इस देश के बगैर इतना सोना नहीं पहुंचता अमेरिका, उल्टे ट्रंप ने 32 फीसदी टैरिफ जड़ा – without this country america that much gold does not reach america on the contrary trump imposed a 32 percent tariff – बिज़नेस स्टैंडर्ड

इस देश के बगैर इतना सोना नहीं पहुंचता अमेरिका, उल्टे ट्रंप ने 32 फीसदी टैरिफ जड़ा – without this country america that much gold does not reach america on the contrary trump imposed a 32 percent tariff – बिज़नेस स्टैंडर्ड


अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद सोने को इग्लैंड से अमेरिका भेजने का जो सिलसिला पिछले साल नवंबर के आखिर से शुरू हुआ वह मार्च तक कमोबेश चलता रहा। लेकिन इस दौरान जितना सोना लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (London Bullion Market Association) की तिजोरी से न्यूयॉर्क स्थित कॉमेक्स  (COMEX) की तिजारी में शिफ्ट हुआ, वह संभव नहीं हो पाता यदि स्विट्जरलैंड ने इसमें मदद नहीं की होती। लेकिन उल्टे डोनाल्ड ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड से आयात पर 32 फीसदी टैरिफ लगा दिया। जबकि यूरोपीय यूनियन पर 20 फीसदी टैरिक लगाया गया है।

क्यों स्विट्जरलैंड के जरिए अमेरिका पहुंचता है सोना ?

स्विट्जरलैंड दुनिया का सबसे बडा रिफाइनिंग हब है। यहां दुनिया भर का 70 फीसदी सोना रिफाइन किया जाता है।  भारत भी अपनी जरूरत का करीब आधा हिस्सा स्विट्जरलैंड  से खरीदता है। लंदन में सोने मे लेन-देन 400 औंस यानी 12.5 किलोग्राम के सोने के बार (gold bar) में होता  है। इसलिए लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन की तिजोरी में सोने के बार इसी वजन के रखे जाते हैं। ये गोल्ड बार ईट की तरह दिखते हैं। वहीं कॉमेक्स की तिजोरी में 100 औंस (2.83 किलोग्राम) यानी स्मार्टफोन साइज के सोने के बार को रखा जाता है। सोने को लंदन से न्यूयॉर्क पहुंचाने के लिए यह जरूरी है कि 12.5 किलोग्राम के सोने के बार को 2.83 किलोग्राम के बार में बदला जाए। इसलिए  सोने को न्यूयॉर्क पहुंचाने से पहले स्विट्जरलैंड भेजा जाता है। नवंबर के बाद से स्विट्जरलैंड से यूएस को सोने के निर्यात में इसी वजह से इतनी ज्यादा बढ़ोतरी आई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक सोने को लंदन से न्यूयॉर्क भेजने पर अतिरिक्त 3 से 5 डॉलर प्रति औंस का खर्च उठाना पड़ता है।

दिसंबर और फरवरी के बीच स्विट्जरलैंड ने रिकॉर्ड 414 टन सोना यूएस को भेजा

जनवरी के दौरान स्विट्जरलैंड से यूस को  13 साल में  सबसे ज्यादा 192.9 टन सोने का निर्यात किया गया, जबकि दिसंबर 2024 में 64.2 टन सोने का निर्यात किया गया था। फरवरी में 147.4 टन सोने का निर्यात किया गया। दिसंबर और फरवरी के बीच स्विट्जरलैंड ने रिकॉर्ड 414 टन सोना अमेरिका को एक्सपोर्ट किया।

अवधि  सोने का निर्यात 
जनवरी 2024 1.59 टन
दिसंबर 2024 64.2 टन
जनवरी 2025 192.9 टन
फरवरी 2025 147.4 टन  

Source: Swiss customs

क्यों अमेरिका शिफ्ट हो रहा था सोना ?

अमेरिका में ट्रंप की जीत के बाद मार्केट में इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि शायद गोल्ड इंपोर्ट पर भी ट्रंप प्रशासन कहीं जवाबी (reciprocal) टैरिफ न लगा दे। इसी वजह से पिछले 4 महीने से यूएस गोल्ड फ्यूचर्स पर बेंचमार्क LBMA स्पॉट गोल्ड के मुकाबले बहुत ज्यादा या कहें असामान्य प्रीमियम देखने को मिल रहा था। इससे पहले इस तरह का प्रीमियम नहीं देखने को मिलता था। इस असामान्य प्रीमियम का फायदा उठाने के लिए बैंक और ट्रेडर्स जहाज भर-भर कर सोना अमेरिका शिफ्ट कर रहे थे।

Also Read: Gold ETF: ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में दूसरा सबसे बड़ा इनफ्लो लेकिन भारत में लगातार 10 महीने बाद लोगों ने निकाले पैसे

आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं। कॉमेक्स (COMEX) से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में फिलहाल सोने का भंडार बढ़कर 43.3  मिलियन औंस यानी 1,228 टन (135 बिलियन डॉलर) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह अमेरिका में 5 साल की खपत के लिए पर्याप्त है। नवंबर के अंत से इसमें 26.2 मिलियन औंस (743 टन) यानी 80 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। दूसरी और लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के खजाने में सोना घटकर 5 साल के निचले स्तर 8,488 टन पर चला गया है।

हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल  को जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की लेकिन उन्होंने गोल्ड को इससे दूर रखा। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ऐलान के साथ ही नियर मंथ यूएस गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और बेंचमार्क LBMA स्पॉट गोल्ड के बीच स्प्रेड यानी EFP (Exchange-for-Physical) घटकर अब 20 डॉलर के आस पास आ गया है। ट्रंप के जवाबी टैरिफ के ऐलान से ठीक एक दिन पहले 1 अप्रैल को यूएस गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और बेंचमार्क LBMA स्पॉट गोल्ड के बीच 62 डॉलर प्रति औंस से ज्यादा का स्प्रेड दर्ज किया गया था।


First Published – April 9, 2025 | 6:20 PM IST



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Gold ETF: ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में दूसरा सबसे बड़ा इनफ्लो लेकिन भारत में लगातार 10 महीने बाद लोगों ने निकाले पैसे – gold etf second largest inflow in gold etf at global level but people withdraws money from gold etf in india after 10 consecutive months – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Gold ETF: ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में दूसरा सबसे बड़ा इनफ्लो लेकिन भारत में लगातार 10 महीने बाद लोगों ने निकाले पैसे – gold etf second largest inflow in gold etf at global level but people withdraws money from gold etf in india after 10 consecutive months – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Gold ETF in March 2025: गोल्ड के लिए नए साल का  तीसरा महीना भी शानदार रहा। मार्च के दौरान लगातार चौथे महीने इन्वेस्टमेंट डिमांड में तेजी देखने को मिली। गोल्ड ईटीएफ  (gold ETF) के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। मार्च तिमाही (जनवरी-मार्च 2025) की बात करें तो ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में इस दौरान दूसरा सबसे  बड़ा नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि भारत में मार्च के दौरान गोल्ड ईटीएफ से लोगों ने पैसे निकाले। अमेरिकी डॉलर मे कमजोरी, ग्लोबल लेवल पर ट्रेड वॉर की आशंका और जबरदस्त इन्वेस्टमेंट डिमांड के बीच मार्च के दौरान सोने के भाव में यूएस डॉलर और भारतीय रुपये में क्रमश: 9.9 फीसदी और 4.6 फीसदी का इजाफा हुआ।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च के दौरान ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश 8.6 बिलियन डॉलर बढ़ा। वॉल्यूम /होल्डिंग के लिहाज से इस दौरान निवेश में 92 टन की वृद्धि हुई। सोने की कीमतों में तेजी और लगातार चौथे महीने आए इनफ्लो के दम पर  मार्च 2025 के अंत तक गोल्ड ईटीएफ का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM बढ़कर रिकॉर्ड 345 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। टोटल होल्डिंग भी पिछले महीने के अंत तक 3,445 टन पर दर्ज किया गया जो मई 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। मई 2023 में टोटल होल्डिंग 3,476 टन पर था।

फरवरी की तुलना में एसेट अंडर मैनेजमेंट और टोटल होल्डिंग दोनों में कमश: 12.74 फीसदी और 2.74 फीसदी की वृद्धि हुई।

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फरवरी के दौरान गोल्ड ईटीएफ में निवेश 9.4 बिलियन डॉलर ( 100 टन) बढ़ा। जनवरी  के दौरान इसमें 3 बिलियन डॉलर (34.5 टन) की तेजी आई, जबकि 2024 के आखिरी महीने दिसंबर में 0.8 बिलियन डॉलर (3.6 टन) का नेट इनफ्लो रहा था। इससे पहले बीते साल नवंबर में लगातार छह महीने  की तेजी के बाद गोल्ड ईटीएफ में 2.1 बिलियन डॉलर यानी 28.6 टन का आउटफ्लो दर्ज किया गया था।

गोल्ड ईटीएफ में दूसरा सबसे बड़ा इनफ्लो

मार्च तिमाही की बात करें तो इस दौरान ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में 21 बिलियन डॉलर (226 टन) का नेट इनफ्लो आया। गोल्ड ईटीएफ में यह दूसरा सबसे बडा नेट इनफ्लो है। इससे ज्यादा नेट इनफ्लो सिर्फ 2020 की दूसरी तिमाही के दौरान देखा गया था। उस दौरान गोल्ड ईटीएफ में 24 बिलियन डॉलर (433 टन) का इनफ्लो दर्ज किया गया था।

