दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज का नया दौर, जीबी पंत में वर्ल्ड क्लास हेल्थ फैसिलिटी शुरू

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज का नया दौर, जीबी पंत में वर्ल्ड क्लास हेल्थ फैसिलिटी शुरू


दिल्ली सरकार ने राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. गोविंद बल्लभ पंत (जीबी पंत) अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक से लैस नई चिकित्सा सुविधाओं की शुरुआत की गई है, जिससे न सिर्फ दिल्ली बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों को भी बड़ा फायदा मिलने वाला है.

अस्पताल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने 256 स्लाइस सीटी स्कैन, वाइड कैथ लैब और नए आईसीयू का उद्घाटन किया. इस मौके पर अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा जगत से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मौजूद रहे.

अब सरकारी अस्पतालों में भी मिलेगा प्राइवेट जैसा इलाज

उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य सरकारी अस्पतालों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इलाज में अमीर और गरीब का अंतर खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि हर नागरिक को समान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.

नॉर्थ इंडिया का पहला 256 स्लाइस सीटी स्कैन

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जीबी पंत अस्पताल में लगाया गया 256 स्लाइस सीटी स्कैन अपनी श्रेणी में चुनिंदा मशीनों में से एक है और नॉर्थ इंडिया में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में इसे स्थापित किया गया है. यह मशीन कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की तेज और सटीक जांच में बेहद कारगर साबित होगी. उन्होंने कहा, अस्पताल में नई न्यूरो कैथ लैब की शुरुआत के साथ न्यूरो विज्ञान से जुड़े इलाज को नई मजबूती मिलेगी. वर्ष 1964 से चिकित्सा सेवा और शिक्षा में अग्रणी रहे इस अस्पताल को लगभग 38 करोड़ रुपये की लागत से ये आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

पुरानी तकनीक हटाकर किया गया आधुनिक अपग्रेड

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जीबी पंत अस्पताल में न्यूरो आईटी सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड किया गया है. पुरानी मशीनों को हटाकर नई तकनीक लगाई गई है, जिससे आम मरीजों को सीधे तौर पर बेहतर और तेज इलाज का लाभ मिलेगा.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली की जनता को दिए गए भरोसे को आगे बढ़ाते हुए सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही है. आने वाले समय में दिल्ली के अन्य अस्पतालों में भी एमआरआई, सीटी स्कैन और आधुनिक जांच सुविधाएं शुरू की जाएंगी.

दिल्ली सरकार का मानना है कि जीबी पंत अस्पताल में शुरू हुई ये नई सुविधाएं राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत आधार देंगी और सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों के विश्वास को और गहरा करेंगी.

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क्या सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना सही, इस वक्त ठंडा या गरम कौन-सा पानी पीना ज्यादा अच्छा?

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Water In Morning: अपने दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करना शायद आसान लग सकता है. लेकिन यह छोटी सी आदत आपकी पूरी हेल्थ पर काफी ज्यादा असर डाल सकती है. 6 से 8 घंटे की नींद के बाद शरीर थोड़ा डिहाइड्रेटेड हो जाता है. खाली पेट पानी पीने से अंदरूनी सिस्टम फिर से शुरू हो जाते हैं. 

सुबह पानी पीना क्यों फायदेमंद 

सुबह उठते ही पानी पीने से डाइजेशन एक्टिव हो जाता है. नेचुरल डिटॉक्स प्रक्रिया में मदद मिलती है और शरीर दिन के लिए तैयार होता है. यह डाइजेस्टिव सिस्टम को धीरे-धीरे जगाता है, रेगुलर बॉवेल मूवमेंट में मदद करता है और पूरे दिन एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करता है.

गुनगुना पानी 

खाली पेट गुनगुना पानी सबसे सही ऑप्शन माना जाता है. यह डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए काफी हल्का होता है और शरीर इसे आसानी से सोख लेता है. सुबह इसे पीने से आंतों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं. इससे डाइजेशन आसान होता है और कब्ज कम होता है. यह शरीर को रात भर जमा हुए टॉक्सिन को बाहर निकलने में भी मदद करता है. शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ाकर गुनगुना पानी मेटाबॉलिज्म को बढ़ा सकता है. साथ ही यह वेट मैनेजमेंट में भी मदद कर सकता है. इसके अलावा यह ब्लड वेसल्स को नेचुरली फैलाने में मदद करके ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाता है. 

