Sovereign Gold Bond 2019-20 Series V: 32वें SGB को कल रिकॉर्ड रिडेम्प्शन प्राइस पर बेचने का मौका! सालाना रिटर्न 16% – sovereign gold bond 2019 20 series v opportunity to sell 32nd sgb at record redemption price tomorrow annual return 16 percent – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Sovereign Gold Bond 2019-20 Series V: 32वें SGB को कल रिकॉर्ड रिडेम्प्शन प्राइस पर बेचने का मौका! सालाना रिटर्न 16% – sovereign gold bond 2019 20 series v opportunity to sell 32nd sgb at record redemption price tomorrow annual return 16 percent – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Sovereign Gold Bond 2019-20 Series V premature redemption: देश के 32वें (SGB 2019-20 Series V) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) को मैच्योरिटी से पहले दूसरी बार बेचने का मौका बॉन्ड धारकों को मंगलवार (15 अप्रैल  2025) को अब तक के सबसे ऊंचे रिडेम्प्शन प्राइस (9,069 रुपये) पर मिलेगा। यह बॉन्ड 15 अक्टूबर 2027 को मैच्योर होगा। वैसे बॉन्ड धारक ही इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले 15 अप्रैल को भुना सकते हैं जिन्होंने इसके लिए अप्लाई किया है। प्रीमैच्योर रिडेम्पशन को लेकर इच्छुक बॉन्ड धारकों के लिए अप्लाई करने की तारीख 15 मार्च  से लेकर 5 अप्रैल तक थी।

कितने यूनिट गोल्ड बॉन्ड का अब से पहले हो चुका है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन

इस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन से पहले भी बॉन्डधारकों ने इस बॉन्ड में अपने यूनिट बेचे हैं। बीते साल 15 अक्टूबर को इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले पहली बार बेचने का मौका मिला था। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि बॉन्ड धारकों ने इस दौरान बॉन्ड के कुल 1,133 यूनिट भुनाए। इससे पहले इस बॉन्ड के लिए कुल 4,55,776 यूनिट की खरीद की गई थी। इस तरह से इस बॉन्ड के 454,643 यूनिट अभी भी बचे हैं।

(SGB 2019-20 Series V)

प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख  प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन वॉल्यूम
15 अक्टूबर 2024 7,549 रुपये प्रति  यूनिट 1,133 यूनिट

(Source: RBI)

क्या  है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए इश्यू और रिडेम्प्शन प्राइस आईबीजेए (IBJA) से 24 कैरेट गोल्ड (999) के लिए मिले रेट के आधार पर तय होते हैं। नियमों के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख से ठीक पहले के 3 कारोबारी दिन के लिए आईबीजेए से प्राप्त 24 कैरेट गोल्ड (999) के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज होता है। 10 अप्रैल,  12 अप्रैल और 13 अप्रैल को अवकाश होने की वजह से आरबीआई (RBI) ने इस सीरीज का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 8 अप्रैल, 9 अप्रैल  और 11 अप्रैल के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय किया है। 8 अप्रैल, 9 अप्रैल  और 11 अप्रैल  के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज 9,069 रुपये है, इसलिए 32वें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 9,069 रुपये प्रति यूनिट है।

तारीख क्लोजिंग प्राइस (gold 999)
8 अप्रैल 8,855 रुपये प्रति यूनिट
9 अप्रैल 9,016  रुपये प्रति यूनिट
10 अप्रैल महावीर जयंती
11 मार्च 9,335 रुपये प्रति यूनिट
12 मार्च शनिवार 
13 मार्च रविवार 
एवरेज क्लोजिंग प्राइसप्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस        9,069 रुपये प्रति यूनिट

Source: IBJA

अब जानते हैं कि आखिर वैसे बॉन्ड धारक जो इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले 15 अप्रैल को भुनाएंगे उन्हें कितनी कमाई होगी।

