कम पानी, ज्यादा उत्पादन: भारत ने पेश की जिनोम संवर्धित चावल की पहली किस्में, 30% तक बढ़ेगी पैदावार – genome edited rice varieties india icar kamala drr dhan pusa dst high yield low water sustainable farming – बिज़नेस स्टैंडर्ड

कम पानी, ज्यादा उत्पादन: भारत ने पेश की जिनोम संवर्धित चावल की पहली किस्में, 30% तक बढ़ेगी पैदावार – genome edited rice varieties india icar kamala drr dhan pusa dst high yield low water sustainable farming – बिज़नेस स्टैंडर्ड


प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Pexels

भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में पहली बार जिनोम संवर्धित चावल की दो नई किस्में आज पेश की हैं। इसके अलावा इन नई किस्मों के जरिये पैदावार 30 फीसदी तक बढ़ने और मौजूदा किस्मों के मुकाबले फसलों के पकने में 15 से 20 दिन कम लगने का दावा किया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने रविवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)  द्वारा विकसित इन दोनों किस्मों का अनावरण किया है।

इस दौरान कृषि मंत्री ने कहा, ‘चावल की ये नई किस्में (कमला-डीआरआर धान-100 और पूसा डीएसटी चावल 1)’ कम पानी का उपयोग करेंगी और इससे पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम होगा।

ब्रीडर, फाउंडेशन और प्रमाणित बीजों का सामान्य चक्र पूरा करने के बाद किसानों तक पहुंचने में इन किस्मों को कम से कम चार से पांच साल का वक्त लगेगा। चौहान ने कहा, ‘हम इसे भी तेजी से करने की कोशिशों में जुटे हैं ताकि किसानों को अधिक पैदावार वाली ये किस्में जल्द मुहैया कराई जा सके।’

इन किस्मों को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पुद्दुचेरी, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों के लिए अनुशंसित किया गया है।

जीनोम संवर्धित फसलों और जीन संवर्धित फसलों के बीच बड़ा अंतर यह होता है कि जीनोम संवर्धित में अंतिम उत्पाद (जो बीटी कपास जैसी फसल होती है) में बाहरी जीन होते हैं, लेकिन जीन संवर्धित किस्मों में कोई अतिरिक्त बाहरी जीन नहीं होता है। कुछ साल पहले भारत ने खतरनाक सूक्ष्मजीवों या आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों अथवा  कोशिकाओं के निर्माण, उपयोग एवं आयात या निर्यात तथा भंडारण के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (ईपीए) के नियम 7-11 से एसडीएन1 और एसडीएन2 जिनोम संवर्धित किस्मों  को छूट दी थी। इससे उन्हें जीईएसी नियमों के दायरे से बाहर कर दिया था। एसडीएन-1, एसडीएन-2 और एसडीएन-3 फसलों में जिनोम संवर्धन के तरीके हैं। आज पेश की गईं धान की सभी नई किस्मों में जिनोम संवर्धन का इस्तेमाल किया गया है। केंद्र सरकार ने अपने साल 2023-24 के बजट में कृषि फसलों में जिनोम संवर्धन के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। आनुवांशिक संवर्धन के मुकाबले जिनोम संवर्धन नया क्षेत्र है।

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा, ‘धान के अलावा करीब 24 अन्य खाद्य फसलें और 15 बागवानी फसलें हैं, जो जिनोम संवर्धन के विभिन्न चरणों में हैं और धीरे-धीरे उनका अनावरण किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि आज पेश की गईं किस्मों के बाद अब हम जल्द ही उनके आईपीआर पंजीकरण के लिए आवेदन करेंगे। शुरुआत में नई जिनोम संवर्धित बीज सरकारी फर्म बेचेंगी।

आईसीएआर ने साल 2018 में अपने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान कोष के जरिये चावल में जिनोम संवर्धन अनुसंधान परियोजना की शुरुआत की थी। सबसे पहले किसानों ने सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली चावल की प्रमुख किस्म- सांभा मंसूरी (बीपीटी5204) और एमटीयू1010 (कॉटनडोरा सन्नालू) का चयन किया था, जो देश भर में 90 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाती हैं। सांभा मंसूरी को अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और बाजार में अच्छी खासी कीमत के लिए जाना जाता है मगर वह जलवायु प्रतिरोध में अच्छी किस्म नहीं मानी जाती है।


