Gold, Silver Price Today: रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आया सोना, चांदी भी पड़ी नरम; चेक करें आज का भाव – gold silver price today on 23 april 2025 on mcx commex precious metal falls from record high – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Gold, Silver Price Today: रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आया सोना, चांदी भी पड़ी नरम; चेक करें आज का भाव – gold silver price today on 23 april 2025 on mcx commex precious metal falls from record high – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Gold, Silver price today: लगातार दो दिन रिकॉर्ड बनाने के बाद बुधवार (23 अप्रैल) को सोने का भाव ग्लोबल व डोमेस्टिक दोनों मार्केट में नरम पड़ गए। सोने-चांदी के वायदा भाव गिरावट के साथ खुले। सोने के भाव मंगलवार को ग्लोबल मार्केट में 3,509.90 डॉलर के भाव पर नए रिकॉर्ड पर पहुंच थे, घरेलू बाजार में भी सोने के वायदा भाव ने 99,358 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था। चांदी के वायदा भाव में भी दोनों बाजार में आज नरमी देखने को मिल रही है।

सोने के वायदा भाव नरम

सोने के वायदा भाव की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क जून कॉन्ट्रैक्ट आज 840 रुपये की गिरावट के साथ 96,500 रुपये के भाव पर खुला। पिछला बंद भाव 97,340 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 1,435 रुपये की गिरावट के साथ 95,905 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 96,500 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 95,457 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। सोने के वायदा भाव ने मंगलवार को 99,358 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

चांदी भी फिसली

चांदी के वायदा भाव की शुरुआत सुस्त रही। MCX पर चांदी का बेंचमार्क मई कॉन्ट्रैक्ट आज 450 रुपये की नरमी के साथ 95,429 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 95,879 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 428 रुपये की गिरावट के साथ 95,451 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। इस समय इसने 95,549 रुपये के भाव पर दिन का उच्च और 95,425 रुपये के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। चांदी के वायदा भाव ने इस साल 1,01,999 रुपये किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया था।

Also Read: सोने की कीमत ₹1 लाख के पार: कैसे इतनी तेजी से चमका सोना और क्या आपको अभी खरीदना चाहिए?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी नरम पड़े

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज सोने चांदी के वायदा भाव की शुरुआत नरमी के साथ हुई।
  • Comex पर सोना 3,367.70 डॉलर प्रति औंस के भाव पर खुला। पिछला क्लोजिंग प्राइस 3,419.40 डॉलर प्रति औंस था।
  • खबर लिखे जाने के समय यह 36.30 डॉलर की गिरावट के साथ 3,383.10 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।
  • सोने के वायदा भाव ने मंगलवार को 3,509.90 डॉलर के भाव पर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे।
  • Comex पर चांदी के वायदा भाव 32.45 डॉलर के भाव पर खुले, पिछला क्लोजिंग प्राइस 32.90 डॉलर था। खबर लिखे जाने के समय यह 0.11 डॉलर की गिरावट के साथ 32.79 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।

MCX, Comes पर भाव

MCX Open Last Close LTP
सोना 96,500 97,340 95,905
चांदी 95,429 95,879 95,451
Comex Open Last Close LTP
सोना 3,367.70 3,419.40 3,383.10
चांदी 32.45 32.90 32.79


(नोट: mcx में सोने के वायदा भाव रुपये प्रति 10 ग्राम, चांदी रुपये प्रति किलो में हैं। कॉमेक्स में दोनों के वायदा भाव डॉलर प्रति ओंस में हैं। last trading price (LTP) खबर लिखे जाने के समय के हैं।)


First Published – April 23, 2025 | 9:42 AM IST



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शेयर बाजार की चमक फीकी, सोने की कीमतों ने मारी जबरदस्त छलांग; निवेशकों ने बढ़ाया गोल्ड में निवेश – the shine faded gold prices of the stock market killed tremendous jump investors invested in gold – बिज़नेस स्टैंडर्ड

शेयर बाजार की चमक फीकी, सोने की कीमतों ने मारी जबरदस्त छलांग; निवेशकों ने बढ़ाया गोल्ड में निवेश – the shine faded gold prices of the stock market killed tremendous jump investors invested in gold – बिज़नेस स्टैंडर्ड


शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता बढ़ने के साथ ही सोने में निवेश का रुझान बढ़ा है। यही कारण है कि सोना निवेशकों के लिए एक पसंदीदा परिसंप​त्ति बन गया है। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में पिछले एक साल के दौरान सोने की कीमतों में करीब 52 फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि इस दौरान अमेरिका के बेंचमार्क शेयर सूचकांक डॉउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज (डाउ) में 0.9 फीसदी की गिरावट आई है। 

पिछले एक साल के दौरान भारत में सोने की कीमतें 38 फीसदी बढ़ी हैं जबकि बीएसई सेंसेक्स में महज 6.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी और भारतीय शेयर सूचकांकों के आंकड़ों में लाभांश यील्ड को शामिल नहीं किया गया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के आंकड़ों के अनुसार डाउ पर लाभांश यील्ड फिलहाल 1.87 फीसदी और बीएसई सेंसेक्स पर 1.15 फीसदी है। 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में काफी तेजी देखी गई है और यह मंगलवार को 3,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। वहीं दिल्ली में घरेलू सोने की कीमतों में 1,800 रुपये की उछाल देखी गई है और इसने आभूषण विक्रेताओं और इसका स्टॉक रखने वालों की खरीदारी में आई तेजी के बलबूते एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर लिया। मुंबई में सोने की कीमत 98,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रही। 

अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए मई 2006 के बाद 12 महीने की अवधि में सोने में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन है। मई 2006 में सोने की कीमतों में 54.6 फीसदी की तेजी आई थी। भारत में जुलाई 2019 से जुलाई 2020 की अवधि के बाद से पीली धातु के लिए यह सबसे अच्छा साल रहा है। उस दौरान सोने की कीमतों में 54 फीसदी की तेजी आई थी।

हालिया तेजी के बाद सोना अब न केवल लंबी अवधि ब​ल्कि लघु अवधि में भी शेयर बाजार को पछाड़कर आगे निकल गया है। अमेरिकी शेयर बाजार के मुकाबले सोने का दीर्घकालिक प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

पिछले 25 वर्ष में अमेरिका के हाजिर बाजार में सोने की कीमतों में 12.7 गुना की बढ़त देखी गई जबकि इसी अवधि के दौरान डाउ पर इसमें 3.6 गुना की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका में सोने के निवेशकों के लिए यह 10.7 फीसदी वार्षिक चक्रवृद्धि रिटर्न के रूप में दिखा जो इक्विटी में निवेश करने वाले निवेशकों के रिटर्न के दोगुने से अधिक है। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में इस अवधि में 5.2 फीसदी की सालाना औसत चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़त देखी गई। अमेरिका में सोने की कीमतें अप्रैल 2000 के 273.6 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस से फिलहाल 3,471 डॉलर प्रति औंस हो गया है। 

इसी तरह पिछले 10 वर्षों में अमेरिका में सोने की कीमतें 11.4 फीसदी सीएजीआर के हिसाब से बढ़ी हैं जबकि इसकी तुलना में इसी अ‍​वधि के दौरान डाउ जोंस में 7.9 फीसदी सीएजीआर देखी गई।  पिछले 25 वर्षों में सोने का प्रदर्शन भारतीय बाजारों में और बेहतर रहा है और इसका श्रेय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन को भी जाता है। हालांकि पिछले 25 वर्षों में सेंसेक्स का प्रदर्शन भी स्थानीय मुद्रा में डॉउ के मुकाबले बेहतर रहा है। 

घरेलू बाजार में सोने की कीमत पिछले 25 वर्ष में 13.3 फीसदी सीएजीआर की दर से बढ़ी। अप्रैल 2000 में इसकी कीमत 4,350 रुपये प्रति 10 ग्राम थी और इसकी तुलना में बुधवार को यह 98,484 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई। इस कीमत में बिक्री कर या वस्तु एवं सेवा कर शामिल नहीं है। समान अवधि के दौरान बीएसई सेंसेक्स 12 फीसदी सीएजीआर की दर से बढ़ा और अप्रैल 2000 के 4,658 के स्तर से बढ़कर यह मंगलवार को 79,596 के स्तर पर चला गया।


First Published – April 22, 2025 | 10:37 PM IST



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Steel Sector की MSMEs को लेकर क्या कहा इस्पात सचिव ने – what did the steel secretary say about steel sectors msmes – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Steel Sector की MSMEs को लेकर क्या कहा इस्पात सचिव ने – what did the steel secretary say about steel sectors msmes – बिज़नेस स्टैंडर्ड


इस्पात उद्योग ने सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को निर्यात मूल्य के समान दरों पर आपूर्ति करने के लिए सहमति जताई है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने इस चिंता को भी दूर किया कि कुछ आयात उत्पादों पर लगाए गए रक्षोपाय शुल्क से छोटे उद्यमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सरकार ने सोमवार को हॉट रोल्ड कॉयल, चादर और प्लेट जैसे इस्पात उत्पादों पर 200 दिन के लिए 12 प्रतिशत का अस्थायी रक्षोपाय (सेफगार्ड) शुल्क लगाया है, ताकि घरेलू कंपनियों को सस्ते आयात से बचाया जा सके। यह फैसला वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा डीजीटीआर की सिफारिश के बाद लिया गया। 

इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से कहा, ”जहां तक ​​एमएसएमई के बारे में आपका सवाल है, इस्पात उद्योग पहले ही इस बात पर सहमत हो चुका है कि वे एमएसएमई को निर्यात समता मूल्यों पर आपूर्ति करेंगे।” उन्होंने कहा, ‘‘इस्पात उद्योग एमएसएमई को निर्यात के लिए ईईपीसी (इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन निकाय) के साथ बातचीत कर रहा है। वे बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने पहले ही यह व्यवस्था लागू कर दी है, ताकि एमएसएमई पर इस्पात की ऊंची कीमत का असर न पड़े।’’ निर्यात समता मूल्य से आशय समायोजित अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य से है, जिस पर घरेलू उत्पादक माल ढुलाई और निर्यात संबंधी लागत को ध्यान में रखते हुए विदेशी बाजारों में इस्पात बेचते हैं। 

एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी दरों की पेशकश करके सरकार यह सुनिश्चित करती है कि छोटे निर्माताओं को नीतिगत हस्तक्षेपों के कारण कीमतों में उछाल का नुकसान न उठाना पड़े। सचिव ने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी उद्योगों को उचित मूल्य मिले। यह सामान्य बात है कि कुछ उद्योग केंद्र के फैसले की आलोचना करेंगे, क्योंकि इस्पात अंतिम उत्पाद नहीं है और कोई भी उपभोक्ता उद्योग इस फैसले को पसंद नहीं करेगा। सचिव ने आगे कहा कि चीन और वियतनाम के खिलाफ दो डंपिंग-रोधी जांच चल रही हैं, सुनवाई पूरी हो चुकी है और जल्द ही सिफारिशें आने की उम्मीद है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)


First Published – April 22, 2025 | 9:49 PM IST



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सोने की कीमत ₹1 लाख के पार: कैसे इतनी तेजी से चमका सोना और क्या आपको अभी खरीदना चाहिए? – gold price today mcx rate sovereign gold bond investment india us dollar central bank buying – बिज़नेस स्टैंडर्ड

सोने की कीमत ₹1 लाख के पार: कैसे इतनी तेजी से चमका सोना और क्या आपको अभी खरीदना चाहिए? – gold price today mcx rate sovereign gold bond investment india us dollar central bank buying – बिज़नेस स्टैंडर्ड


Invest in Gold: सोने की कीमतों में लगातार तेजी जारी है। आज सोने की कीमत 1,899 रुपये बढ़कर 99,178 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। यह लगातार चौथा दिन है जब सोने की कीमतों ने नई ऊंचाई छुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट ने कुछ समय के लिए 1 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर लिया और 1,00,484 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो करीब 2,000 रुपये या 2% की बढ़ोतरी है।

इस तेज उछाल का कारण सुरक्षित निवेश की मांग है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की फेडरल रिजर्व की आलोचना से बढ़ी है। इन घटनाओं ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है।

सोने में इतनी तेजी क्यों है?

