क्या आपका वजन भी अचानक बढ़ और घट रहा? हो सकती है यह खतरनाक बीमारी

क्या आपका वजन भी अचानक बढ़ और घट रहा? हो सकती है यह खतरनाक बीमारी


Sudden Weight Fluctuation Causes: अक्सर लोग वजन बढ़ने या घटने को अपनी डाइट, तनाव या हार्मोनल बदलाव से जोड़ते हैं. लेकिन अगर बिना किसी कारण आपका वजन लगातार बढ़ रहा है या अचानक तेजी से घट रहा है, तो यह सिर्फ लाइफस्टाइल समस्या नहीं हो सकती. कई बार यह गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है.

अचानक वजन बदलना क्यों है चिंता का विषय?

डॉ. रमाकांत शर्मा का कहना है कि, ब्लड कैंसर में मरीज का मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है. इससे शरीर में ऊर्जा का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता.

  • अचानक वजन बढ़ना: शरीर में सूजन और ब्लड फ्लो में गड़बड़ी के कारण हो सकता है.
  • अचानक वजन घटना: कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को खा जाती हैं, जिससे बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के भी वजन तेजी से घटने लगता है.

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ब्लड कैंसर के अन्य लक्षण

  • लगातार थकान और कमजोरी मरीज को हर समय थकान महसूस होती है.
  • बार-बार बुखार या इंफेक्शन इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से.
  • आसानी से खून बहना या चोट लगना प्लेटलेट्स की कमी से छोटी-सी चोट पर भी खून रुकता नहीं.
  • हड्डियों और जोड़ों में दर्द बोन मैरो पर असर की वजह से.
  • त्वचा का पीला या नीला पड़ना खून की कमी और ऑक्सीजन की कमी का संकेत.

कब करें डॉक्टर से संपर्क?

अगर आपको अचानक बिना कारण वजन बढ़ने या घटने लगे, साथ ही ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. शुरुआती जांच और सही समय पर इलाज से ब्लड कैंसर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

  • ब्लड कैंसर से बचाव कैसे संभव है?
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें
  • शरीर को सक्रिय रखें और एक्सरसाइज करें
  • धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
  • किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें

वजन का अचानक बढ़ना या घटना हमेशा सामान्य बात नहीं होती. यह ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. इसलिए शरीर के बदलावों को गंभीरता से लें और समय पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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डेंगू होने पर कब पड़ती है प्लेटलेट्स की जरूरत, कब तक कर सकते हैं इंतजार?

डेंगू होने पर कब पड़ती है प्लेटलेट्स की जरूरत, कब तक कर सकते हैं इंतजार?


Dengue Platelet Count: बरसात का मौसम आते ही डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी कई बार सामान्य बुखार जैसी लगती है, लेकिन सही समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर रूप ले सकती है. डेंगू के मरीजों में सबसे ज्यादा चिंता का कारण प्लेटलेट्स की गिरती संख्या होती है. अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि आखिर प्लेटलेट्स कब चढ़ाने चाहिए और कब तक इंतजार किया जा सकता है?

डॉ. अविनाश कुमार का कहना है कि, डेंगू वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को प्रभावित करता है. प्लेटलेट्स खून को जमाने का काम करते हैं. जब इनकी संख्या सामान्य से कम हो जाती है तो मरीज में खून बहने का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि हर स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती.

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कब होती है प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत?

अगर प्लेटलेट्स की संख्या 10,000 से 20,000 तक गिर जाए और मरीज में ब्लीडिंग के लक्षण दिखने लगें (जैसे नाक से खून आना, मसूड़ों से खून बहना या शरीर पर लाल चकत्ते दिखना) तो तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी होता है.

  • अगर प्लेटलेट्स की संख्या 20,000 से अधिक है और मरीज में कोई ब्लीडिंग नहीं है, तो आमतौर पर प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती.
  • सिर्फ प्लेटलेट्स की संख्या कम होने से डरने की बजाय, मरीज की स्थिति और लक्षणों को देखकर ही फैसला लेना चाहिए.

कब तक किया जा सकता है इंतजार?

  • डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या धीरे-धीरे गिरती है और फिर कुछ दिनों बाद अपने आप बढ़ने लगती है.
  • यदि प्लेटलेट्स 50,000 या उससे अधिक हैं और मरीज स्थिर है, तो इंतजार करना बिल्कुल सुरक्षित है.
  • जरूरत से ज्यादा जल्दी प्लेटलेट्स चढ़ाना भी सही नहीं है, क्योंकि यह हमेशा शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होता.

