अमेरिका जाएगा 40,000 टन झींगा – america will go to america 40000 tonnes – बिज़नेस स्टैंडर्ड

अमेरिका जाएगा 40,000 टन झींगा – america will go to america 40000 tonnes – बिज़नेस स्टैंडर्ड


भारत के समुद्री खाद्य निर्यातक अमेरिका को 35,000-40,000 टन झींगा भेजने की तैयारी कर रहे हैं। उद्योग के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की योजना पर रोक लगाने के बाद ऑर्डर स्थिर बने हुए हैं।
भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संघ के महासचिव केएन राघवन ने कहा, ‘अब हमें काफी राहत मिली है, क्योंकि हम अमेरिका के अन्य निर्यातकों के बराबर पहुंच गए हैं। अब रोके गए निर्यात को भेजने की तैयारी की जाएगी।’ उन्होंने कहा कि अमेरिकी शुल्क की घोषणा और फिर उन पर रोक के कारण लंबित हुए झींगा के करीब 2,000 कंटेनर अब निर्यात के लिए तैयार किए जा रहे हैं। अस्थायी राहत के तहत चीन को छोड़कर सभी देशों पर 10 प्रतिशत का मूल शुल्क लागू रहेगा। चीन पर 145 प्रतिशत शुल्क है।

अमेरिका को भारतीय झींगा निर्यात पर वर्तमान में 17.7 प्रतिशत का प्रभावी सीमा शुल्क लगता है, जिसमें 5.7 प्रतिशत प्रतिकारी शुल्क और 1.8 प्रतिशत डंपिंग रोधी शुल्क शामिल है। उद्योग जगत के सूत्रों ने बताया कि भारतीय निर्यातक आमतौर पर आपूर्ति शुल्क-भुगतान व्यवस्था के तहत शुल्क लागत वहन करते हैं, जिसका मतलब है कि पहले से अनुबंधित निर्यात को उच्च शुल्क के तहत महत्त्वपूर्ण अतिरिक्त खर्चों का सामना करना पड़ता।

उद्योग के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘(अतिरिक्त शुल्क पर) 90 दिन की रोक से निर्यातकों को अतिरिक्त लागत के बिना इन ऑर्डर को पूरा करने का अवसर मिलता है।’ भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संघ के अनुसार, अमेरिका से ऑर्डर में कोई कमी नहीं आई है, जो मात्रा और मूल्य के मामले में भारत का सबसे बड़ा झींगा बाजार बना हुआ है। भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका को 2.7 अरब डॉलर का झींगा निर्यात किया। राघवन ने सरकार से आग्रह किया कि शुल्क रोक समाप्त होने से पहले आगामी व्यापार वार्ता के दौरान देश के समुद्री खाद्य निर्यात के लिए ‘समान अवसर’ सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।


First Published – April 14, 2025 | 10:25 PM IST


(बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाया सोने की कीमत का अनुमान – goldman sachs estimates the price of gold – बिज़नेस स्टैंडर्ड

गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाया सोने की कीमत का अनुमान – goldman sachs estimates the price of gold – बिज़नेस स्टैंडर्ड


गोल्डमैन सैक्स ने दिसंबर के अंत तक सोने की कीमत बढ़कर 3,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जबकि पहले 3,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया था। केंद्रीय बैंकों और की उम्मीद से अधिक मांग और और मंदी के जोखिम के कारण एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड के उच्च प्रवाह के कारण सोने की कीमत की अनुमानित सीमा 3,650 से 3,950 डॉलर के बीच रहने का अनुमान है।

शुक्रवार के एक नोट में बैंक ने कहा है, ‘अगर मंदी आती है तो ईटीएफ प्रवाह आगे और बढ़ सकता है और साल के अंत तक सोने की कीमत 3,880 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।’ इसने कहा है, ‘अगर नीतिगत अनिश्चितता घटने पर वृद्धि बढ़कर उच्च स्तर पर जाती है तो ईटीएफ का प्रवाह हमारे दर परआधारित अनुमान को बदल सकता है और साल के अंत तक कीमत 3,550 डॉलर प्रति औंस तक रह सकती है।’ अमेरिका ने स्मार्टफोन और कंप्यूटरों पर जवाबी शुल्क से छूट दी है, लेकिन डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी भी दी है कि कुछ समय बाद शुल्क लगाए जाने की संभावना है।