एंजल वन के डीवीपी- रिसर्च (नॉन-एग्री कमोडिटीज एंड करेंसीज) प्रथमेश माल्या ने कहा, “इस साल सोने की कीमतों में 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। व्यापार तनाव ने बाजारों में घबराहट पैदा की है, जिससे सुरक्षित संपत्तियों की मांग बढ़ी है। हालांकि, डॉलर इंडेक्स में 4% से ज्यादा की गिरावट आई है। सोने में निवेश करने वाले एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में मजबूत निवेश और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी ने इस रुझान को समर्थन दिया है।”

इस बीच, कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय गृहिणियों की सोने में विश्वास की तारीफ की। उन्होंने लिखा, “भारतीय गृहिणी दुनिया की सबसे चतुर फंड मैनेजर है।” उन्होंने कहा कि अधिक घाटे वाले खर्च को बढ़ावा देने वाली सरकारें और अर्थशास्त्री भारत से कुछ सीख सकते हैं, जो “हमेशा मूल्यवान संपत्ति का शुद्ध आयातक रहा है!” कोटक का यह बयान तब आया जब इंडिया बुलियन एसोसिएशन के अनुसार, सुबह 10:53 बजे सोने की कीमत 99,170 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

Also Read | Sovereign Gold Bond 2018-19 Series II: 6.5 साल में 3 गुना से ज्यादा हो गए पैसे! 3,146 रुपये के गोल्ड बॉन्ड को बेच सकेंगे 9,669 रुपये पर

सोने की कीमतें और भविष्य

कामा ज्वैलरी के एमडी कोलिन शाह ने कहा, “सोने की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन अमेरिकी डॉलर की गिरावट अन्य मुद्राओं में सोने को सस्ता बनाएगी, जिससे मांग और कीमत का संतुलन बना रहेगा। वैश्विक आर्थिक बदलावों को देखते हुए, हम अनुमान लगाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत वित्त वर्ष 2026 में 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस को पार कर जाएगी। भारत में अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से सोने की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी देखी जाती है। सोने में निवेश का भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व मांग को बनाए रखेगा, चाहे कीमत का रुझान कुछ भी हो।”

सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार विवाद

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव ने बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा चीनी सामानों पर टैरिफ लगाने और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की आलोचना ने निवेशकों को परेशान किया है। इससे अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और सोने की मांग बढ़ी।

फेडरल रिजर्व की नीति और ब्याज दरों में कटौती

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती की है, जिससे सोने जैसे गैर-लाभकारी संपत्तियां आकर्षक हो गई हैं। कम ब्याज दरें सोने में निवेश की अवसर लागत को कम करती हैं।

केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी

भारत और चीन सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार बढ़ा रहे हैं। इसे “डी-डॉलराइजेशन” कहा जा रहा है, जो आर्थिक अनिश्चितताओं से बचाव और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने की रणनीति है।

वैल्यू रिसर्च के अनुसार, “2024 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने लगातार तीसरे साल 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा। विशेष रूप से, चीन की नीति में बदलाव, जिसके तहत बीमा कंपनियों को 1% संपत्ति सोने में निवेश करने की अनुमति दी गई, से सालाना मांग में 255 टन की बढ़ोतरी हो सकती है।”

वैल्यू रिसर्च के धीरेंद्र कुमार ने कहा, “रूसी केंद्रीय बैंक की संपत्तियों को फ्रीज करने से देशों को एहसास हुआ कि डॉलर भंडार में राजनीतिक जोखिम है। इसके जवाब में केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी बढ़ा दी है। यह केवल अटकलें नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मौद्रिक प्रणाली में गहरे बदलावों का संकेत है।”

क्या आपको अभी सोना खरीदना चाहिए?

बढ़ती बाजार अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई निवेशक सोच रहे हैं: क्या अपनी बचत को सोने में बदल देना चाहिए? हाल के उछाल के बाद सोना आकर्षक लग सकता है, लेकिन अपने पोर्टफोलियो में इसकी भूमिका पर विचार करना जरूरी है।

सोना विकासशील संपत्ति नहीं है। यह लाभांश या ब्याज जैसी आय उत्पन्न नहीं करता। यह केवल चमकता है और कभी-कभी इसकी कीमत बढ़ती है। इसलिए धीरेंद्र कुमार इसे निवेश के बजाय बचाव (हेज) कहते हैं।

उन्होंने कहा, “यह अनिश्चित समय में आपके पोर्टफोलियो की रक्षा के लिए सबसे अच्छा है, न कि इसके रिटर्न को बढ़ाने के लिए। सोने में निवेश तभी करें जब आपके पोर्टफोलियो में इसकी कमी हो। ज्यादातर निवेशकों के लिए, कुल पोर्टफोलियो का 5-10% हिस्सा सोने में पर्याप्त है। यह सुरक्षा की एक परत जोड़ता है, बिना समग्र रिटर्न को प्रभावित किए।”

