दूध पीने का सही वक्त कौन-सा, एक बार में कम से कम कितना दूध पीना सही?

दूध पीने का सही वक्त कौन-सा, एक बार में कम से कम कितना दूध पीना सही?


Milk Benefits : बच्चों के लिए दूध को बेहद फायदेमंद कहा गया है. दूध केवल कैल्शियम का ही अच्छा सोर्स नहीं है, बल्कि इससे बॉडी और हड्डियों का अच्छा विकास होता है. ऐसे में सवाल पैदा होता है कि दिन में दूध पीने का सही वक्त कौन सा होता है और एक बार में कम से कम कितना दूध पीना चाहिए? आइए जानते हैं विस्तार से.

दिन भर में दूध पीने का सही वक्त

दूध पीने का कोई एक “सही” समय नहीं है, क्योंकि यह आपकी व्यक्तिगत जरूरतों पर डिपेंड करता है. हालांकि, आयुर्वेद के अनुसार, वयस्कों के लिए रात में सोने से पहले गर्म दूध पीना सेहत के लिए सबसे अच्छा है, क्योंकि यह अच्छी नींद लाने में मदद करता है और हड्डियों के लिए कैल्शियम  के उत्पाद को बढ़ाता है. बच्चों के लिए, सुबह दूध पीना ज्यादा फायदेमंद होता है.

फिजिकल बेनिफिट्स के लिए दूध पीने का सही वक्त

रात में दूध पीना: रात में दूध पीने से शरीर को आराम मिलता है और यह अच्छी नींद लाने वाले मेलाटोनिन के उत्पादन में मदद करता है, जिससे नींद में सुधार होता है.

सुबह दूध पीना: सुबह दूध पीने से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट से ऊर्जा मिलती है, जिससे आप दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं और ओवरईटिंग से बच सकते हैं.

आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने का सही तरीका

वयस्कों के लिए: आयुर्वेद के अनुसार, वयस्कों के लिए दूध पीने का सबसे अच्छा समय रात को सोने से पहले होता है. रात को सोते समय पाचन क्रिया तेज होती है, जिससे दूध आसानी से पच जाता है. रात में दूध पीने से अच्छी नींद आती है और शरीर में कैल्शियम को बेहतर ढंग से स्टोर करता है. दूध में मौजूद गुण शांत और नींद लाने वाले होते हैं, जो अनिद्रा से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होते हैं. वयस्कों के लिए दूध हड्डियों, मांसपेशियों, दांतों और  ओवर ऑल हेल्थ के लिए बेहतरीन है, दूध में कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और  बी-विटामिन जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों के कार्य में मदद करने, इम्यूनिटी  को बढ़ावा देने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं. 

बच्चों के लिए: आयुर्वेद के अनुसार, बच्चों के लिए सुबह दूध पीना सबसे फायदेमंद होता है. इससे बच्चों को दिनभर के लिए ऊर्जा मिलती है और उनका शरीर सक्रिय रहता है. सुबह दूध पीने से बच्चों को थकान कम महसूस होती है और वे ऊर्जावान महसूस करते हैं, क्योंकि इसमें मौजूद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट उन्हें दिनभर की ऊर्जा प्रदान करते हैं. दूध में कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन-डी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

एक बार-बार में कितना दूध पीना चाहिए?

एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 3 कप (लगभग 750 मिलीलीटर) दूध पीना चाहिए, लेकिन यह मात्रा हर व्यक्ति की उम्र, शारीरिक जरूरत और स्वास्थ्य पर डिपेंड करती है. 12 महीने से 2 साल तक के बच्चों को रोजाना 1 2/3 से 2 कप दूध पिलाना चाहिए, और 4 से 8 साल तक के बच्चों को 2 1/2 कप दूध देना चाहिए. स्वस्थ वयस्कों को प्रति दिन लगभग 3 कप (750 मिलीलीटर) दूध पीने की सलाह दी जाती है. जबकि कुछ लोगों के लिए 500 मिली लीटर दूध पीना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है.

ज्यादा दूध पीने के नुकसान

ज्यादा दूध पीने से मुंहासे  और त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं. खासकर, लैक्टोज को पचाने के लिए लैक्टोज नामक एंजाइम की जरूरत होती है. जिसकी बॉडी में लैक्टोज की मात्रा ज्यादा होती है. उन लोगों को ज्यादा दूध पीने से पेट फूलना, गैस और दस्त हो सकते हैं. अधिक फैट वाले दूध से वजन बढ़ सकता है. बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा हो सकता है. कई रिसर्च के अनुसार, ज्यादा दूध पीने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा ज्यादा दूध से बलगम और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. 