सोमवार को सोने की हाजिर कीमत एक नए रिकॉर्ड 3,245.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। बाजार में शुल्क को लेकर चल रही अटकलों के कारण इसमें एक निश्चित दिशा का अभाव था। उसके बाद स्मार्टफोन और कंप्यूटर को ट्रंप शुल्क से मुक्त किए जाने के बाद सोने की कीमत रिकॉर्ड उच्च स्तर से कम हुई लेकिन यह 3,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर उल्लेखनीय स्तर पर बनी रही। सोने की हाजिर कीमत 0.4 प्रतिशत गिरकर 3,223.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत गिरकर 3,238.20 डॉलर पर आ गया।

ओएएनडीए के मार्केटपल्स के विश्लेषक जेन वावडा ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन को शुल्क से बाहर रखने की घोषणा के बाद बाजार की धारणा में थोड़ा सुधार हुआ है। इससे आंशिक रूप से सोने की कीमतों में गिरावट आई है, जो संभवतः मुनाफा कमाने के कारण है।’


First Published – April 14, 2025 | 10:22 PM IST



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निवेशकों के लिए मौका! डॉलर पर नहीं, अब दुनिया को सोने पर भरोसा – केंद्रीय बैंकों ने बढ़ाया भंडार – no chance for investors is not on dollars now the world trusts gold central banks increased stores – बिज़नेस स्टैंडर्ड

निवेशकों के लिए मौका! डॉलर पर नहीं, अब दुनिया को सोने पर भरोसा – केंद्रीय बैंकों ने बढ़ाया भंडार – no chance for investors is not on dollars now the world trusts gold central banks increased stores – बिज़नेस स्टैंडर्ड


हाल के वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने बढ़ती महंगाई, कम होती ब्याज दर और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण अपने स्वर्ण भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि की है। साल 2024 में केंद्रीय बैंकों ने वैश्विक स्वर्ण भंडार में 1,045 टन सोना जोड़ा है। स्वर्ण भंडार में इतनी भारी वृद्धि प्रमुख आरक्षित परिसंपत्ति के तौर पर सोने की ओर रणनीतिक बदलाव दर्शाती है, जो दुनिया भर में डी-डॉलरीकरण की प्रवृत्ति और भूराजनीतिक तथा आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती बरकरार रखने के प्रयासों के अनुरूप है।

अपनी वित्तीय स्थिति को दमदार रखने के लिए केंद्रीय बैंक प्रतिकूल समय के दौरान अपने भंडार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तेजी से सोना खरीद रहे हैं। यह कवायद मुख्य रूप से चीन ने शुरू की थी, जिसका उद्देश्य दुनिया भर की मुद्रा बाजार पर हावी रहने वाले डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करना था। इस रणनीति का एक और मुख्य कारण है कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अस्थिरता के दौरान सोना ही बचाव का काम करता है। आज के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव वाले माहौल में सोने को एक विश्वसनीय निवेश साधन के तौर पर देखा जाता है, जो किसी भी मुद्रा अथवा सरकार से स्वतंत्र रहता है।

क्या करना चाहिए निवेशकों को 

कामा ज्वैलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह ने कहा, ‘सोने को सुरक्षित परिसंपत्ति वर्ग माना जाता है। इसकी हमेशा मजबूत मांग होती है और आर्थिक अनिश्चितता के दौरान इसमें निवेश भी बढ़ जाता है। ट्रंप द्वारा जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा के बाद दुनिया भर में भारी उठा-पटक देखने को मिली, जिससे निवेशक अब इंतजार करने लगे हैं।’