नार्थ अमेरिकी  फंडों ने लगातार दूसरे महीने दिखाया दम लेकिन भारत में निवेशक पीछे हटे

मार्च के दौरान गोल्ड ईटीएफ को सबसे तगड़ा सपोर्ट नॉर्थ अमेरिका से मिला। इस दौरान नार्थ अमेरिकी  फंडों में  6.5  बिलियन  डॉलर (+67.4 टन) का नेट इनफ्लो देखा गया। फरवरी के दौरान इसमें  6.8 बिलियन डॉलर (72.2 टन) की बढ़त देखी गई थी। इससे पहले नार्थ अमेरिकी  फंडों में दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 के दौरान आउटफ्लो देखा गया था। 

पिछले महीने यूरोप में गोल्ड ईटीएफ में 1 बिलियन  डॉलर (+13.7 टन) का नेट इनफ्लो देखा गया। फरवरी और जनवरी के दौरान यूरोप में क्रमश: 0.2 बिलियन  डॉलर (+2 टन) और 3.4 बिलियन  डॉलर (+39 टन) का नेट इनफ्लो देखा गया था। हालांकि बीते साल ज्यादातर महीने यूरोप में नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया था।

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इस दौरान एशिया में  निवेशकों ने नेट 0.9 बिलियन डॉलर (+9.5 टन) डाले। एशिया में चीन इनफ्लो के मामले में सबसे आगे रहा। इस दौरान गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों ने वहां 772.1 मिलियन डॉलर (+7.7 टन)  डाले।  हालांकि भारत के गोल्ड ईटीएफ में इस दौरान 51.4 मिलियन डॉलर   (-0.5 टन) का आउटफ्लो दर्ज किया गया।

Gold ETF holdings and flows by region (Month ending 31 March, 2025)

By region

Region AUM
(bn)
Fund Flows
(US$mn)
Holdings
(tonnes)
Demand
(tonnes)
Demand
(% of holdings)
North America 178.7 6,537.9 1,784.3 67.4 3.9%
Europe 134.4 1,019.7 1,342.4 13.7 1.0%
Asia 25.4 943.5 250.7 9.5 3.9%
Other 6.8 98.4 68.0 1.3 2.0%
Total 345.4 8,599.5 3,445.3 92.0 2.7%
Global inflows / Positive Demand 12,711.1 99.5 4.2%
Global outflows / Negative Demand -4,111.6 -7.6 -1.3%

By country

Country AUM
(bn)
Fund Flows
(US$mn)
Holdings
(tonnes)
Demand
(tonnes)
Demand
(% of holdings)
US 171.7 6,456.8 1,714.5 66.6 4.0%
UK 60.4 358.2 602.7 4.3 0.7%
Switzerland 32.7 290.9 326.5 4.6 1.4%
Germany 32.5 3.7 324.5 1.0 0.3%
China P.R. Mainland 13.9 772.1 138.2 7.7 5.9%
France 7.1 331.2 70.7 3.4 5.1%
Canada 7.0 81.1 69.8 0.9 1.2%
India 6.6 -51.4 63.8 -0.5 -0.8%
Australia 4.5 78.2 45.3 0.9 2.1%
Japan 4.4 220.1 44.4 2.3 5.4%
South Africa 2.0 10.3 20.3 0.3 1.5%
Ireland 1.2 43.4 12.2 0.4 3.8%
Italy 0.5 -7.4 5.3 -0.1 -1.4%
Hong Kong SAR 0.4 0.0 3.9 -0.0 -0.1%
Turkey 0.2 10.0 2.3 0.1 4.4%
Liechtenstein 0.1 -0.4 0.5 -0.0 -0.9%
Malaysia 0.0 2.7 0.4 0.0 7.3%
Saudi Arabia 0.0 0.0 0.1 -0.0 -0.9%

(Source: World Gold Council) 

ईटीएफ के लिए 2024 भी रहा था शानदार

इससे पहले तीन वर्ष के लंबे इंतजार के बाद गोल्ड (gold) में 2024 के दौरान एक बार फिर इन्वेस्टमेंट डिमांड में तेजी देखने को मिली। 2020 के बाद पहली बार ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में 2024 के दौरान इनफ्लो यानी निवेश में इजाफा दर्ज किया गया। कैलेंडर ईयर 2024 की बात करें तो गोल्ड ईटीएफ में निवेश में 3.4 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। हालांकि टोटल होल्डिंग में इस दौरान कमी आई। टोटल होल्डिंग 2024 में 5 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। बीते साल टोटल होल्डिंग 3,218.8 टन रहा जो 2023 के 3,225.6 टन के मुकाबले 6.8 टन कम है।