ये भी पढ़ें: Rice Benefits: चावल खाने के नुकसान के बारे में तो सब जानते हैं, अब आप इसके फायदे भी जान लीजिए

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

फेफड़ों को मजबूत करने के लिए खाएं ये 6 फल, बार-बार खांसी की परेशानी रहेगी दूर

फेफड़ों को मजबूत करने के लिए खाएं ये 6 फल, बार-बार खांसी की परेशानी रहेगी दूर


सेब: सेब को फेफड़ों के लिए सबसे हेल्दी फल माना जाता है. इसमें पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड्स, विटामिन C और फाइबर फेफड़ों को डैमेज होने से बचाते हैं. रोज़ाना एक सेब खाने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है और बार-बार होने वाली खांसी में भी राहत मिलती है.

संतरा: संतरे में विटामिन C की भरपूर मात्रा होती है, जो फेफड़ों को संक्रमण से बचाती है. यह फल इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाता है और खांसी-जुकाम की समस्या जल्दी दूर करता है. अगर आप बार-बार खांसी से परेशान रहते हैं, तो संतरे का सेवन ज़रूर करें.

संतरा: संतरे में विटामिन C की भरपूर मात्रा होती है, जो फेफड़ों को संक्रमण से बचाती है. यह फल इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाता है और खांसी-जुकाम की समस्या जल्दी दूर करता है. अगर आप बार-बार खांसी से परेशान रहते हैं, तो संतरे का सेवन ज़रूर करें.

अंगूर: अंगूर में मौजूद रेस्वेराट्रॉल और एंटीऑक्सीडेंट्स फेफड़ों की कोशिकाओं को साफ और मजबूत बनाते हैं. यह बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है और सांस लेने की दिक्कत को कम करता है. खासकर काले अंगूर फेफड़ों के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं.

अंगूर: अंगूर में मौजूद रेस्वेराट्रॉल और एंटीऑक्सीडेंट्स फेफड़ों की कोशिकाओं को साफ और मजबूत बनाते हैं. यह बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है और सांस लेने की दिक्कत को कम करता है. खासकर काले अंगूर फेफड़ों के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं.

अनार: अनार का जूस फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं और खून को साफ करते हैं. नियमित सेवन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और खांसी की समस्या धीरे-धीरे कम हो जाती है.

अनार: अनार का जूस फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं और खून को साफ करते हैं. नियमित सेवन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और खांसी की समस्या धीरे-धीरे कम हो जाती है.

पपीता: पपीते में विटामिन A और एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो फेफड़ों की कोशिकाओं को रिपेयर करते हैं. यह फल म्यूकस (बलगम) बनने से रोकता है और सांस संबंधी बीमारियों से बचाव करता है. बार-बार खांसी आने पर पपीते का सेवन बहुत फायदेमंद होता है.

पपीता: पपीते में विटामिन A और एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो फेफड़ों की कोशिकाओं को रिपेयर करते हैं. यह फल म्यूकस (बलगम) बनने से रोकता है और सांस संबंधी बीमारियों से बचाव करता है. बार-बार खांसी आने पर पपीते का सेवन बहुत फायदेमंद होता है.

कीवी: कीवी में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा काफी अधिक होती है, जो फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाते हैं. यह संक्रमण से लड़ने में मदद करता है और सांस की नलियों को साफ रखता है. नियमित सेवन से फेफड़े हेल्दी रहते हैं और खांसी-जुकाम की समस्या कम होती है.

कीवी: कीवी में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा काफी अधिक होती है, जो फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाते हैं. यह संक्रमण से लड़ने में मदद करता है और सांस की नलियों को साफ रखता है. नियमित सेवन से फेफड़े हेल्दी रहते हैं और खांसी-जुकाम की समस्या कम होती है.

Published at : 25 Aug 2025 05:05 PM (IST)


Preferred Sources

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

भविष्य में खत्म हो जाएंगे इंसान के बाल समेत ये 4 अंग, जानें क्यों होगा ऐसा?

भविष्य में खत्म हो जाएंगे इंसान के बाल समेत ये 4 अंग, जानें क्यों होगा ऐसा?