सोने में निवेश का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

वैल्यू रिसर्च के अनुसार, निवेश के लिए भौतिक सोना (सिक्के, बार) से बचना चाहिए; यह सांस्कृतिक या सजावटी उपयोग के लिए बेहतर है। निवेश के लिहाज से यह अक्षम है और इसमें अतिरिक्त लागत आती है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) सबसे अच्छा विकल्प हैं। ये 2.5% वार्षिक ब्याज देते हैं और परिपक्वता पर टैक्स लाभ मिलता है।  गोल्ड ETF या म्यूचुअल फंड दूसरा विकल्प हैं, लेकिन इनमें कुछ लागतें शामिल हैं।

धीरेंद्र कुमार ने कहा, “सोने को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब सही नहीं है। आपके निवेश पोर्टफोलियो का 5-10% हिस्सा मुद्रा अवमूल्यन और भू-राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ बचाव के रूप में उचित हो सकता है। इसे विकास निवेश के बजाय बीमा की तरह देखें। अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो विचार करें कि भौतिक सोना, गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स, या गोल्ड म्यूचुअल फंड आपके लिए सबसे उपयुक्त हैं। प्रत्येक के अपने फायदे और नुकसान हैं, जैसे लिक्विडिटी, लागत और सिक्योरिटी।”


First Published – April 22, 2025 | 9:01 PM IST



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Sovereign Gold Bond 2018-19 Series II premature redemption: देश के 23वें (SGB 2017-18 Series IV) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) को मैच्योरिटी से पहले चौथी बार बेचने का मौका बॉन्ड धारकों को बुधवार (23 अप्रैल 2025) को अब तक के सबसे ऊंचे रिडेम्प्शन प्राइस (9,669 रुपये) पर मिलेगा। यह बॉन्ड अगले साल 23 अक्टूबर को मैच्योर होगा। वैसे बॉन्ड धारक ही इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले 23 अप्रैल को भुना सकते हैं जिन्होंने इसके लिए अप्लाई किया है। प्रीमैच्योर रिडेम्पशन को लेकर इच्छुक बॉन्ड धारकों के लिए अप्लाई करने की तारीख 24 मार्च से लेकर 15 अप्रैल तक थी।

कितने यूनिट गोल्ड बॉन्ड का अब से पहले हो चुका है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन

इस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन से पहले भी बॉन्ड धारकों ने इस बॉन्ड में अपने यूनिट बेचे हैं। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि इससे पहले के 3 मौकों पर बॉन्ड धारकों ने इस बॉन्ड के कुल 8,000 यूनिट भुनाए। इस बॉन्ड के लिए कुल 3,12,258 यूनिट की खरीद की गई थी। इस तरह से इस बॉन्ड के 3,04,258 यूनिट अभी भी बॉन्ड धारकों के पास पड़े हैं।

क्या  है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए इश्यू और रिडेम्प्शन प्राइस आईबीजेए (IBJA) से 24 कैरेट गोल्ड (999) के लिए मिले रेट के आधार पर तय होते हैं। नियमों के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख से ठीक पहले के 3 कारोबारी दिन के लिए आईबीजेए से प्राप्त 24 कैरेट गोल्ड (999) के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज होता है। 18 अप्रैल, 19 अप्रैल और 20 अप्रैल  को अवकाश होने की वजह से आरबीआई (RBI) ने इस सीरीज का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 17 अप्रैल, 21 अप्रैल और 22 अप्रैल के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय किया है। 17 अप्रैल, 21 अप्रैल और 22 अप्रैल के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज 9,669 रुपये है, इसलिए 11वें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 9,669 रुपये प्रति यूनिट है।

तारीख क्लोजिंग प्राइस (gold 999)
17 अप्रैल 9,491 रुपये प्रति यूनिट
18 अप्रैल गुड फ्राइडे
19  अप्रैल शनिवार 
20 अप्रैल रविवार 
21 अप्रैल 9,667 रुपये प्रति यूनिट
22 अप्रैल 9,848 रुपये प्रति यूनिट
एवरेज क्लोजिंग प्राइस/ प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस   9,669 रुपये प्रति यूनिट

Source: IBJA

अब जानते हैं कि आखिर वैसे बॉन्ड धारक जो इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले 23 अप्रैल को भुनाएंगे उन्हें कितनी कमाई होगी।