First Published – May 4, 2025 | 10:06 PM IST



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महाराष्ट्र के अरहर किसानों की लगी बम्पर लॉटरी, सरकार दे रही बाजार से ज्यादा भाव, ठप्प हो गया पेमेंट सिस्टम – bumper lottery of the arhar farmers of maharashtra the government is giving more prices to the government giving more than the market – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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महाराष्ट्र राज्य विपणन विभाग की धन अंतरण प्रणाली में तकनीकी समस्या के कारण अरहर का उत्पादन करने वाले कई किसानों को भुगतान करने में देरी हुई है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। हालांकि कई उत्पादकों को उनकी उपज की खरीद पर धन अंतरित किए जाने की पुष्टि करने वाले संदेश प्राप्त हुए हैं, लेकिन अभी तक उनके बैंक खातों में जमा राशि को नहीं दर्शाया जा रहा है। 

राज्य विपणन विभाग के अधिकारी ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘गड़बड़ी का जल्दी ही समाधान कर लिया जाएगा और अरहर खरीद की राशि को किसानों के खातों में जमा कर दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष के अंत में भीड़ के कारण कभी-कभी देरी होती है।’’ राज्य सरकार ने अरहर के लिए 7,550 रुपये प्रति क्विंटल खरीद मूल्य तय किया है, जो मौजूदा बाजार दरों से अधिक है। इसने अधिक किसानों को अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेचने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिसके परिणामस्वरूप पंजीकरण में वृद्धि हुई है। अधिकारी ने कहा कि अधिक संख्या में पंजीकरण ने आंशिक रूप से प्रणाली को प्रभावित किया है। 

राज्य विपणन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) ने अब तक महाराष्ट्र में लगभग 6.5 लाख क्विंटल अरहर की खरीद की है। बुलढाणा जिले के किसान निम्बाजी लाखाडे ने कहा, ‘‘मैंने नौ और 24 मार्च को सरकार द्वारा निर्धारित केंद्रों पर अरहर बेची और सभी आवश्यक दस्तावेज से जुड़ी कवायद पूरी की। लेकिन मुझे आज तक कोई भुगतान नहीं मिला है।’’ अधिकारियों ने बताया कि किसानों ने मांग की है कि अरहर खरीद की समयसीमा, जो पहले 30 अप्रैल तय की गई थी, बढ़ाई जाए। कई किसान सरकारी एजेंसियों को बेचने के इच्छुक हैं क्योंकि यह खुले बाजार में दाल बेचने से ज्यादा लाभकारी है। 

राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सहित नौ राज्यों से 13.22 लाख टन अरहर खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसने घरेलू कीमतों को स्थिर करने में मदद के लिए 10 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने की योजना की भी घोषणा की है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में अरहर की खेती का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत बढ़ गया है, जबकि राष्ट्रीय उत्पादन लगभग 35 लाख टन रहने का अनुमान है।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

गुड़ और खांडसारी इकाइयों पर सख्ती करेगी सरकार

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First Published – May 4, 2025 | 8:43 PM IST



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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों से खुलासा, गर्मियों की शुरुआत के साथ डीजल की खपत बढ़ी  – diesel consumption increased with the onset of summer – बिज़नेस स्टैंडर्ड

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों से खुलासा, गर्मियों की शुरुआत के साथ डीजल की खपत बढ़ी  – diesel consumption increased with the onset of summer – बिज़नेस स्टैंडर्ड


देश में डीजल की मांग में अप्रैल में करीब चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कई माह की नकारात्मक या कम वृद्धि के बाद अप्रैल में गर्मियों की शुरुआत के साथ डीजल की खपत बढ़ी है। डीजल देश में सबसे ज्यादा उपभोग किया जाने वाला ईंधन है। यह देश के परिवहन क्षेत्र और ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था की ‘जीवनरेखा’ है। 31 मार्च, 2024 को समाप्त वित्त वर्ष में डीजल की मांग में सिर्फ दो प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी और इससे पिछले वित्त वर्ष में डीजल की खपत में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में डीजल की खपत बढ़कर 82.3 लाख टन हो गई, जो एक साल पहले की समान अवधि से लगभग चार प्रतिशत अधिक है। अप्रैल, 2023 की तुलना में खपत 5.3 प्रतिशत और कोविड-पूर्व की अवधि यानी 2019 की तुलना में इसमें 10.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गर्मियों की शुरुआत से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में एयर-कंडीशनिंग की मांग बढ़ जाती है। अप्रैल, 2025 में डीजल की मांग में चार प्रतिशत की वृद्धि इस महीने के लिए दर्ज की गई सबसे ऊंची मात्रा और किसी भी महीने में अबतक की दूसरी सबसे अधिक मात्रा है। 