बिना टैक्स चुकाए कमाई

यह सॉवरेन गोल्ड (IN0020190370) 3,788 रुपये के इश्यू प्राइस पर 17 सितंबर 2019 को जारी हुआ था, जबकि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 9,069 रुपये प्रति यूनिट है। इस हिसाब से इस सीरीज को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने पर बॉन्ड धारकों को 139.41 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न और 15.66 फीसदी का एनुअल रिटर्न  मिलेगा। ऑनलाइन बॉन्ड धारक तो और ज्यादा फायदे में रहेंगे क्योंकि उन्हें इस बॉन्ड की खरीदारी पर इश्यू प्राइस के मुकाबले 50 रुपये प्रति यूनिट का डिस्काउंट भी मिला होगा। ऐसे बॉन्ड धारकों को इस बॉन्ड के प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर 142.62 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न और 15.92 फीसदी का एनुअल रिटर्न  मिलेगा।

टैक्स चुकाने के बाद कमाई

 प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन के मामले में बॉन्ड धारक बॉन्ड इश्यू होने के 12 महीने बाद बेच रहे हैं इसलिए उन्हें कैपिटल गेन पर 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना पड़ेगा।

अब इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने के मामले में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स, ग्रॉस रिटर्न और एनुअल रिटर्न की गणना करते हैं:

परचेज प्राइस/ इश्यू प्राइस: 3,788 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस : 9,069 रुपये

टैक्सेबल कैपिटल गेन: 9,069-3,788 = 5,281 रुपये

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स (12.5%): 660 रुपये

टैक्स चुकाने के बाद कमाई: 5,281- 660 = 4,621 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस (LTCG टैक्स घटाने के बाद): 9,069-660 = 8,409 रुपये

ऑफलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 122%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 14.21%

ऑनलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 142.62%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 14.47%

इंटरेस्ट जोड़कर कमाई

निवेशकों को इस सीरीज के लिए प्रति वर्ष 2.5 फीसदी यानी 47.35 रुपये प्रति छह महीने जबकि 5.5 साल की होल्डिंग पीरियड के दौरान 521 रुपये इंटरेस्ट/कूपन मिला। इस तरह से देखें तो इंटरेस्ट को जोड़ने के बाद इस बॉन्ड से 15.36 फीसदी का एनुअल रिटर्न (CAGR) मिलेगा। ऑनलाइन बॉन्ड धारकों को तो 15.62 फीसदी का एनुअल रिटर्न मिलेगा। सितंबर 2016 के बाद जारी होने वाले सीरीज के लिए इंटरेस्ट को सालाना 2.75 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है।

SGB की इस सीरीज पर इंटरेस्ट जोड़कर सालाना कमाई (CAGR) की गणना:

परचेज प्राइस/ इश्यू प्राइस: 3,788 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस : 9,069 रुपये

टैक्सेबल कैपिटल गेन: 9,069-3,788 = 5,281 रुपये

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स (12.5%): 660 रुपये

टैक्स चुकाने के बाद कमाई: 5,281- 660 = 4,621 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस (LTCG टैक्स घटाने के बाद): 9,069-660 = 8,409 रुपये

इंटरेस्ट: 521 रुपये

ऑफलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 135.74%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 15.36%

ऑनलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न: 139%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 15.62%

अब जानते हैं कि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन को लेकर नियम क्या हैं?

कब कर सकते हैं प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन ?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने का विकल्प भी निवेशकों के पास होता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को आप उसके इश्यू होने के 5 साल बाद मैच्योरिटी से पहले रिडीम कर सकते हैं। आरबीआई प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख उस दिन तय करती है जिस दिन इस बॉन्ड पर इंटरेस्ट देय होता है। इस बॉन्ड पर इंटरेस्ट प्रत्येक छह महीने यानी साल में दो दफे मिलता है।

कैसे होती है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस की गणना

मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख से ठीक पहले के 3 कारोबारी दिन के लिए आईबीजेए (IBJA) की तरफ से प्राप्त 24 कैरेट गोल्ड (999) के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज होता है।

टैक्स को लेकर क्या हैं नियम ?

