Marsons bags Rs 33-cr supply order from Vikran Engineering

Marsons bags Rs 33-cr supply order from Vikran Engineering


Marsons announced that it has received an order worth Rs 33.19 crore from Vikran Engineering for the supply of inverter-duty transformers for an NTPC Renewable Energy project.

The order comprises various quantities of 17.6 MVA, 8.8 MVA and 4.4 MVA oil-cooled (ONAN), OCTC, outdoor-type, aluminum-wound inverter-duty transformers. The domestic order is scheduled to be executed within six months.

Marsons clarified that neither the promoter/promoter group nor group companies have any interest in the awarding entity, and the contract does not fall under related-party transactions.

Marsons is engaged in the business of manufacturing, trading & servicing transformers, transformer goods & other rental income. The companys consolidated net profit surged 151.6% to Rs 22.62 crore on a 66% increase in net sales to Rs 92.65 crore in Q4 FY26 over Q4 FY25.

 

Shares of Marsons shed 0.61% to Rs 123 on the BSE.

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First Published: Jun 10 2026 | 12:04 PM IST



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Yes Bank hikes FX deposit rates to attract non-resident inflows

Yes Bank hikes FX deposit rates to attract non-resident inflows


Yes Bank Ltd. has raised interest rates on foreign currency non-resident deposits by as much as 335 basis points, becoming one of the first Indian lenders to offer the program aimed at attracting capital flows and shore up the battered rupee.

The private-sector lender will offer 7 per cent on three-year FCNR(B) deposits, 7.05 per cent on four-year deposits and 7.10 per cent on five-year deposits, a spokesperson for the bank said. Previously, the bank offered rates of as high as 4 per cent on similar deposits.

The revised rates mark a sharp increase from previous levels and come days after the central bank announced regulatory relaxations to encourage banks to mobilize more foreign currency deposits between June and September.

It also introduced a dollar-rupee swap facility for banks raising such deposits, reducing the cost of attracting overseas funds.

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Published on June 10, 2026



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IND vs AFG: हार्दिक पांड्या अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर, जानिए वजह

IND vs AFG: हार्दिक पांड्या अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर, जानिए वजह


टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं. यह खबर हार्दिक के फिटनेस टेस्ट के पास होने के एक दिन बाद आई है. सूत्रों के मुताबिक हार्दिक के बाहर हो जाने की वजह उनके पैरों में लगी मोच हैं, जिसके कारण उन्हें वनडे सीरीज से बाहर होना पड़ा है. पैरों की मोच के चलते हार्दिक को अगले 2 हफ्ते और बेंगलुरु में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ही बिताने पड़ सकते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली वनडे सीरीज 13 जून से शुरू हो रही है. पहला वनडे धर्मशाला में खेला जाना है, जिसके लिए हार्दिक पंड्या को 11 जून को टीम इंडिया को जॉइन करना था लेकिन उनके पैरों में आई मोच ने टीम इंडिया से जुड़ने के उनके इंतजार को अब और बढ़ा दिया है.

खबरों से यह पता चला है कि हार्दिक पंड्या को लो ग्रेड इंजरी है. उनके पैरों के बीच में मोच है. हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि ये इंजरी लंबी नहीं खिचेगी. इंजरी और ना बढ़ जाए इसलिए मेडिकल स्टाफ ने उन्हें अगले कुछ दिन और आराम की सलाह दी गई है.

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गौर करने वाली बात यह है कि अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज से हार्दिक पंड्या 14 महीने बाद वनडे क्रिकेट में वापसी करने वाले थे. मगर अब उन्हें और इंतजार करना होगा. पंड्या के वनडे टीम से बाहर होने के बाद ये भी देखना दिलचस्प होगा कि बीसीसीआई उनके रिप्लेसमेंट की घोषणा करती है या नहीं.

कुल मिलाकर, भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली यह वनडे सीरीज दोनों टीमों के लिए काफी अहम साबित हो सकती है. जहां भारतीय टीम 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों को मजबूत करने और नए खिलाड़ियों को परखने की कोशिश करेगी, वहीं अफगानिस्तान की नजर मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खुद को साबित करने पर होगी. ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी सीरीज देखने को मिल सकती है.

