क्या आप भी सैलून में कराते हैं सेविंग, जानें नाई के उस्तरे से कैसे खराब हो सकता है आपका लिवर?

क्या आप भी सैलून में कराते हैं सेविंग, जानें नाई के उस्तरे से कैसे खराब हो सकता है आपका लिवर?


आजकल सैलून में पुरुष और महिलाएं कई तरह की ब्यूटी ट्रीटमेंट करवाते हैं. इसमें से एक है शेविंग या दाढ़ी बनवाना. आमतौर पर हम सोचते हैं कि यह एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाई के उस्तरे या शेविंग के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरण से आपके लिवर पर असर पड़ सकता है? चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं कि यह कैसे आपके लिए खतरनाक है और इसको लेकर डॉक्टर क्या कहते हैं साथ ही इससे बचाव के तरीके क्या-क्या हैं. 

कैसे फैल सकती हैं खतरनाक बीमारियां?

शेविंग के दौरान अगर उस्तरा ठीक से साफ न हो या कई लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो खून या त्वचा के जरिए से इंफेक्शन वाली बीमारियां फैल सकती हैं. इसके सबसे खतरनाक उदाहरणों में हैपेटाइटिस बी और सी शामिल हैं. यह वायरस सीधे लिवर को प्रभावित करता है और लंबे समय में लिवर सिरोसिस या कैंसर का कारण बन सकता है.

रिसर्च पेपर में बड़ा दावा

एक रिसर्च के अनुसार, World Journal of Hepatology, 2022 में कहा गया है कि कम साफ-सुथरे शेविंग उपकरणों का इस्तेमाल हैपेटाइटिस सी संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी से जुड़ा हुआ पाया गया. अध्ययन में यह भी दिखाया गया कि संक्रमित उस्तरे का एक बार उपयोग ही गंभीर लिवर की समस्या का कारण बन सकता है.

डॉक्टर क्या कहते हैं?

डॉ. जितेंद्र सिंह बताते हैं बताते हैं कि “हम अक्सर ऐसे मरीज देखते हैं जिनका लिवर वायरस से प्रभावित हुआ होता है और उनका इतिहास लिया जाए तो पता चलता है कि उन्होंने सार्वजनिक सैलून में शेविंग करवाई थी. अगर उपकरण साफ न हों तो वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है.”

सावधानियां जो आप कर सकते हैं

  • सुनिश्चित करें कि नाई उस्तरे और उपकरण को अल्कोहल या स्टीरिलाइज़र से साफ कर रहा हो.
  • अगर सैलून में खून आने वाली कोई प्रक्रिया हो रही हो, तो वहां से दूर रहें.
  • नियमित लिवर चेकअप कराएं और वैक्सीनेशन करवा लें.
  • इसके अलावा आप नाई से उस्तरा साफ करने के लिए कह सकते हैं ताकि कोई दिक्कत न हो

सैलून में शेविंग एक आम प्रक्रिया है, लेकिन गंदे उपकरण गंभीर लिवर समस्याओं का कारण बन सकते हैं. हमेशा साफ-सुथरे और व्यक्तिगत उपकरण का इस्तेमाल करें. रिसर्च भी दिखाती है कि सार्वजनिक शेविंग उपकरणों का इस्तेमाल सीधे लिवर संक्रमण के जोखिम से जुड़ा है. अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अब लैब में ही पता लग जाएगी कैंसर की हर डिटेल, प्रकार से लेकर कैंसर के प्रसार की मिलेगी जानकारी

अब लैब में ही पता लग जाएगी कैंसर की हर डिटेल, प्रकार से लेकर कैंसर के प्रसार की मिलेगी जानकारी


Lab Research on Cancer Spread: कैंसर को लेकर पहले मरीज और डॉक्टर दोनों को सही जानकारी पाने में लंबा समय लगता था, लेकिन अब विज्ञान ने इस चुनौती को आसान बना दिया है. आधुनिक लैब तकनीक से न सिर्फ यह पता लगाना संभव हो गया है कि कैंसर किस प्रकार का है, बल्कि यह भी जाना जा सकता है कि, यह शरीर में किस हद तक फैल चुका है.