अगर आपने मैच्योरिटी पीरियड से पहले रिडीम किया तो टैक्स लिस्टेड फाइनेंशियल एसेट्स की तरह लगेगा। मतलब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने के बाद 12 महीने से पहले बेच देते हैं तो होने वाली कमाई यानी कैपिटल गेन को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। जो आपके ग्रॉस टोटल इनकम में जोड़ दिया जाएगा और आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। लेकिन अगर आप 12 महीने बाद बेचते हैं तो 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना होगा। लेकिन यदि आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी यानी 8 साल तक होल्ड करते हैं तो रिडेम्प्शन के समय आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।


First Published – April 14, 2025 | 1:20 PM IST



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पहली बार निजी कोयला ले रही एनटीपीसी – ntpc taking private coal for the first time – बिज़नेस स्टैंडर्ड

पहली बार निजी कोयला ले रही एनटीपीसी – ntpc taking private coal for the first time – बिज़नेस स्टैंडर्ड


भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने पहली बार देश की निजी मालिकाना वाली वाणिज्यिक खदानों से कोयला खरीदना शुरू किया है। अब तक एनटीपीसी सरकार द्वारा संचालित कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) से ही घरेलू कोयला खरीदती थी, जो दीर्घावधि ईंध आपूर्ति समझौते (एफएसए) के तहत खरीदा जाता था। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि एनटीपीसी ने पिछले 6 महीनों में निजी खनन कंपनियों से 30 लाख टन कोयला खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है और इसकी आपूर्ति पहले ही शुरू हो चुकी है।

कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम वाणिज्यिक खदानों से कोयला प्राप्त कर रहे हैं। इन खदानों से सीधे हमारे संयंत्र को कोयले की आपूर्ति की जा रही है। यह टेंडर एनटीपीसी की नॉन पिटहेड बिजली सयंत्रों के लिए था।’ नॉन पिटहेड संयंत्र कोयला खदानों से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर होते हैं, जबकि पिटहेड बिजली संयंत्र खदानों के नजदीक होते हैं। अधिकारियों ने कहा कि कोल इंडिया के कोयले की तुलना में निजी वाणिज्यिक खदानों से कोयला खरीदना थोड़ा महंगा है, लेकिन आयातित कोयले से सस्ता है।

सीआईएल से कोयला लेने के अलावा एनटीपीसी उच्च गुणवत्ता वाले कोयले का आयात भी करती है। खासकर यह आयात इंडोनेशिया से होता है। इसे घरेलू कोयले में मिलाया जाता है और सीआईएल से मिलने वाले कोयले की कमी होने पर उसकी भरपाई हो जाती है। एनटीपीसी की कोयले की कुल मांग में आयातित कोयला 8 से 10 प्रतिशत होता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने लक्ष्य रखा है कि जल्द ही आयातित कोयले की जगह हम घरेलू वाणिज्यिक कोयला खरीदने लगेंगे। हमने निकट भविष्य में कोयले का आयात शून्य करने का लक्ष्य रखा है। एनटीपीसी इस समय बिजली उत्पादन की पूरी लागत का बोझ बिजली आपूर्ति की दर पर डालती है। कंपनी के अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि कुल मिलाकर लागत पर इसका असर मामूली होगा।

अधिकारी ने कहा, ‘इन निजी खदानों से कोयला सीधे हमारे संयंत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। यह सीआईएल के कोयले की आपूर्ति से इतर है, जिसे आमतौर पर रेल साइडिंग से उठाना पड़ता है। इसके लिए हमें अक्सर सड़क मार्ग से ढुलाई का सहारा लेना पड़ता है। वाणिज्यिक कोयले बढ़ी लागत में ढुलाई का खर्च भी शामिल है,जिसका वहन खनन कंपनी करती है। सीधी डिलिवरी, लागत के हिसाब से भी सही है और पर्यावरण के हिसाब से भी सही है।’


First Published – April 13, 2025 | 10:39 PM IST



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भारत में झींगे के दाने की कीमत घटी – the price of shrimp decreased in india – बिज़नेस स्टैंडर्ड

भारत में झींगे के दाने की कीमत घटी – the price of shrimp decreased in india – बिज़नेस स्टैंडर्ड


ट्रंप शुल्क का असर भारत के झींगा क्षेत्र पर लगातार नजर आ रहा है, भले ही इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। व्यापार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रमुख झींगा निर्यात केंद्रों में अनिश्चितता के कारण झींगा की कीमत में आई गिरावट की आंशिक भरपाई के लिए झींगा फीड विनिर्माताओं ने मछुआरों के लिए अपने उत्पाद की कीमतें 4 रुपये किलो कम कर दी है।

कारोबारियों ने कहा कि इसकी वजह से अब वन्नामेई झींगा (अमेरिका को निर्यात की जाने वाली सबसे लोकप्रिय किस्म) के दाने की 25 किलो की बोरी की कीमत 2,667 से 2,701.75 रुपये के बीच होगी, जो ग्रेड पर निर्भर है। वहीं टाइगर झींगा के दाने की 25 किलो की बोरी की कीमत 2,947 से 2,995 रुपये होगी।

कुछ अन्य जाने माने ब्रांडों की 25 किलो की बोरी की कीमत 3,647.75 से 3,672.75 रुपये हो गई है, जो उसके विभिन्न ग्रेड पर निर्भर है।
भारत के पशुधन क्षेत्र की संस्था कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएलएफएमए) के अध्यक्ष दिव्य कुमार गुलाटी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘अमेरिका को निर्यात को लेकर असमंजस की स्थिति है। इसकी वजह से प्रसंस्करणकर्ताओं द्वारा झींगा की खरीद कीमत में गिरावट आई है। इसे देखते हुए दाना बनाने वाले उत्पादकों ने भी अपने दाम कम कर दिए हैं, ताकि मछुआरों को कुछ राहत मिल सके।’

यह राहत ऐसे समय मिली है, जब झींगा उत्पादन का सीजन अपने चरम पर है। अमेरिका द्वारा 26 प्रतिशत कर लगाए जाने के बाद भारत के वन्नामेई झींगे की कीमत करीब 30 से 50 रुपये किलो कम हो गई है। अमेरिकी शुल्क सहित अन्य करों के कारण भारतीय झींगे की कीमत करीब 40 प्रतिशत बढ़ गई है, जिससे मांग में कमी आई है। शुल्क लगाए जाने के पहले 20-50 काउंट (जिसका निर्यात अमेरिका को होता है) झींगे की कीमत 470 से 350 रुपये प्रति किलो के बीच थी।

वित्त वर्ष 2024 में भारत ने करीब 2.3 अरब डॉलर के झींगे का निर्यात अमेरिकी बाजारों में किया है। यह अमेरिका को भारत से किए गए कुल समुद्री खाद्य निर्यात के 90 प्रतिशत से ज्यादा है। कारोबार के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में हुए कुल झींगा निर्यात में मूल्य के हिसाब से 66 प्रतिशत झींगा अमेरिका भेजा गया।


First Published – April 13, 2025 | 10:20 PM IST



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Oil Prices: तेल कीमतों में दूसरे हफ्ते भी गिरावट के आसार – oil prices oil prices expected to fall for the second week as well – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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शुक्रवार को तेल की कीमतें स्थिर रहीं, लेकिन अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार युद्ध की आशंका से लगातार दूसरे सप्ताह भी गिरावट का रुझान देखा गया। ब्रेंट क्रूड वायदा 12.21 बजे तक 16 सेंट या 0.25 फीसदी तक चढ़कर 63.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

यूएस टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड 15 सेंट या 0.25 फीसदी चढ़कर 60.22 डॉलर पर आ गया। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में करीब 3 फीसदी की साप्ताहिक गिरावट हो सकती है। इन दोनों में पिछले सप्ताह करीब 11 फीसदी की गिरावट आई थी। ब्रेंट इस सप्ताह 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंचा जो फरवरी 2021 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है।

यूबीएस के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा, ‘ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ चीन की सख्त प्रतिक्रिया ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है और तेल कीमतों में कमजोरी आई है।’ चीन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी सामान पर शनिवार से 125 प्रतिशत शुल्क लगाएगा जो पहले की गई 84 प्रतिशत की घोषणा से अधिक है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को चीन के खिलाफ टैरिफ बढ़ाकर 145 फीसदी कर दिया था।

बीएमआई के विश्लेषकों का मानना है कि तेल कीमतों पर दबाव की आशंका है क्योंकि निवेशक इस समय चल रही व्यापार वार्ताओं और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव का जायाज ले रहे हैं।


First Published – April 11, 2025 | 11:04 PM IST



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मटर की बंपर आमद से टूटे दालों के दाम, मगर किसानों की चिंता बढ़ी – prices of pulses broken due to pea bumper influx but farmers concern increased – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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अनुकूल कर ढांचे के कारण भारत में दालों का आयात वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 7 साल के उच्च स्तर 67 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है। ज्यादातर दालों पर आयात शुल्क शून्य रखा गया है, जिससे कि आपूर्ति सुनिश्चित  हो सके और कीमतों में वृद्धि न हो।

दालों के आयात में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण पीली मटर के आयात में वृद्धि है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने करीब 20.4 लाख टन मटर का आयात किया है, जो कुल आयात का करीब 31 प्रतिशत है। यह वित्त वर्ष 2017-18 के बाद सर्वाधिक मात्रा में आयात है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और रूस से भारी मात्रा में मटर का आयात किया गया है। 

मटर भारत में आयात होने वाली सबसे सस्ती दाल है। इसका आयात मूल्य प्रमुख दालों के  न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम है। यह तमाम लोगों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह किसानों को अनाज की फसल की बोआई छोड़कर दालों की ओर जाने की मंशा को हतोत्साहित करती है। 

कारोबारियों का कहना है कि आगे भी इस दलहन का बड़ी मात्रा में आयात जारी रहेगा, जब तक कि मटर के आयात को रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए जाते हैं। मटर के बाद सबसे ज्यादा आयात देसी चना का हुआ है। उसके बाद मसूर का स्थान आता है।  


First Published – April 11, 2025 | 10:43 PM IST



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रुपया हुआ मजबूत, शेयर बाजार की रफ्तार ने दी नई उड़ान; निवेशकों में लौटी उम्मीद – rupee rupee rupee speed gave new flight to investors hope – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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रुपये में एक दिन में दो वर्ष की सर्वाधिक उछाल आज  दर्ज हुई। घरेलू मुद्रा में मार्च, 2023 के बाद सर्वाधिक उछाल आई। डीलरों के मुताबिक अमेरिकी डॉलर में तेज गिरावट और घरेलू शेयर बाजारों में उछाल के कारण रुपये में 0.75 प्रतिशत की मजबूती दर्ज हुई। डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 86.05 पर बंद हुआ जबकि यह गुरुवार को 86.70 पर बंद हुआ था। रुपया बीते सप्ताह 85.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। 

बीते दो सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपये में कुछ मजबूती आई। इसका कारण यह था कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था की विकास संबंधित चिंताओं के कारण डॉलर की चमक फीकी पड़ गई थी। दरअसल, अमेरिका ने चीन के अलावा ज्यादातर देशों पर ‘जवाबी’ शुल्क लगाने को रोक दिया है लेकिन इससे डॉलर को मदद नहीं मिली। यूरो की तुलना में डॉलर का आधार घट रहा है और अधिक सुरक्षित मुद्राओं जैसे जापानी येन और स्विस फ्रैंक की ओर रुख किया जा रहा है। 

इस कैलेंडर वर्ष में रुपये में 0.51 प्रतिशत की गिरावट आई। इस क्रम में अप्रैल में घरेलू मुद्रा में 0.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। एक सरकारी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, ‘रुपया डॉलर सूचकांक का अनुसरण कर रहा था और एशिया की सभी मुद्राओं ने बढ़त दर्ज की।’ उन्होंने कहा, ‘लिहाजा रुपये की खरीदारी की मांग स्वाभाविक रूप से थी।’

बीते सप्ताह तक डॉलर के मुकाबले रुपया बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने के कारण रुपया 85 डॉलर के पार चला गया था। 

डॉलर सूचकांक तीन साल में सर्वाधिक 0.7 प्रतिशत गिरकर 99.75 प्रतिशत पर आ गया। इसका कारण यह था कि अमेरिका की व्यापार नीति में बदलाव इस देश को मंदी की ओर लेकर जा सकते हैं। इससे अमेरिकी परिसंपत्तियों में निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है। डॉलर सूचकांक छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मजबूती का आकलन करता है। इस बीच एक वर्षीय निहित अग्रिम प्रीमियम 8 आधार अंक घटकर 2.25 प्रतिशत रह गया। 

सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘रुपया 85.50 से 86.50 प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है और इसमें मूल्य वृद्धि का रुझान है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक अग्रिम मार्केट में इस महीने परिपक्व होने वाले अनुबंधों को स्वीकार करेगा। इसका कारण यह है कि हम जितनी राशि का प्रवाह देख रहे हैं, वह परिपक्वता राशि का ध्यान रखेगा।’


First Published – April 11, 2025 | 10:38 PM IST



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