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नाइट क्लब विवाद से पहले बेन स्टोक्स ने पी थी कितनी महंगी शराब, दाम जानकर उड़ जाएंगे होश

नाइट क्लब विवाद से पहले बेन स्टोक्स ने पी थी कितनी महंगी शराब, दाम जानकर उड़ जाएंगे होश


इंग्लैंड टीम के टेस्ट कप्तान, बेन स्टोक्स का नाइटक्लब मारपीट मामला गंभीर होता जा रहा है. इस पूरी घटना को देखते हुए इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने अपनी जांच शुरू कर दी है. बैन स्टोक्स की कप्तानी पर भी सवाल उठ रहे हैं. बैन स्टेक्स का नाइटक्लब का मामला, रविवार को खत्म हुए न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के बाद का है.

मैच जीतने की खुशी में टेस्ट टीम के कप्तान बेन स्टोक्स, अपने साथी गस एटकिंसन के साथ शाम को पब में शराब पीने गए. इस मामले के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहा है. जिसमें नाइटक्लब के बाहर बेन स्टोक्स और कथित रग्बी प्लेयर के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही थी.

इसी बीच पब क्लब के एक स्टाफ ने सामने आकर पूरा सच बताया कि विवाद कैसे शुरू हुआ था. इंग्लैंड की मीडिया आउटलेट ‘डेली मेल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक बेन स्टोक्स और उनके साथी गस एटकिंसन ने रविवार को अपनी शाम दक्षिण-पश्चिम लंदन के व्हाइट हॉर्स पब में बिताई थी.

ये दोनों न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली जीत का जश्न मना रहे थे. यहां कुछ समय बिताने के बाद, दोनों चेल्सी के एक नाइट क्लब रेक्स रूम्स गए. इस कल्ब को चेल्सी का सबसे बदनाम नाइट क्लब भी कहा जाता है.

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पब के कर्मचारियों ने किया बड़ा खुलासा 

पब के कर्मचारियों ने बताया कि बेन स्टोक्स पहले से ही थोडे़ नशे में लग रहे थे. उन्होंने बताया कि स्टोक्स करीब रात 9 बजें क्लब में आए थे. चेल्सी के क्लब में पहुंचने के बाद बेन स्टोक्स ने महंगे ऑर्डर किए. जिसमें स्टोक्स ने एक साथ कई सारी डबल रम और कोक मंगाई, जिनकी कीमत कुल 25 पाउंड थी.लगभग 2700 रुपए प्रति ड्रिंक.

ऑर्डर करने के बाद स्टोक्स को बेन अर्ल और जेमी जॉर्ज सहित कई रग्बी खिलाड़ियों के साथ बातचीत करते हुए देखा गया था. स्टाफ ने बताया कि जॉर्ज के साथ स्टोक्स की बातचीत काफी दोस्ताना प्रतीत हो रही थी. लेकिन किसी बात पर उनकी टोटोआ औवुआ से बहस शुरू हो गई. जिससे मामला मारपीट तक पहुंच गया.

रिपोर्ट्स ने भी बड़ा सच बताया

रिपोर्ट्स के अनुसार क्लब के वीआईपी एरिया में टेबल को लेकर बहस शुरू हुई थी. सार्केन्स के रग्बी खिलाड़ी टोटोआ औवुआ ने कथित तौर पर एटकिंसन को निशाना बनाया. टोटोआ औवुआ ने एक मुक्का मारा, जो एटकिंसन के बजाय इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के एक सुरक्षा गार्ड को लगा. इसके बाद बेन स्टोक्स अपना आपा खो बैठे.

टोटोआ औवुआ की हरकत से बेन स्टोक्स और एटकिंसन का गुस्सा फूट पड़ा और हाथापाई शुरू हो गई. हालांकि, बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन को कोई चोट नहीं आई. ऐसा नहीं माना जा रहा है कि पूरा विवाद बेन स्टोक्स के द्वारा शुरू किया गया था लेकिन जो सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आया है. उसमें ये लग रहा है कि बेन स्टोक्स ने एक व्यक्ति को मुक्का मारकर नीचे गिरा दिया था.

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मोटापा कम करने का नया कमाल, 52 नहीं अब सिर्फ 12 इंजेक्शन में चलेगा काम, जानें कैसे?

मोटापा कम करने का नया कमाल, 52 नहीं अब सिर्फ 12 इंजेक्शन में चलेगा काम, जानें कैसे?


