सुबह खाली पेट चाय पीने से कौन सी बीमारी होती है, कहीं आपको भी तो नहीं?

सुबह खाली पेट चाय पीने से कौन सी बीमारी होती है, कहीं आपको भी तो नहीं?


हेल्दी और फिट रहने के लिए सिर्फ सही खानपान ही नहीं, बल्कि सुबह की आदतें भी बहुत जरूरी होती है. आमतौर पर माना जाता है कि दिन की शुरुआत जैसी होती है, उसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है. खासतौर पर लिवर की सेहत के लिए सुबह की लाइफस्टाइल बहुत जरूरी मानी जाती है. वहीं भारत में बड़ी संख्या में लोग दिन की शुरुआत खाली पेट चाय से करते हैं. कुछ लोग इसे एनर्जी के लिए पीते हैं, तो कुछ पेट साफ करने की आदत के तौर पर, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सुबह खाली पेट चाय पीना आपकी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा सकता है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि सुबह खाली पेट चाय पीने से कौन सी बीमारी होती है और कहीं आपको भी तो वो बीमारी नहीं है.

खाली पेट चाय क्यों बन सकती है परेशानी?

दरअसल चाय में कैफीन और टैनिन जैसे तत्व पाए जाते हैं. ये दोनों ही खाली पेट शरीर पर सीधा असर डालते हैं. वहीं सुबह के समय पेट ज्यादा संवेदनशील होता है और ऐसे में चाय पीने से एसिडिटी, गैस और अपच की शिकायत हो सकती है. लंबे समय तक यह आदत बनी रहे तो पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है.

लिवर पर भी पड़ता है असर

एक्सपर्ट्स के अनुसार खाली पेट चाय पीने से लिवर की काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इससे लिवर में सूजन और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. सुबह उठते ही चाय पीने की बजाय शरीर को पहले पानी और हल्के पोषण की जरूरत होती है.

आयरन की कमी का खतरा

चाय में मौजूद टैनिन शरीर में आयरन के अवशोषण को रोकता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति रोजाना खाली पेट चाय पीता है तो समय के साथ हीमोग्लोबिन का लेवल गिर सकता है. इसका असर थकान, कमजोरी, बाल झड़ने और अन्य समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है.

गट हेल्थ पर नेगेटिव इफेक्ट

सुबह के समय शरीर को पानी और फाइबर की जरूरत होती है, ताकि गट के अच्छे बैक्टीरिया एक्टिव हो सके. लेकिन खाली पेट चाय पीने से गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पाचन कमजोर हो जाता है और पोषक तत्वों का सही अवशोषण नहीं हो पाता है.

एक्सपर्ट क्या सलाह देते हैं?

एक्सपर्ट्स के अनुसार चाय पीने का सही समय सुबह उठने के करीब दो घंटे बाद या नाश्ता करने के एक घंटे बाद होता है. इससे चाय का शरीर पर नेगेटिव इफेक्ट नहीं पड़ता. वहीं दिन की शुरुआत 1 से 2 गिलास पानी, फल या हल्के नाश्ते से करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.

ये भी पढ़ें-बिहार में 22 दिन से नहीं निकली धूप, डॉक्टर बोले- विटामिन डी की कमी से बढ़ा बीमारियों का खतरा

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

डेंटिस्ट्स ने किया अलर्ट, ये 5 आदतें चुपके से दांतों को अंदर से कर रहीं कमजोर

डेंटिस्ट्स ने किया अलर्ट, ये 5 आदतें चुपके से दांतों को अंदर से कर रहीं कमजोर


अक्सर लोग सोचते हैं कि जितना जोर से ब्रश करेंगे दांत उतने साफ होंगे. लेकिन हकीकत इससे उल्टी है. हार्ड ब्रश या जरूरत से ज्यादा प्रेशर से ब्रश करने पर एनामेल धीरे-धीरे घिसने लगता है. शुरुआत में इसका पता नहीं चलता, लेकिन समय के साथ दांत पतले और सेंसिटिव हो जाते हैं.

