गुड़ और खांडसारी इकाइयों पर सख्ती करेगी सरकार – government will strict on jaggery and khandasari units – बिज़नेस स्टैंडर्ड

गुड़ और खांडसारी इकाइयों पर सख्ती करेगी सरकार – government will strict on jaggery and khandasari units – बिज़नेस स्टैंडर्ड


केंद्र सरकार ने बड़ी गुड़ और खाड़सारी इकाइयों और बेलगाम चीनी मिलों की लगाम कसने के लिए 1966 के चीनी नियंत्रण आदेश में संशोधन अधिसूचित करने का फैसला किया है।

इसमें संशोधन कर केंद्र सरकार 500 टन पेराई प्रतिदिन (टीसीडी) करने वाली 66 बड़ी गुड़ और खांडसारी इकाइयों को चीनी नियंत्रण आदेश के दायरे में लाएगा। इनमें से ज्यादातर इकाइयां उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में हैं। इस संशोधन की बदौलत गन्ना किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो पाएगा और इससे चीनी उत्पादन का सही अनुमान लगाने में भी मदद मिलेगी। भारत की सालाना करीब 31 प्रतिशत गन्ना उत्पादन की खपत गुड़ और खांडसारी इकाइयों में होती है।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया, ‘इस संशोधन का उद्देश्य चीनी क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले नियामकीय ढांचे को वर्तमान उद्योग की गतिशीलता और प्रौद्योगिकी में आए बदलाव के अनुरूप सरल और कारगर बनाना है।’ सचिव ने बताया कि इन्हें शामिल करने से गन्ना किसानों को खांडसारी इकाइयों से उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) हासिल हो पाएगा और इसके अलावा चीनी उत्पादन का बेहतर अनुमान हासिल होगा।

खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्वनी श्रीवास्तव ने बताया कि देश में 373 खांडसारी इकाइयों की कुल क्षमता करीब 95,000 टन पेराई प्रतिदिन है। श्रीवास्तव ने बताया, ‘इनमें से 66 इकाइयों की क्षमता 500 टीसीडी से अधिक है। इन इकाइयों को इस आदेश के तहत विनियमित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को नैशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) के तहत पंजीकृत किया जाएगा।’ इन इकाइयों को दो माह में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत करना होगा। इस आदेश में विभिन्न उप उत्पादों में गन्ने की खोई, गुड़, गुड़ की ढेली और ऐथनॉल शामिल हैं।  

संशोधित आदेश में विभिन्न चीनी उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण की परिभाषाएं अपनाई गई हैं और इसमें चीनी मूल्य विनियमन से संबंधित खंड शामिल हैं। इससे पहले वे अन्य आदेश का हिस्सा होती थीं।

चीनी का निर्यात : भारत की चीनी मिलें 2025-26 के सत्र में कम मांग के कारण आबंटित 10 लाख टन की जगह 8 लाख टन चीनी का निर्यात ही कर सकती हैं। इसमें से शेष 2 लाख टन चीनी की खपत देश में हो जाएगी। अभी तक 30 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया है।

राशन में गेहूं आपूर्ति बहाली की समीक्षा

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि केंद्र मौजूदा खरीद अभियान के समाप्त होने के बाद और निर्यात की अनुमति देना संभव नहीं होने की स्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गेहूं आबंटन पात्रता बहाली के बारे में समीक्षा करेगा।

उन्होंने बताया कि केंद्र ने अभी तक 256 लाख टन गेहूं की खरीद की है और यह बीते साल की इस अवधि की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।

उत्तर प्रदेश में बीते साल की तुलना में खरीद बेहतर है लेकिन यह लक्ष्य 30 लाख टन से कम है। 


First Published – May 1, 2025 | 10:57 PM IST



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दो हफ्ते के निचले स्तर पर सोना – gold at a two week low – बिज़नेस स्टैंडर्ड

