरफ से कंपनी को एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज के लिए चल रही PLI स्कीम से बाहर निकाल दिए जाने की खबरें सामने आने लगीं. चूंकि ACC बैटरी का कारोबार कंपनी के महत्वपूर्ण भविष्य परियोजनाओं में शामिल है इसलिए अगर कंपनी को योजना के लिए अयोग्य माने जाने पर फैसला ले लिया जाता है, तो यह इसके लिए किसी झटके से कम नहीं होगा.

कहां से बिगड़ने लगी बात?

दरअसल, हाल-फिलहाल में सेबी ने अपने 109- पन्नों के अंतरिम आदेश में आरोप लगाया है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 और 2024-25 के बीच अपने रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर 15.15 लाख करोड़ रुपया दिखाया, जो वास्तव में कंपनी की सहायक इकाइयों के कुल राजस्व का लगभग 99.8% हिस्सा था. सेबी ने कंपनी पर फंड डायवर्जन सहित संबंधित पक्षों के बीच संदिग्ध लेनदेन का आरोप लगाया. इसके बाद सेबी ने कंपनी के प्रोमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता के शेयर बाजार पर ट्रेडिंग करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी और कंपनी के खातों का फॉरेन्सिक ऑडिट कराने का निर्देश दिया. 

एलआईसी के कितने करोड़ फंसे? 

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी कंपनी के शेयरों में लगातार तीन सालों से कम होती जा रही है, जो मार्च 2023 में 17.6% के मुकाबले मार्च 2026 तक घटकर लगभग 14.26% रह गई है. चूंकि राजेश एक्सपोर्ट का मार्केट कैप 3090 करोड़ रुपये है और कंपनी में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी 10.80% है. इस हिसाब से कंपनी में भारतीय जीवन बीमा निगम का 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश फंसा है. 

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‘125 किलो’ का रग्बी प्लेयर कौन है जिससे बेन स्टोक्स की नाइटक्लब में हुई मारपीट, जानिए

‘125 किलो’ का रग्बी प्लेयर कौन है जिससे बेन स्टोक्स की नाइटक्लब में हुई मारपीट, जानिए


लॉर्ड्स टेस्ट में न्यूजीलैंड पर इंग्लैंड की जीत के बाद बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन का जश्न उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामे में बदल गया जब कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज एटकिंसन, चेल्सी के एक वीआईपी नाइटक्लब में ‘सारेसेंस’ क्लब के एक खूंखार रग्बी खिलाड़ी से भिड़ गए.

रिपोर्ट्स के अनुसार, 125 किलो वजनी और 6 फीट 5 इंच लंबे रग्बी प्लेयर ने गस एटकिंसन पर जानलेवा मुक्का चलाया था. इस पूरे विवाद के बाद इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने अपनी जांच शुरू कर दी है. इंग्लैंड के दोनों सीनियर क्रिकेटरों पर दूसरे टेस्ट से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है.

आखिर कौन था टोटोआ औवा?

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे बवाल मामले के अंदर में जो रग्बी खिलाड़ी है, उसका नाम टोटोआ औवा है. टोटोआ औवा की उम्र 21 साल है. यह खिलाड़ी औवा एक ‘सारेसेंस’ रग्बी क्लब नामक एकेडमी सिस्टम का हिस्सा है.

टोटोआ कोई साधारण खिलाड़ी नहीं है, उसका कद 6 फीट 5 इंच है और वजन करीब 125 किलोग्राम है. टोटोआ औवा समोआ की अंडर-20 और समोआ ‘ए’ टीम का कप्तान भी रह चुका है. उसे रग्बी का उभरता हुआ सितारा माना जाता है.

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नाइटक्लब में कैसे हुई थी लड़ाई?

रविवार को लॉर्ड्स में न्यूजीलैंड़ के खिलाफ हुए टेस्ट मैच में, जीतने के बाद स्टोक्स और एटकिंसन चेल्सी के ‘रेक्स रूम्स’ नाइटक्लब के वीआईपी एरिया में जश्न मना रहे थे. ठीक उसी समय सारेसेंस रग्बी क्लब के खिलाड़ी भी अपनी एंड-ऑफ-सीजन पार्टी मनाने वहां पहुंचे थे.

तड़के सुबह दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर बहसबाज़ी शुरू हो गई. बहस इतनी हद-तक बढ़ गई कि रग्बी प्लेयर टोटोआ औवा ने अपना आपा खो दिया. टोटोआ औवा ने क्रिकेटर गस एटकिंसन के चेहरे पर एक जोरदार मुक्का जड़ने का प्रहास किया.

किस्मत से गस एटकिंसन तो बच गए. लेकिन टोटोआ के द्वारा चलाया गया मुक्का, वहां पर मौजूद क्रिकेटरों के सिक्योरिटी स्टाफ के सदस्य को लग गया. मुक्का इतना जोरदार था कि सिक्योरिटी गार्ड को टांके लगावाने पड़ गए. हालांकि,अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है की. बेन स्टोक्स या गस एटकिंसन ने इस हमले के जवाब में पलटवार किया था या नहीं.

नियम का उलंघन करने पर ECB हुई सक्त

यह लड़ाई का मामला सिर्फ मार-पीट तक ही सीमीत नहीं है. बल्कि कर्फ्यू का नियम तोड़ने की भी है. इंग्लैंड टीम के लिए इसी साल जनवरी में एशेज दौरे के बाद खिलाड़ियों के ऊपर ‘आधी रात का कर्फ्यू’ नियम दोबारा लागू किया गया था.

बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन ने इस नियम का उल्लंघन किया है और देर रात तक क्लब में रहे है. ईसीबी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बयान दिया कि स्टोक्स और एटकिंसन सोमवार तड़के एक नाइटक्लब में मौजूद थे. जब यह घटना घटित हुई. हम अभी पूरी जानकारी जुटा रहे हैं और दूसरे टेस्ट की टीम को लेकर जल्द ही घोषणा कर देंगे.’

इस घटना के सामने आने के बाद, यह साफ माना जा रहा है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ 17 जून से शुरू होने वाले. दूसरे टेस्ट में बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन पर ECB बोर्ड अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है. जिससे उनका खेलना संदिग्ध हो सकता है.

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