वर्ष        गोल्ड ईटीएफ टोटल होल्डिंग (टन) एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) (बिलियन डॉलर)
2024 3,218.8 270.5
2023 3,225.6 214.4
2022 3,469.8 202.6
2021 3,579.4 209.7
2020 3,768.1 229.3
2019 2,875.6 140.9
2018 2,472 101.9

(Source: World Gold Council)

लेकिन सोने की कीमतों में तेजी और इनफ्लो की वजह से 2024 में गोल्ड ईटीएफ का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM 2023 के मुकाबले 26 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 271 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया।

Gold ETF holdings and flows by region in 2024

Region AUM
(bn)
Fund Flows
(US$mn)
Holdings
(tonnes)
Demand
(tonnes)
Demand
(% of holdings)
Other 5.4 464.2 64.3 4.7 7.9%
North America 138.5 2,289.2 1,650.5 8.0 0.5%
Europe 108.1 -5,773.6 1,287.6 -97.9 -7.1%
Asia 18.5 6,418.7 216.4 78.4 56.8%
Total 270.5 3,398.5 3,218.8 -6.8 -0.2%
Global inflows/ Positive Demand 59,215.4 180.1 27.6%
Global outflows/ Negative Demand -55,816.9 -186.9 -26.0%

(Source: World Gold Council)

इनफ्लो के मामले में 2024 में एशिया सबसे आगे रहा। एशियाई देशों में इस दौरान  6.4 बिलियन डॉलर का निवेश बढ़ा। नार्थ अमेरिका में भी 2.3 बिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया। सालाना आधार पर देखें तो 2020 के बाद पहली बार नार्थ अमेरिकी देशों में निवेश में इजाफा हुआ। लेकिन यूरोप में निवेशक गोल्ड ईटीएफ को लेकर उत्साहित नहीं दिखे। यूरोपीय निवेशकों ने बीते साल गोल्ड ईटीएफ से 5.8 बिलियन डॉलर निकाले। बीते महीने हालांकि यूरोपीय देशों में 0.3 बिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया।

महीना     गोल्ड ईटीएफ इनफ्लो/आउटफ्लो  
दिसंबर 2024 +0.8 बिलियन डॉलर (+3.6 टन)
नवंबर 2024 -2.1बिलियन डॉलर (-28.5 टन)
अक्टूबर 2024 +4.3 बिलियन डॉलर (+43.5 टन)
सितंबर 2024 +1.4 बिलियन डॉलर (+18.4 टन)
अगस्त 2024 +2.1 बिलियन डॉलर (+28.5 टन)
जुलाई 2024 +3.6 बिलियन डॉलर (+47.7 टन)
जून 2024 +1.4 बिलियन डॉलर (+17.5 टन)
मई 2024 +0.5 बिलियन डॉलर (+8.2 टन)
अप्रैल 2024 -2.1 बिलियन डॉलर (-32.9 टन)
मार्च 2024 -0.8 बिलियन डॉलर (-13.6 टन)
फरवरी 2024 -2.9 बिलियन डॉलर (-48.7 टन)
जनवरी 2024 -2.8 बिलियन डॉलर (-50.9 टन)

(Source: World Gold Council)

मई  2024 से पहले गोल्ड ईटीएफ पड़ा था सुस्त

मई 2024 से पहले भी लगातार 12 महीने ग्लोबल लेवल पर गोल्ड ईटीएफ में आउटफ्लो देखने को मिला था। मार्च-मई 2023 की अवधि को निकाल दें तो अप्रैल 2022 से इन्वेस्टमेंट डिमांड अप्रैल 2024 तक लगातार नेगेटिव जोन में पड़ी हुई थी। 2020 में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 49.4 बिलियन डॉलर (892.1 टन) बढ़ा था। हालांकि उसके बाद 2021 और 2022 में यह क्रमश: 8.9 बिलियन डॉलर (188.8 टन) और 2.9 बिलियन डॉलर (109.5) टन घटा। कैलेंडर ईयर 2023 के दौरान गोल्ड ईटीएफ से कुल 14.7 बिलियन डॉलर (244.2 टन) की निकासी हुई।

वर्ष        गोल्ड ईटीएफ इनफ्लो/आउटफ्लो  
2024 +3.4 बिलियन डॉलर (-6.8 टन)
2023 -14.7 बिलियन डॉलर (-244.2 टन)
2022 -2.9 बिलियन डॉलर (-109.5)
2021 -8.9 बिलियन डॉलर (-188.8 टन)
2020 +49.4 बिलियन डॉलर (+892.1 टन)
2019 +19.6 बिलियन डॉलर (+403.6 टन)
2018 +3.9 बिलियन डॉलर (+70.2 टन)

(Source: World Gold Council)