दो हफ्ते के निचले स्तर पर सोना – gold at a two week low – बिज़नेस स्टैंडर्ड


सोने की कीमत गुरुवार को करीब 2 फीसदी गिरकर दो हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई। व्यापार जोखिम कम होने और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ने के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई है। इसके अलावा डॉलर के मजबूत होने का भी असर कीमतों में नरमी पर पड़ा है। बीते 15 अप्रैल को निचले स्तर पर पहुंचने के बाद आज हाजिर सोना 2 फीसदी कम होकर 3,222.66 डॉलर प्रति औंस रहा। अमेरिकी वायदा सोना 2.7 फीसदी कम होकर 3,230.80 डॉलर था।

हालांकि, डॉलर सूचकांक में 0.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जिससे अन्य मुद्राओं को रखने वाले खरीदारों के डॉलर में सोने की कीमत बढ़ गई।

यूबीएस के विश्लेषक जियोवैनी स्टानोवो ने बताया, ‘फिलहाल उम्मीद है कि कुछ व्यापार सौदे जल्द किए जाएंगे, जिससे कम शुल्क बरकरार रहेगा।’ उन्होंने कहा कि इस आशावाद के साथ डॉलर की मजबूती से सोने पर दबाव पड़ रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि भारत, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ सौदे संभावित हैं। उन्होंने कहा था कि इसके अलावा चीन के साथ सौदा होने की अच्छी उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि चीनी के मीडिया संस्थान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा था कि अमेरिका ने ट्रंप की 145 फीसदी जवाबी शुल्क पर बात करने के लिए चीन से संपर्क किया है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तीन साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नरमी आई है। इसका कारण आयात में उछाल को बताया जा रहा है, क्योंकि कारोबारों ने उच्च शुल्क लगाए जाने से बचने की कोशिश की है।

मगर फेडरल रिजर्व ने नीति निर्माताओं ने संकेत दिया है कि अल्पकालिक ब्याज दरों में तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा जब तक मुद्रास्फीति के केंद्रीय बैंक के 2 फीसदी लक्ष्य के करीब पहुंचने अथवा नौकरी बाजार में संभावित गिरावट के स्पष्ट तौर पर संकेत नहीं मिलते हैं।

इधर, निवेशकों को शुक्रवार को आने वाली गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट का भी इंतजार है, जो फेड की नीति की दिशा तय करेगी। जियोवैनी स्टानोवो ने कहा, ‘पेरोल रिपोर्ट कमजोर होने पर फेड इस साल दरों में और कटौती कर सकता है और इससे आने वाले महीनों में सोना फिर 3,500 डॉलर प्रति औंस पहुंच सकता है।’

रॉयटर्स के तिमाही सर्वेक्षण में विश्लेषकों ने पहली बार सोने की सालाना औसत कीमत 3,000 डॉलर से अधिक होने का अनुमान लगाया है। राजनीतिक अस्थिरता और वित्तीय उठापटक से बचाने वाली पीली धातु की कीमत बीते हफ्ते 3,500 डॉलर तक पहुंच गई थी। वहीं, हाजिर चांदी की कीमत 1.8 फीसदी कम होकर 31.99 डॉलर प्रति औंस हो गई और प्लैटिनम की कीमत 1 फीसदी गिर 956.63 डॉलर तथा पैलेडियम की कीमत 0.3 फीसदी बढ़कर 941.10 डॉलर थी।


First Published – May 1, 2025 | 10:33 PM IST



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Wheat procurement: सरकार ने MSP पर की 250 लाख टन गेहूं खरीदी, 21 लाख किसानों को ₹62,155 करोड़ का भुगतान – wheat procurement government purchased 250 lakh tonnes of wheat from 21 lakh farmers – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Wheat procurement: सरकार ने MSP पर की 250 लाख टन गेहूं खरीदी, 21 लाख किसानों को ₹62,155 करोड़ का भुगतान – wheat procurement government purchased 250 lakh tonnes of wheat from 21 lakh farmers – बिज़नेस स्टैंडर्ड


इस साल गेहूं की सरकारी खरीद खूब हो रही है। गेहूं की सरकारी खरीद का आंकड़ा 250 लाख टन को पार कर गया है। सरकारी खरीद से लाखों गेहूं किसानों को फायदा हो रहा है और उन्हें गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिल रहा है। सरकारी खरीद की मौजूदा चाल को देखते हुए इस साल पिछले साल से अधिक गेंहू की खरीद होने की उम्मीद है।

इस साल अब तक कितनी हुई गेहूं की सरकारी खरीद?

केंद्रीय उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश भर के प्रमुख राज्यों में रबी विपणन वर्ष (RMS) 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद सुचारू रूप से जारी है। चालू रबी विपणन वर्ष में 312 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 30 अप्रैल तक केंद्रीय पूल में 256.31 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। पिछले साल की इसी अवधि में 205.41 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी। इस तरह इस साल गेहूं की सरकारी खरीद में पिछले साल की तुलना में 24.78 फीसदी इजाफा हुआ।

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गेहूं की खरीद करने वाले सभी पांच प्रमुख राज्यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक गेहूं की खरीद की है। इन राज्यों में क्रमशः 103.89 लाख टन, 65.67 लाख टन, 67.57 लाख टन, 11.44 लाख टन और 7.55 लाख टन गेहूं की खरीद की गई। RMS 2025-26 में खरीद अवधि अभी भी शेष है। इसलिए गेहूं की खरीद के पिछले वर्ष के आंकड़ों को पार करने की पूरी संभावना है। पिछले साल गेहूं की सरकारी खरीद करीब 262 लाख टन दर्ज की गई थी।

गेहूं सरकारी खरीद से कितने किसानों को लाभ और कितना मिला पैसा?

इस साल गेहूं की अधिक खरीद से लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार RMS 2025-26 के दौरान 21.03 लाख किसानों से गेहूं की खरीद की जा चुकी है। सरकारी एजेंसियों को गेहूं बेचने वाले किसानों को 62,155.96 करोड़ रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्राप्त हुआ।

मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा कि इस वर्ष गेहूं की खरीद में हुई बढ़ोतरी खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के ठोस प्रयासों का परिणाम है, जिनकी शुरुआत पिछले वर्षों से प्राप्त सीखों के आधार पर राज्य-विशिष्ट कार्य योजनाएं तैयार करने और राज्यों के साथ पहले से ही साझा करने से हुई। इन प्रयासों के अंतर्गत किसानों को जागरूक करना, किसानों का पंजीकरण, खरीद केंद्रों की तैयारी, किसानों


First Published – May 1, 2025 | 4:25 PM IST



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मई की शुरुआत में राहत की खबर! LPG सिलेंडर हुआ सस्ता, ATF में ₹4000 तक की गिरावट; दिल्ली से चेन्नई तक जानें नए रेट – may 2025 lpg cylinder atf price cut details for delhi to chennai – बिज़नेस स्टैंडर्ड

मई की शुरुआत में राहत की खबर! LPG सिलेंडर हुआ सस्ता, ATF में ₹4000 तक की गिरावट; दिल्ली से चेन्नई तक जानें नए रेट – may 2025 lpg cylinder atf price cut details for delhi to chennai – बिज़नेस स्टैंडर्ड


LPG-ATF Price on May 1: देश की तेल विपणन कंपनियों ने आज से 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹14.50 की कटौती की है। इसके साथ ही, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी कटौती की है। इससे एयरलाइंस को बड़ी राहत मिली है और आने वाले दिनों में हवाई सफर सस्ता हो सकता है। अप्रैल 2025 में भी कंपनियों ने ₹5,870.54 प्रति किलोलीटर की बड़ी कटौती की थी।

देखें कि अप्रैल और मई के बीच ATF की कीमतों में कितना अंतर आया:

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में मई 2025 में अप्रैल के मुकाबले अच्छी खासी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली में अप्रैल में ATF का रेट ₹89,441.18 प्रति किलोलीटर था, जो मई में घटकर ₹85,486.80 हो गया है। यानी कुल ₹3,954.38 की कमी आई है। कोलकाता में यह दर अप्रैल में ₹91,921.00 थी, जो मई में ₹88,237.05 हो गई—यहां ₹3,683.95 की गिरावट दर्ज की गई है। मुंबई में भी अप्रैल के ₹83,575.42 के मुकाबले मई में दर ₹79,855.59 हो गई है, यानी ₹3,719.83 की राहत मिली है। चेन्नई में अप्रैल में ATF का दाम ₹92,503.80 था, जो मई में घटकर ₹88,494.52 हो गया—यहां सबसे ज्यादा ₹4,009.28 की कटौती की गई है।

