भारत में सोने की मांग 800 टन के पार, 5 साल में Gold ETF की होल्डिंग्स 200% ज्यादा बढ़ी – gold demand in india crosses 800 tonnes gold etf holdings increased by 200 pc in 5 years – बिज़नेस स्टैंडर्ड

 भारत में सोने की मांग 800 टन के पार, 5 साल में Gold ETF की होल्डिंग्स 200% ज्यादा बढ़ी – gold demand in india crosses 800 tonnes gold etf holdings increased by 200 pc in 5 years – बिज़नेस स्टैंडर्ड


भारत में सोने से लगाव काफी पुराना है। देश की आस्था और संस्कृति में सोना रचा-बसा है। लगभग हर घर में सोने की खरीदारी का चलन है। कई ऐसे अवसर आते हैं जब सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है, इन्हीं में से एक है अक्षय तृतीया। इस साल, 30 अप्रैल को देशभर में अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। पिछले तीन दशकों में भारत और सोने का यह रिश्ता और भी मजबूत हुआ है। फंड हाउस जीरोधा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत में सोने की मांग 800 टन से ज्यादा रही। वहीं, 1992 में यह 340 टन थी। देश के बदलते आर्थिक हालात, लोगों की बढ़ती आय और सांस्कृतिक मान्यताओं ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा सोने का उपभोक्तआ बना दिया है।

भारत सोने के गहनों का सबसे बड़ा उपभोक्ता

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत दुनियाभर में सोने के आभूषणों का सबसे बड़ा उपभोक्ता बनकर उभरा है, जहां सालाना खपत 563 टन से भी ज्यादा रही और इसकी कुल मांग की कीमत ₹3.6 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गई। भारत में सोने के गहने न केवल सजने-संवरने के साधन हैं, बल्कि परंपरा और समृद्धि के भी प्रतीक है। विवाह से लेकर त्योहारों तक, हर समारोह में सोने के आभूषणों का विशेष महत्व है।

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सोने के सिक्कों और बिस्किट्स की मांग तेजी से बढ़ी

भारत में सोना सिर्फ आभूषण (सजने-संवरने) के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश विकल्प के रूप में भी देखा जाता है। शहरों से लेकर गांवों तक, लोग सोने को अपनी दौलत बढ़ाने का एक भरोसेमंद तरीका मानते हैं। यही वजह है कि भारत में सोने के सिक्कों और बिस्किट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। 2024 में इस तरह के निवेश में भारत ने लगभग 239 टन सोना खरीदा, जो दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।

अगर भारतीय रुपये में बात करें, तो 2024 में सोने के सिक्कों और बिस्किट्स की मांग ₹1.5 लाख करोड़ के आसपास रही। यह 2023 के मुकाबले 60% ज्यादा है, जो दिखाता है कि भारत में सोने में निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

5 साल में Gold ETF की होल्डिंग्स 200% से ज्यादा बढ़ी

पिछले कुछ वर्षों में भारत में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और इससे जुड़े अन्य फंड्स की ओर लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ा है। गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स का मतलब— भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड और ट्रेड होने वाले विभिन्न गोल्ड ईटीएफ द्वारा रखे गए कुल सोने का भंडार से है।

पिछले पांच वर्षों में गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स 21 टन से बढ़कर 63 टन से ज्यादा हो गई है। यह दिखाता है कि भारत में लोग पारंपरिक तरीकों जैसे आभूषण या फिजिकल गोल्ड खरीदने के अलावा अब निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ जैसे डिजिटल माध्यमों को भी तेजी से अपना रहे हैं।

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5 साल में Gold ETF फोलियो 13 गुना बढ़ा

मार्च 2020 से मार्च 2025 के बीच भारत में गोल्ड ईटीएफ फोलियो की संख्या में 13 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है। जीरोधा फंड हाउस के सीईओ विशाल जैन ने कहा, “भारत में गोल्ड ईटीएफ का बढ़ना यह दिखाता है कि निवेश का माहौल बदल रहा है, जहां निवेशक अब म्युचुअल फंड के रास्ते से सोने में निवेश की सुविधा और सरलता को तेजी से अपना रहे हैं।”

बदलते समय के साथ भले ही खरीदारी के तरीके और प्राथमिकताएं बदली हों, लेकिन सोने के प्रति भारतीयों का प्रेम अब भी उतना ही अटूट बना हुआ है।


First Published – April 29, 2025 | 2:59 PM IST



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Gold silver price today: ग्लोबल सुस्ती पर नरम पड़े सोना-चांदी, जानिए MCX पर आज का भाव – gold silver price falls in early trade on 29 april 2025 check rates on mcx comex today – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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Gold silver price today: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। दोनों के वायदा भाव मंगलवार (29 अप्रैल) गिरावट के साथ खुले। खबर लिखे जाने के समय घरेलू बाजार में सोने के भाव 95,300 रुपये, जबकि चांदी के भाव 96,250 रुपये के करीब कारोबार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखी जा रही है।

Gold: MCX पर सोना नरम

सोने के वायदा भाव की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट आज 225 रुपये की गिरावट के साथ 95,800 रुपये के भाव पर खुला। पिछला बंद भाव 96,025 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 714 रुपये की गिरावट के साथ 95,311 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 95,800 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 95,311 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। सोने के वायदा भाव ने पिछले सप्ताह 99,358 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

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Silver: मई कॉन्ट्रैक्ट भाव टूटा

चांदी के वायदा भाव की शुरुआत सुस्त रही। MCX पर चांदी का बेंचमार्क मई कॉन्ट्रैक्ट आज 77 रुपये की नरमी के साथ 96,387 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 96,464 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 185 रुपये की गिरावट के साथ 96,279 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 96,387 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 96,254 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। चांदी के वायदा भाव ने इस साल 1,01,999 रुपये किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

Comex पर भी सोना-चांदी में सुस्ती

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को सोने-चांदी के वायदा भाव के भाव में नरमी देखने को मिल रही है। Comex पर सोना 3,354.90 डॉलर प्रति औंस के भाव पर खुला। पिछला क्लोजिंग प्राइस 3,347.70 डॉलर प्रति औंस था।
  • खबर लिखे जाने के समय यह 22.80 डॉलर की गिरावट के साथ 3,324.90 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के वायदा भाव पिछले सप्ताह 3,509.90 डॉलर के भाव पर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे।
  • Comex पर चांदी के वायदा भाव 33.09 डॉलर के भाव पर खुले, पिछला क्लोजिंग प्राइस 33 डॉलर था। हालांकि खबर लिखे जाने के समय यह 0.05 डॉलर की गिरावट के साथ 32.95 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।

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MCX, Comes पर भाव

MCX Open Last Close LTP
सोना 95,800 96,025 95,311
चांदी 96,387 96,464 96,279
Comex Open Last Close LTP
सोना 3,354.90 3,347.70 3,324.90
चांदी 33.09 33 32.95

(नोट: MCX में सोने के वायदा भाव रुपये प्रति 10 ग्राम, चांदी रुपये प्रति किलो में हैं। कॉमेक्स में दोनों के वायदा भाव डॉलर प्रति ओंस में हैं। last trading price (LTP) खबर लिखे जाने के समय के हैं।)

 

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First Published – April 29, 2025 | 9:52 AM IST



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Akshaya Tritiya 2025: 2019 से 200% महंगा हुआ सोना, फिर भी खरीदारी का जोश बरकरार! जानिए इस बार कैसे बदल रहा है ट्रेंड – akshaya tritiya 2025 gold price surge 200 pc since 2019 how buyers are going light this akshaya tritiya – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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Akshaya Tritiya 2025: निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोना पिछले एक साल में खूब चमका है। 10 मई 2024 से अब तक सोने ने 30% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। अक्षय तृतीया (30 अप्रैल) नजदीक आने के साथ ही इस बेशकीमती पीली धातु का आकर्षण और भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि ऊंची कीमतों के चलते ग्राहकों के रुझान में बदलाव देखा जा रहा है।

सोने के भाव ने बनाया रिकॉर्ड

22 अप्रैल 2025 को सोने की कीमत पहली बार 10 ग्राम के लिए ₹1 लाख के पार चली गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और महंगाई का लगातार बना हुआ दबाव रहा। 24 अप्रैल 2025 तक प्रमुख रिटेलर्स पर 22 कैरेट सोने की कीमतें इस प्रकार रहीं:​

  • मालाबार गोल्ड: ₹7,945 प्रति ग्राम
  • जोयालुक्कास: ₹7,945 प्रति ग्राम
  • कल्याण ज्वेलर्स: ₹7,945 प्रति ग्राम
  • तनिष्क: ₹7,990 प्रति ग्राम

इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म वेंचुरा (Ventura) के अनुसार, इस तेजी ने पिछले अक्षय तृतीया (2024) के मुकाबले सोने की कीमतों में 30% की वृद्धि दर्ज की है। पिछले अक्षय तृतीया पर सोने का भाव ₹73,240 प्रति 10 ग्राम था। वहीं, 2019 की तुलना में कीमतों में लगभग 200% की बढ़ोतरी हुई है। 2019 में सोना ₹31,729 प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध था।

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अक्षय तृतीया सोने के भाव goldbuyingactivisty

सोने की बिक्री वॉल्यूम में गिरावट की आशंका

वेंचुरा की रिपोर्ट के अनुसार, “भौगोलिक रूप से देखा जाए तो अक्षय तृतीया पर भारत में सोने की खपत का सबसे बड़ा हिस्सा दक्षिण भारत से आता है, जो कुल मांग में 40% का योगदान देता है। इसके बाद पश्चिम भारत का 25%, पूर्व भारत का 20% और उत्तर भारत का 10% योगदान रहता है। उत्तर भारत के उपभोक्ता आमतौर पर धनतेरस के मौके पर सोने की खरीदारी को प्राथमिकता देते हैं।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के चलते इस अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। हालांकि कुल रेवेन्यू पिछले साल के समान स्तर पर रहने की उम्मीद है।”

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ग्राहकों का बदल रहा व्यवहार

सोने की ऊंची कीमतों का असर ग्राहकों की खरीदारी आदतों पर साफ दिख रहा है। मई, जून और जुलाई में होने वाली शादियों के लिए कई परिवार अब भारी गहनों की बजाय हल्के गहनों का विकल्प चुन रहे हैं। पहले जहां परंपरागत रूप से 2 सोवरन (सोने के सिक्के) खरीदे जाते थे, अब लोग 1 से 1.5 सोवरन तक की खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही 14 कैरेट और 18 कैरेट सोने की मांग भी बढ़ रही है, जो किफायती होने के साथ-साथ टिकाऊ भी माना जाता है।

बदलते रुझान को देखते हुए ज्वेलर्स भी नई रणनीति अपना रहे हैं। वे प्रमोशनल डील, एडवांस बुकिंग और एक्सचेंज स्कीम्स जैसी सुविधाएं पेश कर रहे हैं ताकि ऊंची कीमतों के बावजूद ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, ” सोने की रिकॉर्ड हाई कीमतों के कारण अब शादी के मौके पर ग्राहक सोने की बजाय नकद को उपहार के रूप में देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। साथ ही, वे ज्वेलर्स द्वारा पेश की गई मासिक किस्त योजनाओं के जरिए सोना खरीदने का विकल्प भी अपना रहे हैं। ज्वेलर्स के एक्सचेंज ऑफर्स के जरिए ग्राहक अपने पुराने सोने के गहनों को नए डिजाइन के गहनों में अपग्रेड कर पा रहे हैं। 14 कैरेट और 18 कैरेट शुद्धता के विकल्प अब ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, जो टिकाऊपन और स्टाइल के साथ किफायती भी हैं। इसलिए हल्के गहनों की ओर रुझान बढ़ रहा है। इसके अलावा, स्टडेड ज्वेलरी, नेचुरल डायमंड्स और जेमस्टोन ज्वेलरी में भी ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ती देखी जा रही है।”

इस बीच सोने में निवेश पर भी ग्राहकों का फोकस बढ़ा है। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद लोग सुरक्षित लॉन्ग टर्म एसेट के रूप में सोने के बिस्किट और सिक्कों में निवेश करना जारी रखे हुए हैं। वहीं, गहनों की खरीदारी अब ज्यादातर जरूरत के आधार पर या त्योहारों पर ही की जा रही है।

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अक्षय तृतीया के दिन खरीदारी की परंपरा

इस साल अक्षय तृतीया 29 अप्रैल की शाम 5:31 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल दोपहर 2:12 बजे तक मनाई जाएगी। यह पर्व सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ा है और इसे अंतहीन समृद्धि और सफलता लाने वाला माना जाता है। अक्षय तृतीया को फाइनेंशियल निर्णय लेने, नए काम शुरू करने और खासतौर पर सोना खरीदने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। खरीदारी और पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त 30 अप्रैल को सुबह 5:40 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। परंपरागत रूप से, इस दिन सोना खरीदना केवल एक निवेश नहीं, बल्कि धन और सौभाग्य का स्वागत करने का प्रतीकात्मक कार्य माना जाता है।

सोने की ऊंची कीमतों से ब्रिकी घटेगी! रेवेन्यू नहीं

सोने पर शानदार रिटर्न के बावजूद, इस साल रिकॉर्ड हाई कीमतों के चलते सोने की बिक्री की मात्रा पर दबाव पड़ने की संभावना है। उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स
का मानना है कि खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच खरीदी गई कुल मात्रा में गिरावट देखी जा सकती है, जहां लोग या तो अपनी खरीदारी का आकार छोटा कर सकते हैं या हल्के गहनों और सिक्कों की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, ज्वेलर्स अब भी आशावादी हैं। एक मुंबई स्थित बुलियन डीलर ने कहा, “भले ही वॉल्यूम थोड़ा घट जाए, लेकिन ऊंची कीमतों के चलते कुल रेवेन्यू पिछले साल के समान स्तर पर रह सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “कई ग्राहक परंपरा निभाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से 1 या 2 ग्राम सोने की खरीदारी जरूर करेंगे।”

वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक भी अब एक बार फिर से सोने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जिन्होंने पिछले अक्षय तृतीया या उससे पहले सोने में निवेश किया था, उनके लिए यह निवेश वाकई ‘गोल्डन रिटर्न’ लेकर आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, “ग्राहक अब सोने की कीमतों में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं और 5-8% के प्रीमियम में कमी आने की आशा कर रहे हैं। हालांकि इस त्योहारी मौके पर प्रतीकात्मक खरीदारी जरूर की जाएगी। अक्षय तृतीया के बाद अप्रैल से जुलाई के ऑफ-सीजन में, जब मांग कम होती है तब ज्वेलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने और स्टॉक क्लियर करने के लिए डिस्काउंट ऑफर करते हैं। ऐसे में इस समय खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए सौदेबाजी का अच्छा मौका रहता है, क्योंकि सीजनल डिमांड कम होने से कीमतें भी अपेक्षाकृत नीचे होती हैं।”

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सोने में जारी रहेगी तेजी या आएगी गिरावट?

वेंचुरा का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक हालात बिगड़ते हैं, तो सोने की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती भी सोने की कीमतों में तेजी का एक प्रमुख ट्रिगर बन सकती है। वेंचुरा के मुताबिक, अगले अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) तक सोने की कीमतें $3,600–$3,700 प्रति औंस या ₹1,01,000–₹1,04,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। ये अनुमान इस बात को दर्शाते हैं कि अनिश्चितता के दौर में सोना सुरक्षित निवेश विकल्प बना रहता है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि सोने की कीमतों के बढ़ने का रास्ता बिना जोखिम के नहीं है। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को टालता है, केंद्रीय बैंकों की खरीद में सुस्ती आती है या अमेरिका की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो सोने की कीमतों में अस्थायी गिरावट आ सकती है। ऐसे हालात में सोना $3,000–$2,900 प्रति औंस या ₹90,000–₹87,000 प्रति 10 ग्राम तक फिसल सकता है।

वेंचुरा रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्तरों से दिसंबर 2025 तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और बाजार अस्थिर रहेगा। इस दौरान सोने की कीमतें $2,900 से $3,300 प्रति औंस या ₹86,000 से ₹96,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकती हैं।


First Published – April 29, 2025 | 8:44 AM IST



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रुपया 85 के नीचे, विदेशी बैंकों की डॉलर बिकवाली से बाजार में हलचल – rupee stir in market due to selling dollar of foreign banks below 85 – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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शेयर बाजार में मजबूत लिवाली और कुछ विदेशी बैंकों द्वारा डॉलर की बिकवाली से डॉलर के मुकाबले रुपया आज कारोबार के दौरान सुधरकर 84.96 प्रति डॉलर पर आ गया था। मगर कारोबार की समा​प्ति पर उसने अपनी थोड़ी बढ़त गंवा दी और 85.03 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बीते शुक्रवार को रुपया 85.49 पर बंद हुआ था।

आईएफए ग्लोबल में मुख्य कार्या​धिकारी अ​भिषेक गोयनका ने कहा, ‘शेयर बाजार के शानदार प्रदर्शन से रुपये में अप्रत्या​शित मजबूती आई है। विदेशी निवेशकों की लिवाली से भी बाजार और रुपये को दम मिला।’ डॉलर इंडेक्स 0.1 फीसदी गिरकर 99.6 पर आ गया। निजी बैंक के एक डीलर ने कहा, ‘विदेशी बैंकों ने आज डॉलर की बिकवाली की।’ दूसरी ओर विदेशी बैंक लगातार सरकारी प्रतिभूतियों की मुनाफे में बिकवाली कर रहे हैं जिससे बॉन्ड यील्ड 4 आधार अंक बढ़ गई। बेंचमार्क यील्ड 6.40 फीसदी पर बंद हुई जो शुक्रवार को 6.36 फीसदी थी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) नीलामी के जरिये 1.25 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने की घोषणा की है। यह नीलामी 6, 9, 15 और 19 मई को चार किस्तों में की जाएगी। बॉन्ड बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि इससे बाजार में तेजी आएगी तथा बॉन्ड यील्ड करीब 3 से 4 आधार अंक घट सकती है। 


First Published – April 28, 2025 | 10:54 PM IST



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दिल्ली, मुंबई से लेकर चेन्नई तक, सोने की बढ़ती कीमत ने बुझाई शादी-ब्याह की रौनक, पुरानी ज्वेलरी बेचकर लोग चला रहे काम – from kolkata to mumbai jewellery markets see slump as old gold exchange rises – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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कोलकाता के प्रसिद्ध आभूषण बाजार बोऊबाजार में शादी-ब्याह के सीजन के दौरान आम तौर पर दिखने वाली हलचल बिल्कुल गायब है। शहर के मध्य ​में स्थित इस इलाके में करीब 350 दुकानें हैं लेकिन वहां के माहौल में उदासी साफ तौर पर देखी जा सकती है।

गोल्ड एम्पोरियम के एक सेल्सपर्सन ने कहा कि सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं और खरीदारों का बजट कम पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘बिक्री में काफी गिरावट आई है। जो लोग अपने प्रियजनों को सोना उपहार में देना चाहते हैं, उन्हें अपने बजट में कुछ भी अच्छा नहीं मिल रहा है। यहां तक ​​कि नाक की लौंग (नोज पिन) जैसी मामूली चीज भी अब 6,000 रुपये में मिल रही है। मगर नोज पिन उपहार में कौन देता है?’

एक अन्य दुकान के मालिक ने कहा, ‘लोग महज 2 ग्राम वजन में सोने की चेन की तलाश कर रहे हैं। क्या यह संभव है?’ 

बोऊबाजार में हर जगह लगभग यही कहानी है। ग्राहकों की आवाजाही कम हो रही है और हल्के, कम वजन वाले आभूषणों की मांग बढ़ रही है। वैश्विक अनिश्चितता के कारण सुरक्षित निवेश समझी जाने वाली इस परिसंप​त्ति में लगातार तेजी दिख रही है। सोने की कीमतों में उछाल ने खरीदारों की परेशानी बढ़ा दी है।

पिछले सप्ताह की शुरुआत में घरेलू खुदरा बाजार में सोने का भाव 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया था। हालांकि उसके बाद नरमी आई लेकिन अभी भी 2024-25 के औसत के मुकाबले करीब 20 फीसदी की तेजी बनी हुई है।

कीमतों में मामूली गिरावट के बावजूद खरीदार अपनी खर्च करने से कतरा रहे हैं। स्वर्ण शिल्प बचाओ समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बबलू डे ने कहा, ‘ग्राहक फिलहाल इंतजार करने के मूड में हैं।’

बजट पर दबाव होने के कारण कई खरीदार अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पुराने आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं। कोलकाता की कंपनी सेनको गोल्ड के प्रबंध निदेशक और सीईओ सुवनकर सेन ने कहा, ‘ग्राहक अपने बजट के दायरे में शादी-ब्याह के लिए आभूषणों की तलाश कर रहे हैं। पुराने सोने के बदले खरीदारी में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है।’

देश भर के अन्य सर्राफा बाजार में भी यही कहानी दिखती है। 

चांदनी चौक, दिल्ली

आम तौर पर भीड़-भाड़ वाली चांदनी चौक की गलियां शहर के ऐतिहासिक आभूषण केंद्र दरीबा कलां की ओर ले जाती हैं। राधे किशन गोपाल किशन ज्वैलर्स के मालिक गौरव गुप्ता ने कहा, ‘पिछले तीन महीनों के दौरान सोने की कीमतों में उछाल के कारण कारोबार में काफी गिरावट आई है। आने वाले थोड़े-बहुत ग्राहक भी 18 कैरट या 14 कैरट के आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं।’

गुप्ता दरीबा ज्वैलर्स एसोसिएशन (डीजेए) के कोषाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि उपहार देने की आदतें भी बदल रही हैं। उन्होंने कहा, ‘लोग शादी-ब्याह, जन्मदिन एवं अन्य अवसरों पर आम तौर पर 10 ग्राम की सोने की चेन उपहार में देते थे। मगर सोने की कीमतों में तेजी के कारण अब लोग अन्य उपहार या सिर्फ नकद उपहार देने लगे हैं।’

रतन चंद ज्वाला नाथ ज्वैलर्स में भी माहौल कुछ अलग नहीं है। डीजेए के मालिक और अध्यक्ष तरुण गुप्ता ने कहा, ‘भू-राजनीतिक परिस्थिति ने सोने की कीमतों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इससे मनोवैज्ञानिक बाधा टूट गई है। पिछले तीन महीनों के दौरान हमारे कारोबार में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है। खरीदार हल्के आभूषणों की मांग कर रहे हैं।’ गली के आखिर में श्रीराम हरी राम ज्वैलर्स में काफी चहल-पहल है। वहां भीड़भाड़ जरूर है लेकिन खरीदारों की नहीं। काउंटरों पर मौजूद लोग अपने पुराने सोने के आभूषण बेचने के लिए वजन कर रहे हैं।

भारत में सोना निवेश से कहीं बढ़कर है और लोगों का उससे भावनात्मक लगाव है। यहां सोना बेचना, खास तौर पर विरासत में मिले सोने को बेचना अक्सर हताशा का प्रतीक माना जाता है। मगर आज पीली धातु की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने से लोगों की भावना भी बदल रही है।

अपने आभूषण बेच रही एक 55 वर्षीय महिला ने कहा, ‘हमारे बच्चे कनाडा चले गए हैं और अब इतने भारी आभूषण नहीं पहनना चाहते। ये आभूषण केवल बैंक लॉकर में पड़े हैं।’ श्रीराम हरी राम ज्वैलर्स ने बताया कि ऐसी बिक्री में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।

साल 1789 में स्थापित इस स्टोर के मालिक महेश चंद गुप्ता ने कहा, ‘हमारी कुल बिक्री में 50 फीसदी की गिरावट आई है। मगर पुराने आभूषण बेचने वाले ग्राहकों में काफी वृद्धि दिख रही है। परंपरागत तौर पर ऐसा केवल कठिन परिस्थितियों में ही होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है।’

जवेरी बाजार, मुंबई

जवेरी बाजार की संकरी गलियों में भी कहानी लगभग समान है। वहां की गलियों में चहल-पहल है, लेकिन शादी-ब्याह के मौसम में वहां पहले की तरह भीड़ नहीं है। वहां जाने वाले अधिकतर ग्राहक पुराने हैं। शादी-ब्याह के लिए की खरीदारी करने वाले आम तौर पर पुराने सोने के बदले आभूषण ले रहे हैं।

यूटी जवेरी ऐंड संस में शोभा मेहता अपनी बेटी की शादी के लिए पुराने आभूषणों के बदले नए डिजाइन के आभूषण पसंद कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे पुराने आभूषणों के बदले खरीदारी करना पसंद नहीं है। मगर सोने की कीमतें काफी अधिक होने के कारण मेरे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।’ 

मालिक जीतू जैन ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘हमें काफी कम नई खरीदारी दिख रही है। अधिकतर ग्राहक पुराने सोने के बदले खरीदारी कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि ग्राहकों की संख्या में करीब 65 फीसदी घट गई है।

पोपली ग्रुप के निदेशक राजीव पोपली ने कहा कि यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘दो साल पहले जब सोना 60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था तो महज 5 फीसदी आभूषणों की खरीद में ही पुराने सोने को बदला जाता था। मगर अब यह 20 फीसदी तक पहुंच गया है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर मांग स्थिर रहेगी।

चेन्नई में मिलाजुला रुख

चेन्नई में सोने की खरीदारी सांस्कृतिक तौर पर गहराई से जुड़ी हुई है, मगर वहां चलन थोड़ा अलग है। चेन्नई के खरीदार अक्षय तृतीया से पहले कीमतों में आई हालिया गिरावट का फायदा उठाकर स्टॉक जमा कर रहे हैं। अण्णा शालै में वुम्मिडी बंगारू ज्वैलर्स में अपराह्न के 2 बजे काफी चहल-पहल है। दक्षिण भारत में सोने के प्रति गहरा लगाव कोई रहस्य की बात नहीं है। 

बच्चों के कपड़ों का ब्रांड लिलिपुट लेन चलाने वाली रंजीता राज ने कहा, ‘जमीन की ही तरह सोना भी एक सुरक्षित संपत्ति है।’ बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन खरीदारों से बात की उनमें से अधिकतर की भावना स्पष्ट थी। वे मौजूदा अनिश्चितता के दौर में सोने को 30-40 फीसदी की तेजी के बावजूद सबसे सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। 

वुम्मिडी बंगारू ज्वैलर्स इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर अमरेंद्रन वुम्मिडी ने कहा, ‘हमें अभी तक मात्रात्मक बिक्री में गिरावट नहीं दिखी है। अगर कीमतें 3 से 5 फीसदी कम होती हैं तो हम अक्षय तृतीया के दौरान बिक्री में करीब 6 गुना वृद्धि देख सकते हैं।’


First Published – April 28, 2025 | 10:28 PM IST



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Chana: निचले भाव पर खरीद बढ़ने से चने में तेजी, भाव बढ़कर MSP से ऊपर पहुंचे – chana increases the boom in gram due to increasing purchase at the lower price and reached above msp – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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चना की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है और इसके भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर कारोबार कर रहे हैं। चना के भाव बढ़ने की वजह निचले भाव पर इसकी खरीद बढ़ना है। सीजन की शुरुआत में चना का उत्पादन बढ़ने के अनुमान से इसके भाव तेजी से गिरकर एमएसपी से नीचे चले गए थे। बाजार जानकारों के अनुसार चना के भाव में आगे तेजी की संभावना है।

 कितना महंगा हुआ चना?

इस समय दिल्ली में चना के भाव 5,750 से 5,800 रुपये चल रहे हैं। महीने भर में इसके भाव में 150 रुपये की तेजी आ चुकी है। पिछले महीने इसके भाव गिरकर एमएसपी से नीचे 5,450-5,500 रुपये तक चले गए थे। चना का एमएसपी 5,650 रुपये प्रति क्विंटल है। महाराष्ट्र की अकोला मंडी चना की अहम मंडी है। इस मंडी में चना 6,025-6,050 रुपये बिक रहा है। महीने भर पहले यह 5,800-5,825 रुपये क्विंटल रहा था। इस तरह इस मंडी में चना के भाव 225 रुपये क्विंटल चढ़ चुके हैं।

चना क्यों हो रहा है महंगा?

कमोडिटी एक्सपर्ट और एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल में रिसर्च हेड इंद्रजीत पॉल ने बताया कि नई फसल की आवक के समय चना के दाम काफी गिर गए थे। भाव एमएसपी से नीचे जाने के बाद इसकी मांग बढ़ने लगी। जिससे अब चना के भाव बढ़कर एमएसपी से ऊपर चल रहे हैं। सरकारी नीतियों से भी चना की कीमतों में तेजी को समर्थन मिला। केंद्र सरकार ने पिछले महीने चना के आयात पर 10 फीसदी शुल्क लगा दिया था।  साथ ही शुल्क मुक्त पीली मटर के आयात की अवधि में समाप्त हो चुकी है। इन कारणों से भी चना की कीमतों में तेजी को बल मिला।

आगे क्या रहने वाले हैं चना के भाव?

बाजार जानकारों के अनुसार आगे चना की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिल सकता है। पॉल ने कहा कि अगले महीने तक चना के भाव 200 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ सकते हैं क्योंकि चना का स्टॉक कम है। इसलिए स्टॉकिस्ट इसकी खरीद बढ़ा सकते हैं। India Pulses and Grains Association (IPGA) के मुताबिक महीने भर में चना महंगा हुआ है। हालांकि सप्ताह भर में चना की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली है। लेकिन आगे चना की कीमतों में तेजी आ सकती है क्योंकि किसानों ने अब चना की बिक्री धीमी कर दी है। इसके साथ ही मिलर भी आवश्यकता के अनुसार इसकी खरीद कर रहे हैं। हालांकि सस्ती पीली मटर की उपलब्धता के बीच चना की कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

 


First Published – April 28, 2025 | 5:04 PM IST



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