दिल बनेगा मजबूत और कोलेस्ट्रॉल रखेगा कंट्रोल, डाइट में शामिल करें ये 5 हर्बल टी

दिल बनेगा मजबूत और कोलेस्ट्रॉल रखेगा कंट्रोल, डाइट में शामिल करें ये 5 हर्बल टी


गहरी लाल रंग वाली हिबिस्कस टी दिल के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. एक क्लिनिकल ट्रायल में हाई ब्लड प्रेशर वाले 65 लोगों को 6 हफ्तों तक रोज तीन कप हिबिस्कस टी दी गई. इसके बाद रिजल्ट में पाया गया कि उनका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर काफी कम हुआ है.  इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर दोनों को कंट्रोल करने में मदद करते हैं.

ग्रीन टी में पाए जाने वाले कैटेचिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. रिसर्च के अनुसार दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी पीने से न सिर्फ दिल हेल्दी रहता है, बल्कि सूजन कम होती है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है.

ग्रीन टी में पाए जाने वाले कैटेचिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. रिसर्च के अनुसार दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी पीने से न सिर्फ दिल हेल्दी रहता है, बल्कि सूजन कम होती है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है.

रूइबोस टी जिसे रेड बुश टी भी कहा जाता है. यह कैफीन फ्री और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. इसमें मौजूद एस्पालाथिन और नोटोफैगिन जैसे कंपाउंड ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं और कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करते हैं. एक रिसर्च में पाया गया है कि रोजाना 200 से 1200 मिलीलीटर रूइबोस टी पीने से शरीर के लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर लेवल में सुधार होता है.

रूइबोस टी जिसे रेड बुश टी भी कहा जाता है. यह कैफीन फ्री और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. इसमें मौजूद एस्पालाथिन और नोटोफैगिन जैसे कंपाउंड ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं और कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करते हैं. एक रिसर्च में पाया गया है कि रोजाना 200 से 1200 मिलीलीटर रूइबोस टी पीने से शरीर के लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर लेवल में सुधार होता है.

कैमोमाइल टी आम तौर पर रिलैक्सेशन और नींद के लिए जानी जाती है. लेकिन यह दिल की हेल्थ के लिए भी उतनी ही फायदेमंद मानी जाती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे अपीजेनिन, ल्यूटिन और क्वेरसेटिन सूजन कम करते हैं. ब्लड प्रेशर घटाते हैं और कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं, इससे दिल की कार्य क्षमता बेहतर होती है.

कैमोमाइल टी आम तौर पर रिलैक्सेशन और नींद के लिए जानी जाती है. लेकिन यह दिल की हेल्थ के लिए भी उतनी ही फायदेमंद मानी जाती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे अपीजेनिन, ल्यूटिन और क्वेरसेटिन सूजन कम करते हैं. ब्लड प्रेशर घटाते हैं और कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं, इससे दिल की कार्य क्षमता बेहतर होती है.

अदरक हर्बल टी में मौजूद जिंजरॉल और शोओगॉल जैसे कंपाउंड शरीर में सूजन को कम करते हैं और ब्लड फ्लो को बेहतर बनाते हैं. यह हर्बल टी ब्लड प्रेशर को संतुलित रखती है और खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने में भी मददगार होती है.

अदरक हर्बल टी में मौजूद जिंजरॉल और शोओगॉल जैसे कंपाउंड शरीर में सूजन को कम करते हैं और ब्लड फ्लो को बेहतर बनाते हैं. यह हर्बल टी ब्लड प्रेशर को संतुलित रखती है और खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने में भी मददगार होती है.

Published at : 03 Nov 2025 07:57 AM (IST)



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सुबह की धूप से लेकर स्ट्रेस मैनेजमेंट तक, जानिए ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के 5 आसान तरीके

सुबह की धूप से लेकर स्ट्रेस मैनेजमेंट तक, जानिए ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के 5 आसान तरीके


एक्सपर्ट के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए रोजाना थोड़ी देर एक्सरसाइज करना और सुबह की धूप लेना जरूरी है. वॉकिंग, जॉगिंग, साइकलिंग, स्विमिंग या कोई भी एक्टिविटी शरीर को मजबूत बनाती है और विटामिन डी से इम्यून सिस्टम बेहतर होता है. जिससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रोटीन सिर्फ मसल्स बनाने के लिए नहीं बल्कि शरीर के टिशूज रिपेयर करने और एंटीबॉडी बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इम्यून सिस्टम को बैक्टीरिया और कैंसर सेल से लड़ने के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है. इसलिए हर दिन अपने खाने में आप पर्याप्त प्रोटीन शामिल करके भी ब्रेस्ट कैंसर से बच सकते हैं.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रोटीन सिर्फ मसल्स बनाने के लिए नहीं बल्कि शरीर के टिशूज रिपेयर करने और एंटीबॉडी बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इम्यून सिस्टम को बैक्टीरिया और कैंसर सेल से लड़ने के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है. इसलिए हर दिन अपने खाने में आप पर्याप्त प्रोटीन शामिल करके भी ब्रेस्ट कैंसर से बच सकते हैं.

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कैंसर का खाना शुगर होता है. ऐसे में वह सलाह देते हैं कि जंक फूड, मिठाइयां, चॉकलेट, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और अल्कोहल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभी इन चीजों का सेवन ठीक है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कैंसर का खाना शुगर होता है. ऐसे में वह सलाह देते हैं कि जंक फूड, मिठाइयां, चॉकलेट, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और अल्कोहल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभी इन चीजों का सेवन ठीक है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.

वहीं लगातार तनाव और नींद की कमी से शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. इससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.  ऐसे में शरीर के लिए पर्याप्त नींद और मानसिक शांति जरूरी होती है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर से बचा जा सकता है.

वहीं लगातार तनाव और नींद की कमी से शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. इससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में शरीर के लिए पर्याप्त नींद और मानसिक शांति जरूरी होती है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर से बचा जा सकता है.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हर महिला को महीने में एक बार ब्रेस्ट की सेल्फ एग्जामिनेशन करनी चाहिए और साल में एक बार डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. जिससे समय पर पता चलने पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव हो सकता है.

इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हर महिला को महीने में एक बार ब्रेस्ट की सेल्फ एग्जामिनेशन करनी चाहिए और साल में एक बार डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. जिससे समय पर पता चलने पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव हो सकता है.

Published at : 02 Nov 2025 09:31 PM (IST)



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किन बीमारियों से जूझ रहे धर्मेंद्र, जान लें ये बीमारियां कितनी खतरनाक?

किन बीमारियों से जूझ रहे धर्मेंद्र, जान लें ये बीमारियां कितनी खतरनाक?



Dharmendra Deol: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 89 साल के धर्मेंद्र पिछले कुछ दिनों से डॉक्टरों की सख्त निगरानी में हैं और फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र किस बीमारी से पीड़ित हैं.

हालत स्थिर, लेकिन निगरानी में

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र शुरू में एक रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें भर्ती करने का फैसला किया. ब्रीच कैंडी अस्पताल के एक स्टाफ सदस्य ने मीडिया को बताया कि “धर्मेंद्र जी सांस फूलने की शिकायत लेकर आए थे. अभी वो आईसीयू में हैं और आराम कर रहे हैं.” जब उनकी सेहत को लेकर पूछा गया तो अस्पताल के प्रतिनिधि ने कहा कि फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है. वो स्थिर हैं. उनका हार्ट रेट 70 है, ब्लड प्रेशर 140/80 है और यूरिन आउटपुट भी नॉर्मल है.

डॉक्टरों ने उन्हें कुछ और दिन ऑब्जर्वेशन में रखने की सलाह दी है. इस बीच, उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल अपने काम से थोड़ा वक्त निकालकर पिता के पास मौजूद हैं. दिसंबर में धर्मेंद्र 90 साल के होने वाले हैं और हाल के सालों में उन्हें कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

सांस फूलने की समस्या कितनी गंभीर?

89 साल की उम्र में शरीर के लंग्स और हार्ट पहले जैसे मजबूत नहीं रहते, इसलिए जरा सी थकान या ऑक्सीजन की कमी भी सांस फूलने का कारण बन सकती है. कई बार ऐसा तब होता है जब शरीर में पानी रुक जाता है, फेफड़ों में हल्का संक्रमण हो जाता है या दिल की धड़कनें ठीक से काम नहीं करतीं. सामान्य तौर पर, अगर किसी बुजुर्ग को सिर्फ थकान या मौसम बदलने की वजह से थोड़ी देर के लिए सांस फूलती है, तो यह बहुत खतरनाक नहीं होती. लेकिन जब सांस लेने में तकलीफ अचानक या बार-बार होने लगे, तो यह दिल, फेफड़ों या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकती है.

कुछ महीने पहले हुई थी सर्जरी

इस साल अप्रैल में धर्मेंद्र की मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उन्होंने जल्दी ही रिकवरी कर ली थी. उम्र के इस पड़ाव पर भी वो खुद को एक्टिव रखते हैं न सिर्फ निजी जिंदगी में बल्कि प्रोफेशनली भी. वर्क फ्रंट की बात करें तो धर्मेंद्र हाल ही में फिल्म तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया (2024) में नजर आए थे, जिसमें शाहिद कपूर और कृति सेनन ने मुख्य भूमिका निभाई थी. अब वह श्रीराम राघवन की फिल्म इक्कीस में नजर आएंगे. यह एक वॉर ड्रामा है जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित है, जो भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता हैं. फिल्म में अगस्त्या नंदा, सिमर भाटिया, जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म दिसंबर 2025 में रिलीज होने वाली है.

इसे भी पढ़ें: अंडा सही है या खराब… ऐसे करें चेक, नहीं तो लिवर में हो जाएगी ये बीमारी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किडनी डैमेज हो गई तो सुबह उठते ही दिखते हैं ये 5 लक्षण, 99 पर्सेंट लोग कर देते हैं इग्नोर

किडनी डैमेज हो गई तो सुबह उठते ही दिखते हैं ये 5 लक्षण, 99 पर्सेंट लोग कर देते हैं इग्नोर


किडनी हमारे शरीर का वो अहम हिस्सा है जो खून को फिल्टर करने, टॉक्सिन्स बाहर निकालने और शरीर के मिनरल बैलेंस को बनाए रखने का काम करती है. लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान और ज्यादा दवाइयों के सेवन से किडनी डैमेज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. बड़ी समस्या यह है कि लोग इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते और जब तक पता चलता है, तब तक बीमारी खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी होती है.

सुबह उठते ही दिखने वाले किडनी डैमेज के 5 संकेत

चेहरे और आंखों में सूजन (Facial Puffiness)

अगर सुबह उठते ही आपका चेहरा, खासकर आंखों के नीचे सूजन लिए रहता है, तो यह किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत हो सकता है. किडनी जब सही से काम नहीं करती, तो शरीर में एक्स्ट्रा फ्लूइड जमा होने लगता है.

सुबह थकान और कमजोरी (Morning Fatigue)

नींद पूरी करने के बावजूद अगर आप सुबह उठते ही बहुत थके हुए और कमजोर महसूस करते हैं, तो इसे हल्के में न लें. किडनी डैमेज होने पर शरीर में टॉक्सिन्स का लेवल बढ़ जाता है, जिससे थकान और कमजोरी बढ़ती है.

फोम वाली यूरिन (Foamy Urine)

सुबह पहली पेशाब में अगर ज्यादा झाग दिखाई दे, तो यह प्रोटीन लीकेज का संकेत हो सकता है. सामान्य रूप से पेशाब में झाग बहुत जल्दी गायब हो जाता है, लेकिन लगातार झाग बने रहना किडनी हेल्थ के लिए अलर्ट है.

पैरों और टखनों में सूजन (Swelling in Feet/Ankles)

सुबह उठते ही पैरों और टखनों में सूजन आना भी किडनी खराब होने का लक्षण है. इसका कारण यह है कि किडनी शरीर से सोडियम और फ्लूइड को बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे निचले हिस्से में सूजन बनने लगती है.

सुबह सिरदर्द और ध्यान की कमी (Morning Headache & Lack of Focus)

किडनी डैमेज से शरीर में टॉक्सिन्स जमा होते हैं, जो दिमाग तक खून की सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं. इसका नतीजा है सुबह उठते ही सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी.

कब करें डॉक्टर से संपर्क?

अगर आपको ये लक्षण लगातार 1-2 हफ्तों तक दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप करवाना जरूरी है. ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट से शुरुआती स्टेज पर किडनी प्रॉब्लम की पहचान हो सकती है.

बचाव कैसे करें?

  • ज्यादा पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें
  • ज्यादा नमक और पैकेज्ड फूड से बचें
  • ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल कंट्रोल में रखें
  • जरूरत से ज्यादा पेनकिलर या एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें
  • रेगुलर हेल्थ चेकअप कराते रहें

डॉक्टर क्या कहते हैं

डॉ. सनजय पांडे, जो नारायणा हेल्थ हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजिस्ट हैं, ने एक ऑनलाइन वीडियो में बताया कि सुबह उठते ही चेहरे पर सूजन, टखनों में पानी भरना, फोम वाली पेशाब, लगातार थकान और नींद पूरी होने के बाद भी कमजोरी महसूस होना किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि ये लक्षण अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें इग्नोर करना किडनी फेल्योर का कारण बन सकता है. डॉ. पांडे के मुताबिक, ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत ब्लड और यूरिन टेस्ट करवाना चाहिए और नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. किडनी डैमेज धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, इसलिए इसके शुरुआती संकेतों को इग्नोर न करें. समय रहते जांच और सही इलाज से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- यूथ में क्यों बढ़ रहे कार्डियक अरेस्ट से मौत के मामले, आखिर क्या गलती करके जान गंवा रहे युवा?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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55 की उम्र में 17वें बच्चे की मां बनी महिला, इस उम्र में नेचुरली कंसीव करना कितना मुश्किल?

55 की उम्र में 17वें बच्चे की मां बनी महिला, इस उम्र में नेचुरली कंसीव करना कितना मुश्किल?


राजस्थान के उदयपुर जिले के झाड़ोल इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. 55 साल की रेखा गलबेलिया ने अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया. रेखा पहले भी 16 बच्चों की मां रह चुकी हैं, लेकिन उनमें से 4 बेटे और 1 बेटी जन्म के तुरंत बाद ही चल बसे थे. अभी परिवार में कई बच्चे जीवित हैं, जिनमें से 5 की शादी हो चुकी है और उनके अपने बच्चे भी हैं.

रेखा की बेटी शीला कंलबेलिया कहती हैं कि इतने बड़े परिवार में जीवन कठिनाइयों से भरा रहता है. शीला बताती हैं, “जब लोगों को पता चलता है कि हमारी मां के इतने बच्चे हैं तो हर कोई हैरान रह जाता है. हमें हमेशा संघर्ष करना पड़ता था.”

55 साल में नेचुरली गर्भधारण क्या संभव है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं की फर्टिलिटी उम्र के साथ घटती जाती है. 50 साल के बाद ओवरीज में एग्स की संख्या और उनकी क्वालिटी कम होने लगती है. ऐसे में नेचुरल तरीके से प्रेग्नेंट होना बहुत ही मुश्किल और रेयर होता है.

  • आमतौर पर महिलाओं में मेनोपॉज 45-55 साल के बीच शुरू हो जाती है.
  • 50 के ऊपर गर्भवती होने वाली महिलाओं को हाई बीपी, डायबिटीज और जन्म के समय दिक्कतों का अधिक खतरा होता है.
  • अगर कोई महिला इस उम्र में नेचुरली गर्भवती होती है, तो यह अत्यंत दुर्लभ और रिस्की प्रेग्नेंसी मानी जाती है.

एक्सपर्ट का क्या कहना है?

HeyDoc! नाम के अपने यूट्यूब चैनल पर Dr. Kady Diabagaté MD (Women Health and Reproductive Medicine) एक्सपर्ट बताती हैं, “55 साल की उम्र में नेचुरली कंसीव करना बहुत ही मुश्किल काम है. ऐसे मामलों में मां और बच्चे दोनों के लिए हाई रिस्क रहता है. डिलीवरी के समय सावधानी बेहद जरूरी है.” डॉ. Kady Diabagaté के अनुसार, इस उम्र में एग्स की क्वालिटी, मां की स्वास्थ्य स्थिति और गर्भ का सुरक्षित विकास सबसे बड़ी चुनौती होती है. साथ ही, बच्चे के जन्म के बाद मां की रिकवरी पर भी ध्यान देना पड़ता है.

क्या यह सुरक्षित है?

55 साल की उम्र में नेचुरली प्रेग्नेंट संभव है, लेकिन यह बेहद जोखिम भरा होता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में मेडिकल मॉनिटरिंग और हेल्थ सपोर्ट जरूरी है. महिलाओं को इस उम्र में प्रेग्नेंसी से जुड़े जोखिम और दिक्कतों को समझकर ही निर्णय लेना चाहिए. रेखा गलबेलिया का मामला बताता है कि उम्र बढ़ने के बाद भी नेचुरली प्रेग्नेंट संभव है, लेकिन यह अत्यंत दुर्लभ और जोखिम भरा होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस उम्र में हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए सुरक्षित देखभाल, नियमित जांच और पर्याप्त सपोर्ट बेहद जरूरी है.

इसे भी पढ़ें- वेट लॉस की ये दवाई कर देगी सबकी छु्ट्टी, क्लीनिकल ट्रायल में मिले कमाल के रिजल्ट्स

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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किचन से आज की उठाकर फेंक दें ये चीजें, वरना बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

किचन से आज की उठाकर फेंक दें ये चीजें, वरना बढ़ सकता है कैंसर का खतरा


प्लास्टिक कंटेनर और बोतलें: प्लास्टिक में रखा खाना या पानी ज़्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रहता. प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स खाने में मिलकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं.किचन से प्लास्टिक के बर्तन और बोतलें आज ही हटा दें.

बासी तेल: खाने का तेल दोबारा इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक होता है. इसमें ‘ट्रांस फैट’ और टॉक्सिन्स बन जाते हैं, जो दिल की बीमारियों और कैंसर का कारण बन सकते हैं.

बासी तेल: खाने का तेल दोबारा इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक होता है. इसमें ‘ट्रांस फैट’ और टॉक्सिन्स बन जाते हैं, जो दिल की बीमारियों और कैंसर का कारण बन सकते हैं.

खुले में रखा नमक और मसाले: अगर नमक और मसाले खुले में रखे हों तो उनमें नमी और फंगस लग सकती है. फंगस से बनने वाला अफ्लाटॉक्सिन एक खतरनाक तत्व है, जो लिवर कैंसर का रिस्क बढ़ाता है.

खुले में रखा नमक और मसाले: अगर नमक और मसाले खुले में रखे हों तो उनमें नमी और फंगस लग सकती है. फंगस से बनने वाला अफ्लाटॉक्सिन एक खतरनाक तत्व है, जो लिवर कैंसर का रिस्क बढ़ाता है.

एल्यूमीनियम फॉयल में रखा खाना: कई लोग बचा हुआ खाना एल्यूमीनियम फॉयल में रख देते हैं. रिसर्च के अनुसार एल्यूमीनियम लंबे समय तक शरीर में जमा होकर कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

एल्यूमीनियम फॉयल में रखा खाना: कई लोग बचा हुआ खाना एल्यूमीनियम फॉयल में रख देते हैं. रिसर्च के अनुसार एल्यूमीनियम लंबे समय तक शरीर में जमा होकर कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

सड़े-गले फल और सब्ज़ियां: किचन में रखे खराब फल या सब्ज़ियां अगर गल चुकी हैं, तो उनमें खतरनाक बैक्टीरिया और फंगस पैदा हो जाते हैं. ऐसे फल-सब्ज़ियों का सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है.

सड़े-गले फल और सब्ज़ियां: किचन में रखे खराब फल या सब्ज़ियां अगर गल चुकी हैं, तो उनमें खतरनाक बैक्टीरिया और फंगस पैदा हो जाते हैं. ऐसे फल-सब्ज़ियों का सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है.

रेडीमेड पैकेज्ड स्नैक्स: चिप्स, नूडल्स, बिस्किट्स जैसे पैकेज्ड स्नैक्स में प्रिज़र्वेटिव्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर्स होते हैं. इनका अधिक सेवन शरीर में टॉक्सिन्स जमा करता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है.

रेडीमेड पैकेज्ड स्नैक्स: चिप्स, नूडल्स, बिस्किट्स जैसे पैकेज्ड स्नैक्स में प्रिज़र्वेटिव्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर्स होते हैं. इनका अधिक सेवन शरीर में टॉक्सिन्स जमा करता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है.

प्लास्टिक की पैकिंग वाली पनीर और दूध: बाजार से लाए गए पनीर या दूध अक्सर प्लास्टिक में पैक होते हैं. अगर इन्हें लंबे समय तक उसी पैकिंग में रखा जाए तो प्लास्टिक के केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं.

प्लास्टिक की पैकिंग वाली पनीर और दूध: बाजार से लाए गए पनीर या दूध अक्सर प्लास्टिक में पैक होते हैं. अगर इन्हें लंबे समय तक उसी पैकिंग में रखा जाए तो प्लास्टिक के केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं.

Published at : 28 Aug 2025 06:34 PM (IST)


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