अगर बात घरेलू एयरलाइंस की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लगने वाले ATF रेट की करें, तो ये कीमतें डॉलर में तय होती हैं। इसमें भी चेन्नई सबसे महंगा रहा, जहां कीमत $763.34 प्रति किलोलीटर रही। कोलकाता में यह दर $806.46 रही, जो चारों महानगरों में सबसे अधिक है। दिल्ली और मुंबई में ATF की दरें क्रमशः $768.09 और $768.23 प्रति किलोलीटर दर्ज की गईं।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटे, घरेलू सिलेंडर की कीमतें स्थिर

तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹14.50 की कटौती की है, जो आज से प्रभावी हो गई है। इस कटौती के बाद दिल्ली में इस सिलेंडर की खुदरा कीमत ₹1,747.50 हो गई है, जो पहले ₹1,762.00 थी।​

अन्य महानगरों में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कमी दर्ज की गई है:​

कोलकाता: ₹1,868.50 से घटकर ₹1,851.50

मुंबई: ₹1,713.50 से घटकर ₹1,699.00

चेन्नई: ₹1,921.50 से घटकर ₹1,906.00

यह कटौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते की गई है। तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इससे पहले, 1 अप्रैल 2025 को भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹41 की कटौती की गई थी।​

घरेलू उपयोग के लिए 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत ₹853.00, कोलकाता में ₹879.00, मुंबई में ₹852.50 और चेन्नई में ₹868.50 बनी हुई है।​

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में यह कमी होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए राहत की खबर है, जो बड़े पैमाने पर एलपीजी का उपयोग करते हैं।


First Published – May 1, 2025 | 9:03 AM IST



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Gold sales: मुंबई में अच्छी ग्राहकी, दिल्ली में कम बिक्री – gold sales low sales in delhi in mumbai – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Gold sales: मुंबई में अच्छी ग्राहकी, दिल्ली में कम बिक्री – gold sales low sales in delhi in mumbai – बिज़नेस स्टैंडर्ड


अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है मगर इस बार सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं जिससे खरीदारों में ज्यादा उत्साहन नहीं दिखा। कारोबारियों के मुताबिक मुंबई में मांग अच्छी रही मगर दिल्ली में बिक्री उम्मीद के अनुरूप नहीं बढ़ी। बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन को अक्षय तृतीया पर कम से कम 100 टन सोना बिकने की उम्मीद है। पिछले साल अक्षय तृतीया पर मुंबई में 82 टन सोना बिका था। मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 97,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 92,000 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार जैन ने बताया कि इस बार आभूषणों के साथ गिन्नियों की भी भारी मांग देखी जा रही है। खरीदारी करने आए करीब 40 फीसदी ग्राहकों ने सोने के सिक्के खरीदे। दूसरी ओर दिल्ली में दुकानें सुनसान दिखाई दीं क्योंकि मांग 50 फीसदी तक घट गई हैं।

दिल्ली के ऑल बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने कहा कि दिल्ली के विभिन्न बाजारों में दुकानें शाम 7 बजे तक बंद हो गईं। मैंने अपनी ज्वैलरी की दुकान बंद कर दी और घर चला गया। उन्होंने कहा कि ग्राहक हल्के वजन के आभूषण खरीदना पसंद कर रहे थे, वहीं सोना महंगा होने से कुछ ग्राहकों को चांदी के सिक्के भी खरीदते देखा गया। दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 98,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।


First Published – April 30, 2025 | 10:47 PM IST



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पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा रुपया – rupee reached five months high – बिज़नेस स्टैंडर्ड

पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा रुपया – rupee reached five months high – बिज़नेस स्टैंडर्ड


अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की व्यापार नीति के कारण डॉलर में नरमी तथा विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक की अनुपस्थिति के बीच रुपये ने करीब ढाई साल में अपनी सर्वश्रेष्ठ एक दिवसीय बढ़त दर्ज की और यह पांच महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को 85.25 डॉलर प्रति डॉलर के मुकाबले आज स्थानीय मुद्रा 84.49 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुई। यह इस कैलेंडर वर्ष में इसमें सबसे बड़ी एक दिन की वृद्धि है। स्थानीय मुद्रा में 0.9 फीसदी का इजाफा हुआ जो 11 नवंबर 2022 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