Pfizer’s Berobenatide Weight Loss Drug: मोटापे और डायबिटीज के इलाज में एक बड़ा बदलाव आने की संभावना दिखाई दे रही है. दवा कंपनी फाइजर ने अपनी नई प्रायोगिक दवा बेरोबेनेटाइड के मिड-स्टेज ट्रायल के नतीजे जारी किए हैं.  खास बात यह है कि यदि यह दवा भविष्य में मंजूरी हासिल कर लेती है, तो यह दुनिया की पहली ऐसी जीएलपी-1 आधारित वेट लॉस थेरेपी हो सकती है जिसे हर हफ्ते नहीं, बल्कि महीने में सिर्फ एक बार इंजेक्शन के रूप में लेना होगा. 

इस तरह कैसे दी जाती है दवा?

मौजूदा समय में वेगोवी और जेडबाउंड जैसी लोकप्रिय वेट लॉस दवाएं साप्ताहिक इंजेक्शन के रूप में दी जाती हैं. इसके विपरीत ब्राबांटिया का उद्देश्य मरीजों के लिए इलाज को अधिक सुविधाजनक बनाना है. शुरुआती चरण में मरीजों को साप्ताहिक डोज दी जाएगी, जिसके बाद उन्हें महीने में केवल एक इंजेक्शन लेना होगा. इसका मतलब है कि सालभर में 52 इंजेक्शन की जगह केवल 12 इंजेक्शन की जरूरत पड़ेगी. 

वेस्पर-3 नामक क्लिनिकल ट्रायल में डायबिटीज से पीड़ित न होने वाले प्रतिभागियों का वजन 12.3 प्रतिशत तक कम हुआ.  दिलचस्प बात यह रही कि जो मरीज बाद में मासिक डोज पर गए, उनका वजन कम होना जारी रहा और वजन घटने की प्रक्रिया किसी ठहराव पर नहीं पहुंची. 

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क्या इनके असर दिखते हैं?

हालांकि वेगोवी और जेडबाउंड जैसी दवाओं ने बड़े और लंबे स्टडी में लगभग 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से अधिक वजन घटाने के परिणाम दिखाए हैं,  लेकिनफोर्टिस सीडीओसी हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड एलाइड साइंसेज के चेयरमैन और एम्स दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अनूप मिश्रा का कहना है कि अलग-अलग ट्रायल्स के परिणामों की सीधी तुलना नहीं की जानी चाहिए.

क्या है इसकी खासियत?

डॉ. अनूप मिश्रा के अनुसार बेरोबेनेटाइड की सबसे बड़ी खासियत वजन घटाने का प्रतिशत नहीं, बल्कि इसकी मासिक डोजिंग है. उनका मानना है कि भारत जैसे देश में लंबे समय तक इलाज जारी रखना बड़ी चुनौती होता है. ऐसे में महीने में केवल एक बार इंजेक्शन लेने की सुविधा मरीजों की उपचार के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ा सकती है और इलाज छोड़ने की संभावना कम कर सकती है. एक्सपर्ट के मुताबिक अब इस दवा के फेज-3 ट्रायल्स पर नजर रहेगी. इसमें लंबे समय तक वजन कम रहने की क्षमता, सुरक्षा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड इफेक्ट्स, हार्ट और किडनी पर प्रभाव जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा. यह भी देखा जाएगा कि शरीर में पूरे महीने तक सक्रिय रहने वाली यह दवा किसी नए जोखिम को तो जन्म नहीं देती.

कब तक मार्केट में आ सकती है?

डॉ. मिश्रा का मानना है कि भविष्य में मोटापे के इलाज का फोकस केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं रहेगा. हार्ट रोग, किडनी स्वास्थ्य, ब्लड शुगर कंट्रोल, दवा की कीमत और मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति जैसे कारक भी इलाज तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. उनके अनुसार आने वाले वर्षों में लंबे समय तक असर करने वाली दवाएं, कॉम्बिनेशन थेरेपी और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट मोटापे के इलाज की दिशा तय करेंगे. यदि यह अपने अंतिम ट्रायल्स में सफल रहती है, तो इसके 2028 के अंत या 2029 के मध्य तक मरीजों के लिए उपलब्ध होने की संभावना है. एक्सपर्ट मानते हैं कि यह दवा मोटापे को एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी के रूप में प्रबंधित करने के तरीके को बदल सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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