Wisdom tooth पहले कठोर और कच्चा खाना चबाने में मदद करती थी. अब नरम और पका हुआ खाना खाने के कारण इसकी जरूरत कम हो गई है.

टेलबोन हमारे पूर्वजों की पूंछ का अवशेष है. आज कुर्सियों और समतल जगहों पर बैठने के कारण इसका इस्तेमाल बहुत कम हो गया है.

टेलबोन हमारे पूर्वजों की पूंछ का अवशेष है. आज कुर्सियों और समतल जगहों पर बैठने के कारण इसका इस्तेमाल बहुत कम हो गया है.

अपेंडिक्स पहले रेशेदार और कठिन खाने को पचाने में मदद करता था. अब पका और हल्का खाना खाने के कारण यह कम उपयोगी अंग बन गया है.

अपेंडिक्स पहले रेशेदार और कठिन खाने को पचाने में मदद करता था. अब पका और हल्का खाना खाने के कारण यह कम उपयोगी अंग बन गया है.

पूर्वजों ने कान की मांसपेशियों से आवाज़ की दिशा पकड़कर खतरे का पता लगाया था. आज ये मांसपेशियां ज्यादा इस्तेमाल नहीं होती हैं.

पूर्वजों ने कान की मांसपेशियों से आवाज़ की दिशा पकड़कर खतरे का पता लगाया था. आज ये मांसपेशियां ज्यादा इस्तेमाल नहीं होती हैं.

आज कम मेहनत और तकनीक के इस्तेमाल ने शरीर की जरूरतें बदल दी हैं. पहले जरूरी अंग अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं.

आज कम मेहनत और तकनीक के इस्तेमाल ने शरीर की जरूरतें बदल दी हैं. पहले जरूरी अंग अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं.

शोध बताते हैं कि बदलते खाने, जीवनशैली और पर्यावरण के कारण हज़ारों सालों में हमारे अंग बदल सकते हैं.

शोध बताते हैं कि बदलते खाने, जीवनशैली और पर्यावरण के कारण हज़ारों सालों में हमारे अंग बदल सकते हैं.

भविष्य में शरीर के कुछ अंग और बाल गायब हो सकते हैं. यह पूरी तरह से स्वाभाविक है और आधुनिक जीवनशैली का असर है.

भविष्य में शरीर के कुछ अंग और बाल गायब हो सकते हैं. यह पूरी तरह से स्वाभाविक है और आधुनिक जीवनशैली का असर है.

Published at : 25 Aug 2025 03:00 PM (IST)


Preferred Sources

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

Vitamin Deficiency: किस विटामिन की कमी से आती है नींद? जानें कैसे करें पूर्ति

Vitamin Deficiency: किस विटामिन की कमी से आती है नींद? जानें कैसे करें पूर्ति


Which Vitamin causes Sleep Issues: “अच्छी नींद क्यों नहीं आती?” कोई घंटों करवटें बदलता है तो किसी की नींद बार-बार टूट जाती है. लोग इसे तनाव या थकान का नतीजा मानते हैं, लेकिन नींद की समस्या का एक बड़ा कारण शरीर में कुछ विटामिन्स की कमी भी हो सकता है.

इस पर डॉ. सरीन बताते हैं कि, अच्छी और गहरी नींद के लिए केवल आरामदायक बिस्तर ही नहीं, बल्कि सही पोषण लेना भी जरूरी है.

ये भी पढ़े: मेंटल हेल्थ करनी है मजबूत तो रोजाना खेलें ये इनडोर गेम्स, डॉक्टर भी करते हैं रेकमंड

विटामिन D

विटामिन D हमारे नींद चक्र को नियंत्रित करता है. इसकी कमी से शरीर में थकान और अनिद्रा की समस्या बढ़ जाती है. खासतौर पर जो लोग धूप से दूर रहते हैं या पर्याप्त धूप नहीं लेते, उन्हें नींद की परेशानी अधिक होती है.

विटामिन B12

विटामिन B12 मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखता है. इसकी कमी से मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, जो नींद लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. देर तक नींद न आना या रात को बार-बार नींद टूटना.

मैग्नीशियम

यह विटामिन नहीं बल्कि एक खनिज है, लेकिन नींद से इसका गहरा रिश्ता है. मैग्नीशियम दिमाग को शांत करता है और मांसपेशियों को रिलैक्स करता है. इसकी कमी नींद की गुणवत्ता को खराब कर देती है.

