इन 5 सब्जियों से रिवर्स हो जाता है फैटी लिवर, जानें इन्हें खाने का सही वक्त

इन 5 सब्जियों से रिवर्स हो जाता है फैटी लिवर, जानें इन्हें खाने का सही वक्त


डायट की बात आती है, तो कुछ ऐसी सब्जियां हैं जो फैटी लिवर को सुधारने में खास भूमिका निभाती हैं. इन्हें रोजाना या नियमित डाइट में शामिल करने से लिवर के ऊपर पड़ने वाला बोझ कम होता है और सूजन भी घटती है. बस ध्यान रहे, इन सब्जियों के साथ संतुलित खान-पान, वर्कआउट और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं भी जरूरी हैं.

चुकंदर लिवर के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और नाइट्रेट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो लिवर में खून का प्रवाह बढ़ाते हैं और उसकी डिटॉक्स क्षमता को मजबूत करते हैं. यह पित्त बनाने में भी मदद करता है, जो शरीर में जमा वसा को तोड़ने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में जरूरी है. रिसर्च बताती है कि चुकंदर लिवर कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है और एंजाइम एक्टिविटी को बेहतर बनाता है.

चुकंदर लिवर के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और नाइट्रेट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो लिवर में खून का प्रवाह बढ़ाते हैं और उसकी डिटॉक्स क्षमता को मजबूत करते हैं. यह पित्त बनाने में भी मदद करता है, जो शरीर में जमा वसा को तोड़ने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में जरूरी है. रिसर्च बताती है कि चुकंदर लिवर कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है और एंजाइम एक्टिविटी को बेहतर बनाता है.

राजमा, चना, मसूर और छोले जैसे लेग्यूम्स पौधे आधारित प्रोटीन के साथ-साथ भरपूर फाइबर देते हैं. इनमें फैट बहुत कम होता है, इसलिए ये फैटी लिवर वाले लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं. कई स्टडीज में पाया गया है कि मांस की जगह दालें लेने से लिवर में फैट कम होता है. साथ ही ये पाचन बेहतर करते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं, जो फैटी लिवर के लिए बेहद ज़रूरी है.

राजमा, चना, मसूर और छोले जैसे लेग्यूम्स पौधे आधारित प्रोटीन के साथ-साथ भरपूर फाइबर देते हैं. इनमें फैट बहुत कम होता है, इसलिए ये फैटी लिवर वाले लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं. कई स्टडीज में पाया गया है कि मांस की जगह दालें लेने से लिवर में फैट कम होता है. साथ ही ये पाचन बेहतर करते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं, जो फैटी लिवर के लिए बेहद ज़रूरी है.

लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता, लिवर का दोस्त भी है. इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड लिवर में जमा होने वाली चर्बी को कम करने में मदद करते हैं और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखते हैं. रिसर्च बताती है कि लहसुन लिवर में फैट जमा होने से रोकता है और उसकी प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है. इसकी एंटी-इंफ्लेमेटरी खूबियां सूजन कम कर लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाती हैं.

लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता, लिवर का दोस्त भी है. इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड लिवर में जमा होने वाली चर्बी को कम करने में मदद करते हैं और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखते हैं. रिसर्च बताती है कि लहसुन लिवर में फैट जमा होने से रोकता है और उसकी प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है. इसकी एंटी-इंफ्लेमेटरी खूबियां सूजन कम कर लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाती हैं.

पालक, मेथी और केल जैसी हरी सब्जियां लिवर को साफ रखने में बेहद प्रभावी हैं. इनमें मौजूद क्लोरोफिल शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है और एंटीऑक्सीडेंट लिवर पर पड़ने वाले oxidative stress को कम करते हैं. रिसर्च में पाया गया है कि नियमित रूप से पालक खाने वाले लोगों में फैटी लिवर का खतरा कम देखा गया है. ये सब्ज़ियां पित्त बनने में भी मदद करती हैं, जिससे वसा का breakdown आसान हो जाता है.

