INR settles flat amid tepid moves against dollar

INR settles flat amid tepid moves against dollar


The Indian rupee ended the day almost flat on Wednesday amid tepid moves against the dollar. Rupee stayed range-bound for the second consecutive day and settled 1 paisa lower at 90.96 (provisional) against the US dollar amid higher global crude oil prices and foreign fund outflows. A weaker greenback and positive sentiments in domestic equity markets prevented the rupee’s losses. The benchmark ended the session up 50.15 points, or 0.06 percent, at 82,276.07, after having surged to a high of 82,957.91 earlier on the back of firm cues from global markets as new U.S. tariffs came into effect at 10 percent under a different legal framework. The broader NSE Nifty index hit an intraday high of 25,652.60 before closing up 57.85 points. At the interbank foreign exchange, the rupee opened at 90.94 against the greenback and traded in a narrow range through the session before settling at 90.96 (provisional), down 1 paisa from its previous close.

 

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First Published: Feb 25 2026 | 5:50 PM IST



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टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में हैट्रिक लेने वाले गेंदबाजों की लिस्ट, किसी भारतीय का नाम नहीं

टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में हैट्रिक लेने वाले गेंदबाजों की लिस्ट, किसी भारतीय का नाम नहीं


टी20 वर्ल्ड कप 2026 की पहली हैट्रिक वेस्टइंडीज के रोमारियो शेफर्ड ने स्कॉटलैंड के खिलाफ ईडन गार्ड्न्स में ली. वहीं पिछले यानी 2024 के टी20 विश्व कप में तीन हैट्रिक देखने को मिली थीं, लेकिन उसमें भी किसी भी भारतीय का नाम शामिल नहीं था. तो आइए जानते हैं कि 2007 से लेकर अब तक के टी20 वर्ल्ड कप में किन-किन गेंदबाजों ने हैट्रिक लेने का कमाल किया है. 

तो आपको बता दें कि अब तक टी20 विश्व कप में कुल 10 हैट्रिक ली जा चुकी हैं. 2007 में पहली हैट्रिक ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने बांग्लादेश के खिलाफ केपटाउन में ली थी. इसके बाद दूसरी हैट्रिक देखने के लिए फैंस को 14 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा. टूर्नामेंट की दूसरी हैट्रिक 2021 में आई. 10 में 9 हैट्रिक 2021 से 2026 के बीच हुईं, जबकि एक हैट्रिक 2007 से 2021 के बीच आई. 

लिस्ट में कोई भारतीय गेंदबाज नहीं

टी20 वर्ल्ड कप में हैट्रिक लेने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में किसी भी भारतीय गेंदबाज का नाम शामिल नहीं है. एक बार ऐसा हुआ है कि जब गेंदबाज ने 4 गेंदों पर 4 विकेट चटकाए हैं. यह कमाल कर्टिस कैंपर ने 2021 में किया था. वहीं लिस्ट में पैट कमिंस इकलौते गेंदबाज हैं, जिनका नाम 2 बार मौजूद है. तो आइए जानते हैं कि अब तक हैट्रिक ले चुके 10 गेंदबाज कौन-कौन हैं. 

टी20 वर्ल्ड कप में अब तक की हैट्रिक

खिलाड़ी मैच वेन्यू साल शिकार खिलाड़ी
रोमारियो शेफर्ड वेस्टइंडीज बनाम स्कॉटलैंड ईडन गार्डन्स 2026 मैथ्यू क्रॉस, माइकल लीस्क, ओलिवर डेविडसन
क्रिस जॉर्डन इंग्लैंड बनाम यूएसए ब्रिजटाउन 2024 अली खान, नोस्थुश केंजीगे, सौरभ नेत्रवलकर
पैट कमिंस ऑस्ट्रेलिया बनाम अफगानिस्तान किंग्सटाउन 2024 राशिद खान, करीम जनत, गुलबदीन नायब
पैट कमिंस ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश नॉर्थ साउंड 2024 महमुदुल्लाह, महेदी हसन, तौहीद हृदोय
जोश लिटिल आयरलैंड बनाम न्यूजीलैंड एडिलेड 2022 केन विलियमसन, जिमी नीशम, मिचेल सेंटनर
कार्तिक मयप्पन यूएई बनाम श्रीलंका जीलोंग 2022 भानुका राजपक्षे, चरित असलंका, दासुन शनाका
कगिसो रबाडा दक्षिण अफ्रीका बनाम इंग्लैंड शारजाह 2021 क्रिस वोक्स, इयोन मॉर्गन, क्रिस जॉर्डन
वानिंदु हसरंगा श्रीलंका बनाम दक्षिण अफ्रीका शारजाह 2021 एडेन मार्कराम, तेम्बा बावुमा, ड्वेन प्रिटोरियस
कर्टिस कैंपर आयरलैंड बनाम नीदरलैंड अबू धाबी 2021 कॉलिन एकरमैन, रयान टेन डोशेट, स्कॉट एडवर्ड्स, रोएलोफ वैन डेर मर्व
ब्रेट ली ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश केप टाउन 2007 शाकिब अल हसन, मशरफे मुर्तजा, आलोक कपाली