वहीं कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, खट्टे जूस, चाय, कॉफी और मिठाइयां दांतों के लिए सबसे बड़ा खतरा माने जाते हैं. इनमें मौजूद एसिड और शुगर बार-बार दांतों के संपर्क में आकर एनामेल को कमजोर करते हैं. चाहे आप रोजाना ब्रश ही क्यों न करें लेकिन ऐसी चीजों का ज्यादा सेवन एनामेल इरोजन को बढ़ा देता है.

वहीं कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, खट्टे जूस, चाय, कॉफी और मिठाइयां दांतों के लिए सबसे बड़ा खतरा माने जाते हैं. इनमें मौजूद एसिड और शुगर बार-बार दांतों के संपर्क में आकर एनामेल को कमजोर करते हैं. चाहे आप रोजाना ब्रश ही क्यों न करें लेकिन ऐसी चीजों का ज्यादा सेवन एनामेल इरोजन को बढ़ा देता है.

Published at : 10 Jan 2026 10:43 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

बिहार में 22 दिन से नहीं निकली धूप, डॉक्टर बोले- विटामिन डी की कमी से बढ़ा बीमारियों का खतरा

बिहार में 22 दिन से नहीं निकली धूप, डॉक्टर बोले- विटामिन डी की कमी से बढ़ा बीमारियों का खतरा


बिहार में इस बार बेहद तगड़ी सर्दी पड़ रही है. राजधानी पटना सहित पूरे राज्य के ज्यादातर जिलों में दिसंबर के मध्य से कोहरा और ठंड का कहर बना हुआ है. भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक बिहार में लगातार कोल्ड डे और घने कोहरे की स्थिति बनी हुई है, जिससे करीब 22 दिन से धूप नहीं निकली है. ऐसे में लोगों को सूरज की पर्याप्त रोशनी नहीं मिल रही है, जो शरीर में विटामिन डी बनाने का मुख्य सोर्स है. डॉक्टरों का कहना है कि विटामिन डी की कमी से लोगों में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है.

बिहार में कैसा है मौसम?

आईएमडी की जनवरी 2026 की रिपोर्ट्स बताती हैं कि बिहार के सभी 38 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी है. दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में सुबह से शाम तक घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी बहुत कम हो गई. पटना में कई दिनों तक अधिकतम तापमान 14-15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा और न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री तक गिर गया. राज्य के उत्तरी, दक्षिणी और मध्य हिस्सों में कोल्ड डे की स्थिति बनी रही. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी हवाओं की वजह से ठंड बढ़ी है और कोहरा जनवरी के मध्य तक बना रह सकता है. ऐसे में कोहरे की वजह से धूप न मिलने के कारण विटामिन डी की कमी का खतरा बहुत बढ़ गया है.

क्यों जरूरी है विटामिन डी?

डॉक्टरों के मुताबिक, विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है. यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है, मांसपेशियों को ताकत देता है और दिमाग को हेल्दी रखता है. शरीर का 80-90 प्रतिशत विटामिन डी सूरज की रोशनी से बनता है. इसके लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक की धूप सबसे फायदेमंद होती है, लेकिन जब लगातार 22-25 दिनों तक धूप नहीं निकलती तो शरीर में इसकी कमी हो जाती है. बिहार में पहले से ही विटामिन डी की कमी बेहद कॉमन है. कई स्टडीज में सामने आया है कि बिहार में 70 से 90 पर्सेंट लोग विटामिन डी की कमी से जूझते हैं. 2023 के एक सरकारी सर्वे से पता चला था कि पटना जिले में 82 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी है. 

विटामिन डी की कमी कितनी खतरनाक?

पटना के मशहूर हड्डी रोग विशेषज्ञ और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अश्विनी गौरव ने बताया कि विटामिन डी की कमी से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. कमर, घुटनों और जोड़ों में दर्द रहता है. बच्चों में रिकेट्स नाम की बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं. बुजुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है, यानी हड्डियां बहुत कमजोर होकर आसानी से टूट जाती हैं. थोड़ी सी चोट में भी फ्रैक्चर हो सकता है. इम्यूनिटी कमजोर होने से बार-बार सर्दी-खांसी और वायरल इंफेक्शन होता है और बीमारी से ठीक होने में वक्त लगता है. विटामिन डी की कमी के शुरुआती लक्षण ज्यादा नहीं दिखते, लेकिन हड्डियों में दर्द हो तो इसे नजरअंदाज न करें. घरेलू उपाय आजमा सकते हैं, लेकिन एक-दो दिन में आराम न मिले तो डॉक्टर से मिलें और विटामिन डी की जांच कराएं.