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के निदेशक और उत्पाद एवं अनुसंधान प्रमुख चेतन शेनॉय का कहना है, ‘निवेशक के पूरे पोर्टफोलियो को देखना जरूरी है। हमारा सुझाव है कि निवेशक इक्विटी से डेट/गोल्ड में 80:20 अनुपात में परिसंपत्ति आवंटन के साथ-साथ संतुलित पोर्टफोलियो बरकरार रखें। मगर कुल मिलाकर सोना किसी भी पोर्टफोलियो का 5 से 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।’

शेयरों के मुकाबले सोना भी लगातार कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर रहा है। बीते पांच वर्षों के दौरान सोने के रिटर्न में भी काफी उतार-चढ़ाव आया है और यह 1.73 फीसदी के निचले स्तर पर भी है, जो इसकी अस्थिरता दर्शाता है। बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव और मांग में वृद्धि के मद्देनजर सोने की कीमतें लगातार अप्रत्याशित हैं, जो इसे निफ्टी के मुकाबले निवेश के लिए कम भरोसेमंद परिसंपत्ति वर्ग बनाती है। निफ्टी ने बीते 25 वर्षों में स्थिर और लगातार रिटर्न दिया है।

यह भी देखने को मिला है कि भारतीय परिवारों और निवेशकों का दुनिया भर के निवेशकों के मुकाबले सोने में अधिक निवेश है। शेनॉय ने कहा, ‘ अगर हम सोने के मुकाबले निफ्टी 50 के जोखिम समायोजित रिटर्न को देखें तो पाएंगे कि निफ्टी ने उच्च दक्षता अनुपात के साथ 5 साल की समयसीमा में जोखिम को समायोजित करते हुए बेहतर रिटर्न दिया है। इसलिए, इक्विटी में अधिक निवेश से निवेशक को बेहतर रिटर्न को मुनाफा मिलेगा।’

शाह ने कहा, ‘आने वाले समय में चार कारणों से सोने की कीमतों में वृद्धि होगी। इनमें, व्यापार युद्ध के कारण जारी अनिश्चितता और आगे की वृद्धि, विकसित देशों खासकर अमेरिका में मंदी का जोखिम, रूस और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के बीच भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना खरीदना शामिल होगा। इन सभी कारणों से सोने की कीमतों में इजाफा होगा, जिससे यह लंबी अवधि में और चमकेगा। इसलिए अभी सोने में निवेश करना उचित है क्योंकि यह पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखता है और संभावित नुकसान से भी बचाता है। हम घरेलू स्तर पर सोने की कीमत 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचने फिर से संभावना जता रहे हैं।’


First Published – April 14, 2025 | 10:10 PM IST



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दिखने लगा EVs का असर, बहुत कम बिकने लगा डीजल – evs began to appear diesel started selling very little – बिज़नेस स्टैंडर्ड

दिखने लगा EVs का असर, बहुत कम बिकने लगा डीजल – evs began to appear diesel started selling very little – बिज़नेस स्टैंडर्ड


भारत में सबसे अधिक खपत वाले पेट्रोलियम उत्पाद डीजल की मांग में वृद्धि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में महामारी के बाद सबसे कम रही। अर्थव्यवस्था के धीमी गति से बढ़ने और स्वच्छ ईंधन की ओर रुझान तेज होने के चलते ऐसा हुआ। पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में डीजल की खपत दो प्रतिशत बढ़कर 9.14 करोड़ टन रही। ट्रकों और कृषि मशीनरी में इस्तेमाल होने वाले डीजल की मांग वित्त वर्ष 2023-24 में 4.3 प्रतिशत और 2022-23 में 12.1 प्रतिशत बढ़ी थी। भारत में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में डीजल का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत है। मांग वृद्धि में नरमी देश में आर्थिक गतिविधियों की सुस्ती को दर्शाती है। इसके अलावा बड़ी वजह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) हैं, जो भारत में डीज़ल की मांग को प्रभावित कर रहे हैं। 