मरीज की देखभाल पर ध्यान दें

  • डेंगू के मरीज को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ (पानी, नारियल पानी, सूप, जूस) देना चाहिए ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो.
  • आराम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेना बेहद जरूरी है.
  • खुद से दवाइयां या स्टेरॉयड लेना खतरनाक हो सकता है.
  • नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराते रहें ताकि प्लेटलेट्स की गिरावट पर नजर रखी जा सके.

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साइलेंट किलर डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या है, जानिए लक्षण, कारण और बचाव

साइलेंट किलर डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या है, जानिए लक्षण, कारण और बचाव


Diabetic Retinopathy Symptoms: मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करती है. लोग अक्सर सोचते हैं कि डायबिटीज केवल शुगर लेवल बढ़ाती है, लेकिन सच यह है कि यह हृदय, गुर्दे, नसों और आंखों तक को नुकसान पहुंचा सकती है. आंख हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील अंग है और इसी की एक समस्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी, जिसेसाइलेंट किलरकहा जाता है.

डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या है?

मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ऋतुराज बरुआ बताते हैं कि, रेटिना आंख का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है, जहां पर सबसे छोटे रक्त वाहिकाएं यानी कैपिलरीज़ मौजूद रहती हैं. जब डायबिटीज लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहती तो ये नाजुक रक्त वाहिकाएं कमजोर होकर लीक करने लगती हैं. इससे रेटिना के आसपास की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं और धीरे-धीरे दृष्टि धुंधली होने लगती है.

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शुरुआती खतरे क्यों नहीं समझ आते?

  • डायबिटिक रेटिनोपैथी धीरे-धीरे बढ़ती है
  • मरीज को शुरू में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते
  • यही वजह है कि जब तक व्यक्ति को धुंधलापन, धब्बे या दृष्टि बाधा महसूस होती है, तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है
  • नियमित जांच है सबसे बड़ा बचाव
  • हर 6 महीने में एक बार नेत्र विशेषज्ञ से रेटिना की जांच ज़रूर करानी चाहिए
  • जांच से पहले दवा डालकर पुतलियों को फैलाया जाता है, ताकि डॉक्टर कैपिलरीज़ की स्थिति देख सकें
  • यदि रिसाव शुरुआती स्तर पर दिखे तो इसका मतलब है कि शरीर के अन्य हिस्सों जैसे किडनी, नेफ्रोपैथी, नसें
  • ऐसे समय पर सही इलाज से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है

इलाज के विकल्प

  • शुरुआती अवस्था दवाओं और नियमित निगरानी से नियंत्रित किया जा सकता है
  • मध्यम अवस्था आंखों में लेजर ट्रीटमेंट की आवश्यकता पड़ सकती है
  • गंभीर अवस्था डॉक्टर को आंख में इंजेक्शन या अन्य एडवांस इलाज करना पड़ता है

लक्षण अनदेखा न करें

  • दृष्टि धुंधली होना
  • आंखों के सामने तैरते धब्बे या फ्लोटर्स दिखना
  • दृष्टि क्षेत्र (Field of Vision) में किसी खास हिस्से पर साफ न देख पाना
  • गंभीर स्थिति में दृष्टि लगभग समाप्त हो जाना

डायबिटिक रेटिनोपैथी एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है. समय पर जांच, ब्लड शुगर कंट्रोल और डॉक्टर की सलाह से इस खतरे को रोका जा सकता है. डायबिटीज केवल शुगर नहीं बढ़ाती, यह आंखों की रोशनी भी छीन सकती है.

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दही Vs छाछ, जानिए दोनों में से कौन है आपकी हेल्थ के लिए बेस्ट

दही Vs छाछ, जानिए दोनों में से कौन है आपकी हेल्थ के लिए बेस्ट


Curd vs Buttermilk Health Benefits: गर्मियों की तपती दोपहर हो या फिर सर्दियों का हल्का सा भोजन, भारतीय रसोई में दही और छाछ हमेशा से खास जगह रखते आए हैं. दोनों का स्वाद अलग है, बनावट अलग है और फायदे भी अपने-अपने ढंग से शरीर को पोषण देते हैं. अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि दही और छाछ में से कौन-सा स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद है? आइए जानते हैं इन दोनों के गुणों और कमियों के बारे में.

डॉ. रूपाली जैन का कहना है कि, दही और छाछ दोनों ही हमारी सेहत के लिए लाभकारी हैं, लेकिन इन्हें चुनते समय अपनी जरूरत और मौसम का ध्यान रखना जरूरी है. दही प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है, जिससे हड्डियां मज़बूत होती हैं और इम्यूनिटी बढ़ती है. वहीं छाछ पाचन को दुरुस्त करती है और शरीर को ठंडक प्रदान करती है. गर्मियों में छाछ और सर्दियों में दही का सेवन अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है.