डॉ. तरंग कृष्ण का कहना है कि, पुराने समय में कैंसर की पहचान के लिए बायोप्सी और कई जटिल जांचें करनी पड़ती थीं. लेकिन नई मॉलिक्यूलर लैब तकनीक और जीन टेस्टिंग से अब कोशिकाओं की बारीकियों तक की जानकारी ली जा सकती है. लैब में यह तुरंत पता लगाया जा सकता है कि, कैंसर कैसे शुरू हुआ है और उसकी किस्म क्या है.

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प्रकार की सटीक जानकारी

कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार का होता है, जैसे स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, ब्लड कैंसर आदि. लैब में होने वाली जांच अब हर प्रकार को अलग-अलग पहचान सकती है. इससे यह तय करना आसान हो जाता है कि किस मरीज को कौन सा उपचार दिया जाए और दवाइयों का असर कितना होगा.

कैंसर के प्रसार की निगरानी

सबसे बड़ी चुनौती कैंसर के फैलने यानी मेटास्टेसिस को समझना था. आधुनिक लैब टेस्ट अब यह दिखाते हैं कि कैंसर कोशिकाएं शरीर के किन हिस्सों तक पहुँच चुकी हैं. यह जानकारी मरीज के जीवन बचाने में बेहद अहम है क्योंकि इलाज की योजना उसी आधार पर तय होती है.

इलाज में नई दिशा

जब डॉक्टरों को कैंसर की किस्म और उसके फैलाव की सटीक जानकारी मिल जाती है, तो इलाज भी उसी हिसाब से तय होता है. कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या रेडियोथेरेपी, किस मरीज के लिए कौन-सा इलाज ज्यादा असरदार होगा, यह लैब रिपोर्ट से तय करना आसान हो गया है. इससे मरीज को अनावश्यक दवाओं और दर्द से बचाया जा सकता है.

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज अब और ज्यादा व्यवस्थित हो रहा है. लैब में मिल रही विस्तृत जानकारी से न सिर्फ मरीज का विश्वास बढ़ा है, बल्कि डॉक्टरों के लिए भी यह तकनीक एक नई उम्मीद बनकर आई है. आने वाले समय में यह आधुनिक जांच पद्धति कैंसर को हराने की लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार साबित होगी.

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क्या फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए आप भी खाते हैं दवा, यह सेहत के लिए कितना खतरनाक?

क्या फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए आप भी खाते हैं दवा, यह सेहत के लिए कितना खतरनाक?


आजकल बहुत से युवा फिजिकल रिलेशन बनाने से पहले दवा खा लेते हैं. उन्हें लगता है कि इससे उनकी परफॉर्मेंस बढ़ जाएगी और वे ज्यादा देर तक एक्टिव रहेंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाएं खाना आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि यह कितना खतरनाक साबित हो सकता है.

क्यों खाते हैं लोग ऐसी दवाएं?

कई बार लोग अपनी असली समस्या बताने में शर्माते हैं. इसलिए मेडिकल स्टोर से या ऑनलाइन आसानी से मिलने वाली दवाएं खरीदकर खा लेते हैं. खासकर युवा सोचते हैं कि इन दवाओं से तुरंत असर मिलेगा. लेकिन असलियत यह है कि इनके साइड इफेक्ट बहुत गंभीर हो सकते हैं. तुरंत फायदा देने वाली ये दवाएं बाद में काफी गंभीर समस्या का कारण बन जाती हैं, ऐसा एक दो नहीं कई मामले देखने को मिलते है. 

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर संजीव कुमार का कहना है कि इस तरह की दवाएं शरीर के हार्मोन और खून के बहाव पर सीधा असर डालती हैं. इन्हें खाने से दिल की धड़कन तेज हो सकती है, ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है और कमजोरी या चक्कर आने की दिक्कत हो सकती है. उन्होंने कहा कि “यह दवाएं सिर्फ उन लोगों को दी जाती हैं जिन्हें सच में कोई मेडिकल दिक्कत हो. लेकिन कई लोग इन्हें बिना जरूरत खा लेते हैं. यह बहुत खतरनाक है, क्योंकि इससे किडनी, हार्ट और लीवर तक पर बुरा असर पड़ सकता है.”

साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?

  • सिरदर्द और चक्कर आना
  • ब्लड प्रेशर बढ़ना
  • दिल की धड़कन अनियमित होना
  • आंखों में जलन या धुंधलापन
  • पेट दर्द और अपच
  • लंबे समय तक इस्तेमाल से किडनी और हार्ट खराब होना

क्यों न करें खुद से दवा का इस्तेमाल?

हर इंसान का शरीर अलग होता है. जो दवा किसी और को फायदा देती है, जरूरी नहीं कि वही आपके लिए भी सही हो. अगर आपको बार-बार दवा खाने की जरूरत महसूस हो रही है तो यह संकेत है कि आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. फिजिकल रिलेशन के लिए दवा खाना कोई हल नहीं है. बल्कि यह आपकी समस्या और बढ़ा सकता है. ऐसी दवाएं सिर्फ डॉक्टर की देखरेख में ही लेनी चाहिए. बिना सलाह के इन्हें खाने से सेहत और जान दोनों खतरे में पड़ सकते हैं. इसलिए अपनी समस्या छुपाने के बजाय डॉक्टर से खुलकर बात करें और खुद से कोई दवा न खाएं.

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बाबा रामदेव के ये नुस्खे आजमाए तो 60 की उम्र में भी रहेंगे एकदम फिट, बस सुबह-सुबह करना होगा यह काम

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योग गुरु ने सरल आसनों को अपनाने की सलाह दी, जो ऊर्जा और जीवन शक्ति बढ़ाते हैं. साथ ही उन्होंने सात्विक आहार का पालन करने की भी बात कही, जिसमें मौसमी फल और प्राकृतिक चीज़ें शामिल होती हैं.

जब उनसे पूछा गया कि वह सुबह कितने बजे उठते हैं, तो उन्होंने बताया कि वह सुबह 3 बजे उठते हैं. उन्होंने अपनी सुबह की दिनचर्या भी साझा की.

जब उनसे पूछा गया कि वह सुबह कितने बजे उठते हैं, तो उन्होंने बताया कि वह सुबह 3 बजे उठते हैं. उन्होंने अपनी सुबह की दिनचर्या भी साझा की.

रामदेव ने कहा कि वह सबसे पहले धरती माता और अपने गुरुओं एवं ऋषियों की पूजा करते हैं. इसके बाद वह गर्म पानी पीते हैं, जो पेट को तुरंत साफ कर देता है. उसके बाद वह नहाते हैं और फिर हर सुबह एक घंटे के लिए ध्यान करते हैं.

रामदेव ने कहा कि वह सबसे पहले धरती माता और अपने गुरुओं एवं ऋषियों की पूजा करते हैं. इसके बाद वह गर्म पानी पीते हैं, जो पेट को तुरंत साफ कर देता है. उसके बाद वह नहाते हैं और फिर हर सुबह एक घंटे के लिए ध्यान करते हैं.

साधारण शाकाहारी आहार के बारे में पूछे जाने पर बाबा रामदेव ने कहा कि वह कभी भी अपने सरल आहार में छल नहीं करते. उनका मानना है कि सात्विक भोजन स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

साधारण शाकाहारी आहार के बारे में पूछे जाने पर बाबा रामदेव ने कहा कि वह कभी भी अपने सरल आहार में छल नहीं करते. उनका मानना है कि सात्विक भोजन स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

बाबा रामदेव ने कुछ योग आसनों की भी सिफारिश की, जिन्हें हर किसी को रोज़ करना चाहिए. उन्होंने कहा, “लोगों को कपालभाति और अनुलोम विलोम जरूर करना चाहिए.”

बाबा रामदेव ने कुछ योग आसनों की भी सिफारिश की, जिन्हें हर किसी को रोज़ करना चाहिए. उन्होंने कहा, “लोगों को कपालभाति और अनुलोम विलोम जरूर करना चाहिए.”

सात्विक आहार प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होता है और इसमें कोई कृत्रिम तत्व, प्रिजर्वेटिव या हानिकारक चीज नहीं होती. यह हल्का, पचने में आसान और पाचन तंत्र पर बोझ नहीं डालता. साथ ही यह पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करता है.

सात्विक आहार प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होता है और इसमें कोई कृत्रिम तत्व, प्रिजर्वेटिव या हानिकारक चीज नहीं होती. यह हल्का, पचने में आसान और पाचन तंत्र पर बोझ नहीं डालता. साथ ही यह पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करता है.

बाबा रामदेव की फिटनेस, योग और आहार संबंधी टिप्स अपनाकर आप समग्र स्वास्थ्य और खुशी पा सकते हैं. उनकी सलाह है कि योग को रोज़ाना जीवन में शामिल करें और सात्विक भोजन का पालन करके संतुलित और स्वस्थ जीवन जीएं.

बाबा रामदेव की फिटनेस, योग और आहार संबंधी टिप्स अपनाकर आप समग्र स्वास्थ्य और खुशी पा सकते हैं. उनकी सलाह है कि योग को रोज़ाना जीवन में शामिल करें और सात्विक भोजन का पालन करके संतुलित और स्वस्थ जीवन जीएं.

Published at : 25 Aug 2025 08:25 AM (IST)


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ये 5 लोग तुरंत छोड़ दें पपीता खाना, तबीयत का बुरा हाल कर सकता है यह सुपरफ्रूट

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लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि पपीता सभी लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होता. कुछ लोगों के लिए यह नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. खासकर अगर इसे ज्यादा मात्रा में या अधपका खाया जाए. एक्सपर्ट्स के अनुसार इन 5 तरह के लोगों को पपीता खाने से बचना चाहिए.

प्रेगनेंसी में अधपका या आधा पका पपीता बिल्कुल नहीं खाना चाहिए. इसमें लेटेक्स और पपेन ज्यादा मात्रा में होते हैं, जो गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकते हैं. इससे प्रीमैच्योर डिलीवरी या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं. इसलिए डॉक्टर आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को पपीते से पूरी तरह परहेज़ करने की सलाह देते हैं.

प्रेगनेंसी में अधपका या आधा पका पपीता बिल्कुल नहीं खाना चाहिए. इसमें लेटेक्स और पपेन ज्यादा मात्रा में होते हैं, जो गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकते हैं. इससे प्रीमैच्योर डिलीवरी या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं. इसलिए डॉक्टर आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को पपीते से पूरी तरह परहेज़ करने की सलाह देते हैं.

पपीते में कुछ प्राकृतिक कंपाउंड पाए जाते हैं, जो शरीर में मेटाबॉलिज्म के दौरान हाइड्रोजन साइनाइड छोड़ सकते हैं. सामान्य लोगों के लिए यह हानिकारक नहीं होता, लेकिन जिनको हार्ट से जुड़ी समस्या है, उनके लिए यह खतरनाक हो सकता है. ज्यादा पपीता खाने से हार्ट रिद्म बिगड़ सकता है.

पपीते में कुछ प्राकृतिक कंपाउंड पाए जाते हैं, जो शरीर में मेटाबॉलिज्म के दौरान हाइड्रोजन साइनाइड छोड़ सकते हैं. सामान्य लोगों के लिए यह हानिकारक नहीं होता, लेकिन जिनको हार्ट से जुड़ी समस्या है, उनके लिए यह खतरनाक हो सकता है. ज्यादा पपीता खाने से हार्ट रिद्म बिगड़ सकता है.

अगर आपको लेटेक्स से एलर्जी है तो पपीता खाने से बचना चाहिए. दरअसल पपीते में मौजूद प्रोटीन, लेटेक्स में पाए जाने वाले प्रोटीन से काफी मिलते-जुलते हैं. ऐसे में शरीर क्रॉस-रिएक्शन कर सकता है, जिससे खुजली, छींक या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कतें हो सकती हैं

अगर आपको लेटेक्स से एलर्जी है तो पपीता खाने से बचना चाहिए. दरअसल पपीते में मौजूद प्रोटीन, लेटेक्स में पाए जाने वाले प्रोटीन से काफी मिलते-जुलते हैं. ऐसे में शरीर क्रॉस-रिएक्शन कर सकता है, जिससे खुजली, छींक या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कतें हो सकती हैं

थायरॉयड की समस्या वाले लोगों को भी पपीते से दूरी रखनी चाहिए. इसमें मौजूद कुछ तत्व थायरॉयड हार्मोन के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं. इससे थकान, सुस्ती और ठंड असहनीय होने जैसे लक्षण और बढ़ सकते हैं.

थायरॉयड की समस्या वाले लोगों को भी पपीते से दूरी रखनी चाहिए. इसमें मौजूद कुछ तत्व थायरॉयड हार्मोन के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं. इससे थकान, सुस्ती और ठंड असहनीय होने जैसे लक्षण और बढ़ सकते हैं.

पपीते में विटामिन C ज्यादा पाया जाता है. सामान्य लोगों के लिए यह फायदेमंद है, लेकिन जिन्हें पहले से किडनी स्टोन की समस्या है उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है. दरअसल ज्यादा विटामिन C शरीर में ऑक्सालेट बनाता है, जो कैल्शियम से मिलकर किडनी स्टोन बना सकता है.

पपीते में विटामिन C ज्यादा पाया जाता है. सामान्य लोगों के लिए यह फायदेमंद है, लेकिन जिन्हें पहले से किडनी स्टोन की समस्या है उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है. दरअसल ज्यादा विटामिन C शरीर में ऑक्सालेट बनाता है, जो कैल्शियम से मिलकर किडनी स्टोन बना सकता है.

Published at : 24 Aug 2025 06:35 PM (IST)


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एक्सरसाइज करते-करते दिखते हैं हार्ट अटैक के ये 5 लक्षण, गलती से भी मत कर देना इग्नोर

एक्सरसाइज करते-करते दिखते हैं हार्ट अटैक के ये 5 लक्षण, गलती से भी मत कर देना इग्नोर


आजकल एक्सरसाइज या खेल-कूद के दौरान हार्ट अटैक की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है. अक्सर लोग सोचते हैं कि हल्का सिरदर्द, थकान या सांस फूलना सामान्य है, लेकिन ये कुछ ऐसे संकेत हो सकते हैं जो आपके हृदय को खतरे में डाल सकते हैं. अगर किसी को पहले से कोई हृदय संबंधी बीमारी है या वह अत्यधिक शारीरिक परिश्रम कर रहा है, तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. सौभाग्य से, शरीर हमें इससे पहले ही कुछ संकेत देता है, जिन्हें पहचानकर गंभीर खतरे से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं 5 प्रमुख संकेत, जो एक्सरसाइज के दौरान हार्ट अटैक का इशारा कर सकते हैं.

 चक्कर या हल्का महसूस होना

अगर आप एक्सरसाइज करते समय अचानक चक्कर आने लगते हैं या सिर हल्का महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें. ऐसा तब होता है जब हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और खून का प्रवाह मस्तिष्क तक कम हो जाता है. बार-बार यह समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

सांस लेने में कठिनाई

एक्सरसाइज के दौरान थोड़ी बहुत सांस फूलना सामान्य है, लेकिन अगर बिना किसी कारण सांस लेने में असामान्य कठिनाई हो, तो यह हृदय समस्या का संकेत हो सकता है. जब दिल सही मात्रा में रक्त नहीं पंप कर पाता या धड़कन असामान्य होती है, तो फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं ले पाते, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है.

 असामान्य थकान या कमजोरी

अगर आप बिना ज्यादा मेहनत किए अचानक अत्यधिक थकान या शरीर में कमजोरी महसूस करते हैं, तो इसे हल्के में न लें. हार्ट अटैक से पहले कई लोग सामान्य से अधिक थकान महसूस करने लगते हैं. इसका मतलब हो सकता है कि दिल शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त पंप नहीं कर पा रहा है.

अत्यधिक पसीना

एक्सरसाइज के दौरान पसीना आना सामान्य है, लेकिन अगर अचानक ठंडा पसीना आ जाए या शरीर पूरी तरह से भीग जाए, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है. यह तब होता है जब दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और शरीर तनाव में आता है.

 हाथ, गला या जबड़े में दर्द

हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण सीने में दर्द है, लेकिन कभी-कभी यह दर्द हाथों (विशेषकर बाएं हाथ), गले या जबड़े तक फैल जाता है. अगर एक्सरसाइज के दौरान इन हिस्सों में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो तुरंत गतिविधि बंद करें और डॉक्टर से संपर्क करें

एक्सरसाइज शरीर के लिए फायदेमंद है, लेकिन हार्ट अटैक के इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस करते हैं, तो तुरंत रुकें और चिकित्सकीय मदद लें. शरीर के इन चेतावनी संकेतों को पहचानना ही गंभीर समस्या से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

इसे भी पढ़ें- शरीर में हो रही पानी की कमी, बॉडी करती है ये इशारे

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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