पालक, मेथी और केल जैसी हरी सब्जियां लिवर को साफ रखने में बेहद प्रभावी हैं. इनमें मौजूद क्लोरोफिल शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है और एंटीऑक्सीडेंट लिवर पर पड़ने वाले oxidative stress को कम करते हैं. रिसर्च में पाया गया है कि नियमित रूप से पालक खाने वाले लोगों में फैटी लिवर का खतरा कम देखा गया है. ये सब्ज़ियां पित्त बनने में भी मदद करती हैं, जिससे वसा का breakdown आसान हो जाता है.

ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्ज़ियां फाइबर और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं. ये लिवर की सफाई में मदद करती हैं और सूजन को कम करती हैं. कई रिसर्च में देखा गया है कि इन सब्ज़ियों का अधिक सेवन करने वाले लोगों में लिवर-फैट स्कोर कम पाया गया. इन सब्जियों में मौजूद इंडोल नामक कंपाउंड लिवर पर जमा होने वाली चर्बी और सूजन दोनों को कम करने में मदद करता है.

ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्ज़ियां फाइबर और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं. ये लिवर की सफाई में मदद करती हैं और सूजन को कम करती हैं. कई रिसर्च में देखा गया है कि इन सब्ज़ियों का अधिक सेवन करने वाले लोगों में लिवर-फैट स्कोर कम पाया गया. इन सब्जियों में मौजूद इंडोल नामक कंपाउंड लिवर पर जमा होने वाली चर्बी और सूजन दोनों को कम करने में मदद करता है.

ब्रोकली या फूलगोभी को हफ्ते में कुछ बार खाने से असर दिखने लगता है. चुकंदर को सलाद, जूस या रोस्टेड रूप में ले सकते हैं. दालें, राजमा, चना और सूप में लेग्यूम्स मिलाना आसान है. लहसुन को रोज़ाना सब्जी या दाल में जोड़ें. पालक और मेथी को रोटेशन में शामिल करें, कभी सब्ज़ी, कभी सलाद और कभी स्मूदी के रूप में.

ब्रोकली या फूलगोभी को हफ्ते में कुछ बार खाने से असर दिखने लगता है. चुकंदर को सलाद, जूस या रोस्टेड रूप में ले सकते हैं. दालें, राजमा, चना और सूप में लेग्यूम्स मिलाना आसान है. लहसुन को रोज़ाना सब्जी या दाल में जोड़ें. पालक और मेथी को रोटेशन में शामिल करें, कभी सब्ज़ी, कभी सलाद और कभी स्मूदी के रूप में.

Published at : 15 Nov 2025 08:09 AM (IST)

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भारत में  हर 10 में से 1 व्यक्ति किडनी रोग से परेशान, जानें पड़ोसी देशों का हाल

भारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति किडनी रोग से परेशान, जानें पड़ोसी देशों का हाल



kidney disease prevalence India: किडनी रोग का बोझ कितना बड़ा है, इसका कोई सटीक आंकड़ा अक्सर सामने नहीं आता, खासकर भारत जैसे देशों में जहां communicable diseases की चुनौतियां पहले से ही बनी हुई हैं. लेकिन वैश्विक अनुमान बताते हैं कि दुनिया भर में करीब 800 से  850 मिलियन लोग, यानी 80 करोड़ से 85 करोड़ की संख्या में लोग, किसी न किसी रूप में किडनी रोग से प्रभावित हैं. 

DailyRounds के अनुसार भारत में तस्वीर भी उतनी ही चिंताजनक है. यहां हर 10 में से 1 भारतीय किडनी की बीमारी से प्रभावित माना जाता है. इतना ही नहीं, लगभग 5 लाख लोगों को डायलिसिस जैसी गंभीर उपचार की जरूरत होती है. भारत में किडनी की बीमारी मौत का आठवां सबसे बड़ा कारण मानी जाती है. लैंसेट में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 13.8 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि भारत के पडोसी देशों में कितने लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं. 

क्या हाल है भारत के पड़ोसी देशों का 

Shrestha et al., 2021 (Frontiers in Medicine) द्वारा किए गए एक सिस्टमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस के मुताबिक दक्षिण एशिया के प्रमुख देशों भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल में CKD का बोझ चौंकाने वाला है. भारत से सटे देश भी इस समस्या से कम पीड़ित नहीं हैं. बांग्लादेश में CKD लगभग 14 प्रतिशत (12 से 17 प्रतिशत के बीच) पाया गया है. यहां के एक्सपर्ट बताते हैं कि अत्यधिक नमक सेवन, प्रदूषित पानी, आर्थिक सीमाएं और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि किडनी धीरे-धीरे कमजोर हो रही है.

अगर बात पाकिस्तान की करें, तो पाकिस्तान में CKD की प्रचलन दर लगभग 12 प्रतिशत (11 से 14 प्रतिशत) पाई गई है. पाकिस्तान में डायबिटीज का तेजी से बढ़ना, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और देर से इलाज शुरू होना स्थिति को और गंभीर बनाता है. स्टडी बताते हैं कि वहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच असमान है और कई मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं.

नेपाल में सबसे कम मरीज

दक्षिण एशिया में सबसे कम इसका प्रभाव नेपाल में पाया गया. यहां करीब 6 प्रतिशत (6 से 7 प्रतिशत). हालांकि यह संख्या कम दिखाई देती है, लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि नेपाल में स्वास्थ्य जांचों की सीमित उपलब्धता के कारण कई मामले रिपोर्ट ही नहीं होते. नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाएं सीमित होने से केस अक्सर देर से पकड़े जाते हैं. साथ ही, बढ़ता ब्लड प्रेशर और डायबिटीज आने वाले समय में इस संख्या को बढ़ा सकता है.

इसे भी पढ़ें- Why Poop Floats: बार-बार फ्लश करने के बावजूद क्या कमोड में तैरती रहती है आपकी पॉटी, कैसे खोलती है सेहत के राज?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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न रहेगी कब्ज की दिक्कत और वजन भी घटेगा, पानी में भिगोकर ऐसे चबाएं मेथी दाना

न रहेगी कब्ज की दिक्कत और वजन भी घटेगा, पानी में भिगोकर ऐसे चबाएं मेथी दाना


Ayu जर्नल में छपी एक स्टडी में पाया गया कि टाइप-2 डायबिटीज वाले जिन लोगों ने 60 दिनों तक रोज 10 ग्राम भिगोई हुई मेथी खाई, उनकी फास्टिंग ब्लड शुगर में काफी गिरावट देखी गई.

सुबह-सुबह भिगोई हुई मेथी चबाने से ब्लड शुगर कंट्रोल से लेकर सूजन कम करने और बालों की सेहत सुधारने तक कई फायदे मिलते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि भिगोई हुई मेथी खाने के क्या फायदे हैं और इससे किस तरह हमारे सेहत पर असर पड़ता है.

सुबह-सुबह भिगोई हुई मेथी चबाने से ब्लड शुगर कंट्रोल से लेकर सूजन कम करने और बालों की सेहत सुधारने तक कई फायदे मिलते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि भिगोई हुई मेथी खाने के क्या फायदे हैं और इससे किस तरह हमारे सेहत पर असर पड़ता है.

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि मेथी भिगोने पर होता क्या है. पानी में रहने से मेथी का कठोर छिलका नरम हो जाता है. इसके अंदर मौजूद घुलनशील फाइबर, अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट आसानी से रिलीज हो जाते हैं. इससे मेथी पेट के लिए हल्की हो जाती है, पोषक तत्व जल्दी अब्जॉर्ब होते हैं और दानों को चबाना भी आसान होता है.

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि मेथी भिगोने पर होता क्या है. पानी में रहने से मेथी का कठोर छिलका नरम हो जाता है. इसके अंदर मौजूद घुलनशील फाइबर, अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट आसानी से रिलीज हो जाते हैं. इससे मेथी पेट के लिए हल्की हो जाती है, पोषक तत्व जल्दी अब्जॉर्ब होते हैं और दानों को चबाना भी आसान होता है.

1–2 चम्मच मेथी रात में एक छोटे कटोरे में पानी के साथ भिगो दें. अगर स्वाद तेज़ लगे, तो इसे गुनगुने पानी या थोड़ा शहद मिलाकर भी लिया जा सकता है. ध्यान रखें दो चम्मच से अधिक न लें, वरना ज्यादा फाइबर पेट में परेशानी कर सकता है. सुबह खाली पेट दाने अच्छी तरह चबाकर खाएं और बचा हुआ पानी भी पी लें.

1–2 चम्मच मेथी रात में एक छोटे कटोरे में पानी के साथ भिगो दें. अगर स्वाद तेज़ लगे, तो इसे गुनगुने पानी या थोड़ा शहद मिलाकर भी लिया जा सकता है. ध्यान रखें दो चम्मच से अधिक न लें, वरना ज्यादा फाइबर पेट में परेशानी कर सकता है. सुबह खाली पेट दाने अच्छी तरह चबाकर खाएं और बचा हुआ पानी भी पी लें.

ज्यादातर लोग मेथी को पेट की समस्याओं के लिए खाते हैं, मेथी में मौजूद घुलनशील फाइबर पानी सोखकर जेल जैसा रूप ले लेता है, जो पाचन को आसान बनाता है. इसके नियमित सेवन से कब्ज में राहत, पेट की जलन कम, ब्लोटिंग घटती है और सुबह की एसिडिटी में आराम मिलता है.

ज्यादातर लोग मेथी को पेट की समस्याओं के लिए खाते हैं, मेथी में मौजूद घुलनशील फाइबर पानी सोखकर जेल जैसा रूप ले लेता है, जो पाचन को आसान बनाता है. इसके नियमित सेवन से कब्ज में राहत, पेट की जलन कम, ब्लोटिंग घटती है और सुबह की एसिडिटी में आराम मिलता है.

खासकर जिन लोगों को खाना भारी लगता है या पेट जल्दी गड़बड़ रहता है, उनके लिए यह आदत काफी राहत देती है. इस वजह से भिगोई हुई मेथी सुबह के समय पेट को हल्का और आरामदायक महसूस कराती है.

खासकर जिन लोगों को खाना भारी लगता है या पेट जल्दी गड़बड़ रहता है, उनके लिए यह आदत काफी राहत देती है. इस वजह से भिगोई हुई मेथी सुबह के समय पेट को हल्का और आरामदायक महसूस कराती है.

मेथी का सबसे बड़ा फायदा है ब्लड शुगर संतुलित रखना. भिगोई मेथी से निकलने वाला गैलेक्टोमैनन फाइबर कार्बोहाइड्रेट को धीरे पचाता है, जिससे शुगर अचानक नहीं बढ़ती. अगर आप वजन कम करने की कोशिश में हैं, तो भिगोई हुई मेथी आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है, स्नैकिंग कम होती है और भूख नियंत्रण में रहती है. साथ ही पाचन दुरुस्त रहने से मेटाबॉलिजम भी बेहतर काम करता है.

मेथी का सबसे बड़ा फायदा है ब्लड शुगर संतुलित रखना. भिगोई मेथी से निकलने वाला गैलेक्टोमैनन फाइबर कार्बोहाइड्रेट को धीरे पचाता है, जिससे शुगर अचानक नहीं बढ़ती. अगर आप वजन कम करने की कोशिश में हैं, तो भिगोई हुई मेथी आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है, स्नैकिंग कम होती है और भूख नियंत्रण में रहती है. साथ ही पाचन दुरुस्त रहने से मेटाबॉलिजम भी बेहतर काम करता है.

Published at : 14 Nov 2025 05:58 PM (IST)

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तलाक होते ही सानिया मिर्जा को आया था पैनिक अटैक, जानें ऐसे में कब खतरनाक हो जाती है सिचुएशन?

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क्या विटामिन बी12 की कमी से चली जाती है याददाश्त, जानें इससे क्या-क्या होती हैं दिक्कतें?

क्या विटामिन बी12 की कमी से चली जाती है याददाश्त, जानें इससे क्या-क्या होती हैं दिक्कतें?



Vitamin B12 Deficiency: भूलने की समस्या और सोचने की गति धीमी पड़ना अक्सर उम्र, तनाव या काम के दबाव का असर माना जाता है, लेकिन कई बार इसकी असली वजह विटामिन B12 की कमी होती है. दिमाग और नसों की सेहत के लिए जरूरी यह पोषक तत्व खासकर बुजुर्गों, शाकाहारी लोगों और कुछ मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे मरीजों में कम पाया जाता है. अगर इसे समय रहते पहचान लिया जाए, तो याददाश्त कमजोर होने और सोचने की क्षमता घटने जैसी बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है.

साइंटफिक स्टडी में लगातार सामने आया है कि उम्र या तनाव के साथ-साथ पोषण की कमी भी दिमाग के कामकाज पर असर डालती है. इनमें सबसे ज्यादा ध्यान विटामिन B12 की कमी पर दिया जा रहा है. यह पानी में घुलने वाला विटामिन है, जिसे ज्यादातर हम मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों से प्राप्त करते हैं. यह दिमाग की सेल्स को सुरक्षित रखने, नर्व सिग्नल सही तरह से पहुंचाने और शरीर में होमोसिस्टीन के स्तर को कंट्रोल करने में मदद करता है. जब शरीर में B12 की कमी होती है, तो ये सभी प्रक्रियाएं गड़बड़ा जाती हैं और नतीजतन याददाश्त कमजोर होना, सोचने में समय लगना और ध्यान कम होना जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं.

विटामिन B12 दिमाग पर कैसे असर डालता है?

विटामिन B12 दिमाग और नर्वस सिस्टम को कई तरीकों से सपोर्ट करता है. इसका एक सक्रिय रूप मिथाइलकोबालामिन शरीर में होमोसिस्टीन को मेथिओनिन में बदलने में मदद करता है. यह प्रक्रिया DNA बनाने और न्यूरोट्रांसमीटर तैयार करने में जरूरी है. जब B12 कम होता है, तो होमोसिस्टीन बढ़ने लगता है, जिससे दिमाग की सेल्स और नुकसान झेलती हैं. इससे याददाश्त, सीखने की क्षमता और ध्यान पर असर पड़ता है. कई रिसर्च बताते हैं कि बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन हिप्पोकैम्पस और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में बदलाव ला सकता है, जो दिमाग के वे हिस्से हैं जो याद रखने और सोचने का काम संभालते हैं.

विटामिन B12 का दूसरा रूप एडेनोसिलकोबालामिन ऊर्जा निर्माण और माइलिन शीथ, जो नसों को सुरक्षित रखने वाली परत है. उसको मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. इसकी कमी से नसों में सिग्नल धीमे हो जाते हैं, जिससे भूलने की आदत, ध्यान में कमी और सोचने की क्षमता में गिरावट दिखाई देती है. कई मामलों में लंबे समय तक कमी बनी रहने पर डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ सकता है.

कौन लोग B12 की कमी से ज्यादा प्रभावित होते हैं?

  • बुजुर्गों में अक्सर पेट के एसिड की मात्रा कम हो जाती है, जिससे भोजन से B12 ठीक से एवजोर्व नहीं हो पाता.
  • शाकाहारी और वीगन लोग भी जोखिम में होते हैं क्योंकि पौधों में प्राकृतिक रूप से B12 मौजूद नहीं होता.
  • पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं, जैसे सेलिएक, क्रोहन रोग, पर्निशियस एनीमिया या आंतों की सर्जरी भी अब्जोर्वेशन को प्रभावित करती हैं.
  • लंबे समय तक मेटफॉर्मिन या एसिडिटी की दवाएं लेने पर भी B12 का स्तर घट सकता है.
  • डायबिटीज, किडनी संबंधी समस्याएं और प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारण भी जोखिम बढ़ाते हैं.

यानी B12 की कमी अक्सर एक ही वजह से नहीं, बल्कि कई वजहों के मिलकर होने से सामने आती है.

B12 की कमी के शुरुआती संकेत कैसे पहचानें?

शुरुआत में बहुत हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे चीजें भूलना, ध्यान न लगना, सोचने की गति धीमी पड़ना या समस्या हल करने में दिक्कत. इसके साथ ही चिड़चिड़ापन, उदासी या चिंता जैसे मूड में बदलाव भी हो सकते हैं.

इसकी रोकथाम कैसे करें?

B12 से भरपूर आहार लें. मांस, मछली, अंडे और डेयरी में यह खूब मिलता है. शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंट लें.

जरूरत पड़े तो सप्लीमेंट लें, गोली, ड्रॉप या इंजेक्शन किसी भी रूप में लिया जा सकता है.

रिस्क ग्रुप की जांच जरूरी, बुजुर्ग, पाचन रोग वाले मरीज और लंबे समय से दवाएं ले रहे लोग समय-समय पर जांच कराएं.

इसे भी पढ़ें- Man Periods: महिलाओं की तरह क्या मर्दों को भी होता है पीरियड पेन, जानें इस दौरान क्या-क्या होता है?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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महिलाओं की तरह क्या मर्दों को भी होता है पीरियड पेन, जानें इस दौरान क्या-क्या होता है?

महिलाओं की तरह क्या मर्दों को भी होता है पीरियड पेन, जानें इस दौरान क्या-क्या होता है?



Testosterone fluctuation in Men: क्या पुरुषों को महिलाओं की तरह पीरियड पेन होता है? यह सवाल सोशल मीडिया से लेकर हेल्थ फोरम तक बार-बार सामने आता है. ताजा रिसर्च और मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार इसका सीधा जवाब है नहीं, पुरुषों को महिलाओं जैसा पीरियड्स नहीं होता, लेकिन कुछ ऐसी शारीरिक और मानसिक स्थितियां जरूर होती हैं जिनके कारण पुरुष पीरियड जैसे लक्षण महसूस कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि कब पुरुषों में पीरियड्स जैसी स्थिति दिखने लगती है.

पुरुषों में क्या होता है?

Healthline की रिपोर्ट Do Men Have Periods? के अनुसार पुरुषों में यूट्रस, ओवुलेशन और पीरियड साइकिल नहीं होता. इसलिए पुरुषों को महिलाओं पीरियड दर्द नहीं हो सकता. अगर पुरुषों को दर्द, चिड़चिड़ापन या मूड महसूस होता है, तो उसका कारण कुछ और होता है. WebMD बताता है कि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर रोज बदलता है. जब यह स्तर घटता है, तो पुरुषों को चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है. इसे Irritable Male Syndrome (IMS) कहा जाता है, जो PMS जैसे लक्षण देता है.

Mayo Clinic की रिसर्च बताती है कि स्ट्रेस बढ़ने पर कोर्टिसोल हार्मोन शरीर में बहुत बढ़ जाता है. इस कोर्टिसोल की वजह से पुरुषों में पेट में ऐंठन, सिरदर्द, नींद में कमी, थकान और मूड खराब होना जैसे लक्षण आ सकते हैं. हालांकि ये सब लक्षण महिलाओं के PMS जैसे लगते हैं, लेकिन यह असली पीरियड नहीं होता.

इससे कैसे बचा जा सकता है?

अगर बात करें कि इससे बचने के उपाय क्या हैं, तो पुरुषों में पीरियड जैसे दिखने वाले लक्षण खास तौर पर तनाव, नींद की कमी, पाचन की गड़बड़ी और काम के दबाव के कारण पैदा होते हैं, और इन्हें ठीक करने के लिए सबसे पहले स्ट्रेस कम करना जरूरी है. जब दिमाग और शरीर ज्यादा दबाव में रहते हैं तो चिड़चिड़ापन, थकान, पेट में ऐंठन और मूड में उतार-चढ़ाव जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं. ऐसे में नींद पूरी लेना, समय पर खाना खाना, हल्का-फुल्का व्यायाम करना और दिन भर पर्याप्त पानी पीना शरीर को काफी राहत देता है. गैस, कब्ज या पेट की सूजन भी अक्सर पीरियड जैसा दर्द पैदा करती है, इसलिए पाचन को ठीक रखना बेहद जरूरी है.

शराब, सिगरेट, जंक फूड और देर रात तक जागना शरीर को और कमजोर बनाता है, इसलिए इन्हें कम करना या छोड़ देना फायदेमंद है. अगर यह लक्षण कई दिनों तक बने रहें, रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करें या बहुत ज्यादा दर्द हो, तो यह किसी अंदरूनी समस्या या हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है, ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर होता है.

इसे भी पढ़ें: World Diabetes Day 2025: मीठा नहीं खाते फिर भी बढ़ रहा शुगर लेवल, जानें किन आदतों से बढ़ता है डायबिटीज का खतरा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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