विटामिन डी की कमी से क्या होता है?

न्यूरो सर्जन डॉ. श्याम सुंदर ने भी चेतावनी दी है कि विटामिन डी की कमी दिमाग पर बुरा असर डालती है. सुस्ती, थकान, चिड़चिड़ापन, उदासी, डिप्रेशन और नींद की समस्या हो सकती है. दिन भर सुस्ती रहती है, काम करने की इच्छा नहीं होती. हाल की स्टडीज में पाया गया कि विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन और एंग्जायटी की दिक्कत बढ़ जाती है. विटामिन डी से दिमाग में सूजन कम होती है और  यह सेरोटोनिन हार्मोन को नियंत्रित करता है, जो खुशी का हार्मोन है. वहीं, विटामिन डी की कमी होने पर मूड खराब रहता है. डॉ. श्याम सुंदर कहते हैं कि अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं. धूप न मिल रही हो तो दवा से कमी पूरी की जा सकती है, लेकिन इन दवाओं का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. 

महिलाओं-बच्चों को होती है ये दिक्कतें

डॉक्टरों के मुताबिक, विटामिन महिलाओं और बच्चों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है. गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी की कमी से डिलीवरी के समय दर्द नहीं होता है. इससे गर्भ में बच्चे का विकास रुक सकता है और हड्डियां कमजोर हो सकती हैं. बच्चों में लंबाई और वजन नहीं बढ़ते. साथ ही, बाल झड़ते हैं, स्किन रूखी हो जाती है और घाव जल्दी नहीं भरते. डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा भी बढ़ता है. 

कैसे करें अपना बचाव?

डॉक्टरों की सलाह है कि ज्यादा से ज्यादा ताजा हरी सब्जियां और फल जैसे पालक, मशरूम, दूध और अंडे खाएं, जिनमें विटामिन डी के सोर्स होते हैं. हालांकि, मुख्य सोर्स धूप है. जब धूप निकले तो 15-20 मिनट चेहरे, हाथ-पैर पर लगने दें. ठंड में गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकलें. अगर विटामिन डी की कमी ज्यादा है तो डॉक्टर से दवा लें.

ये भी पढ़ें: ECG की नॉर्मल रिपोर्ट के भरोसे बैठे हैं तो हो जाएं सावधान, ध्यान नहीं दिया तो कभी भी आ सकती है मौत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या पैकेज्ड फूड से होता हैं कैंसर? पटना के डॉक्टर ने बताई डराने वाली हकीकत

क्या पैकेज्ड फूड से होता हैं कैंसर? पटना के डॉक्टर ने बताई डराने वाली हकीकत


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग जल्दी-जल्दी तैयार होने वाले पैकेज्ड फूड पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं. चिप्स, बिस्किट, पैकेट वाला जूस, कोल्ड ड्रिंक, प्रोसेस्ड मीट, रेडी-टू-ईट नूडल्स और ब्रेड जैसी चीजें हर घर में आम हो गई हैं. अब सवाल उठता है कि क्या पैकेट वाली इन चीजों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है? इस सवाल पर दुनिया भर में रिसर्च हो रही है. फ्रांस की बड़ी स्टडी न्यूट्रीनेट-सैंटे से लेकर हाल की रिपोर्ट्स तक कई सबूत मिले हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के ज्यादा सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अभी पुख्ता सबूत नहीं हैं. पटना के मशहूर कैंसर एक्सपर्ट डॉ. बीपी सिंह ने भी इस पर अपनी राय दी है. आइए जानते हैं कि इस मसले पर उन्होंने क्या  खुलासा किया? 