कैसे करें विटामिन की पूर्ति?

  • विटामिन D के लिए रोजाना 20 मिनट धूप सेंकना फायदेमंद है। साथ ही दूध, अंडे और मशरूम का सेवन करें.
  • विटामिन B12 की कमी पूरी करने के लिए दही, दूध, अंडे, फिश और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं.
  • मैग्नीशियम के लिए आहार में मेवे (बादाम, अखरोट), केले, हरी सब्जियां और दालें शामिल करें.
  • डॉक्टर की सलाह पर जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं.

नींद सुधारने के अतिरिक्त उपाय

  • सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें.
  • हल्का भोजन करें और कैफीन से बचें.
  • रिलैक्सेशन तकनीक जैसे मेडिटेशन या गहरी सांसें लेना अपनाएंय
  • रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें.

अगर आपको लगातार नींद की समस्या है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. यह सिर्फ तनाव या थकान का मामला नहीं बल्कि शरीर में विटामिन्स की कमी का संकेत भी हो सकता है.

ये भी पढ़ें: बदल रहा है पेशाब का रंग, कहीं पित्त की थैली में पथरी तो नहीं?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

मेंटल हेल्थ करनी है मजबूत तो रोजाना खेलें ये इनडोर गेम्स, डॉक्टर भी करते हैं रेकमंड

मेंटल हेल्थ करनी है मजबूत तो रोजाना खेलें ये इनडोर गेम्स, डॉक्टर भी करते हैं रेकमंड


Indoor Games for Mental Health: हम अक्सर सोचते हैं कि, गेम्स सिर्फ बच्चों के लिए होते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि खेलना हर उम्र में जरूरी है. आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी, काम का प्रेशर और तनावभरे रिश्ते हमारी मानसिक सेहत पर बुरा असर डालते हैं. ऐसे में रोज़ाना कुछ मिनट इनडोर गेम्स खेलने से दिमाग को न सिर्फ़ आराम मिलता है, बल्कि मानसिक ताकत भी बढ़ती है.

डॉ. कल्पना रावल बताती हैं कि, इनडोर गेम्स सिर्फ मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि ये मेंटल फिटनेस के लिए एक तरह की एक्सरसाइज़ भी हैं. लगातार तनाव, चिंता और डिप्रेशन हमारी सोचने-समझने की क्षमता को कमजर कर सकते हैं. ऐसे में अगर हम रोजना कुछ दिमागी खेल खेलें तो न सिर्फ़ हमारा मूड अच्छा रहता है, बल्कि हमारी मेमोरी और एकाग्रता भी तेज होती है.

ये भी पढ़े- रेडियोलॉजी में बढ़ा AI का इस्तेमाल, फायदे के साथ डरा रहा यह खतरा

ये इनडोर गेम्स करेंगे दिमाग को पॉजिटिव

शतरंज

शतरंज खेलने से दिमाग की कॉग्निटिव एबिलिटी बढ़ती है. यह हमें रणनीति बनाना, धैर्य रखना और सोच-समझकर फैसले लेना सिखाता है.

पजल्स हल करना

क्रॉसवर्ड या पजल्स हल करना दिमाग को व्यस्त और सक्रिय रखता है. इससे कंसंट्रेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स बेहतर होती हैं.

लूडो और कैरम

लूडो और कैरम जैसे गेम्स सिर्फ़ बच्चों के लिए नहीं हैं, बल्कि पूरे परिवार को जोड़ने का काम करते हैं. साथ में खेलने से तनाव कम होता है और रिश्तों में पॉजिटिविटी आती है.

मेमोरी टेस्ट वाले गेम्स

कार्ड गेम्स या मेमोरी टेस्ट वाले गेम्स दिमाग की रिटेंशन पावर को बढ़ाते हैं. यह खासतौर पर स्टूडेंट्स और बुजुर्गों के लिए बहुत उपयोगी माने जाते हैं.

डॉक्टर की खास सलाह

  • रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट इनडोर गेम्स खेलने की आदत डालें.
  • गेम्स का चुनाव अपनी पसंद और मानसिक आराम को ध्यान में रखकर करें.
  • इलेक्ट्रॉनिक गेम्स की जगह माइंड एक्टिविटी गेम्स चुनें.
  • परिवार के साथ खेलें ताकि सोशल बॉन्डिंग भी मजबूत हो.