10 फरवरी, 2025 को 87.95 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निम्नतम स्तर पर पहुंचने के बाद भारतीय मुद्रा ने मार्च में 2 फीसदी और अप्रैल में 1.16 फीसदी की वृद्धि के साथ उल्लेखनीय वापसी की। 2025 में इसमें अब तक 1.33 फीसदी की वृद्धि हुई है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, भारतीय रुपये में नवंबर 2022 के बाद सबसे बड़ी एक दिवसीय बढ़त देखी गई। इस उछाल का श्रेय महीने के अंत में समायोजन और छुट्टियों से पहले अमेरिकी डॉलर में तकनीकी बिकवाली को दिया जा सकता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद बाजार से भारतीय रिजर्व बैंक की स्पष्ट अनुपस्थिति और अन्य एशियाई मुद्राओं के मजबूत होने से व्यापारियों की सतर्कता कुछ हद तक कम हो गई जिससे रुपये को सहारा मिला।

उन्होंने कहा, निकट भविष्य में हाजिर बाजार में डॉलर-रुपये को 84.10 के आसपास समर्थन मिल सकता है और 85.50 के आसपास प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। मौजूदा रुझान रुपये में और मजबूती के पक्ष में दिख रहे हैं।

लाभ को बचाए रखने के लिए निर्यातकों की डॉलर बिक्री, साथ ही आयातकों की डॉलर मांग में नरमी के कारण (जिन्होंने पिछले महीने की तेजी के दौरान पहले ही अपने जोखिम को कम कर लिया था) स्थानीय मुद्रा ने 2025 में सबसे तेज वृद्धि देखी। व्यापारियों को भी उम्मीद थी कि भारत, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने वाले शुरुआती देशों में से एक होगा क्योंकि ट्रंप दोनों देशों के बीच सकारात्मक व्यापार वार्ता पर जोर दे रहे हैं।

एक विदेशी बैंक के डीलर ने कहा, हालांकि यह कहना कठिन है कि ये स्तर बरकरार रहेंगे या नहीं, लेकिन आरबीआई के लिए डॉलर खरीदने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने का यह अच्छा समय है। भू-राजनीतिक अनुकूलता, कमजोर होते अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व द्वारा नरम रुख अपनाने की उम्मीदों के कारण एशियाई मुद्राओं के लिए संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।

वर्ष 2025 में रुपये से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कुछ एशियाई मुद्राओं में दक्षिण कोरियाई वॉन, फिलिपींस का पेसो, थाई भाट और मलेशियाई रिंगिट आदि शामिल हैं। ब्रोकरेज फर्म के एक ट्रेडर ने कहा, रुपये में तेजी के कई कारण हैं। पहला है एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) का डेट और इक्विटी दोनों बाजारों में निवेश। दूसरा, बाजार ने इस तथ्य को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को खत्म करने के करीब है। दिन के दौरान स्टॉप लॉस 84.95 के स्तर से नीचे ट्रिगर हो रहे थे और आखिरी बात, महीने के अंत में निवेश होना था।

डीलरों ने कहा कि शुक्रवार को भी निवेश जारी रहने की उम्मीद है। शुक्रवार को दोनों के नीचे जाने के जोखिम के साथ 84.25/85.00 के दायरे में रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर गुरुवार को विदेशी मुद्रा और मुद्रा बाजार बंद रहेंगे। बुधवार को बॉन्ड यील्ड काफी हद तक स्थिर रही और 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर मंगलवार को 6.34 फीसदी की तुलना में 6.35 फीसदी की दर रही। डीलरों ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक तनाव के कारण व्यापारी सतर्क रहे। केंद्रीय बैंक के नकदी बढ़ाने, नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करने और मौद्रिक नीति के रुख को उदार बनाने के कारण अप्रैल में सरकारी बॉन्ड के यील्ड में 23 आधार अंकों की गिरावट आई है।


First Published – April 30, 2025 | 10:38 PM IST



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