 

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यूएस-ईरान तनाव के बीच खुला एक और फ्रंट, ड्रैगन के सीधे एक्शन ने बढ़ा दी इस देश की टेंशन

यूएस-ईरान तनाव के बीच खुला एक और फ्रंट, ड्रैगन के सीधे एक्शन ने बढ़ा दी इस देश की टेंशन


China Japan Tensions: पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ा है. मिडिल ईस्ट और Ukraine युद्ध के बाद अब अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव और एशिया में नई खींचतान देखने को मिल रही है. ताजा घटनाक्रम में China और Japan के बीच तनाव बढ़ गया है, जहां बीजिंग ने जापान की 40 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है. चीन का आरोप है कि ये कंपनियां जापान की सैन्य क्षमताओं को दोबारा मजबूत करने से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हैं.

तनाव उस समय और बढ़ा जब जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य कदम उठाता है तो टोक्यो हस्तक्षेप पर विचार कर सकता है. चीन लंबे समय से Taiwan को अपना हिस्सा बताता रहा है और इस मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील है.

चीन-जापान में ठनी

इसके बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने जापान की 20 कंपनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में डाल दिया, जबकि 20 अन्य कंपनियों को अलग वॉच लिस्ट में रखा गया है. एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में शामिल कंपनियां अब चीन से ‘ड्यूल यूज’ (दोहरे इस्तेमाल वाले) सामान का आयात नहीं कर पाएंगी. ड्यूल यूज वस्तुएं वे होती हैं जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.

इस कार्रवाई की जद में कई बड़ी जापानी कंपनियां आई हैं, जिनमें Mitsubishi Heavy Industries (जहाज निर्माण, लड़ाकू विमान इंजन और समुद्री मशीनरी), Kawasaki Heavy Industries और Fujitsu जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल बताई जा रही हैं. चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इन कंपनियों को चीन में कार्यरत विदेशी संस्थाओं से भी ड्यूल यूज सामान की आपूर्ति पर प्रतिबंध रहेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक व कूटनीतिक संबंधों में और तनाव बढ़ा सकता है.

बीजिंग के एक्शन से टेंशन

Ministry of Commerce of the People’s Republic of China ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट कहा है कि दोहरे इस्तेमाल (ड्यूल-यूज़) वाले सामानों से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, यदि उसका संबंध सैन्य उपयोग से हो सकता है. मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जिन 20 कंपनियों को वॉच लिस्ट में रखा गया है, उनके संदर्भ में चीन ने अतिरिक्त निगरानी तंत्र लागू किया है.

अब चीन से इन कंपनियों को निर्यात करने वाले किसी भी आपूर्तिकर्ता को पहले एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा. इसके साथ एक विस्तृत रिस्क मैनेजमेंट रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित सामान का उपयोग किस उद्देश्य से होगा. साथ ही एक औपचारिक शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) भी देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह आश्वासन देना होगा कि ड्यूल-यूज़ सामान का इस्तेमाल Japan की सैन्य गतिविधियों में नहीं किया जाएगा. विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल व्यापारिक नियंत्रण नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है, जिससे China क्षेत्रीय सुरक्षा और ताइवान मुद्दे पर अपने रुख को सख्ती से लागू करना चाहता है.

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INR settles flat amid tepid moves against dollar

PNGS Reva Diamond Jewellery subscribed 67%


The offer received bids for 38.26 lakh shares as against 57.06 lakh shares on offer.

PNGS Reva Diamond Jewellery received bids for 38,26,240 shares as against 57,06,235 shares on offer, according to stock exchange data at 17:00 IST on Wednesday (25 February 2026). The issue was subscribed 0.67 times.

The issue opened for bidding on 24 February 2026 and it will close on 26 February 2026. The price band of the IPO is fixed between Rs 367 and 386 per share.

The IPO comprises a fresh issue of equity shares worth up to Rs 380 crore.

The objectives for the fresh issue include Rs 286.56 for funding expenditure towards setting up 15 new stores, Rs 35.4 crore for marketing and promotional expenses, and the remaining amount for general corporate purposes.

 

Ahead of the IPO, PNGS Reva Diamond Jewellery on 23 February 2026, raised Rs 920.99 crore from anchor investors by allotting 87.46 lakh shares at Rs 1,053 each to 41 anchor investors.

P.N. Gadgil & Sons, its corporate promoter, divested its diamond business through a slump sale to PNGS Reva Diamond Jewellery under a business transfer agreement (BTA). Following this transaction, PNGS Reva Diamond Jewellery operates as a separate entity in the diamond jewelry segment.

PNGS Reva Diamond Jewellery offers different types of jewellery using diamonds and precious and semi-precious stones, which are studded into precious metals such as gold and platinum. The product offerings include rings, earrings, necklaces, pendants, solitaires, bangles, bracelets, mangalsutra, nose rings, and chains to cater to diverse customer segments and occasions. Prices start at around Rs 20,000 and go up to high-value jewelry pieces.

As of September 30, 2025, the company had 13 distinct jewelry collections, including in-house design team and curated selections from third-party manufacturers and Karigars.

For the six month ended 30 September 2025, the firm recorded a consolidated net profit of Rs 20.13 crore and income from operations of Rs 156.72 crore.

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मास्क, बीमारी और डर, दिल्ली-NCR की जहरीली हवा कैसे छीन रही बच्चों की मुस्कान?

मास्क, बीमारी और डर, दिल्ली-NCR की जहरीली हवा कैसे छीन रही बच्चों की मुस्कान?


How Air Pollution Affects Children In Delhi: दिल्ली में पिछले कुछ सालों से वायुप्रदूषण ने कहर बरपा है. इसको लेकर  चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता वायु पॉल्यूशन बच्चों की सेहत, मेंटल स्थिति, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डाल रहा है. दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच, जब प्रदूषण अपने चरम पर था, 6 से 15 वर्ष की आयु के 1,257 बच्चों से बातचीत के आधार पर यह स्टडी तैयार किया गया. इनमें से 86 प्रतिशत बच्चों ने माना कि प्रदूषित हवा सीधे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है. अक्टूबर 2025 के बाद करीब 44 प्रतिशत बच्चों को डॉक्टर के पास जाना पड़ा और कई बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याओं के कारण एक से अधिक बार इलाज कराना पड़ा.

क्या बताया गया है रिपोर्ट में?

‘ए जेनरेशन अंडर सीज’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया कि 77 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि जहरीली हवा उन्हें बेचैन, चिड़चिड़ा, डरा हुआ या तनावग्रस्त महसूस कराती है. लगभग 46.6 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि यदि मौका मिले तो वे दिल्ली-एनसीआर छोड़ना चाहेंगे. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रदूषण का असर सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी भी बीमार पड़ रहे हैं. करीब 55 प्रतिशत बच्चों ने माना कि प्रदूषण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ी, जिससे पढ़ाई पर भी असर पड़ा.

खुद को बचाने की कोशिश करते हैं बच्चे

जब हवा जहरीली हो जाती है तो बच्चे खुद को बचाने की कोशिश जरूर करते हैं. करीब 85 प्रतिशत बच्चों ने किसी न किसी तरह का बचाव अपनाया. इनमें 39 प्रतिशत ने N95 मास्क या एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया, जबकि 37 प्रतिशत ने घर के भीतर रहना या बाहरी गतिविधियां कम करना बेहतर समझा. इसके बावजूद 85 प्रतिशत बच्चों ने आंखों में जलन, खांसी, सिरदर्द और थकावट जैसे लक्षण महसूस करने की बात कही. इससे साफ है कि एहतियात बरतने के बाद भी वे पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं.

इसमें बताया गया है कि कई बच्चे गंभीर प्रदूषण के दौरान भी स्कूल जाने, खेलकूद या अन्य एक्टिविटी के लिए बाहर निकलने को मजबूर होते हैं. ऐसे में नीतियों को बच्चों के स्वास्थ्य और उनके अनुभवों को केंद्र में रखकर तैयार करने की जरूरत बताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ शहर के औसत आंकड़ों से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह समझना होगा कि बच्चे घर, स्कूल और रोजाना के सफर में कैसी हवा में सांस ले रहे हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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