Gold-Silver Price Today: अक्षय तृतीया से पहले सोने की कीमतों में गिरावट, ₹95000 के नीचे लुढ़का; चांदी ₹96,000 के करीब

Gold-Silver Price Today: अक्षय तृतीया से पहले सोने की कीमतों में गिरावट, ₹95000 के नीचे लुढ़का; चांदी ₹96,000 के करीब


Gold-Silver Price Today: इस सप्ताह के पहले दिन सोने चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। सोने के वायदा भाव हल्की तेजी के साथ खुलने के बाद नरम पड़ गए। चांदी के भाव गिरावट के साथ खुले। खबर लिखे जाने के समय घरेलू बाजार में आज सोने के भाव 94,900 रुपये, जबकि चांदी के भाव 95,800 रुपये के करीब कारोबार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखी जा रही है।

तेज शुरुआत के बाद लुढ़का सोना

सोने के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट आज 8 रुपये की तेजी के साथ 95,000 रुपये के भाव पर खुला। पिछला बंद भाव 94,992 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 67 रुपये की गिरावट के साथ 94,925 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 95,000 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 94,903 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। सोने के वायदा भाव ने पिछले सप्ताह 99,358 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

चांदी फिसली

चांदी के वायदा भाव की शुरुआत सुस्त रही। MCX पर चांदी का बेंचमार्क मई कॉन्ट्रैक्ट आज 572 रुपये की नरमी के साथ 95,869 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 96,441 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 641 रुपये की गिरावट के साथ 95,800 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 96,037 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 95,800 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। चांदी के वायदा भाव ने इस साल 1,01,999 रुपये किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज सोने चांदी के वायदा भाव के भाव में नरमी देखने को मिल रही है। Comex पर सोना 3,336.50 डॉलर प्रति औंस के भाव पर खुला। पिछला क्लोजिंग प्राइस 3,298.40 डॉलर प्रति औंस था। खबर लिखे जाने के समय यह 7.50 डॉलर की गिरावट के साथ 3,290.90 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के वायदा भाव पिछले सप्ताह 3,509.90 डॉलर के भाव पर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे। Comex पर चांदी के वायदा भाव 33.02 डॉलर के भाव पर खुले, पिछला क्लोजिंग प्राइस 33.01 डॉलर था। हालांकि खबर लिखे जाने के समय यह 0.28 डॉलर की गिरावट के साथ 32.73 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।





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Mann ki Baat: पहलगाम से Space Technology, खेती से आजादी के आंदोलन तक, क्या-क्या कहा पीएम मोदी ने

Mann ki Baat: पहलगाम से Space Technology, खेती से आजादी के आंदोलन तक, क्या-क्या कहा पीएम मोदी ने


रविवार, 27 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से एक बार फिर देश के लोगों को संबोधित किया। ‘मन की बात’ के इस एपिसोड में पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले से लेकर इसरो प्रमुख डॉ. कस्तूरीरंगन, स्पेस सेक्टर में भारत की प्रगति, खेती को लेकर देश भर में हो रहे नए-नए प्रयोग और आजादी के आंदोलन को लेकर विस्तार से बात की।

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने क्या कहा, पढ़िए प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का मूल पाठ:

Pahalgam Terror Attack पर क्या बोले पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। आज जब मैं आपसे ‘मन की बात’ कर रहा हूँ, तो मन में गहरी पीड़ा है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुई आतंकी वारदात ने देश के हर नागरिक को दुख पहुँचाया है। पीड़ित परिवारों के प्रति हर भारतीय के मन में गहरी संवेदना है। भले वो किसी भी राज्य का हो, वो कोई भी भाषा बोलता हो, लेकिन वो उन लोगों के दर्द को महसूस कर रहा है, जिन्होंने इस हमले में अपने परिजनों को खोया है। मुझे ऐहसास है, हर भारतीय का खून, आतंकी हमले की तस्वीरों को देखकर खौल रहा है। पहलगाम में हुआ ये हमला, आतंक के सरपरस्तों की हताशा को दिखाता है, उनकी कायरता को दिखाता है।

ऐसे समय में जब कश्मीर में शांति लौट रही थी, स्कूल-कॉलेजों में एक vibrancy थी, निर्माण कार्यों में अभूतपूर्व गति आई थी, लोकतंत्र मजबूत हो रहा था, पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही थी, लोगों की कमाई बढ़ रही थी, युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो रहे थे। देश के दुश्मनों को, जम्मू-कश्मीर के दुश्मनों को, ये रास नहीं आया। आतंकी और आतंक के आका चाहते हैं, कश्मीर फिर से तबाह हो जाए और इसलिए इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दिया।

आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में देश की एकता, 140 करोड़ भारतीयों की एकजुटता, हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यही एकता, आतंकवाद के खिलाफ हमारी निर्णायक लड़ाई का आधार है। हमें देश के सामने आई इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने संकल्पों को मजबूत करना है। हमें एक राष्ट्र के रूप में दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना है। आज दुनिया देख रही है, इस आतंकी हमले के बाद पूरा देश एक स्वर में बोल रहा है।

साथियो, भारत के हम लोगों में जो आक्रोश है, वो आक्रोश पूरी दुनिया में है। इस आतंकी हमले के बाद लगातार दुनिया-भर से संवेदनाएं आ रही हैं। मुझे भी Global leaders ने phone किए हैं, पत्र लिखे हैं, संदेश भेजे हैं। इस जघन्य तरीके से किए गए आतंकी हमले की सब ने कठोर निंदा की है। उन्होंने मृतकों के परिवारजनों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। पूरा विश्व, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में, 140 करोड़ भारतीयों के साथ खड़ा है। मैं पीड़ित परिवारों को फिर भरोसा देता हूँ कि उन्हें न्याय मिलेगा, न्याय मिलकर रहेगा। इस हमले के दोषियों और साजिश रचने वालों को कठोरतम् जवाब दिया जाएगा।

ISRO चीफ रहे महान वैज्ञानिक डॉ० के. कस्तूरीरंगन को किया याद

साथियो, दो दिन पहले हमने देश के महान वैज्ञानिक डॉ० के. कस्तूरीरंगन जी को खो दिया है। जब भी कस्तूरीरंगन जी से मुलाकात हुई, हम भारत के युवाओं के talent, आधुनिक शिक्षा, space-science ऐसे विषयों पर काफी चर्चा करते थे। विज्ञान, शिक्षा और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई देने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके नेतृत्व में ISRO को एक नई पहचान मिली। उनके मार्गदर्शन में जो space programme आगे बढ़े, उससे भारत के प्रयासों को global मान्यता मिली। आज भारत जिन satellites का उपयोग करता है, उनमें से कई डॉ० कस्तूरीरंगन की देखरेख में ही launch की गई थी।

उनके व्यक्तित्व की एक और बात बहुत खास थी, जिससे युवा-पीढ़ी उनसे सीख सकती है। उन्होंने हमेशा innovation को महत्व दिया। कुछ नया सीखने, जानने और नया करने का vision बहुत प्रेरित करने वाला है। डॉ० के. कस्तूरीरंगन जी ने देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। डॉ० कस्तूरीरंगन, 21वीं सदी की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक forward looking education का विचार लेकर आए थे। देश की नि:स्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। मैं डॉ० के. कस्तूरीरंगन जी को विनम्र भाव से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

आर्यभट्ट Satellite की launching के 50 वर्ष और Space Technology में आज का भारत

मेरे प्यारे देशवासियो, इसी महीने अप्रैल में आर्यभट्ट Satellite की launching के 50 वर्ष पूरे हुए हैं। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, 50 वर्षों की इस यात्रा को याद करते हैं – तो लगता है हमने कितनी लंबी दूरी तय की है। अंतरिक्ष में भारत के सपनों की ये उड़ान एक समय केवल हौंसलों से शुरू हुई थी। राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा पाले कुछ युवा वैज्ञानिक – उनके पास न तो आज जैसे आधुनिक संसाधन थे, न ही दुनिया की Technology तक वैसी पहुँच थी – अगर कुछ था तो वो था, प्रतिभा, लगन, मेहनत और देश के लिए कुछ करने का जज्बा।
बैलगाड़ियों और साइकिलों पर Critical Equipment को खुद लेकर जाते हमारे वैज्ञानिकों की तस्वीरों को आपने भी देखा होगा। उसी लगन और राष्ट्रसेवा की भावना का नतीजा है कि आज इतना कुछ बदल गया है। आज भारत एक Global Space Power बन चुका है। हमने एक साथ 104 Satellite का Launch करके Record बनाया है। हम चंद्रमा के South Pole पर पहुँचने वाले पहले देश बने हैं। भारत ने Mars Orbiter Mission Launch किया है और हम आदित्य – L1 Mission के जरिए सूरज के काफी करीब तक पहुंचे हैं। आज भारत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा cost effective लेकिन Successful Space Program का नेतृत्व कर रहा है। दुनिया के कई देश अपनी Satellites और Space Mission के लिए ISRO की मदद लेते हैं।

साथियो, हम जब ISRO द्वारा किसी Satellite का launch देखते हैं तो हम गर्व से भर जाते हैं। ऐसी ही अनुभूति मुझे तब हुई जब मैं 2014 में PSLV-C-23 की launching का साक्षी बना था। 2019 में Chandrayaan-2 की landing के दौरान भी, मैं बेंगलुरू के ISRO Center में मौजूद था। उस समय Chandrayaan को वो अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, तब वैज्ञानिकों के लिए, वो, बहुत मुश्किल घड़ी थी। लेकिन मैं अपनी आंखों से वैज्ञानिकों के धैर्य और कुछ कर गुजरने का जज्बा भी देख रहा था। और कुछ साल बाद पूरी दुनिया ने भी देखा कैसे उन्हीं वैज्ञानिकों ने Chandrayaan-3 को सफल करके दिखाया।

Space Sector में private partincipation, युवा और उनके start-ups

साथियो, अब भारत ने अपने Space Sector को Private Sector के लिए भी Open कर दिया है। आज बहुत से युवा Space Startup में नए झंडे लहरा रहे हैं। 10 साल पहले इस क्षेत्र में सिर्फ एक Company थी, लेकिन आज देश में, सवा तीन सौ से ज्यादा Space Startup काम कर रहे हैं। आने वाला समय Space में बहुत सारी नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। भारत नई ऊंचाइयों को छूने वाला है। देश गगनयान, SpaDeX और Chandrayaan-4 जैसे कई अहम् मिशन की तैयारियों में जुटा है। हम Venus Orbiter Mission और Mars Lander Mission पर भी काम कर रहे हैं। हमारे Space Scientists अपने Innovations से देशवासियों को नए गर्व से भरने वाले हैं।

म्यांमार भूकंप और भारत का Operation Brahma

साथियो, पिछले महीने म्यांमार में आए भूकंप की खौफनाक तस्वीरें आपने जरूर देखी होंगी। भूकंप से वहाँ बहुत बड़ी तबाही आई, मलबे में फंसे लोगों के लिए एक-एक सांस, एक-एक पल कीमती था। इसलिए भारत ने म्यांमार के हमारे भाई-बहनों के लिए तुरंत Operation Brahma शुरू किया। Air force के aircraft से लेकर Navy के ships तक म्यांमार की मदद के लिए रवाना हो गए। वहाँ भारतीय टीम ने एक field hospital तैयार किया। इंजीनियरों की एक टीम ने अहम् इमारतों और infrastructures को हुए नुकसान का आकलन करने में मदद की। भारतीय team ने वहां कंबल, tent, sleeping bags, दवाइयां, खाने-पीने के सामान के साथ ही और भी बहुत सारी चीजों की supply की। इस दौरान भारतीय टीम को वहाँ के लोगों से बहुत सारी तारीफ भी मिली।

साथियो, इस संकट में, साहस, धैर्य और सूझ-बूझ के कई दिल छू जाने वाले उदाहरण सामने आए। भारत की टीम ने 70 वर्ष से ज्यादा उम्र की एक बुजुर्ग महिला को बचाया जो मलबे में 18 घंटों से दबी हुई थी। जो लोग अभी TV पर ‘मन की बात’ देख रहे हैं, उन्हें उस बुजुर्ग महिला का चेहरा भी दिख रहा होगा। भारत से गई टीम ने उनके oxygen level को stable करने से लेकर fracture के treatment तक, इलाज की हर सुविधा उपलब्ध कराई। जब इस बुजुर्ग महिला को अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन्होंने हमारी टीम का बहुत आभार जताया। वो बोली कि, भारतीय बचाव दल की वजह से उन्हें नया जीवन मिला है। बहुत से लोगों ने हमारी टीम को बताया कि उनकी वजह से वो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ढूंढ पाए।

साथियो, भूकंप के बाद म्यांमार में मांडले की एक monastery में भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका थी। हमारे साथियों ने यहां भी राहत और बचाव अभियान चलाया, इसकी वजह से उन्हें बौद्ध भिक्षुओं का ढ़ेर सारा आशीर्वाद मिला। हमें Operation Brahma में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों पर बहुत गर्व है। हमारी परंपरा है, हमारे संस्कार हैं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना – पूरी दुनिया एक परिवार है। संकट के समय विश्व-मित्र के रूप में भारत की तत्परता और मानवता के लिए भारत की प्रतिबद्धता हमारी पहचान बन रही है।

अफ्रीकी देश Ethiopia के प्रवासी भारतीयों की मानवीय पहल

साथियो, मुझे अफ्रीका के Ethiopia में प्रवासी भारतीयों के एक अभिनव प्रयास का पता चला है। Ethiopia में रहने वाले भारतीयों ने ऐसे बच्चों को इलाज के लिए भारत भेजने की पहल की है जो जन्म से ही हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे बहुत से बच्चों की भारतीय परिवारों द्वारा आर्थिक मदद भी की जा रही है। अगर किसी बच्चे का परिवार पैसे की वजह से भारत आने में असमर्थ है, तो इसका भी इंतजाम, हमारे भारतीय भाई-बहन कर रहे हैं। कोशिश ये है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे Ethiopia के हर जरुरतमन्द बच्चे को बेहतर इलाज मिले। प्रवासी भारतीयों के इस नेक कार्य को Ethiopia में भरपूर सराहना मिल रही है। आप जानते हैं कि भारत में मेडिकल सुविधाएँ लगातार बेहतर हो रही हैं। इसका लाभ दूसरे देश के नागरिक भी उठा रहे हैं।

अफगानिस्तान के लोगों के लिए वैक्सीन, दवाएं

साथियो, कुछ ही दिन पहले भारत ने अफगानिस्तान के लोगों के लिए बड़ी मात्रा में vaccine भी भेजी है। ये Vaccine, Rabies, Tetanus, Hepatitis B और Influenza जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव में काम आएगी। भारत ने इसी हफ्ते नेपाल के आग्रह पर वहाँ दवाईयाँ और vaccine की बड़ी खेप भेजी है। इनसे thalassemia और sickle cell disease के मरीजों को बेहतर इलाज सुनिश्चित होगा। जब भी मानवता की सेवा की बात आती है, तो भारत, हमेशा इसमें आगे रहता है और भविष्य में भी ऐसी हर जरूरत में हमेशा आगे रहेगा।

प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए NDMA का ‘सचेत APP’

साथियो, अभी हम Disaster Management की बात कर रहे थे। और किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने में बहुत अहम् होती है -आपकी alertness, आपका सचेत रहना। इस alertness में अब आपको अपने मोबाईल के एक स्पेशल APP से मदद मिल सकती है। ये APP आपको किसी प्राकृतिक आपदा में फंसने से बचा सकते हैं और इसका नाम भी है ‘सचेत’। ‘सचेत APP’, भारत की National Disaster Management Authority (NDMA) ने तैयार किया है। बाढ़, Cyclone, Land-slide, Tsunami, जंगलों की आग, हिम-स्खलन, आंधी, तूफान या फिर बिजली गिरने जैसी आपदाएँ हो, ‘सचेत APP’ आपको हर प्रकार से informed और protected रखने का प्रयास करता है। इस APP के माध्यम से आप मौसम विभाग से जुड़े updates प्राप्त कर सकते हैं। खास बात ये है कि ‘सचेत APP’ क्षेत्रीय भाषाओं में भी कई सारी जानकारियां उपलब्ध कराता है। इस APP का आप भी फायदा उठायें और अपने अनुभव हमसे जरूर साझा करें।

मेरे प्यारे देशवासियो, आज हम पूरी दुनिया में भारत के talent की तारीफ होते देखते हैं। भारत के युवाओं ने भारत के प्रति दुनिया का नज़रिया बदल दिया है, और, किसी भी देश के युवा की रुचि किस तरफ है, किधर है, उससे पता चलता है कि देश का भविष्य कैसा होगा। आज भारत का युवा, Science, Technology और Innovation की ओर बढ़ रहा है। ऐसे इलाके, जिनकी पहचान पहले पिछड़ेपन और दूसरे कारणों से होती थी, वहां भी युवाओं ने ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किये हैं, जो हमें, नया विश्वास देते हैं।

कभी नक्सल एरिया था छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा, अब Science Centre में बच्चे कर रहे प्रयोग

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा का विज्ञान केंद्र आजकल सबका ध्यान खींच रहा है। कुछ समय पहले तक, दंतेवाड़ा का नाम केवल हिंसा और अशान्ति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब वहाँ, एक Science Centre, बच्चों और उनके माता-पिता के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है। इस Science Centre में जाना बच्चों को खूब पसंद आ रहा है। वे अब नई–नई मशीनें बनाने से लेकर technology का उपयोग करके नए products बनाना सीख रहे हैं। उन्हें 3D printers और robotic कारों के साथ ही दूसरी innovative चीजों के बारे में जानने का मौका मिला है।

अभी कुछ समय पहले मैंने गुजरात Science City में भी Science Galleries का उद्घाटन किया था। इन galleries से ये झलक मिलती है कि आधुनिक विज्ञान का potential क्या है, विज्ञान हमारे लिए कितना कुछ कर सकता है। मुझे जानकारी मिली है कि इन galleries को लेकर वहाँ बच्चों में बहुत उत्साह है। Science और Innovation के प्रति ये बढ़ता आकर्षण, जरूर भारत को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हमारे 140 करोड़ नागरिक हैं, उनका सामर्थ्य है, उनकी इच्छा शक्ति है। और जब करोड़ों लोग, एक-साथ किसी अभियान से जुड़ जाते हैं, तो उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। इसका एक उदाहरण है ‘एक पेड़ माँ के नाम’ – ये अभियान उस माँ के नाम है, जिसने हमें जन्म दिया और ये उस धरती माँ के लिए भी है, जो हमें अपनी गोद में धारण किए रहती है। साथियो, 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर इस अभियान के एक साल पूरे हो रहे हैं। इस एक साल में इस अभियान के तहत देश-भर में माँ के नाम पर 140 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। भारत की इस पहल को देखते हुए, देश के बाहर भी लोगों ने अपनी माँ के नाम पर पेड़ लगाए हैं। आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें, ताकि एक साल पूरा होने पर, अपनी भागीदारी पर आप गर्व कर सकें।

अहमदाबाद में 70 लाख पेड़

साथियो, पेड़ों से शीतलता मिलती है, पेड़ों की छाँव में गर्मी से राहत मिलती है, ये हम सब जानते हैं। लेकिन बीते दिनों मैंने इसी से जुड़ी एक और ऐसी खबर देखी जिसने मेरा ध्यान खींचा। गुजरात के अहमदाबाद शहर में पिछले कुछ वर्षों में 70 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। इन पेड़ों ने अहमदाबाद में green area काफी बढ़ा दिया है। इसके साथ–साथ, साबरमती नदी पर River Front बनने से और कांकरिया झील जैसे कुछ झीलों के पुनर्निर्माण से यहाँ water bodies की संख्या भी बढ़ गई है। अब news reports कहती हैं कि बीते कुछ वर्षों में अहमदाबाद global warming से लड़ाई लड़ने वाले प्रमुख शहरों में से एक हो गया है। इस बदलाव को, वातावरण में आई शीतलता को, वहाँ के लोग भी महसूस कर रहे हैं। अहमदाबाद में लगे पेड़ वहाँ नई खुशहाली लाने की वजह बन रहे हैं। मेरा आप सबसे फिर आग्रह है कि धरती की सेहत ठीक रखने के लिए, Climate Change की चुनौतियों से निपटने के लिए, और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए, पेड़ जरूर लगाएं ‘एक पेड़ – माँ के नाम’।

कर्नाटक में सेब (Apple) की खेती

साथियो, एक बड़ी पुरानी कहावत है ‘जहां चाह-वहां राह’। जब हम कुछ नया करने की ठान लेते हैं, तो मंजिल भी जरूर मिलती है। आपने पहाड़ों में उगने वाले सेब तो खूब खाए होंगे। लेकिन, अगर मैं पुछूँ कि क्या आपने कर्नाटक के सेब का स्वाद चखा है ? तो आप हैरान हों जाएंगे। आमतौर पर हम समझते हैं कि सेब की पैदावार पहाड़ों में ही होती है। लेकिन कर्नाटक के बागलकोट में रहने वाले श्री शैल तेली जी ने मैदानों में सेब उगा दिया है। उनके कुलाली गांव में 35 डिग्री से ज्यादा तापमान में भी सेब के पेड़ फल देने लगे हैं। दरअसल श्री शैल तेली को खेती का शौक था तो उन्होंने सेब की खेती को भी आजमाने की कोशिश की और उन्हें इसमें सफलता भी मिल गई। आज उनके लगाए सेब के पेड़ों पर काफी मात्रा में सेब उगते हैं जिसे बेचने से उन्हें अच्छी कमाई भी हो रही है।

हिमाचल, केरल के वायनाड में केसर की खेती

साथियो, अब जब सेबों की चर्चा हो रही है, तो आपने किन्नौरी सेब का नाम जरूर सुन होगा। सेब के लिए मशहूर किन्नौर में केसर का उत्पादन होने लगा है। आमतौर पर हिमाचल में केसर की खेती कम ही होती थी, लेकिन अब किन्नौर की खूबसूरत सांगला घाटी में भी केसर की खेती होने लगी। ऐसा ही एक उदाहरण केरला के वायनाड का है। यहां भी केसर उगाने में सफलता मिली है। और वायनाड में ये केसर किसी खेत या मिट्टी में नहीं बल्कि Aeroponics Technique से उगाए जा रहे हैं।

तमिलनाडु, राजस्थान में लीची की खेती

कुछ ऐसा ही हैरत भरा काम लीची की पैदावार के साथ हुआ है। हम तो सुनते आ रहे थे कि लीची बिहार, पश्चिम बंगाल या झारखंड में उगती है। लेकिन अब लीची का उत्पादन दक्षिण भारत और राजस्थान में भी हो रहा है। तमिलनाडु के थिरु वीरा अरासु, कॉफी की खेती करते थे। कोडईकनाल में उन्होंने लीची के पेड़ लगाए और उनकी 7 साल की मेहनत के बाद अब उन पेड़ों पर फल आने लगे। लीची उगाने में मिली सफलता ने आसपास के दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया है। राजस्थान में जितेंद्र सिंह राणावत को लीची उगाने में सफलता मिली है। ये सभी उदाहरण बहुत प्रेरित करने वाले हैं। अगर हम कुछ नया करने का इरादा कर लें, और मुश्किलों के बावजूद डटे रहें, तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।

चंपारण के नील किसानों का आंदोलन

मेरे प्यारे देशवासियो, आज अप्रैल का आखिरी रविवार है। कुछ ही दिनों में मई का महिना शुरू हो रहा है। मैं आपको आज से करीब 108 साल पहले लेकर चलता हूँ। साल 1917, अप्रैल और मई के यही दो महीने – देश में आजादी की एक अनोखी लड़ाई लड़ी जा रही थी। अंग्रेजों के अत्याचार उफान पर थे। गरीबों, वंचितों और किसानों का शोषण अमानवीय स्तर को भी पार कर चुका था। बिहार की उपजाऊ धरती पर ये अंग्रेज किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर कर रहे थे। नील की खेती से किसानों के खेत बंजर हो रहे थे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत को इससे कोई मतलब नहीं था। ऐसे हालात में, 1917 में गांधी जी बिहार के चंपारण पहुंचे हैं। किसानों ने गांधी जी को बताया – हमारी जमीन मर रही है, खाने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है। लाखों किसानों की उस पीड़ा से गांधी जी के मन में एक संकल्प उठा। वहीं से चंपारण का ऐतिहासिक सत्याग्रह शुरू हुआ। ‘चंपारण सत्याग्रह’ ये बापू द्वारा भारत में पहला बड़ा प्रयोग था। बापू के सत्याग्रह से पूरी अंग्रेज हुकूमत हिल गई। अंग्रेजों को नील की खेती के लिए किसानों को मजबूर करने वाले कानून को स्थगित करना पड़ा। ये एक ऐसी जीत थी जिसने आजादी की लड़ाई में नया विश्वास फूंका।

आप सब जानते होंगें इस सत्याग्रह में बड़ा योगदान बिहार के एक और सपूत का भी था, जो आजादी के बाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। वो महान विभूति थे – डॉ० राजेन्द्र प्रसाद। उन्होंने ‘चंपारण सत्याग्रह’ पर एक किताब भी लिखी – ‘Satyagraha in Champaran’, ये किताब हर युवा को पढ़नी चाहिए। भाईयों-बहनों, अप्रैल में ही स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के कई और अमिट अध्याय जुड़े हुए हैं। अप्रैल की 6 तारीख को ही गांधी जी की ‘दांडी यात्रा’ संपन्न हुई थी। 12 मार्च से शुरू होकर 24 दिनों तक चली इस यात्रा ने अंग्रेजों को झकझोर कर रख दिया था। अप्रैल में ही जलियाँवाला बाग नरसंहार हुआ था। पंजाब की धरती पर इस रक्तरंजित इतिहास के निशान आज भी मौजूद हैं।

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साथियो कुछ ही दिनों में, 10 मई को, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वर्षगांठ भी आने वाली है। आज़ादी की उस पहली लड़ाई में जो चिंगारी उठी थी, वो आगे चलकर लाखों सेनानियों के लिए मशाल बन गई। अभी 26 अप्रैल को हमने 1857 की क्रांति के महान नायक बाबू वीर कुंवर सिंह जी की पुण्यतिथि भी मनाई है। बिहार के महान सेनानी से पूरे देश को प्रेरणा मिलती है। हमें ऐसे ही लाखों स्वतंत्रा सेनानियों की अमर प्रेरणाओं को जीवित रखना है। हमें उनसे जो ऊर्जा मिलती है, वो अमृतकाल के हमारे संकल्पों को नई मजबूती देती है।

साथियो, ‘मन की बात’ की इस लंबी यात्रा में आपने इस कार्यक्रम के साथ एक आत्मीय रिश्ता बना लिया है। देशवासी जो उपलब्धियाँ दूसरों से साझा करना चाहते हैं उसे ‘मन की बात’ के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं। अगले महीने हम फिर मिलकर देश की विविधताओं, गौरवशाली परंपराओं और नई उपलब्धियों की बात करेंगे। हम ऐसे लोगों के बारे में जानेंगे जो अपने समर्पण और सेवा भावना से समाज में बदलाव ला रहे हैं। हमेशा की तरह आप हमें अपने विचार और सुझाव भेजते रहिए। धन्यवाद, नमस्कार।

Pahalgam Terror Attack पर भारत की Diplomacy, G20 देशों से बातचीत, पाक होगा अकेला?

पढ़ें PM Modi का India Steel 2025 में दिया जोरदार भाषण

 

युवाओं के रोजगार के लिए मोदी सरकार क्या कर रही है? पढ़े, PM Modi का पूरा भाषण

 

 

 

 


First Published – April 27, 2025 | 6:55 PM IST



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बहुत कीमती खनिज पर Vedanta Group की नजर; अभी तक होता है आयात

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वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) पोटाश खनन क्षेत्र में उतरने की योजना बना रही है और राजस्थान के एक ब्लॉक पर नजर गड़ाए हुए है, जहां लिथियम भंडार होने की भी अच्छी संभावना है। यह जानकारी कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है।
भारत पोटाश के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और इस निर्भरता को कम करने के उपायों पर काम कर रहा है। भारत का पोटाश आयात मुख्य रूप से रूस, कनाडा, बेलारूस और इजराइल जैसे देशों से होता है।

हिंदुस्तान जिंक अब बेस मेटल्स—जिंक और लेड—और कीमती धातु चांदी से आगे बढ़कर उन सभी क्रिटिकल मिनरल्स में विस्तार करने की योजना बना रही है, जो कंपनी के रणनीतिक हित में हैं। कंपनी को राजस्थान में डुगोचा गोल्ड ब्लॉक का पसंदीदा बोलीदाता घोषित किया गया है, जिससे कीमती धातुओं के पोर्टफोलियो में विस्तार हुआ है।

क्या कहा CEO ने

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के CEO अरुण मिश्रा ने कहा, “हमने गोल्ड ब्लॉक हासिल किया है, टंगस्टन ब्लॉक भी मिला है। यानी हिंदुस्तान जिंक अब सिर्फ जिंक, लेड और सिल्वर तक सीमित नहीं रहेगी। हम सभी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों में विस्तार करेंगे, जिसमें पोटाश भी शामिल है। राजस्थान में पोटाश मौजूद है और वहां लिथियम के भी जुड़े होने की संभावना है, जिसे हम देखेंगे।” कंपनी को आंध्र प्रदेश में बलेपलयम टंगस्टन ब्लॉक भी आवंटित किया गया है।

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हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के CEO मिश्रा ने बताया कि कंपनी देशभर में हो रही सभी खनिज ब्लॉक्स की नीलामी में भाग लेने की तैयारी कर रही है। उनकी सहायक कंपनी हिंदमेटल एक्सप्लोरेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड इस दिशा में पूरी तरह सक्रिय है। यह इकाई विशेष रूप से रणनीतिक और क्रिटिकल मिनरल्स की खोज पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि वे (कंपनी) भारत की सबसे बड़ी निजी एक्सप्लोरर कंपनी बनकर उभरेंगी।”

मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में 3,003 करोड़ रुपये लाभ

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) ने शुक्रवार को मार्च 2025 को समाप्त तिमाही में 47.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 3,003 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया। कंपनी ने पिछले साल इसी तिमाही में 2,038 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हासिल किया था। यह वृद्धि रिकॉर्ड मेटल वॉल्यूम और कम उत्पादन लागत के चलते संभव हुई है।

40 से अधिक देशों को आपूर्ति

HZL दुनिया का सबसे बड़ा एकीकृत जिंक उत्पादक है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच सिल्वर उत्पादकों में शामिल है। कंपनी 40 से अधिक देशों को आपूर्ति करती है और भारत के प्राइमरी जिंक बाजार में लगभग 77 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

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First Published – April 27, 2025 | 6:08 PM IST



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Indian Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया 0.2% गिरा, माह के अंत की डॉलर मांग और कश्मीर तनाव का असर – indian rupee falls 0 2 against dollar amid month end demand and kashmir tensions – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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डॉलर के मुकाबले रुपया 0.2 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। डीलरों के मुताबिक माह के आखिर की डॉलरों की मांग के कारण अस्थिर कारोबार की वजह से ऐसा हुआ है। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते दबाव का भी रुपये पर असर पड़ा है।

शुक्रवार को रुपया 85.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि इसके पहले 85.27 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। दिन के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 85.67 तक गया।

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘रुपया एक अंतर के साथ खुला, लेकिन करीब 85 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर प्रतिरोध था।’ उन्होंने कहा, ‘माह के आखिर की डॉलर की मांग थी और कश्मीर में जो हो रहा है, उसे लेकर भी सावधानी बरती गई।’

चालू कैलेंडर वर्ष में रुपया अब तक 0.19 प्रतिशत मजबूत हुआ है। अप्रैल में अब तक रुपये में 0.2 प्रतिशत मजबूती आई है। डीलरों ने कहा कि वहीं दूसरी तरफ 10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 आधार अंक बढ़ी क्योंकि डीलरों ने सप्ताहांत के पहले अपनी स्थिति हल्की की। विदेशी बैंकों और प्राथमिक डीलरों ने मुनाफा कमाने के लिए बॉन्ड की बिक्री की, जिससे यील्ड और बढ़ी। शुक्रवार को बेंचमार्क यील्ड 6.36 प्रतिशत पर बंद हुई, जबकि पहले 6.32 प्रतिशत पर बंद हुई थी। कुछ डीलरों ने कहा कि बॉन्ड बाजार भी सावधानी बरत रहा है क्योंकि कश्मीर में तनाव बढ़ रहा है।

एक प्राथमिक डीलरशिप से जुड़े डीलर ने कहा, ‘कुछ मुनाफावसूली हुई है। विदेशी बैंक और पीडी बिकवाली कर रहे थे और सरकारी बैंक खरीद रहे थे। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के कारण भी लोग सप्ताहांत के पहले अपनी पोजिशन हल्की कर रहे थे।’


First Published – April 25, 2025 | 10:36 PM IST



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Gold silver price today: मिलेजुले ग्लोबल संकेतों के बीच चमका सोना, चांदी पड़ी नरम; जानिए आज का भाव – gold silver price today on 25 april 2025 on mcx comex check latest rates – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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Gold silver price today: ग्लोबल बाजारों से मिलेजुले संकेत के बीच घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार को सोने में तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, चांदी की कीमतों में नरमी के साथ कारोबार शुरू हुआ। समाचार लिखे जाने के समय घरेलू बाजार में शुक्रवार सोने के भाव 96,000 रुपये, जबकि चांदी के भाव 97,450 रुपये के करीब कारोबार कर रहे हैं। सोने ने मंगलवार को ग्लोबल मार्केट में 3,509.90 डॉलर प्रति औंस का नया रिकॉर्ड बनाया था। जबकि, घरेलू बाजार में सोने ने 99,358 रुपये प्रति दस ग्राम का सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

Gold: ₹95,999 पर शुरू हुआ कारोबार

सोने के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट शुक्रवार को 77 रुपये की तेजी के साथ 95,999 रुपये के भाव पर खुला। पिछला बंद भाव 95,912 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 104 रुपये की तेजी के साथ 96,016 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 96,239 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 95,954 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। सोने के वायदा भाव ने मंगलवार को 99,358 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

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Silver: ₹97,495 पर खुला

चांदी के वायदा भाव की शुरुआत सुस्त रही। MCX पर चांदी का बेंचमार्क मई कॉन्ट्रैक्ट शुक्रवार को 16 रुपये की नरमी के साथ 97,495 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 97,511 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 44 रुपये की गिरावट के साथ 97,467 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 97,542 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 97,409 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। चांदी के वायदा भाव ने इस साल 1,01,999 रुपये किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

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Comex पर सोना तेज, चांदी नरम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। Comex पर सोना 3,362 डॉलर प्रति औंस के भाव पर खुला। पिछला क्लोजिंग प्राइस 3,348.60 डॉलर प्रति औंस था। खबर लिखे जाने के समय यह 9.10 डॉलर की तेजी के साथ 3,357 .70 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के वायदा भाव ने मंगलवार को 3,509.90 डॉलर के भाव पर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे। Comex पर चांदी के वायदा भाव 33.55 डॉलर के भाव पर खुले, पिछला क्लोजिंग प्राइस 33.50 डॉलर था। हालांकि खबर लिखे जाने के समय यह 0.05 डॉलर की गिरावट के साथ 33.45 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।

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MCX, Comes पर आज का भाव

MCX Open Last Close LTP
सोना 95,999 95,912 96,016
चांदी 97,495 97,511 97,467
Comex Open Last Close LTP
सोना 3,362 3,348.60 3,357.70
चांदी 33.55 33.50 33.45


(नोट: MCX में सोने के वायदा भाव रुपये प्रति 10 ग्राम, चांदी रुपये प्रति किलो में हैं। कॉमेक्स में दोनों के वायदा भाव डॉलर प्रति ओंस में हैं। last trading price (LTP) खबर लिखे जाने के समय के हैं।)


First Published – April 25, 2025 | 9:54 AM IST



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Video: Steel Sector को लेकर जानें हर बात, PM Modi के India Steel 2025 भाषण में – learn everything about video steel sector in india steel 2025 speech v – बिज़नेस स्टैंडर्ड

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया स्टील 2025 कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में भारत के स्टील सेक्टर में हुई प्रगति का लेखा-जोखा रखते हुए बताया कि भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक बन गया है। नेशनल स्टील पॉलिसी के तहत भारत ने 2030 तक 300 मिलियन टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इतना ही नहीं भारत में निर्मित स्टील से देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत बना है और इस्पात का योगदान चंद्रयान जैसे मिशनों में भी देखने को मिला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 24 अप्रैल को मुंबई में आयोजित इंडिया स्टील hr2025 कार्यक्रम के दौरान वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए।

देखें – बिजनेस स्टैंडर्ड मल्टीमीडिया –  https://hindi.business-standard.com/multimedia/video

पढ़ें PM Modi का India Steel 2025 में दिया जोरदार भाषण


First Published – April 24, 2025 | 9:20 PM IST



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