बिना टैक्स चुकाए कमाई

यह सॉवरेन गोल्ड (IN0020180249) 3,146 रुपये के इश्यू प्राइस पर 23 अक्टूबर 2018 को जारी हुआ था, जबकि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 9,669 रुपये प्रति यूनिट है। इस हिसाब से इस सीरीज को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने पर बॉन्ड धारकों को 207.34 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न और 17.40 फीसदी का एनुअल रिटर्न  मिलेगा। ऑनलाइन बॉन्ड धारक तो और ज्यादा फायदे में रहेंगे क्योंकि उन्हें इस बॉन्ड की खरीदारी पर इश्यू प्राइस के मुकाबले 50 रुपये प्रति यूनिट का डिस्काउंट भी मिला होगा। ऐसे बॉन्ड धारकों को इस बॉन्ड के प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर 212.31 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न और 17.67 फीसदी का एनुअल रिटर्न  मिलेगा।

टैक्स चुकाने के बाद कमाई

प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन के मामले में बॉन्ड धारक बॉन्ड इश्यू होने के 12 महीने बाद बेच रहे हैं इसलिए उन्हें कैपिटल गेन पर 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना पड़ेगा।

अब इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने के मामले में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स, ग्रॉस रिटर्न और एनुअल रिटर्न की गणना करते हैं:

परचेज प्राइस/ इश्यू प्राइस: 3,146 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस : 9,669 रुपये

टैक्सेबल कैपिटल गेन: 9,669 – 3,146 = 6,523 रुपये

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स (12.5%): 815 रुपये

टैक्स चुकाने के बाद कमाई: 6,523 – 815 = 5,708 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस (LTCG टैक्स घटाने के बाद): 9,669 – 815 = 8,854 रुपये

ऑफलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 181.44%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 15.93%

ऑनलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 185.98%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 16.20%

इंटरेस्ट जोड़कर कमाई

निवेशकों को इस सीरीज के लिए प्रति वर्ष 2.5 फीसदी यानी 39.33 रुपये प्रति छह महीने जबकि 6.5 साल की होल्डिंग पीरियड के दौरान 511 रुपये इंटरेस्ट/कूपन मिला। इस तरह से देखें तो इंटरेस्ट को जोड़ने के बाद इस बॉन्ड से 16.86 फीसदी का एनुअल रिटर्न (CAGR) मिलेगा। ऑनलाइन बॉन्ड धारकों को तो 17.13 फीसदी का एनुअल रिटर्न मिलेगा। सितंबर 2016 के बाद जारी होने वाले सीरीज के लिए इंटरेस्ट को सालाना 2.75 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है।

SGB की इस सीरीज पर इंटरेस्ट जोड़कर सालाना कमाई (CAGR) की गणना:

परचेज प्राइस/ इश्यू प्राइस: 3,146 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस : 9,669 रुपये

टैक्सेबल कैपिटल गेन: 9,669 – 3,146 = 6,523 रुपये

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स (12.5%): 815 रुपये

टैक्स चुकाने के बाद कमाई: 6,523 – 815 = 5,708 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस (LTCG टैक्स घटाने के बाद): 9,669 – 815 = 8,854 रुपये

इंटरेस्ट: 511 रुपये

ऑफलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 197.68%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 16.86%

ऑनलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न: 202.49%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 17.13%

अब जानते हैं कि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन को लेकर नियम क्या हैं?

कब कर सकते हैं प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन ?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने का विकल्प भी निवेशकों के पास होता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को आप उसके इश्यू होने के 5 साल बाद मैच्योरिटी से पहले रिडीम कर सकते हैं। आरबीआई प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख उस दिन तय करती है जिस दिन इस बॉन्ड पर इंटरेस्ट देय होता है। इस बॉन्ड पर इंटरेस्ट प्रत्येक छह महीने यानी साल में दो दफे मिलता है।

कैसे होती है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस की गणना? 

मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख से ठीक पहले के 3 कारोबारी दिन के लिए आईबीजेए (IBJA) की तरफ से प्राप्त 24 कैरेट गोल्ड (999) के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज होता है।

टैक्स को लेकर क्या हैं नियम ?

अगर आपने मैच्योरिटी पीरियड से पहले रिडीम किया तो टैक्स लिस्टेड फाइनेंशियल एसेट्स की तरह लगेगा। मतलब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने के बाद 12 महीने से पहले बेच देते हैं तो होने वाली कमाई यानी कैपिटल गेन को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। जो आपके ग्रॉस टोटल इनकम में जोड़ दिया जाएगा और आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। लेकिन अगर आप 12 महीने बाद बेचते हैं तो 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना होगा। लेकिन यदि आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी यानी 8 साल तक होल्ड करते हैं तो रिडेम्प्शन के समय आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।


First Published – April 22, 2025 | 6:59 PM IST



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Sovereign Gold Bond 2017-18 Series IV premature redemption: देश के 11वें (SGB 2017-18 Series IV) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) को मैच्योरिटी से पहले छठी यानी आखिरी बार बेचने का मौका बॉन्ड धारकों को बुधवार (23 अप्रैल 2025) को अब तक के सबसे ऊंचे रिडेम्प्शन प्राइस (9,669 रुपये) पर मिलेगा। यह बॉन्ड इसी साल 23 अक्टूबर को मैच्योर होगा। वैसे बॉन्ड धारक ही इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले 23 अप्रैल को भुना सकते हैं जिन्होंने इसके लिए अप्लाई किया है। प्रीमैच्योर रिडेम्पशन को लेकर इच्छुक बॉन्ड धारकों के लिए अप्लाई करने की तारीख 24 मार्च से लेकर 15 अप्रैल तक थी।

कितने यूनिट गोल्ड बॉन्ड का अब से पहले हो चुका है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन

इस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन से पहले भी बॉन्डधारकों ने इस बॉन्ड में अपने यूनिट बेचे हैं। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि इससे पहले के पांच मौकों पर बॉन्ड धारकों ने इस बॉन्ड के कुल 19,187 यूनिट भुनाए। इस बॉन्ड के लिए कुल 3,78,945 यूनिट की खरीद की गई थी। इस तरह से इस बॉन्ड के 3,59,758 यूनिट अभी भी बॉन्ड धारकों के पास पड़े हैं।

क्या  है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए इश्यू और रिडेम्प्शन प्राइस आईबीजेए (IBJA) से 24 कैरेट गोल्ड (999) के लिए मिले रेट के आधार पर तय होते हैं। नियमों के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख से ठीक पहले के 3 कारोबारी दिन के लिए आईबीजेए से प्राप्त 24 कैरेट गोल्ड (999) के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज होता है। 18 अप्रैल, 19 अप्रैल और 20 अप्रैल  को अवकाश होने की वजह से आरबीआई (RBI) ने इस सीरीज का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 17 अप्रैल, 21 अप्रैल और 22 अप्रैल के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय किया है। 17 अप्रैल, 21 अप्रैल और 22 अप्रैल के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज 9,669 रुपये है, इसलिए 11वें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 9,669 रुपये प्रति यूनिट है।

तारीख क्लोजिंग प्राइस (gold 999)
17 अप्रैल 9,491 रुपये प्रति यूनिट
18 अप्रैल गुड फ्राइडे
19  अप्रैल शनिवार 
20 अप्रैल रविवार 
21 अप्रैल 9,667 रुपये प्रति यूनिट
22 अप्रैल 9,848 रुपये प्रति यूनिट
एवरेज क्लोजिंग प्राइस/ प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस   9,669 रुपये प्रति यूनिट

Source: IBJA

अब जानते हैं कि आखिर वैसे बॉन्ड धारक जो इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले 23 अप्रैल को भुनाएंगे उन्हें कितनी कमाई होगी।

बिना टैक्स चुकाए कमाई

यह सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (IN0020170067) 2,987 रुपये के इश्यू प्राइस पर 23 अक्टूबर 2017 को जारी हुआ था, जबकि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस 9,669 रुपये प्रति यूनिट है। इस हिसाब से इस सीरीज को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने पर बॉन्ड धारकों को 223.70 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न और 15.82 फीसदी का एनुअल रिटर्न  मिलेगा। ऑनलाइन बॉन्ड धारक तो और ज्यादा फायदे में रहेंगे क्योंकि उन्हें इस बॉन्ड की खरीदारी पर इश्यू प्राइस के मुकाबले 50 रुपये प्रति यूनिट का डिस्काउंट भी मिला होगा। ऐसे बॉन्ड धारकों को इस बॉन्ड के प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर 229.21 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न और 16.06 फीसदी का एनुअल रिटर्न  मिलेगा।

टैक्स चुकाने के बाद कमाई

प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन के मामले में बॉन्ड धारक बॉन्ड इश्यू होने के 12 महीने बाद बेच रहे हैं इसलिए उन्हें कैपिटल गेन पर 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना पड़ेगा।

अब इस बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने के मामले में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स, ग्रॉस रिटर्न और एनुअल रिटर्न की गणना करते हैं:

परचेज प्राइस/ इश्यू प्राइस: 2,987 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस : 9,669 रुपये

टैक्सेबल कैपिटल गेन: 9,669 – 2,987 = 6,682 रुपये

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स (12.5%): 835 रुपये

टैक्स चुकाने के बाद कमाई: 6,682 – 835 = 5,847 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस (LTCG टैक्स घटाने के बाद): 9,669 -835 = 8,834 रुपये

ऑफलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 195.75%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 14.52%

ऑनलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 200.78%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 14.76%

इंटरेस्ट जोड़कर कमाई

निवेशकों को इस सीरीज के लिए प्रति वर्ष 2.5 फीसदी यानी 37.34 रुपये प्रति छह महीने जबकि 7.5 साल की होल्डिंग पीरियड के दौरान 560 रुपये इंटरेस्ट/कूपन मिला। इस तरह से देखें तो इंटरेस्ट को जोड़ने के बाद इस बॉन्ड से 15.40 फीसदी का एनुअल रिटर्न (CAGR) मिलेगा। ऑनलाइन बॉन्ड धारकों को तो 15.64 फीसदी का एनुअल रिटर्न मिलेगा। सितंबर 2016 के बाद जारी होने वाले सीरीज के लिए इंटरेस्ट को सालाना 2.75 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है।

SGB की इस सीरीज पर इंटरेस्ट जोड़कर सालाना कमाई (CAGR) की गणना:

परचेज प्राइस/ इश्यू प्राइस: 2,987 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस : 9,669 रुपये

टैक्सेबल कैपिटल गेन: 9,669 – 2,987 = 6,682 रुपये

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स (12.5%): 835 रुपये

टैक्स चुकाने के बाद कमाई: 6,682 – 835 = 5,847 रुपये

रिडेम्प्शन प्राइस (LTCG टैक्स घटाने के बाद): 9,669 -835 = 8,834 रुपये

इंटरेस्ट: 560  रुपये

ऑफलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न (%): 214.5%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 15.40%

ऑनलाइन बॉन्ड धारक 

ग्रॉस रिटर्न: 219.85%

एनुअल रिटर्न (CAGR): 15.64%

अब जानते हैं कि प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन को लेकर नियम क्या हैं?

कब कर सकते हैं प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन ?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने का विकल्प भी निवेशकों के पास होता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को आप उसके इश्यू होने के 5 साल बाद मैच्योरिटी से पहले रिडीम कर सकते हैं। आरबीआई प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख उस दिन तय करती है जिस दिन इस बॉन्ड पर इंटरेस्ट देय होता है। इस बॉन्ड पर इंटरेस्ट प्रत्येक छह महीने यानी साल में दो दफे मिलता है।

कैसे होती है प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन प्राइस की गणना? 

मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन प्राइस प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की तारीख से ठीक पहले के 3 कारोबारी दिन के लिए आईबीजेए (IBJA) की तरफ से प्राप्त 24 कैरेट गोल्ड (999) के क्लोजिंग प्राइस का एवरेज होता है।

टैक्स को लेकर क्या हैं नियम ?

अगर आपने मैच्योरिटी पीरियड से पहले रिडीम किया तो टैक्स लिस्टेड फाइनेंशियल एसेट्स की तरह लगेगा। मतलब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने के बाद 12 महीने से पहले बेच देते हैं तो होने वाली कमाई यानी कैपिटल गेन को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। जो आपके ग्रॉस टोटल इनकम में जोड़ दिया जाएगा और आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। लेकिन अगर आप 12 महीने बाद बेचते हैं तो 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना होगा। लेकिन यदि आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी यानी 8 साल तक होल्ड करते हैं तो रिडेम्प्शन के समय आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।

 

 


First Published – April 22, 2025 | 6:09 PM IST



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