महानगरों- शहरों में ई- रिक्शा का चलन बढ़ा

उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि डीजल अब भी भारतीय परिवहन क्षेत्र के तीन-चौथाई हिस्से को संचालित करता है, लेकिन ईवी बदलाव के कारण वृद्धि धीमी हो रही है। पेट्रोल की तुलना में डीजल की खपत में धीमी वृद्धि मुख्य रूप से वाणिज्यिक ईवी बदलाव के कारण थी। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक बस को तेजी से अपनाया जा रहा है, और कई दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा (ई-रिक्शा) का बोलबाला हो गया है। इस वजह से शहरी सार्वजनिक परिवहन में डीज़ल का उपयोग सीधे तौर पर कम हो रहा है। 

e-commerce कंपनियों का EVs पर जोर

साथ ही, अमेजन, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट जैसी कंपनियां अपने आपूर्ति बेड़े को ईवी में बदल रही हैं। समीक्षाधीन अवधि में पेट्रोल की खपत 7.5 प्रतिशत बढ़कर चार करोड़ टन हो गई, जबकि एलपीजी की मांग 5.6 प्रतिशत बढ़कर 3.13 करोड़ टन रही। इसी तरह वित्त वर्ष 2024-25 में विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग नौ प्रतिशत बढ़कर लगभग 90 लाख टन हो गई।

(एजेंसी इनपुट के साथ)


First Published – April 14, 2025 | 9:30 PM IST



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Video: वैश्विक ट्रेड वॉर का सोने पर असर, कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से दुकानदार-खरीदार हैरान-परेशान – video global trade wars impact on gold – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Video: वैश्विक ट्रेड वॉर का सोने पर असर, कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से दुकानदार-खरीदार हैरान-परेशान – video global trade wars impact on gold – बिज़नेस स्टैंडर्ड


अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक कशमकश का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। वैश्विक बाजार में सोने की कीमत 96,000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गई है। सोने की कीमत हर घंटे बदल रही है। इससे गहने बेचने वाले और खरीदार- दोनों अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।

कीमतों में बेतहाशा उतार-चढ़ाव को देखते हुए कुछ लोगों का मानना ​​है कि सोने की कीमत जल्द एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार कर सकती है। हालांकि कई लोग कीमत में तेज गिरावट की भी संभावना जता रहे हैं।

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Video: RBI की कोशिश भी हुई फेल, शेयर बाजार पर Trump Tariff का डर बरकरार 

Video: Share Market: वित्त वर्ष के पहले ही दिन बाजार में हाहाकार, Sensex 1,390 अंक गिरा, Nifty 23,200 के नीचे 

 


First Published – April 14, 2025 | 8:55 PM IST



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Gold retreats from record high: रिकॉर्ड हाई से 1 फीसदी फिसला सोना, MCX पर 93 हजार के नीचे – gold hits new record high in the global market for the 24th day this year slips by half percent on mcx – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Gold retreats from record high: रिकॉर्ड हाई से 1 फीसदी फिसला सोना, MCX पर 93 हजार के नीचे – gold hits new record high in the global market for the 24th day this year slips by half percent on mcx – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Gold prices on 14th April 2025: ग्लोबल मार्केट से मिल नेगेटिव संकतों के बीच घरेलू फ्यचर्स मार्केट यानी  (MCX) पर सोमवार (14 अप्रैल) को शाम के सत्र में सोना एक फीसदी गिरकर 93 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया। पिछले शुक्रवार को यह 93,940 रुपये के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। घरेलू स्पॉट मार्केट आज अंबेडकर जयंती के अवसर पर बंद रहे, जबकि घरेलू फ्यचर्स मार्केट यानी एमसीएक्स (MCX) पर सिर्फ शाम के सत्र में कारोबार हो रहा है।