मेंटल हेल्थ को मजबूत बनाना सिर्फ मेडिटेशन और दवाइयों तक सीमित नहीं है. अगर आप रोज़ाना थोड़ी देर इनडोर गेम्स खेलते हैं तो यह आपके दिमाग को एक्टिव, खुश और स्ट्रेस-फ्री बनाए रखने का एक आसान और मजदार तरीका हो सकता है.

ये भी पढ़ें: बदल रहा है पेशाब का रंग, कहीं पित्त की थैली में पथरी तो नहीं?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या एसी रूम में सोने वालों को ज्यादा आते हैं डरावने सपने, डॉक्टर से जान लें सच?

क्या एसी रूम में सोने वालों को ज्यादा आते हैं डरावने सपने, डॉक्टर से जान लें सच?


Nightmares in AC Room: ज्यादातर लोग अच्छी नींद का आनंद लेने के लिए एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं. एसी रूम की ठंडी हवा नींद को आरामदायक जरूर बनाती है, लेकिन अक्सर लोग यह भी शिकायत करते हैं कि, एसी में सोने से उन्हें अजीब और डरावने सपने आते हैं. यह सुनकर सवाल उठता है कि, क्या सचमुच एसी और डरावने सपनों के बीच कोई गहरा रिश्ता है?

डॉ. योगेश शर्मा बताते हैं कि, हमारी नींद का सीधा संबंध शरीर के तापमान और वातावरण से होता है. एसी कमरे का तापमान ठंडा कर देता है, जिससे नींद जल्दी आती है। लेकिन अगर तापमान बहुत कम कर दिया जाए तो शरीर असामान्य प्रतिक्रिया देने लगता ह.। यह स्थिति दिमाग की Rapid Eye Movement को प्रभावित करती है, जो कि सपने देखने की अवस्था होती है.

 ये भी पढ़े- क्या फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए आप भी खाते हैं दवा, यह सेहत के लिए कितना खतरनाक?

क्यों आते हैं ज्यादा डरावने सपने?

  • ठंडी हवा और ऑक्सीजन की कमी- बहुत बंद कमरे में एसी चलाने से ताजी हवा का प्रवाह कम हो जाता है. इससे दिमाग पर असर पड़ता है और नींद के दौरान अनचाहे या डरावने सपने आ सकते हैं.
  • तापमान का उतार-चढ़ाव- जब शरीर को बहुत ठंड लगती है तो दिमाग असहज महसूस करता है और यह नींद की गुणवत्ता को बिगाड़ता है.
  • मानसिक थकान और तनावएसी की वजह से शरीर रिलैक्स जरूर होता है, लेकिन मानसिक तनाव और ठंडी नींद का कॉम्बिनेशन अक्सर नेगेटिव सपनों को ट्रिगर कर सकता है.

क्या हमेशा एसी को जिम्मेदार ठहराना सही है?

डॉ. शर्मा बताते हैं कि, हर बार डरावने सपनों के लिए एसी ही जिम्मेदार नहीं होता. कई बार तनाव, डिप्रेशन, देर रात तक मोबाइल चलाना, भारी खाना खाने के बाद सोना भी कारण बनते हैं. हां, अगर आप रोजाना एसी में सोते हैं और अक्सर बुरे सपने देखते हैं, तो इसका एक कारण वातावरण जरूर हो सकता है.

बेहतर नींद के लिए डॉक्टर की सलाह

  • एसी का तापमान 26 डिग्री तक रखें
  • सोते समय कमरे में हल्की वेंटिलेशन जरूर रखें
  • रात को भारी भोजन या कैफीन से बचें
  • सोने से पहले रिलैक्सिंग म्यूजिक, मेडिटेशन या किताब पढ़ने की आदत डालें

एसी रूम और डरावने सपनों के बीच एक कनेक्शन जरूर हो सकता है, लेकिन यह हर किसी पर लागू नहीं होता. ज्यादातर मामलों में समस्या का कारण गलत तापमान सेटिंग या मानसिक तनाव होता है. अगर आप भी एसी में सोते समय बार-बार बुरे सपनों से परेशान होते हैं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नींद के वातावरण को संतुलित बनाना जरूरी है.

ये भी पढ़ें: पैंक्रियाटिक कैंसर से अमेरिका के फेमस जज फ्रैंक कैप्रियो का निधन, जानें यह बीमारी कितनी खतरनाक?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp