क्या डाइट की वजह से भी पड़ जाता है स्ट्रोक? न्यूट्रिशियनिस्ट से समझ लें बचने के तरीके

क्या डाइट की वजह से भी पड़ जाता है स्ट्रोक? न्यूट्रिशियनिस्ट से समझ लें बचने के तरीके


दरअसल आजकल के प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड हमारी सेहत पर धीरे-धीरे असर डालते हैं और यह कुछ आम खानपान की गलतियां होती है जो स्ट्रोक का कारण बनती है. जैसे शरीर में ओमेगा-3, एंटीऑक्सीडेंट, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे तत्वों की जरूरत होती है. इनकी कमी से कोलेस्ट्रॉल लेवल बिगड़ता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है.

वहीं डीप फ्राइड फूड, प्रोसेस्ड मीट और बेकरी आइटम में मौजूद ट्रांस फैट एलडीएल बढ़ाते हैं. जिससे आर्टरी ब्लॉक होने लगती है. इसके अलावा मीठे ड्रिंक,  व्हाइट ब्रेड और पेस्ट्री जैसी चीजें इन्सुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचती है. साथ ही पैक्ड स्नैक्स, अचार और सॉसेज में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं जो स्ट्रोक का सबसे आम कारण माना जाता है.

वहीं डीप फ्राइड फूड, प्रोसेस्ड मीट और बेकरी आइटम में मौजूद ट्रांस फैट एलडीएल बढ़ाते हैं. जिससे आर्टरी ब्लॉक होने लगती है. इसके अलावा मीठे ड्रिंक,  व्हाइट ब्रेड और पेस्ट्री जैसी चीजें इन्सुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचती है. साथ ही पैक्ड स्नैक्स, अचार और सॉसेज में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं जो स्ट्रोक का सबसे आम कारण माना जाता है.

स्ट्रोक से बचाव के लिए संतुलित मात्रा में नमक का सेवन करने के लिए कहा जाता है. साथ ही डाइट में नारियल पानी, दाल और पालक जैसी चीजें शामिल करने के लिए कहा जाता है, ताकि सोडियम का लेवल कंट्रोल रहे.

स्ट्रोक से बचाव के लिए संतुलित मात्रा में नमक का सेवन करने के लिए कहा जाता है. साथ ही डाइट में नारियल पानी, दाल और पालक जैसी चीजें शामिल करने के लिए कहा जाता है, ताकि सोडियम का लेवल कंट्रोल रहे.

वहीं रिफाइंड ऑयल की जगह सरसों का तेल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है और रोजाना दो अखरोट, थोड़ा अलसी और चिया सीड्स लेने के लिए भी कहा जाता है. ताकि शरीर को ओमेगा 3 फैटी एसिड मिल सके.

वहीं रिफाइंड ऑयल की जगह सरसों का तेल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है और रोजाना दो अखरोट, थोड़ा अलसी और चिया सीड्स लेने के लिए भी कहा जाता है. ताकि शरीर को ओमेगा 3 फैटी एसिड मिल सके.

इसके अलावा स्ट्रोक से बचने के लिए एक्सपर्ट्स अल्कोहल का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं और ज्यादा पानी पीने के लिए भी कहते हैं. ताकि शरीर में टॉक्सिन्स जमा न हो और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहे.

इसके अलावा स्ट्रोक से बचने के लिए एक्सपर्ट्स अल्कोहल का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं और ज्यादा पानी पीने के लिए भी कहते हैं. ताकि शरीर में टॉक्सिन्स जमा न हो और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहे.

वहीं हेल्दी फूड अपनाने से भी स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है. इसमें रोजाना खाने में फल, सब्जियां, सीड्स और ड्राई फ्रूट शामिल करने की सलाह दी जाती है, ताकि दिल और दिमाग दोनों हेल्दी रहे.

वहीं हेल्दी फूड अपनाने से भी स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है. इसमें रोजाना खाने में फल, सब्जियां, सीड्स और ड्राई फ्रूट शामिल करने की सलाह दी जाती है, ताकि दिल और दिमाग दोनों हेल्दी रहे.

साथ ही डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि जरूरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए. हमेशा सीमित मात्रा में और धीरे-धीरे खाना चाहिए. ओवरईटिंग से शरीर पर स्ट्रेस बढ़ सकता है जो हार्ट और ब्रेन दोनों के लिए नुकसानदायक होता है.

साथ ही डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि जरूरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए. हमेशा सीमित मात्रा में और धीरे-धीरे खाना चाहिए. ओवरईटिंग से शरीर पर स्ट्रेस बढ़ सकता है जो हार्ट और ब्रेन दोनों के लिए नुकसानदायक होता है.

Published at : 07 Nov 2025 04:18 PM (IST)

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अब बिना सुई लगाए कम खर्च में शुगर टेस्ट, IIT मद्रास की डिवाइस से डायबिटीज के मरीजों को राहत

अब बिना सुई लगाए कम खर्च में शुगर टेस्ट, IIT मद्रास की डिवाइस से डायबिटीज के मरीजों को राहत



भारत में डायबिटीज आज बहुत आम बीमारी बन चुकी है. भारत में करोड़ों लोग रोजाना अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच करते हैं ताकि वे अपनी सेहत को संभाल सकें. लेकिन अब तक जो तरीका यूज होता था. वो उंगली में सुई चुभाकर खून का सैंपल लेना है. वह काफी दर्दनाक और झंझट भरा होता था. कई बार दिन में 3 से 4 बार टेस्ट करना पड़ता है, जिससे न सिर्फ दर्द होता है बल्कि खर्च भी बढ़ जाता है. अब इन सब परेशानियों से राहत देने के लिए IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है जो डायबिटीज मरीजों की जिंदगी को आसान बना देगी. अब बिना सुई लगाए कम खर्च में मरीज शुगर टेस्ट कर सकेंगे. IIT मद्रास की नई डिवाइस से डायबिटीज के मरीजों को राहत मिलेगी. 

सस्ता, आसान और बिना सुई लगाए कम खर्च में शुगर टेस्ट 

IIT मद्रास के इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल्स एंड थिन फिल्म्स लैब के शोधकर्ताओं ने एक खास ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस तैयार की है. इस डिवाइस को प्रोफेसर परसुरामन स्वामीनाथन की अगुवाई में बनाया गया है. यह डिवाइस खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए डिजाइन की गई है ताकि वे बिना सुई के, आसानी से और कम खर्च में अपना ब्लड शुगर लेवल जांच सकें. 

कैसे काम करती है यह नई डिवाइस?

अब तक दो तरह के तरीके आमतौर पर यूज होते थे. जिसमें पहला SMBG (Self-Monitoring of Blood Glucose), इसमें सुई से उंगली चुभाकर खून का सैंपल लिया जाता है. वहीं दूसरा CGM (Continuous Glucose Monitoring), जो बिना बार-बार सुई लगाए रियल-टाइम रीडिंग देता है, लेकिन ये काफी महंगे होते हैं और मोबाइल या अलग डिवाइस से ही डेटा दिखाते हैं.

वहीं IIT मद्रास की टीम ने इन दोनों की कमियों को ध्यान में रखते हुए एक नया समाधान निकाला है. उन्होंने एक मॉड्यूलर सिस्टम बनाया है जिसमें दो हिस्से हैं. एक रीयूजेबल इलेक्ट्रॉनिक यूनिट जिसमें लो-पावर डिस्प्ले लगा है और एक डिस्पोजेबल माइक्रोनीडल सेंसर पैच, जो स्किन पर चिपकाया जाता है. यह माइक्रोनीडल पैच बहुत छोटा होता है और स्किन के बिल्कुल ऊपर वाले हिस्से से शुगर लेवल मेजर कर लेता है. इसका यूज करने में न तो दर्द होता है और न ही खून निकालने की जरूरत पड़ती है. 

क्या है इस रिसर्च का उद्देश्य?

इस नई तकनीक से डायबिटीज के मरीजों को बार-बार सुई चुभाने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा और वे ज्यादा आराम से अपने शुगर लेवल पर नजर रख पाएंगे. इस प्रोजेक्ट से जुड़े एमएस (एंटरप्रेन्योरशिप) स्कॉलर एल. बालमुरुगन ने बताया कि यह डिवाइस गेम-चेंजर साबित हो सकती है. यह ग्लूकोज मॉनिटरिंग को न सिर्फ आसान बनाती है बल्कि गोपनीय और किफायती भी है. अब लोग घर बैठे नियमित रूप से शुगर टेस्ट कर सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी सेहत को समझने और समय पर कदम उठाने में मदद मिलेगी. लंबे समय में इसका फायदा यह होगा कि डायबिटीज से जुड़ी इमरजेंसी और अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी. इससे परिवार पर आर्थिक बोझ घटेगा और मरीज अपनी सेहत को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे.

यह भी पढ़ें: Myrmecophobia: किन लोगों को चींटियों से लगता है डर, किस विटामिन की कमी से होता है ऐसा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दिल का दौरा पड़ने पर बाएं हाथ में क्यों होता है दर्द, जानें इस वॉर्निंग के पीछे छिपा साइंस

दिल का दौरा पड़ने पर बाएं हाथ में क्यों होता है दर्द, जानें इस वॉर्निंग के पीछे छिपा साइंस



Heart Blockage Symptoms: जब भी हम हार्ट की बात करते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में सीने में दर्द का ख्याल आता है. लेकिन कई बार लोगों को इसके साथ या इससे पहले बाएं हाथ में दर्द या भारीपन महसूस होता है. यह दर्द हल्का, दबाव जैसा, झुनझुनी भरा या सुन्नपन जैसा हो सकता है. यह लक्षण यूं ही नहीं आता, बल्कि शरीर का यह एक महत्वपूर्ण संकेत होता है कि कुछ गंभीर हो रहा है. अगर आप समय रहते इसे पहचान लें, तो आप अपनी जान बचा सकते हैं. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. 

क्यों होता है बाएं हाथ में दर्द?

जब दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती क्योंकि कोरोनरी आर्टरीज में ब्लॉकेज आ जाता है, तो हार्ट दर्द के संकेत भेजता है. दिल और बाएं हाथ की नसें एक ही रास्ते से मस्तिष्क तक जाती हैं. इस वजह से दिमाग असली दर्द के सोर्स को पहचान नहीं पाता और उसे बाएं हाथ से आने वाला दर्द समझ लेता है. इसे ही रिफरेड पेन कहा जाता है. दिल और बाएं हाथ की नसें मुख्य रूप से T1 से T4 नामक स्पाइनल नर्व्स से जुड़ी होती हैं. जब दिल में ऑक्सीजन की कमी होती है, तो इन नसों के जरिए दर्द का संदेश पूरे बाएं हिस्से तक फैल जाता है, खासतौर पर कंधे, हाथ और जबड़े तक.

क्यों बाईं तरफ दर्द ज्यादा महसूस होता है?

दिल शरीर के बाएं हिस्से की ओर थोड़ा झुका होता है, इसलिए ब्लॉकेज या दिल की मांसपेशी में ऑक्सीजन की कमी का असर उसी तरफ ज्यादा महसूस होता है. अगर दिल की Left Anterior Descending (LAD) आर्टरीज में रुकावट होती है, तो यह दर्द सीधे बाईं ओर महसूस होता है. डॉक्टर इसे विंडो मेकर आर्टरीज भी कहते हैं, क्योंकि इसमें पूरी रुकावट घातक हो सकती है.

कब समझें कि यह दर्द हार्ट अटैक का संकेत है?

हर बार बाएं हाथ का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन अगर यह दर्द कुछ मिनटों से ज्यादा रहे, दबाव या जलन जैसा महसूस हो और आराम करने पर भी न जाए, तो इसके बाद आपको सतर्क होने की जरूरत है. अगर इस दर्द के साथ सीने में भारीपन, सांस फूलना, जबड़े में दर्द, मतली या पसीना भी महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लें. करीब हर चार में से एक व्यक्ति को हार्ट अटैक के दौरान असामान्य लक्षण होते हैं. यानी उन्हें सीने में दर्द नहीं होता, बल्कि सिर्फ बाएं हाथ में दर्द ही एकमात्र संकेत हो सकता है.