डीजल खपत पर क्या बोले अधिकारी

उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में डीजल की मांग में सुस्ती रही है, जिससे इसके भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। यात्री वाहनों में अब पेट्रोल, सीएनजी और बिजली का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसके बावजूद देश में कुल पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में डीजल का हिस्सा करीब 38 प्रतिशत है। अधिकारियों ने कहा कि डीजल की खपत में कोविड-पूर्व की अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और अगले कुछ साल तक डीजल की मांग बढ़ती रहेगी। अप्रैल, 2025 में पेट्रोल की खपत 4.6 प्रतिशत बढ़कर 34.35 लाख टन हो गई। 

पिछले साल चुनाव प्रचार के चलते पेट्रोल खपत 19% बढ़ी थी

पिछले साल चुनाव प्रचार के कारण पेट्रोल की खपत में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। उज्ज्वला कनेक्शन के काण एलपीजी की खपत 6.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 26.21 लाख टन पर पहुंच गई। 2019 से घरेलू रसोई गैस की खपत में लगभग पांच महीने के बराबर की वृद्धि हुई है। विमान ईंधन एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की खपत में वृद्धि घटकर 3.25 प्रतिशत रह गई है। अप्रैल में एटीएफ की कुल मांग 7,66,000 टन रही। पिछले साल चुनाव प्रचार के कारण जेट ईंधन की मांग में दो अंक में वृद्धि देखने को मिली थी।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

Reliance का रूस के साथ इतना बड़ा तेल सौदा कि चौंक जाएंगे आप

गजब है Reliance! Russia से खरीदा सस्ता Crude Oil, प्रोसेस कर बेचा US को, कमाई? सालभर में 6850 करोड़

 


First Published – May 4, 2025 | 7:25 PM IST



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एक दिन में 122 किलो सोना बिका! अक्षय तृतीया पर इस ज्वेलरी ब्रांड की जमकर हुई बिक्री – akshaya tritiya bonanza 122 kg gold sold in just one day by leading jewellery brand – बिज़नेस स्टैंडर्ड

एक दिन में 122 किलो सोना बिका! अक्षय तृतीया पर इस ज्वेलरी ब्रांड की जमकर हुई बिक्री – akshaya tritiya bonanza 122 kg gold sold in just one day by leading jewellery brand – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Akshaya Tritiya 2025 पर भले ही सोने के दाम अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर थे, लेकिन खरीदारी में कोई कमी नहीं दिखी। लोग इस शुभ दिन पर शुभ भविष्य और सौभाग्य के लिए जमकर सोना खरीदते नजर आए। 22 अप्रैल को पहली बार 24 कैरेट सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। इसके बावजूद ग्राहकों की भावनाओं पर इसका असर नहीं पड़ा और बाजारों में भीड़ उमड़ी रही। अक्षय तृतीया के दौरान सोने की कीमतें ₹99,500 से ₹99,900 प्रति 10 ग्राम के बीच रहीं, जो पिछले साल की कीमत ₹72,300 से करीब 38% ज्यादा थी।

ये भी पढ़ें: Akshaya Tritiya 2025: असली सोने की पहचान कैसे करें? खरीदारी से पहले पढ़ें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

PNG Jewellers की अब तक की सबसे बड़ी बिक्री

महाराष्ट्र की मशहूर पी एन गाडगिल ज्वेलर्स (PNG Jewellers) ने इस बार अक्षय तृतीया पर अब तक की सबसे ज्यादा एक दिन की बिक्री दर्ज की। कंपनी ने बताया कि इस दिन उसे ₹139.53 करोड़ की बिक्री हुई, जो पिछले साल के ₹103.26 करोड़ से करीब 35% ज्यादा है।

कंपनी ने बताया कि अक्षय तृतीया 2025 पर उसकी कुल बिक्री में जबरदस्त इज़ाफा हुआ। सोने की बिक्री वैल्यू के हिसाब से 34% बढ़ी, जबकि हीरे और चांदी की बिक्री में क्रमशः 23% और 114% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खास बात ये रही कि सोने की कीमतों में करीब 31% की तेजी के बावजूद, कंपनी का कुल बिक्री वॉल्यूम भी पिछले साल से ज्यादा रहा। मात्रा के हिसाब से देखें तो सोने की बिक्री में 1.46% का इजाफा हुआ, वहीं हीरे की बिक्री में 31% और चांदी की बिक्री में 90% की बढ़त दर्ज की गई। पिछले साल जहां कंपनी ने अक्षय तृतीया पर 120.24 किलो सोना बेचा था, वहीं इस बार यह बढ़कर 122 किलो तक पहुंच गया।

पूरे देश में ₹16,000 करोड़ का व्यापार

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, इस बार अक्षय तृतीया पर देशभर में कुल ₹16,000 करोड़ का व्यापार हुआ। इसमें से करीब ₹12,000 करोड़ की सोने-चांदी और ज्वेलरी की बिक्री हुई। गौर करने वाली बात ये है कि अप्रैल 2020 में सोने की कीमत ₹47,677 प्रति 10 ग्राम थी, जो अब अप्रैल 2025 में बढ़कर ₹95,592 हो गई है। यानी पिछले 5 सालों में सोने के भाव में 100% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।


First Published – May 4, 2025 | 12:49 PM IST



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सात माह के हाई पर पहुंचकर फिसला रुपया – rupee strengthens to 83 76 but closes at 84 55 after rbi intervention – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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डॉलर के मुकाबले रुपया आज दिन में मजबूत होकर 83.76 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था जो इसका सात माह का उच्च स्तर है। मगर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की खरीदारी करने से रुपये ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी। डीलरों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने 3 अरब डॉलर की लिवाली की। रुपया 17 अक्टूबर, 2024 के बाद पहली 84 के स्तर से नीचे आया है। हालांकि कारोबार की समाप्ति पर यह अपनी सारी बढ़त गंवा कर 84.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। गुरुवार को रुपया 84.49 पर बंद हुआ था।

बाजार के एक भागीदार ने कहा, ‘निवेश प्रवाह से सुबह के कारोबार में रुपया मजबूत होकर 84 से नीचे आ गया। लेकिन बाद में आरबीआई द्वारा मुद्रा बाजार में करीब 3 अरब डॉलर का हस्तक्षेप करने से रुपये पर दबाव बढ़ गया। ’ इस बीच नए 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.33 फीसदी रही। बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.36 फीसदी रही। इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 1.26 फीसदी मजबूत हुआ है जबकि चालू वित्त वर्ष में अभी तक इसमें 1.09 फीसदी का सुधार हुआ है।

आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ (इंडिया फॉरेक्स ऐसेट मैनेजमेंट) अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों के प्रवाह और डॉलर इंडेक्स में नरमी से हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में अच्छी तेजी आई है।’

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 2 अरब डॉलर बढ़कर 688.13 अरब डॉलर हो गया। आरबीआई ने मुद्रा बाजार से डॉलर खरीदे हैं, जिससे मुद्रा भंडार अभी तक के उच्चतम स्तर 705 अरब डॉलर के करीब पहुंच जाएगा।’

बाजार के भागीदारों ने कहा कि केंद्रीय बैंक अपने भंडार को फिर से भरने के लिए मुद्रा बाजार में बना रह सकता है। देश का मुद्रा भंडार 25 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 1.98 अरब डॉलर बढ़कर 688.13 अरब डॉलर हो गया।


First Published – May 2, 2025 | 11:18 PM IST



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Gold-Silver Price Today: सोना एक बार फिर हुआ महंगा, ₹93000 के करीब पहुंचा; चांदी ने भी मारी छलांग – gold silver price on may 2 mcx comex trading trends – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Gold-Silver Price Today: सोना एक बार फिर हुआ महंगा, ₹93000 के करीब पहुंचा; चांदी ने भी मारी छलांग – gold silver price on may 2 mcx comex trading trends – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Gold Silver Price Today, May 2: बीते कुछ दिनों से सोने चांदी की कीमतों में आ रही गिरावट अब थम गई है। दोनों के वायदा भाव आज तेजी के साथ खुले। खबर लिखे जाने के समय घरेलू बाजार में आज सोने के भाव 92,850 रुपये, जबकि चांदी के भाव 95,200 रुपये के करीब कारोबार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने चांदी के वायदा भाव में तेजी देखी जा रही है।

सोने के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट आज 496 रुपये की तेजी के साथ 92,835 रुपये के भाव पर खुला। पिछला बंद भाव 92,339 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 531 रुपये की तेजी के साथ 92,870 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 93,003 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 92,680 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। सोने के वायदा भाव ने पिछले महीने 99,358 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

चांदी चमकी

चांदी के वायदा भाव की शुरुआत तेज रही। MCX पर चांदी का बेंचमार्क मई कॉन्ट्रैक्ट आज 460 रुपये की तेजी के साथ 95,189 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 94,729 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 496 रुपये की तेजी के साथ 95,225 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 95,430 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 95,022 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। चांदी के वायदा भाव ने इस साल 1,01,999 रुपये किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।





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