ग्लोबल मार्केट में भी कीमतों में 1 फीसदी की कमजोरी देखी जा रही है। हालांकि बेंचमार्क स्पॉट गोल्ड सोमवार को शुरुआती कारोबार में 3,245.76 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई तक ऊपर गया, वहीं यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 11 अप्रैल के अपने रिकॉर्ड हाई के बेहद करीब पहुंच गया। मौजूदा कैलेंडर ईयर के दौरान इसने 24वें दिन और इस महीने पांचवें दिन रिकॉर्ड हाई बनाया।  सोने की कीमतों में यह तेजी अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर के मद्देनजर बतौर सुरक्षित विकल्प (safe-haven) इस बेशकीमती धातु की मांग में आई मजबूती की वजह से आई। लेकिन बाद में कीमतें दबाव मेंं आ गईं। पिछले हफ्ते की शुरुआत में ग्लोबल बेंचमार्क कीमतें 3  हजार डॉलर प्रति औंस से नीचे चली गई थीं।

इस बीच चीन पर अमेरिकी टैरिफ के 145 फीसदी किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका तेज हो गई है। चीन ने भी इसके जवाब में पिछले शुक्रवार को अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ को 41 फीसदी बढ़ाते हुए 125 फीसदी कर दिया।

ऊपरी स्तरों से निकल रही मुनाफावसूली ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है लेकिन ब्याज दरों में कटौती की संभावना, अमेरिका सहित दुनिया की अर्थव्यवस्था में स्लोडाउन और महंगाई के बढ़ने की आशंका के मद्देनजर ज्यादातर जानकार सोने को लेकर फिलहाल बेहद बुलिश हैं। उनका मानना है कि ग्लोबल लेवल पर खासकर अमेरिका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वॉर के मद्देनजर जो अनिश्चितता की स्थिति बनी है उसमें बतौर सुरक्षित विकल्प (safe-haven) सोने की मांग बरकरार रह सकती है। साथ ही बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से भी बतौर सुरक्षित विकल्प सोने की मांग में और तेजी आने की उम्मीद है। इतना ही नहीं महंगाई के खिलाफ ‘हेज’ के तौर पर सोने की पूछ परख बढ़ सकती है।

जानकार मानते हैं कि इन्वेस्टमेंट डिमांड गोल्ड के लिए इस साल सबसे ज्यादा सपोर्टिव साबित हो सकता है क्योंकि इसका सपोर्ट पिछले मई से ही मिलना शुरू हुआ है। मौजूदा तेजी से पहले जब भी गोल्ड में तेजी का दौर चला है, सबसे बड़ी भूमिका इन्वेस्टमेंट यानी ईटीएफ डिमांड ने ही निभाई है। फिर चाहे वह 2020 या 2012 की तेजी की बात कर लें।

सोने में रिकॉर्डतोड़ तेजी के बीच लोग फिलहाल इसके ईटीएफ में जमकर निवेश कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 4 महीने से गोल्ड ईटीएफ में इनफ्लो बना हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के मुताबिक मार्च के दौरान ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश 8.6 बिलियन डॉलर बढ़ा। वॉल्यूम /होल्डिंग के लिहाज से इस दौरान निवेश में 92 टन की वृद्धि हुई। सोने की कीमतों में तेजी और लगातार चौथे महीने आए इनफ्लो के दम पर  मार्च 2025 के अंत तक गोल्ड ईटीएफ का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM बढ़कर रिकॉर्ड 345 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। टोटल होल्डिंग भी पिछले महीने के अंत तक 3,445 टन पर दर्ज किया गया जो मई 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। मई 2023 में टोटल होल्डिंग 3,476 टन पर था।

फरवरी की तुलना में एसेट अंडर मैनेजमेंट और टोटल होल्डिंग दोनों में कमश: 12.74 फीसदी और 2.74 फीसदी की वृद्धि हुई।

इसके अलावा सेंट्रल बैंकों की खरीदारी भी कीमतों के लिए सपोर्टिव हैं। 2022 से इसने सोने को लगातार सबसे ज्यादा सपोर्ट किया है। बदलते जियो पॉलिटिकल परिदृश्य और टैरिफ वॉर के मद्देनजर इसके आगे भी मजबूत रहने की संभावना है। सबसे ज्यादा खरीदारी चीन के केंद्रीय बैंक की तरफ से निकलने की उम्मीद है। पिछले कुछ आंकड़ों से भी इस बात के संकेत मिलने लगे हैं। चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) के मुताबिक उसकी तरफ से मार्च में 3 टन (0.09 मिलियन औंस) सोने की खरीद की गई। छह महीने के ब्रेक के बाद पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) ने लगातार पांचवें महीने ( नवंबर 2024 से लेकर मार्च 2025 तक) गोल्ड खरीदा है। मौजूदा कैलेंडर ईयर के पहले तीन महीनों के दौरान चीन के गोल्ड रिजर्व में 13 टन की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 2,292 टन पर पहुंच गया है।

यूएस डॉलर (US Dollar) में देखें तो चीन के कुल फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 6.5 फीसदी पर पहुंच गई है। फरवरी 2025  तक यह हिस्सेदारी 6 फीसदी जबकि ठीक एक साल पहले मार्च 2024 तक 4.6 फीसदी थी। इस तरह से देखें तो एक साल में चीन के फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी में 2 फीसदी का इजाफा हुआ है।

यदि ट्रंप की नीतियों की वजह से चीन और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर टकराहट और बढ़ती है तो शायद चीन का केंद्रीय बैंक सोने की खरीद में और तेजी लाए। इस बात की गुंजाइश इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि चीन के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की हिस्सेदारी अभी भी 7 फीसदी के नीचे है। जबकि भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 11 फीसदी के ऊपर पहुंच गई है। जानकार मानते हैं के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य (geo-political scenario) के मद्देनजर चीन गोल्ड की हिस्सेदारी को कम से कम 10 फीसदी तक बढ़ाना चाहेगा।

घरेलू फ्यूचर्स मार्केट

घरेलू फ्यूचर्स मार्केट एमसीएक्स (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट सोमवार को 795  रुपये यानी 0.85  फीसदी की नरमी के साथ 92,950 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर है। इससे पहले यह आज 167 रुपये गिरकर 93,578 रुपये के भाव पर खुला और कारोबार के दौरान 93,578 रुपये के हाई और 92,891 रुपये के लो के बीच कारोबार किया।

गोल्ड फ्यूचर (Rupees/10 gm)  

तारीख कॉन्ट्रैक्ट पिछला क्लोजिंग ओपनिंग इंट्राडे  हाई इंट्राडे  लो लास्ट ट्रेडिंग प्राइस बदलाव
14 अप्रैल 2025 गोल्ड जून  कॉन्ट्रैक्ट 93,745 93,578 93,578 92,891 92,950 -795 (-0.85%)

(Source: MCX 6:40 pm IST) 

 ग्लोबल मार्केट

ग्लोबल मार्केट में बेंचमार्क स्पॉट गोल्ड (spot gold) कारोबार के दौरान आज रिकॉर्ड 3,245.76 डॉलर प्रति औंस तक ऊपर और 3,193.66 डॉलर प्रति औंस तक नीचे गया। फिलहाल यह 1.21 फीसदी की गिरावट के साथ 3,197  डॉलर प्रति औंस पर है। इसी तरह बेंचमार्क यूएस जून गोल्ड फ्यूचर्स (Gold COMEX JUN′25) भी आज कारोबार के दौरान रिकॉर्ड 3,261.60 डॉलर और 3,213.80 डॉलर प्रति औंस के रेंज में रहा। फिलहाल यह 0.63  फीसदी की नरमी के साथ 3,224.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

इंटरनेशनल गोल्ड (USD/ounce) 

तारीख गोल्ड पिछला क्लोजिंग ओपनिंग इंट्राडे  हाई इंट्राडे  लो लास्ट ट्रेडिंग प्राइस बदलाव
14 अप्रैल 2025 गोल्ड जून कॉन्ट्रैक्ट

(COMEX)

3,244.60 3,246 3,261.60 3,213.80 3,224.20 -20.40 (-0.63%)
14 अप्रैल  2025 स्पॉट गोल्ड 3,236.21 3,236.21 3,245.76 3,193.66 3,197 -39.21 (-1.21%)

Source: Bloomberg (5:50 PM IST)

 


First Published – April 14, 2025 | 6:20 PM IST



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