इसे भी पढ़ें: Women Sleep Needs: क्या सच में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होती है नींद की जरूरत, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये 4 लक्षण नजर आएं तो समझ जाएं गॉलब्लैडर में बनने लगा स्टोन, 99 पर्सेंट लोग कर देते हैं इग्नोर

ये 4 लक्षण नजर आएं तो समझ जाएं गॉलब्लैडर में बनने लगा स्टोन, 99 पर्सेंट लोग कर देते हैं इग्नोर


गॉलस्टोनगॉलब्लैडर में बनने वाले छोटे ठोस कण होते हैं. ये कोलेस्ट्रॉल और बाइल से मिलकर बनते हैं. जब ये पित्त के रास्ते को जाम कर देते हैं, तो पेट में बहुत तेज दर्द होता है जो पीठ या कंधे तक फैल सकता है.

शुरुआत में इनका कोई लक्षण नहीं दिखता. लेकिन जैसे-जैसे पथरी बढ़ती है, दर्द के साथ मतली, उल्टी और तेल से बने खाना खाने के बाद बेचैनी महसूस होती है.

शुरुआत में इनका कोई लक्षण नहीं दिखता. लेकिन जैसे-जैसे पथरी बढ़ती है, दर्द के साथ मतली, उल्टी और तेल से बने खाना खाने के बाद बेचैनी महसूस होती है.

यह परेशानी खासतौर पर महिलाओं, 40 साल से ऊपर के लोगों और मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में अधिक होती है. बहुत तेजी से वजन कम करने या बार-बार गर्भधारण करने से भी जोखिम बढ़ जाता है.

यह परेशानी खासतौर पर महिलाओं, 40 साल से ऊपर के लोगों और मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में अधिक होती है. बहुत तेजी से वजन कम करने या बार-बार गर्भधारण करने से भी जोखिम बढ़ जाता है.

कई बार यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है जिसे एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस कहा जाता है. इसमें गॉलब्लैडर पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है और मरीज को बुखार, ठंड लगना और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है.

कई बार यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है जिसे एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस कहा जाता है. इसमें गॉलब्लैडर पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है और मरीज को बुखार, ठंड लगना और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है.

अगर दर्द हल्का है, तो दवा और खानपान में सुधार से राहत मिल सकती है. लेकिन अगर दर्द बार-बार होता है, तो डॉक्टर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से पित्ताशय निकालने की सलाह देते हैं.

अगर दर्द हल्का है, तो दवा और खानपान में सुधार से राहत मिल सकती है. लेकिन अगर दर्द बार-बार होता है, तो डॉक्टर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से पित्ताशय निकालने की सलाह देते हैं.

गॉलस्टोन से बचने के लिए तली-भुनी चीजें कम खाएं, वजन धीरे-धीरे घटाएं और रोजाना हल्का व्यायाम करें. पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर में पित्त का संतुलन बना रहे.

गॉलस्टोन से बचने के लिए तली-भुनी चीजें कम खाएं, वजन धीरे-धीरे घटाएं और रोजाना हल्का व्यायाम करें. पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर में पित्त का संतुलन बना रहे.

साल में एक बार पेट का अल्ट्रासाउंड करवाना सबसे बेहतर तरीका है ताकि गॉलस्टोन जैसी समस्या का पता समय रहते चल सके और इलाज आसान हो.

साल में एक बार पेट का अल्ट्रासाउंड करवाना सबसे बेहतर तरीका है ताकि गॉलस्टोन जैसी समस्या का पता समय रहते चल सके और इलाज आसान हो.

Published at : 07 Nov 2025 01:46 PM (IST)

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किन लोगों को चींटियों से लगता है डर, किस विटामिन की कमी से होता है ऐसा?

किन लोगों को चींटियों से लगता है डर, किस विटामिन की कमी से होता है ऐसा?



Fear of Ants: कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कई चीजों से डर लगता है. जैसे कि कुछ लोगों को छिपकली से, किसी को सांप से, किसी को अन्य चीजों से डर लगता है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि कुछ लोगों को चींटियों से भी डर लगता है? सुनने में यह थोड़ा अजीब और फिल्मों की कहानियों जैसा लगता है कि लोगों को चींटियों से डर लगता है, लेकिन यह बात सच है कि कुछ लोगों को चींटियों से डर लगता है और इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि यह है कि उनके शरीर में कुछ विटामिन्स की कमी होती है. चलिए, आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

क्या है मामला?

दरअसल, तेलंगाना के संगारेड्डी जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई थी, जहां 25 साल की महिला ने चींटियों के डर से सुसाइड कर लिया. यह घटना 4 नवंबर को घटित हुई. पुलिस के अनुसार, महिला बचपन से ही चींटियों से डरती थी. इसको लेकर उसके पैतृक गांव में उसकी काउंसलिंग भी हो चुकी थी. महिला ने सुसाइड से पहले एक लेटर भी लिखा, जिसमें उसने लिखा कि ‘मैं माफी चाहती हूं कि मैं इन चींटियों के साथ नहीं रह सकती. बेटी का ख्याल रखना. सावधान रहना.”

क्यों लगता है चींटियों से डर?

इस तरह की बीमारी को मायरमेकोफोबिया कहा जाता है. यह एक तरह का स्पेसिफिक फोबिया है, जिसमें व्यक्ति को चींटियों से अत्यधिक डर या घबराहट महसूस होती है. यह डर इतना ज्यादा होता है कि व्यक्ति चींटियों के बारे में सोचकर भी बेचैन हो जाता है. कुछ मामलों में तो लोग चींटियों के आसपास जाने से बचते हैं, बाहर खाना खाने या बाग-बगीचे जाने से भी डरते हैं. जिन लोगों को चींटियों से डर लगता है, उनमें कई शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना या कांपना, और चींटियों से जुड़ी जगहों या चीजों से दूर भागना.

किस विटामिन की कमी से होता है यह?

इसको लेकर अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है कि यह किस विटामिन्स के चलते होता है, लेकिन कई जगह इस बात का उल्लेख किया गया है कि यह विटामिन B12 की कमी के चलते हो सकता है. विटामिन B12 नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. इसकी कमी से व्यक्ति को थकान, कमजोरी, भूलने की बीमारी और डर जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं. जब नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है, तो छोटी-छोटी चीजें भी डर का कारण बन सकती हैं.

ये भी पढ़ें: Prevent Heart Attack: भारत में इन 4 वजहों से 99 पर्सेंट लोगों को पड़ता है हार्ट अटैक, जानें खतरा पहचानने और बचने के तरीके

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सर्दियों में बढ़ रहे यूरिक एसिड का कैसे रखें ध्यान? ये हेल्दी हैबिट्स करेंगी आपकी मदद

सर्दियों में बढ़ रहे यूरिक एसिड का कैसे रखें ध्यान? ये हेल्दी हैबिट्स करेंगी आपकी मदद


यूरिक एसिड शरीर में तब बनता है जब प्यूरीन नाम के तत्व टूटते हैं. प्यूरीन हमें खाने-पीने की चीजों से मिलते हैं, जैसे रेड मीट, कुछ दालें, और सी फूड. सामान्य परिस्थितियों में हमारी किडनी इस यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन ठंड के मौसम में जब पानी पीना कम हो जाता है और फिजिकल एक्टिविटी घट जाती है, तब यही यूरिक एसिड शरीर में जमा होकर परेशानी बढ़ाने लगता है.

सर्दियों में हमें प्यास कम लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं होती, जब शरीर में पानी की कमी होती है तो किडनी को यूरिक एसिड को बाहर निकालने में दिक्कत होती है. इसलिए दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं. सुबह उठते ही हल्का गर्म पानी पीने की आदत डालें. सूप, नारियल पानी, हर्बल चाय या नींबू पानी जैसी चीजें भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करती हैं.

सर्दियों में हमें प्यास कम लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं होती, जब शरीर में पानी की कमी होती है तो किडनी को यूरिक एसिड को बाहर निकालने में दिक्कत होती है. इसलिए दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं. सुबह उठते ही हल्का गर्म पानी पीने की आदत डालें. सूप, नारियल पानी, हर्बल चाय या नींबू पानी जैसी चीजें भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करती हैं.

रेड मीट, समुद्री मछलियां, दालें और ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है. ये यूरिक एसिड को बढ़ा सकते हैं. ऐसे खाने सीमित मात्रा में खाएं. इसके बदले हरी सब्जियां, सलाद, ओट्स, और ताजे फल अपनी डाइट में शामिल करें. चेरी, स्ट्रॉबेरी और नींबू पानी यूरिक एसिड को बेअसर करने में मदद करते हैं.

रेड मीट, समुद्री मछलियां, दालें और ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है. ये यूरिक एसिड को बढ़ा सकते हैं. ऐसे खाने सीमित मात्रा में खाएं. इसके बदले हरी सब्जियां, सलाद, ओट्स, और ताजे फल अपनी डाइट में शामिल करें. चेरी, स्ट्रॉबेरी और नींबू पानी यूरिक एसिड को बेअसर करने में मदद करते हैं.

सर्दियों में अक्सर हम कम्बल में दुबके रह जाते हैं और शरीर की एक्टिविटी कम हो जाती है. इससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और वजन बढ़ता है, जो यूरिक एसिड बढ़ाने का बड़ा कारण है. रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें, जैसे योग, स्ट्रेचिंग या घर के अंदर तेज चाल से वॉक. सुबह धूप में कुछ देर टहलें, इससे विटामिन D भी मिलेगा और शरीर एक्टिव रहेगा.

सर्दियों में अक्सर हम कम्बल में दुबके रह जाते हैं और शरीर की एक्टिविटी कम हो जाती है. इससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और वजन बढ़ता है, जो यूरिक एसिड बढ़ाने का बड़ा कारण है. रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें, जैसे योग, स्ट्रेचिंग या घर के अंदर तेज चाल से वॉक. सुबह धूप में कुछ देर टहलें, इससे विटामिन D भी मिलेगा और शरीर एक्टिव रहेगा.

शराब और पैकेज्ड या फास्ट फूड में प्यूरीन और केमिकल्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो यूरिक एसिड बढ़ाते हैं. शराब, सॉफ्ट ड्रिंक, और ज्यादा शक्कर वाले पेय से पूरी तरह बचें.  प्रोसेस्ड और जंक फूड की जगह घर का बना हल्का और हेल्दी खाना खाएं.

शराब और पैकेज्ड या फास्ट फूड में प्यूरीन और केमिकल्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो यूरिक एसिड बढ़ाते हैं. शराब, सॉफ्ट ड्रिंक, और ज्यादा शक्कर वाले पेय से पूरी तरह बचें. प्रोसेस्ड और जंक फूड की जगह घर का बना हल्का और हेल्दी खाना खाएं.

नींबू में मौजूद विटामिन C शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है. चेरी और स्ट्रॉबेरी जैसे फल सूजन कम करते हैं.  सुबह खाली पेट हल्का गर्म नींबू पानी पिएं. हर दिन एक कटोरी चेरी या स्ट्रॉबेरी खाने की कोशिश करें.

नींबू में मौजूद विटामिन C शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है. चेरी और स्ट्रॉबेरी जैसे फल सूजन कम करते हैं. सुबह खाली पेट हल्का गर्म नींबू पानी पिएं. हर दिन एक कटोरी चेरी या स्ट्रॉबेरी खाने की कोशिश करें.

तनाव और मोटापा, दोनों यूरिक एसिड के स्तर को प्रभावित करते हैं.  नियमित मेडिटेशन और प्राणायाम करें. संतुलित खाने लें और ज्यादा देर तक बैठे रहने से बचें.  अगर आपको जोड़ों में सूजन, दर्द या लालिमा महसूस हो रही है, तो यह गाउट का संकेत हो सकता है. दर्द निवारक दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें.  समय पर जांच कराएं और यूरिक एसिड का स्तर नियमित रूप से जांचते रहें.

तनाव और मोटापा, दोनों यूरिक एसिड के स्तर को प्रभावित करते हैं. नियमित मेडिटेशन और प्राणायाम करें. संतुलित खाने लें और ज्यादा देर तक बैठे रहने से बचें. अगर आपको जोड़ों में सूजन, दर्द या लालिमा महसूस हो रही है, तो यह गाउट का संकेत हो सकता है. दर्द निवारक दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें. समय पर जांच कराएं और यूरिक एसिड का स्तर नियमित रूप से जांचते रहें.

Published at : 07 Nov 2025 10:09 AM (IST)

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