ठंडा पानी 

ठंडे पानी के अपने फायदे हैं लेकिन यह उठने के तुरंत बाद सबसे अच्छा ऑप्शन नहीं हो सकता. काफी ठंडा पानी डाइजेस्टिव सिस्टम को शॉक दे सकता है. इससे डाइजेशन धीमा हो सकता है या फिर गले में जलन हो सकती है. हालांकि यह थोड़ी मात्रा में कैलोरी बर्न करने में मदद करता है. क्योंकि शरीर इसे गर्म करने के लिए एनर्जी का इस्तेमाल करता है. सुबह वर्कआउट के बाद ठंडा पानी खासतौर पर काफी फायदेमंद होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह शरीर को ठंडा करने और जल्दी से रिहाइड्रेट करने में मदद करता है.

पानी का तापमान डाइजेशन को कैसे प्रभावित करता है 

पानी का तापमान इस बात में एक बड़ी भूमिका निभाता है कि डाइजेस्टिव सिस्टम कैसे रिस्पॉन्ड करता है. गुनगुना पानी एंजाइम एक्टिविटी और आसान डाइजेशन में मदद करता है. वहीं ठंडा पानी कुछ समय के लिए ब्लड वेसल्स को सिकोड़ सकता है. इससे डाइजेस्टिव प्रोसेस धीमा हो जाता है. यही वजह है कि खाली पेट आमतौर पर गर्म या फिर गुनगुना पानी पसंद किया जाता है.

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बिना वजह घट रहा है वजन या रहती है थकान? हो सकता है कैंसर का ‘साइलेंट’ संकेत

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Early Symptoms Of Stomach Cancer Explained: दुनियाभर में कई तरह के कैसर के मामले तेजी के साथ बढ़ रही है, इनमें से एक है पेट का कैंसर. शुरुआती चरण में इसका अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं देता. जिन देशों में पेट के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग नहीं होती,वहां ज्यादातर मामलों का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है या पेट से बाहर फैलने लगती है. चलिए आपको कैंसर के मामलों के बारे में जानकारी देने वाली ऑनलाइन बेवसाइट American Cancer Society के हिसाब से बताते हैं कि इसके कौन से लक्षण ऐसे होते हैं, जिनको हमें इग्नोर नहीं करना चाहिए. 

पेट का बार-बार फूलना

भारी या मसालेदार खाना खाने के बाद पेट फूलना आम बात है. लेकिन अगर थोड़ी-सी मात्रा में खाना खाने पर या लगभग रोज ही पेट में भारीपन महसूस होने लगे, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है. पेट के कैंसर के शुरुआती चरण में भोजन की गति धीमी पड़ जाती है, जिससे ऊपरी पेट में कसाव या जकड़न महसूस होती है. अगर यह सूजन खाने के प्रकार से जुड़ी न हो और बार-बार हो रही हो, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

बिना वजन के लगातार तनाव

नींद पूरी न होने या तनाव के कारण थकान महसूस होना सामान्य है, लेकिन अगर बिना किसी साफ वजह के लगातार कमजोरी बनी रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. पेट में धीरे-धीरे होने वाली अंदरूनी ब्लीडिंग शुरुआत में नजर नहीं आती, लेकिन इससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है. अगर थकान के साथ चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलने जैसी परेशानी हो, तो मेडिकल जांच बेहद जरूरी है.

अचानक वजन का कम होना

यह एक ऐसा लक्षण है, जिसके बारे में लोग खुलकर बात नहीं करते. व्यक्ति सामान्य तरीके से खाना शुरू करता है, लेकिन आधा खाना खाते-खाते ही पेट भरने जैसा लगने लगता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैंसर पेट की क्षमता को कम कर सकता है या भोजन को आगे बढ़ने से रोक सकता है. इसके साथ अचानक वजन कम होना भी देखा जा सकता है. अचानक सामान्य भोजन करने में परेशानी होना एक चेतावनी संकेत हो सकता है.

बार-बार मितली का आना

कभी-कभार मितली आना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन बिना किसी कारण बार-बार मिचली महसूस होना चिंता की बात हो सकती है. कुछ लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद उलझन या मिचली होने लगती है, तो कुछ सुबह उठते ही ऐसा महसूस करते हैं. पेट की दीवार में ट्यूमर की जलन से लगातार मतली हो सकती है. यह ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, इसलिए अगर यह कुछ दिनों से ज्यादा बना रहे तो सतर्क होना जरूरी है.

इसको भी हल्के में नहीं लेना चाहिए

तेजाबियत और अपच की समस्या आजकल आम है, खासकर तला-भुना या मीठा खाने के बाद. लेकिन अगर लाइफस्टाइल बदलने या दवाइयां लेने के बावजूद ये परेशानी ठीक न हो, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. लंबे समय तक अपच, ऊपरी पेट में दर्द या जलन पेट से जुड़ी बीमारियों, यहां तक कि कैंसर के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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