First Published – April 9, 2025 | 1:35 PM IST



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Gold, Silver Price today: ग्लोबल संकेतों के दम पर सोना उछला, चांदी भी तेज; चेक करें MCX पर भाव – gold silver rate today on 9 april 2025 check latest rates on mcx comex – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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Gold, Silver Price today: सोने-चांदी के भाव में बुधवार (9 अप्रैल) को भी तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में दोनों के वायदा भाव बढ़त के साथ खुले। खबर लिखे जाने के समय सोने के वायदा भाव 88,300 रुपये के करीब कारोबार कर रहे थे, जबकि चांदी के भाव 89,000 रुपये के करीब कारोबार कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी के भाव बुधवार सुबह मजबूती देखने को मिली।

सोना हुआ महंगा

सोने के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट बुधवार को 350 रुपये की तेजी के साथ 87,998 रुपये के भाव पर खुला। पिछला बंद भाव 87,648 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 669 रुपये की तेजी के साथ 88,317 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 88,396 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 87,998 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। सोने के वायदा भाव ने इस महीने 91,423 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

चांदी के भाव भी चढ़े

चांदी के वायदा भाव की शुरुआत तेज रही। MCX पर चांदी का बेंचमार्क मई कॉन्ट्रैक्ट बुधवार को 261 रुपये की तेजी के साथ 89,005 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 88,744 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 322 रुपये की तेजी के साथ 89,066 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 89,066 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 88,877 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। चांदी के वायदा भाव ने इस साल 1,01,999 रुपये किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी चमके

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को सोने चांदी के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। Comex पर सोना 2,998.30 डॉलर प्रति औंस के भाव पर खुला। पिछला क्लोजिंग प्राइस 2,990.20 डॉलर प्रति औंस था। खबर लिखे जाने के समय यह 29.10 डॉलर की तेजी के साथ 3,019.30 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। पिछले सप्ताह सोने के वायदा भाव ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए। Comex पर चांदी के वायदा भाव 29.78 डॉलर के भाव पर खुले, पिछला क्लोजिंग प्राइस 29.68 डॉलर था। खबर लिखे जाने के समय यह 0.12 डॉलर की तेजी के साथ 29.80 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।

MCX, Comex पर भाव

MCX Open Last Close LTP
सोना 87998 87,648 88,317
चांदी 89,005 88,744 89,066
Comex Open Last Close LTP
सोना 2,998.30 2,990.20 3019.30
चांदी 29.78 29.68 29.80

(नोट: MCX में सोने के वायदा भाव रुपये प्रति 10 ग्राम, चांदी रुपये प्रति किलो में हैं। कॉमेक्स में दोनों के वायदा भाव डॉलर प्रति ओंस में हैं। last trading price (LTP) खबर लिखे जाने के समय के हैं।)


First Published – April 9, 2025 | 9:34 AM IST



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Trump Tariffs: कमोडिटी कीमतों की गिरावट से शेयर बाजार पर दबाव, लेकिन उपभोक्ता कंपनियों को राहत – trump tarifs pressure on the stock market due to fall of commodity prices but relief to consumer companies – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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टैरिफ की घोषणा करते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

ट्रंप शुल्क के बाद कमोडिटी एवं कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट का प्रभाव भारत में शेयर मूल्यों और कंपनी जगत की आय में गिरावट के रूप में दिखेगी। ऐतिहासिक तौर पर कमोडिटी एवं कच्चे तेल की कीमतों और शेयर मूल्य एवं कॉरपोरेट मुनाफे के बीच काफी अनुकूल संबंध रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, कमोडिटी कीमतों में नरमी से आर्थिक वृद्धि एवं कुल मांग का संकेत मिलता है। उसका कंपनी जगत की वृद्धि एवं वित्तीय प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हालांकि कमोडिटी और ऊर्जा की कीमतों में नरमी से एफएमसीजी, पेंट्स, सीमेंट, फार्मा और वाहन जैसे उपभोक्ता उद्योगों की आय और मार्जिन को दम मिलेगा। मगर खनन एवं धातु कंपनियों और तेल एवं गैस कंपनियों जैसे कमोडिटी उत्पादकों की आय में गिरावट से उसका प्रभाव खत्म हो सकता है।

सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के सह-प्रमुख (अनुसंधान एवं इक्विटी रणनीति) धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘ऐतिहासिक तौर पर कमोडिटी की कीमतें, कॉरपोरेट आय और शेयर बाजार की चाल एक ही दिशा में होती है। इसलिए कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट से आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट आय एवं मुनाफे में नरमी का संकेत मिलता है।’

सिन्हा ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से थोक मुद्रास्फीति में कमी दिख सकती है। मगर खुदरा मुद्रास्फीति पर उसका समग्र प्रभाव फिलहाल स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट के साथ-साथ रुपये के कमजोर होने से कीमतें बढ़ जाती हैं। उदाहरण के लिए, साल 2020 में कोविड-19 वै​श्विक महामारी के कारण शेयर मूल्य एवं कॉरपोरेट आय में भारी गिरावट के साथ-साथ कच्चे तेल एवं तांबा, एल्युमीनियम, इस्पात आदि औद्योगिक धातुओं की कीमतों में भी भारी गिरावट आई थी।

कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस, औद्योगिक धातुओं, कृषि और कीमती धातुओं सहित 19 कमोडिटी की कीमतों पर नजर रखने वाला सीआरबी कमोडिटी सूचकांक जनवरी और अप्रैल 2020 के बीच 12.6 फीसदी लुढ़क गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी 58 फीसदी की कमी आई थी। इसके मुकाबले समान अव​धि में निफ्टी50 में 17.6 फीसदी की गिरावट आई और प्रति शेयर आय आधारित ईपीएस सूचकांक 13.3 फीसदी नीचे था। ईपीएस सूचकांक निफ्टी50 में शामिल कंपनियों के एकीकृत शुद्ध लाभ पर नजर रखता है। 

इसी प्रकार कैलेंडर वर्ष 2020 की दूसरी छमाही और 2021 में शेयर मूल्य एवं कॉरपोरेट आय में जबरदस्त तेजी आई थी। मगर उसके साथ-साथ कमोडिटी एवं ऊर्जा की कीमतों में भी उतनी ही बड़ी उछाल दर्ज की गई थी। 

अप्रैल 2020 से अप्रैल 2022 के बीच निफ्टी50 सूचकां में 74 फीसदी की उछाल आई थी जिसे उस दौरान ईपीएस सूचकांक में 51 फीसदी की वृद्धि से दम मिला था। उस दौरान सीआरबी कमोडिटी सूचकांक में 82 फीसदी, ब्रेंट क्रूड में 350 फीसदी और लंदन मेटल एक्सचेंज सूचकांक में 102 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी।

कोविड महामारी के बाद कमोडिटी की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई जिससे समग्र कॉरपोरेट आय में भारी वृद्धि दर्ज की गई। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, कोल इंडिया, एनएमडीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी जैसी कंपनियां वित्त वर्ष 2022 में सबसे अ​धिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शुमार रहीं। 


First Published – April 8, 2025 | 10:21 PM IST



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Gold investment: डॉलर छोड़ सोने की तरफ दौड़े बड़े देश! क्या आपकी बचत सही जगह लगी है? जानें एक्सपर्ट्स की राय – central banks are hoarding gold what does it mean for you – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Gold investment: डॉलर छोड़ सोने की तरफ दौड़े बड़े देश! क्या आपकी बचत सही जगह लगी है? जानें एक्सपर्ट्स की राय – central banks are hoarding gold what does it mean for you – बिज़नेस स्टैंडर्ड


पिछले कुछ सालों में दुनिया के बड़े सेंट्रल बैंकों ने अपने विदेशी रिज़र्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा दी है। साल 2024 में कुल 1,045 टन सोना खरीदा गया, जो दिखाता है कि अब देश अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए सोने को ज़रूरी बना रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि दुनियाभर में आर्थिक हालात अस्थिर हैं—ब्याज दरें गिर रही हैं, महंगाई बढ़ रही है और कई देशों के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में सोना एक ऐसा ज़रिया बन गया है, जो किसी भी सरकार या मुद्रा पर निर्भर नहीं होता।

डॉलर से दूरी बनाने की मुहिम में सोना बना सबसे बड़ा सहारा

अमेरिकी डॉलर लंबे समय से दुनियाभर की सबसे मजबूत मुद्रा रहा है, लेकिन अब कई देश इससे दूरी बनाना चाहते हैं। इस “डॉलर पर निर्भरता कम करो” अभियान की शुरुआत चीन ने की थी। चीन चाहता है कि उसका विदेशी पैसा सिर्फ डॉलर में न हो, इसलिए उसने सोने की खरीद बढ़ाई। अब चीन के साथ-साथ भारत, रूस, तुर्की और कज़ाखस्तान जैसे देश भी इसी राह पर हैं। सोना इसलिए भी पसंद किया जा रहा है क्योंकि इसकी कीमतें किसी एक देश की नीतियों पर निर्भर नहीं होतीं।

क्यों बैंकों के लिए इतना जरूरी हो गया है सोना?

जब दुनियाभर में हालात खराब होते हैं—जैसे कि युद्ध, व्यापार विवाद या आर्थिक मंदी—तो सबसे पहले असर मुद्रा पर पड़ता है। ऐसे वक्त में सोना एक ऐसा विकल्प है, जिसकी मांग हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि सेंट्रल बैंक इसे अब बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं। उन्हें यकीन है कि इससे उनके रिज़र्व सुरक्षित रहेंगे और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ेगा।

क्या आम निवेशकों को भी सोने में निवेश करना चाहिए?

सोना सिर्फ सरकारों या बैंकों के लिए ही नहीं, आम लोगों के लिए भी हमेशा से एक भरोसेमंद निवेश रहा है। इस बारे में कमल ज्वेलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह कहते हैं कि जब भी दुनिया में किसी तरह का संकट आता है, निवेशक सबसे पहले सोने की तरफ भागते हैं। यही वजह है कि इसे “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित ठिकाना कहा जाता है।

हालांकि, आनंद राठी वेल्थ के डायरेक्टर चेतन शेनॉय का मानना है कि सोना पूरी निवेश रणनीति का सिर्फ एक हिस्सा होना चाहिए। उनके मुताबिक, एक संतुलित पोर्टफोलियो में 80 फीसदी निवेश शेयर बाजार में और बाकी 20 फीसदी डेट यानी फिक्स्ड इनकम और सोने में होना चाहिए। सोने की हिस्सेदारी कुल निवेश का 5 से 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

सोने की कमाई में उतार-चढ़ाव, शेयर बाज़ार से पीछे

हालांकि सोना एक सुरक्षित विकल्प है, लेकिन हर बार ये बहुत अच्छा मुनाफा नहीं देता। पिछले पांच सालों में कई बार ऐसा हुआ जब सोने का रिटर्न सिर्फ 1.73 फीसदी ही रहा। वहीं दूसरी तरफ, शेयर बाजार का Nifty 50 इंडेक्स लगातार अच्छा और स्थिर मुनाफा देता आया है। इससे पता चलता है कि अगर आप ज्यादा मुनाफा चाहते हैं और थोड़ी रिस्क ले सकते हैं, तो इक्विटी यानी शेयरों में निवेश ज़्यादा बेहतर हो सकता है।

भारत में सोने से जुड़ी भावनाएं और ज्यादा निवेश

भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, एक परंपरा है। त्योहारों, शादियों और खास मौकों पर सोना खरीदना आम बात है। यही वजह है कि भारतीय घरों में सोने की हिस्सेदारी बाकी दुनिया के मुकाबले कहीं ज़्यादा है। लेकिन जानकारों की मानें तो भावनाओं से ज़्यादा जरूरी है निवेश में समझदारी। सोना पोर्टफोलियो का हिस्सा हो सकता है, लेकिन पूरा भरोसा सिर्फ उसी पर नहीं किया जाना चाहिए।

क्या आने वाले समय में सोने की कीमतें और बढ़ेंगी?

कॉलिन शाह का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में और उछाल आ सकता है। उनके मुताबिक, इसके पीछे चार बड़े कारण होंगे — अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापार युद्ध, मंदी की आशंका, रूस-यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में तनाव, और सेंट्रल बैंकों की लगातार हो रही खरीद। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह हालात बने रहे, तो भारत में सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में $3,200 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।


First Published – April 8, 2025 | 6:04 PM IST



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सबसे सस्ता सोना यहां मिलेगा! सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर डिस्काउंट 5 फीसदी के पार, दोगुना हुआ डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम – buy cheapest gold here sovereign gold bond on 5 percent discount daily trading volume doubled – बिज़नेस स्टैंडर्ड

सबसे सस्ता सोना यहां मिलेगा! सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर डिस्काउंट 5 फीसदी के पार, दोगुना हुआ डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम – buy cheapest gold here sovereign gold bond on 5 percent discount daily trading volume doubled – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Sovereign Gold Bond on Discount: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी टैरिफ की घोषणा के बाद पिछले 3 ट्रेडिंग सेशन में सोना तकरीबन 4 फीसदी टूटा है। पिछले गुरुवार (3 अप्रैल) को जहां कीमतें एमसीएक्स (MCX) पर 91,423 रुपये के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई, फिलहाल 88,500 (5:30 pm IST) के करीब है। सोमवार (7 अप्रैल) को तो यह 86,710 रुपये तक नीचे चली गई। आईबीजेए (IBJA) के मुताबिक स्पॉट मार्केट में फिलहाल सोना 24 कैरेट (999) 8,831 के भाव पर है जबकि 3 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में इसने 9,102 के रिकॉर्ड हाई को छू लिया था।

अगर आप मार्केट रेट पर 400 रुपये से ज्यादा यानी 5 फीसदी के डिस्काउंट पर सोना खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेहतरीन विकल्प है। इस बॉन्ड पर आपको सालाना 2.5 फीसदी इंटरेस्ट भी मिलता है। वहीं यदि आप इसे मैच्योरिटी तक होल्ड करते हैं तो आपको कोई टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता है।

हालांकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कोई भी सीरीज पिछले साल फरवरी के बाद जारी नहीं की गई है। मौजूदा फॉर्म में इसके आगे भी जारी होने की संभावना नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप इस बॉन्ड को खरीद नहीं सकते। वैसे निवेशक जिनके पास डीमैट अकाउंट है वे इसे सेकेंडरी मार्केट यानी स्टॉक एक्सचेंज (BSE/NSE) पर खरीद सकते हैं।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में न सिर्फ इस समय बेहतर ट्रेडिंग वॉल्यूम देखने को मिल रहा है बल्कि स्टॉक एक्सचेंज (BSE & NSE) पर ज्यादातर बॉन्ड तकरीबन 4-5 फीसदी  डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं। डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम सोमवार (7 अप्रैल) को तो 40 हजार यूनिट के पार चला गया। पिछले कुछ दिनों से डेली वॉल्यूम 30 हजार से 40 हजार यूनिट के बीच रहा है जबकि पहले यह 10 हजार से 20 हजार यूनिट के बीच होता था।

Also read: Central Banks Gold Buying ! चीन के सेंट्रल बैंक ने लगातार 5वें महीने मार्च में खरीदा सोना लेकिन इस देश ने सबको छोड़ा पीछे

एनएसई (NSE) से प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की 60 किस्त ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं, जिनमें सबसे ज्यादा डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम बुधवार (8 अप्रैल) को 66वें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी  सीरीज (SGBDE31III) में देखा गया। इस किस्त में आज ट्रेडिंग वॉल्यूम 4,372 ग्राम दर्ज किया गया। यह बॉन्ड आज कारोबार की समाप्ति पर मार्केट प्राइस (8,855 रुपये) के मुकाबले 297 रुपये डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा था। गोल्ड बॉन्ड के इश्यू और रिडेम्प्शन प्राइस के निर्धारण में आईबीजेए की ओर से जारी सोने की कीमतों को ही आधार बनाया जाता है।

आईबीजेए (IBJA) के अनुसार मंगलवार (8 अप्रैल 2025) को बेंचमार्क 24 कैरेट गोल्ड (999) 8,855 रुपये प्रति 1 ग्राम के भाव पर बंद हुआ। NSE में आज कुल 34,504 यूनिट यानी ग्राम सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का ट्रेड हुआ।

अब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की उन किस्तों पर डिस्काउंट का जायजा लेते हैं  जहां ट्रेडिंग वॉल्यूम आज शानदार रहा

SGBDE31III (2023-24, Series III)

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP Market price as per IBJA Discount/premium

 

 

2023-24, Series III

 

Rs 6,199 4,372 units Rs 8,558 Rs 8,855  Rs -297

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBAUG28V (2021-22, Series II)

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP Market price as per IBJA Discount/premium
 

2021-22, Series II

 

 Rs 5,334 3,942 units Rs 8,439 Rs 8,855 Rs -416

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBSEP31II (2023-24, Series II) 

SGB Tranche

Issue price Daily volume LTP on NSE  Market price as per IBJA Discount/premium
2023-24, Series II Rs 5,923 3,395 units Rs 8,501  

Rs 8,855

 

Rs -354

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBFEB32IV (2023-24, Series IV)

SGB  Tranche Issue price Daily volume LTP  Market price as per IBJA Discount/premium
 

2023-24, Series IV

 

Rs 6,263 2,802 units Rs 8,665.05 Rs 8,855 Rs -189.95

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBAPR28I (2020-21, Series I)

SGB  Tranche Issue price Daily volume LTP  Market price as per IBJA Discount/premium
 

2020-21, Series I

 

Rs 4,639 1,985 units Rs 8,450 Rs 8,855 Rs -405

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBMAY29I (2021-22, Series I)

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP Market price as per IBJA Discount/premium
 

 

2021-22, Series I

 

 

Rs 4,777 1,902 units Rs 8,435 Rs 8,855 Rs -420

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBJUN31I (2023-24, Series I)

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP Market price as per IBJA Discount/premium
 

2023-24, Series I

 

Rs 5,926 1,761 units Rs 8,472.99 Rs 8,855 Rs -382.01

Source: RBI, NSE, IBJA

SGBJUL28IV (2020-21, Series V) 

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP on NSE  Market price as per IBJA Discount/premium
2020-21, Series V Rs 4,732 1,423 units Rs 8,431  

Rs 8,855

 

Rs -424

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBJUL29III (2021-22, Series III) 

 

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP on NSE  Market price as per IBJA Discount/premium
2021-22, Series III0 Rs 4,889 1,183 units Rs 8,415  

Rs 8,855

 

Rs -440

Source: RBI, NSE, IBJA

 

SGBMR29XII (2023-24, Series I)

SGB Tranche Issue price Daily volume LTP Market price as per IBJA Discount/premium
 

2023-24, Series I

 

Rs 5,926 1,095 units Rs  8,400.10 Rs 8,855 Rs -454.9

Source: RBI, NSE, IBJA

 


First Published – April 8, 2025 | 6:02 PM IST



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