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दही

दूध को जमाकर तैयार किया गया दही न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि इसमें मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

  • दही हड्डियों और दाँतों को मज़बूती देता है.
  • यह पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाकर पाचन शक्ति सुधारता है.
  • रोजाना दही खाने से इम्यूनिटी मज़बूत होती है और शरीर को ऊर्जा मिलती है.
  • वजन बढ़ाना चाहते हैं तो दही इसमें मददगार साबित हो सकता है क्योंकि इसमें पोषण तत्व अधिक घनत्व में मौजूद होते हैं.

छाछ

छाछ और दही को फेंटकर और उसमें पानी मिलाकर तैयार की जाती है. यह हल्की, पचने में आसान और गर्मियों में शरीर को ठंडक देने वाली होती है.

  • छाछ में मौजूद लैक्टिक एसिड पाचन को दुरुस्त करता है और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है.
  • यह शरीर में डिहाइड्रेशन रोकती है और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है.
  • छाछ वजन घटाने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह हल्की और कम कैलोरी वाली होती है.
  • इसमें मसाले (जैसे भुना जीरा, काला नमक) डालकर पीने से इसका स्वाद और फायदे दोनों बढ़ जाते हैं.

दही Vs छाछ

  • अगर आपको मजबूत हड्डिया और इम्यूनिटी चाहिए तो दही बेहतर विकल्प है.
  • अगर आपको हल्की, पचने में आसान और ठंडक देने वाली ड्रिंक चाहिए तो छाछ चुनें.
  • मोटापे से परेशान हैं तो छाछ ज्यादा मददगार है, वहीं अगर आप शरीर को ऊर्जा देना चाहते हैं तो दही उपयोगी है.
  • दोनों ही शरीर को अलग-अलग तरीके से फायदा पहुंचाते हैं, इसलिए डाइट और मौसम के हिसाब से इन्हें चुनना सबसे अच्छा है.

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रग-रग में फुल फ्लो से दौड़ेगा खून, डाइट में शामिल कर लें ये 5 चीजें

रग-रग में फुल फ्लो से दौड़ेगा खून, डाइट में शामिल कर लें ये 5 चीजें


खून की कमी यानी एनीमिया आजकल बेहद कॉमन प्रॉब्लम बन चुका है. ये परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है. दरअसल, जब हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) या हीमोग्लोबिन कम हो जाता है तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता. इसकी वजह से थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और सिरदर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. आइए जानते हैं उन पांच चीजों के बारे में, जिनकी मदद से आपकी रग-रग में फुल फ्लो से ब्लड दौड़ेगा. 

हीमोग्लोबिन और आयरन का कनेक्शन

एम्स दिल्ली में डॉ. आंचल एमडी ने बताया कि हीमोग्लोबिन एक ऐसा प्रोटीन है, जो हमारे खून में मौजूद रहता है और पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो हीमोग्लोबिन कम बनता है, जिससे खून की कमी हो जाती है. भारत में करीब 40 पर्सेंट महिलाएं और 20 पर्सेंट बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण गलत खानपान और आयरन से भरपूर चीजों का कम सेवन हैं. कुछ आसान और टेस्टी चीजों को डाइट में शामिल करके आप इस कमी को पूरा कर सकते हैं.

काजू: छोटा पैकेट, बड़ा धमाका

काजू न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि ये आपके शरीर के लिए भी कमाल की चीज है. अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि काजू में आयरन और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं. खास बात यह है कि काजू का आयरन शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है. साथ ही, इसमें मौजूद मैग्नीशियम खून बनाने में मदद करता है. अगर आप रोजाना 5-6 काजू खाते हैं तो न सिर्फ खून की कमी दूर होगी, बल्कि शरीर में ताकत भी आएगी. चाहे स्नैक्स के तौर पर खाएं या फिर इन्हें सब्जी या खीर में डालें, काजू हर तरह से फायदेमंद है.

गुड़: देसी सुपरफूड

गुड़ हमारे देसी खानपान का हिस्सा है और खून बढ़ाने का शानदार तरीका भी है. खासकर गांवों में लोग गुड़ बहुत पसंद करते हैं. गुड़ में आयरन के अलावा कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो न सिर्फ खून बढ़ाते हैं, बल्कि इम्यूनिटी भी मजबूत करते हैं. कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि गुड़ खाने से एनीमिया की समस्या में सुधार होता है. आप इसे रोटी के साथ खा सकते हैं, दूध में मिलाकर पी सकते हैं या फिर चाय में चीनी की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं. बस थोड़ा-सा गुड़ आपकी सेहत को बड़ा फायदा दे सकता है.

मटर: हरी ताकत

हरी मटर न सिर्फ सब्जी को स्वादिष्ट बनाती है, बल्कि ये आपकी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. मटर में आयरन और प्रोटीन दोनों होते हैं, जो खून बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं. इसके अलावा मटर में विटामिन सी भी होता है, जो आयरन को शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है. वैज्ञानिकों की मानें तो मटर खाने से खून की कमी दूर होती है और शरीर में एनर्जी बढ़ती है. आप मटर को सब्जी, सूप या पराठे में डालकर खा सकते हैं.

काला चना: आयरन का खजाना

काला चना आयरन और फाइबर का शानदार सोर्स है. ये न सिर्फ खून बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि पाचन को भी दुरुस्त रखता है. कई स्टडीज में साबित हो चुका है कि काला चना खाने से हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ता है और एनीमिया की समस्या ठीक होती है. आप काले चने को भिगोकर सुबह खाली पेट खा सकते हैं. इसे सलाद में डाल सकते हैं या फिर चटपटी चाट बनाकर इसका मजा ले सकते हैं. 

अनार: सेहत का रसीला खजाना

अनार को सेहत का खजाना कहा जाता है. इसमें आयरन, विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो खून बढ़ाने के साथ-साथ शरीर की सूजन भी कम करते हैं. रिसर्च बताती है कि अनार का जूस पीने से खून की कमी दूर होती है और खून की क्वालिटी भी सुधरती है. आप अनार को दाने के रूप में खा सकते हैं या फिर इसका जूस बनाकर पी सकते हैं.

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बच्चों के पेट में बार-बार हो रहे हैं कीड़े? इन नुस्खों से करें इसका मिनटों में इलाज

बच्चों के पेट में बार-बार हो रहे हैं कीड़े? इन नुस्खों से करें इसका मिनटों में इलाज


अजवाइन: अजवाइन पाचन तंत्र को मजबूत करती है और पेट के कीड़े खत्म करने में मदद करती है. थोड़ी-सी अजवाइन को गुड़ के साथ खिलाने से बच्चों को तुरंत आराम मिल सकता है.

नीम की पत्तियां: नीम की पत्तियों में एंटी-पैरासिटिक गुण होते हैं, जो पेट के कीड़ों को जड़ से खत्म करने में मदद करते हैं. सुबह खाली पेट बच्चों को नीम के पत्तों का हल्का रस पिलाने से फायदा होता है.

नीम की पत्तियां: नीम की पत्तियों में एंटी-पैरासिटिक गुण होते हैं, जो पेट के कीड़ों को जड़ से खत्म करने में मदद करते हैं. सुबह खाली पेट बच्चों को नीम के पत्तों का हल्का रस पिलाने से फायदा होता है.

लहसुन: लहसुन एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है. बच्चों को रोज़ाना कच्चा लहसुन चबाने या दूध में उबालकर देने से पेट के कीड़े मर जाते हैं और पाचन बेहतर होता है.

लहसुन: लहसुन एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है. बच्चों को रोज़ाना कच्चा लहसुन चबाने या दूध में उबालकर देने से पेट के कीड़े मर जाते हैं और पाचन बेहतर होता है.

कद्दू के बीज: कद्दू के बीज में कुकुर्बिटासिन नामक तत्व पाया जाता है, जो पेट के कीड़ों को पैरालाइज करके बाहर निकाल देता है. बच्चों को हल्के भूने हुए कद्दू के बीज देने से राहत मिलती है.

कद्दू के बीज: कद्दू के बीज में कुकुर्बिटासिन नामक तत्व पाया जाता है, जो पेट के कीड़ों को पैरालाइज करके बाहर निकाल देता है. बच्चों को हल्के भूने हुए कद्दू के बीज देने से राहत मिलती है.

हल्दी वाला दूध: हल्दी एंटीबैक्टीरियल और एंटीपैरासिटिक गुणों से भरपूर है. रात में सोने से पहले बच्चों को हल्दी वाला दूध पिलाने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

हल्दी वाला दूध: हल्दी एंटीबैक्टीरियल और एंटीपैरासिटिक गुणों से भरपूर है. रात में सोने से पहले बच्चों को हल्दी वाला दूध पिलाने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

नारियल का सेवन: नारियल के टुकड़े या नारियल का तेल बच्चों के पेट में कीड़े खत्म करने का आसान उपाय है. सुबह खाली पेट नारियल खिलाने से पेट के कीड़े धीरे-धीरे निकल जाते हैं.

नारियल का सेवन: नारियल के टुकड़े या नारियल का तेल बच्चों के पेट में कीड़े खत्म करने का आसान उपाय है. सुबह खाली पेट नारियल खिलाने से पेट के कीड़े धीरे-धीरे निकल जाते हैं.

Published at : 25 Aug 2025 06:27 PM (IST)


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