कैसे होते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने की वे चीजें हैं, जो फैक्ट्री में बहुत ज्यादा प्रोसेस की जाती हैं. इनमें नमक, चीनी, तेल और कई तरह के केमिकल ऐडिटिव्स जैसे प्रिजर्वेटिव्स, कलर, फ्लेवर और इमल्सिफायर मिलाए जाते हैं, जिससे फूड प्रॉडक्ट्स लंबे समय तक खराब न हों और स्वाद अच्छा लगे. आमतौर पर पैकेट में बंद चिप्स, सोडा, पैकेट जूस, प्रोसेस्ड चीज, सॉसेज, हैम जैसे मीट प्रॉडक्ट्स और कई तरह के स्नैक्स इसी कैटेगरी में आते हैं.

रिसर्च में क्या आ चुका सामने?

सबसे पहले पुरानी रिसर्च की बात करते हैं. दरअसल, साल 2018 के दौरान न्यूट्रीनेट-सैंटे नाम की बड़ी स्टडी में पाया गया कि अगर डाइट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का हिस्सा 10 पर्सेंट बढ़ जाए तो कैंसर का खतरा 12 पर्सेंट और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 11 पर्सेंट बढ़ जाता है. यह स्टडी मशहूर मेडिकल जर्नल बीएमजे में प्रकाशित हुई थी, जिसके लिए हजारों लोगों को काफी समय तक फॉलो किया गया था. वहीं, जनवरी 2026 में ही बीएमजे जर्नल में न्यूट्रीनेट-सैंटे स्टडी का नया हिस्सा पब्लिश हुआ है, जिसमें फूड प्रिजर्वेटिव्स यानी सामान को खराब होने से बचाने वाले केमिकल्स पर फोकस किया गया.

नई स्टडी में इतने लोग हुए शामिल

जानकारी के मुताबिक, नई स्टडी में एक लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया. नतीजे बताते हैं कि कुछ खास प्रिजर्वेटिव्स का ज्यादा सेवन सभी तरह के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ाता है. दरअसल, पोटैशियम सोर्बेट, सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम नाइट्रेट और सोडियम इरिथोरबेट जैसे ऐडिटिव्स से खतरा ज्यादा दिखा. हालांकि, प्रिजर्वेटिव्स और कैंसर में डायरेक्ट कनेक्शन नहीं मिला, लेकिन ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में कैंसर का रिस्क 10-20 प्रतिशत तक बढ़ा पाया गया.

क्यों बढ़ता है खतरा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में ज्यादा नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट होता है, जो मोटापा, डायबिटीज और इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है. ये सब कैंसर के लिए रिस्क फैक्टर हैं. साथ ही, पैकेजिंग से आने वाले केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं या डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्लास्टिक पैकेट से माइक्रोप्लास्टिक्स भी शरीर में जा सकते हैं.

क्या कभी नहीं खाने चाहिए पैकेज्ड फूड?

तमाम रिसर्च पर फोकस करने पर सवाल उठता है कि क्या गलती से भी पैकेज्ड फूड नहीं खाने चाहिए? इस पर पटना के मशहूर कैंसर एक्सपर्ट डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि अब तक कई रिसर्च हो चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी लैब में पुख्ता सबूत नहीं मिले कि पैकेट वाले खाने से कैंसर होता है. यह साफ है कि पैकेज्ड फूड हानिकारक होता है, जिससे पेट की बीमारियां और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रॉब्लम्स बढ़ती हैं. ताजा जूस, दूध या ब्रेड फायदेमंद होते हैं, लेकिन पैकेट वाले फूड हानिकारक हो सकते हैं. प्लास्टिक पैकेट में आने वाले दूध को भी अच्छा नहीं माना जाता है, लेकिन कैंसर के सबूत अब तक नहीं मिले हैं. हालांकि, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे फूड से पेट और आंतों से संबंधित कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. 

ये भी पढ़ें: ECG की नॉर्मल रिपोर्ट के भरोसे बैठे हैं तो हो जाएं सावधान, ध्यान नहीं दिया तो कभी भी आ सकती है मौत

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

ठंड में खाना खाने के बाद आपको भी होती है मीठे की क्रेविंग, ये चीजें करें ट्राई

ठंड में खाना खाने के बाद आपको भी होती है मीठे की क्रेविंग, ये चीजें करें ट्राई


Why Do We Crave Sugar In Winter: सर्दियों में दिन छोटे और तापमान कम होते ही शरीर का झुकाव अपने-आप ज्यादा एनर्जी देने वाले खाने की तरफ बढ़ने लगता है. इसमें मीठी चीजें भी शामिल हैं. दरअसल, ठंड के मौसम में शरीर अतिरिक्त एनर्जी की तलाश करता है, ताकि खुद को गर्म और संतुलित रख सके. यही वजह है कि खाना खाने के बाद भी मिठाई या कुछ मीठा खाने की तलब महसूस होने लगती है.

इस मौसमी बदलाव का असर सिर्फ भूख पर नहीं, बल्कि मूड पर भी पड़ता है. कुछ स्टडी में पाया गया है कि सर्दियों में कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीजों की क्रेविंग का संबंध मौसमी उदासी या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से भी हो सकता है. हालांकि अच्छी बात यह है कि रोशनी, सही खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी जैसी आदतों से इन क्रेविंग्स को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

सर्दियों में मीठे की तलब क्यों बढ़ती है?

2022 में Food Quality and Preference जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, ठंडा मौसम, कम होती धूप और सर्दियों से जुड़ी मानसिक धारणाएं लोगों को हल्के खाने के बजाय ज्यादा कैलोरी वाले फूड की ओर आकर्षित करती हैं. आसान शब्दों में कहें तो जैसे-जैसे मौसम ठंडा और अंधेरा होता है, शरीर और दिमाग दोनों ज्यादा एनर्जी देने वाले खाने की मांग करने लगते हैं.

वहीं, मेंटल हेल्थ से जुड़े रिसर्च बताते हैं कि सर्दियों का असर हमारी भावनाओं पर भी पड़ता है. The American Journal of Psychiatry में प्रकाशित एक पुराने लेकिन जरूरी स्टडी में पाया गया कि सीजनल डिप्रेशन से जूझ रहे लोग सर्दियों में वसंत या गर्मियों की तुलना में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीज़ें खाते हैं. रिसर्चर के अनुसार, मीठे और कार्बोहाइड्रेट की क्रेविंग सर्दियों में होने वाले डिप्रेशन के प्रमुख लक्षणों में से एक है.

मीठे की क्रेविंग को कैसे करें कंट्रोल?

अगर सर्दी आपको मीठे की तरफ खींच रही है, तो भी इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को बेबस मान लें। इन आसान उपायों से आप क्रेविंग को संभाल सकते हैं:

धूप को दिनचर्या में शामिल करें
धूप में कुछ समय बिताना या लाइट थेरेपी लैम्प का इस्तेमाल मूड और बॉडी क्लॉक को बेहतर करता है, जिससे मीठे की तलब कम हो सकती है.

हेल्दी और गर्म खाना चुनें
सूप, स्टू, गर्म अनाज, सब्ज़ियां जैसे भरपेट और पौष्टिक विकल्प अपनाएं. ये आपको संतुष्टि देंगे और बार-बार मीठा खाने की इच्छा नहीं होगी.

एक्टिव रहें
हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या घर के अंदर की एक्सरसाइज ब्लड शुगर को बैलेंस रखती है और मूड भी बेहतर बनाती है.

मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें
सर्दियों में अकेलापन और तनाव बढ़ सकता है. दोस्तों से बातचीत, हॉबीज़ या क्रिएटिव एक्टिविटी इसमें मददगार हो सकती हैं.

पहले से तैयारी रखें
घर में हेल्दी विकल्प जैसे मेवे, गर्म चाय, फल या होल ग्रेन स्नैक्स रखें, ताकि मीठा ही एकमात्र विकल्प न बने.

इसे भी पढ़ें- Knuckle Cracking: बार-बार चटकाने से कमजोर हो जाती हैं उंगलियों की हड्डियां, कितनी सही है यह बात?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp